लुल्ला परिवारLULLA FAMILY, शुरुआतEnglish
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लुल्ला परिवार का पुस्तकालय

यहाँ क्या उपलब्ध है

पुस्तकालय में 9 समूहों के 58 संग्रह हैं। कहीं पूरा अध्याय-क्रम है, कहीं किसी बड़े ग्रंथ से चुनी हुई कथाएँ, कहीं मूल पाठ और साथ में व्याख्या। कोई भी नाम खोलिए, वहीं लिखा है कि उसमें क्या है और मूल ग्रंथ का कितना अंश।

महाकाव्य और पुराण

वाल्मीकि और तुलसीदास के राम, हरिवंश सहित महाभारत, और 5 पुराण-ग्रंथ।

वाल्मीकि रामायण34 पाठ

तमसा-तट पर निषाद का बाण क्रौंच-जोड़े के नर को गिराता है और वाल्मीकि की पीड़ा पहला श्लोक बनती है। सातों काण्ड, 34 सतत अध्याय, मूल वाल्मीकि के अनुसार।

इस संग्रह के कुछ पाठ

श्रीरामचरितमानस142 पाठ

काण्ड-दर-काण्ड, प्रसंग-दर-प्रसंग: तुलसीदास के सातों सोपान, मूल अवधी चौपाई और दोहा, और उनके साथ विस्तृत हिन्दी कथा।

सातों सोपान

महाभारत41 पाठ

गणेश जी एक शर्त पर लेखनी उठाते हैं कि व्यास रुकेंगे नहीं; व्यास की शर्त, हर श्लोक समझकर ही लिखिए। सभी 18 पर्व, 41 मुख्य और 11 पूरक अध्याय।

इस संग्रह के कुछ पाठ

हरिवंश20 पाठ

पूरा महाभारत सुन चुके जनमेजय वैशम्पायन से यदुवंश की कथा आरम्भ से माँगते हैं, और कहानी सृष्टि से शुरू होती है। महाभारत के इस खिल-पर्व से 20 चुने हुए प्रसंग, जिनमें 15 कृष्ण-चरित के, जन्म से बाणासुर-युद्ध तक; पूरे ग्रंथ का अनुवाद नहीं।

इस संग्रह के कुछ पाठ

भागवतम् की कथाएँ65 पाठ

सात दिन में तक्षक डँसेगा; गंगा-तट पर बैठे परीक्षित शुकदेव से पूछते हैं कि ऐसे में क्या सुनना चाहिए। इन 65 कथाओं में जो शीर्षक खींचे, वहीं से पढ़िए।

इस संग्रह के कुछ पाठ

शिवपुराण32 पाठ

प्रयाग के निकट एक शिवालय में ब्राह्मण रोज़ शिवपुराण पढ़ता है, और सूतजी शौनक को बताते हैं कि इसे सुनने से क्या होता है। गीता प्रेस के संक्षिप्त शिवपुराण से 32 कथाएँ, सती और पार्वती से 12 ज्योतिर्लिंगों तक।

इस संग्रह के कुछ पाठ

विष्णुपुराण26 पाठ

सभी 6 अंशों से चुने गए 26 कथा-पाठ। पाँचवें अंश में कृष्ण-जन्म, गोवर्धन और यदुवंश का अन्त पढ़िए।

इस संग्रह के कुछ पाठ

श्रीमद्देवीभागवत27 पाठ

प्रलय की घड़ी, तीनों लोक एक अपार जलराशि में विलीन और विष्णु योगनिद्रा में; सूतजी नैमिषारण्य के ऋषियों को कथा सुनाते हैं। गीता प्रेस के श्रीमद्देवीभागवत से 27 कथाएँ, यम के पीछे चलती सावित्री से देवी गीता तक।

इस संग्रह के कुछ पाठ

देवी माहात्म्य13 पाठ

राज्य से हटाए गए राजा सुरथ और स्वजनों के निकाले वैश्य समाधि वन में मेधा ऋषि के पास पहुँचते हैं, और तीन चरित्र खुलते हैं: मधु-कैटभ, महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ। मार्कण्डेय पुराण के तेरहों अध्याय, हर श्लोक अर्थ सहित; ‘या देवी’ और नारायणी स्तुतियाँ पूरी।

इस संग्रह के कुछ पाठ

गीताएँ

कृष्ण, अष्टावक्र और दत्तात्रेय की गीताएँ, और 2 जो श्रीराम कहते हैं।

भगवद् गीता18 पाठ

कुरुक्षेत्र में दोनों सेनाओं के बीच अर्जुन सामने चाचा, गुरु और भाई-बंधु देखते हैं; हाथ काँपते हैं, धनुष गिरता है। सभी 18 अध्याय, धनुष के फिर उठने तक।

इस संग्रह के कुछ पाठ

अष्टावक्र गीता20 पाठ

आठ जगह से टेढ़े देह वाले अष्टावक्र मिथिला में राजा जनक के प्रश्न का उत्तर देते हैं: ज्ञान कैसे मिलता है, मुक्ति कैसे होगी। कुल 20 प्रकरण, 298 श्लोक।

इस संग्रह के कुछ पाठ

अवधूत गीता8 पाठ

अवधूत दत्तात्रेय का अपना गायन, जिसका हर श्लोक एक ही केन्द्र पर लौटता है: मैं हूँ, मैं वही हूँ। कुल 8 अध्याय, 264 श्लोक।

उपलब्ध पाठ

  1. अवधूत गीता · अध्याय 1
  2. अवधूत गीता · अध्याय 2
  3. अवधूत गीता · अध्याय 3
  4. अवधूत गीता · अध्याय 4
  5. अवधूत गीता · अध्याय 5
  6. अवधूत गीता · अध्याय 6
  7. अवधूत गीता · अध्याय 7
  8. अवधूत गीता · अध्याय 8
श्री राम गीता8 पाठ

राज्याभिषेक के बाद, महल के एकान्त में भाई के पाँव दबाते लक्ष्मण श्रीराम से ब्रह्म-ज्ञान का उपदेश माँगते हैं, और राम गुरु बनकर उत्तर देते हैं। अध्यात्म रामायण के उत्तर काण्ड से 62 श्लोक, 8 खण्डों में, अर्थ और व्याख्या सहित।

उपलब्ध पाठ

  1. श्री राम गीता · खण्ड 1: प्रश्न और प्रारम्भ
  2. श्री राम गीता · खण्ड 2: ज्ञान बनाम कर्म
  3. श्री राम गीता · खण्ड 3: पंच-कोश विवेक
  4. श्री राम गीता · खण्ड 4: अद्वैत-स्वरूप
  5. श्री राम गीता · खण्ड 5: माया का खेल
  6. श्री राम गीता · खण्ड 6: साधना का मार्ग
  7. श्री राम गीता · खण्ड 7: मुक्त की दशा
  8. श्री राम गीता · खण्ड 8: उपसंहार
विभीषण गीता6 पाठ

लंका के रणक्षेत्र में रावण सजे रथ पर है और रघुवीर राम पैदल, न रथ, न कवच; विभीषण संशय कहते हैं और श्रीराम धर्म-रथ के रूपक से उत्तर देते हैं। तुलसीदास के लंकाकाण्ड से 6 खण्ड, अवधी चौपाइयाँ अर्थ सहित, विभीषण की शरणागति तक।

उपलब्ध पाठ

  1. रथहीन रघुवीर और विभीषण का संशय
  2. धर्म-रथ के पहिये: शौर्य और धैर्य
  3. चार घोड़े और ईश-भजन का सारथी
  4. भीतर के हथियार और अभेद्य कवच
  5. धर्ममय रथ: संसार-रिपु पर विजय
  6. विभीषण का समर्पण: उपदेश का मर्म

वेदान्त और दर्शन

विवेकचूडामणि, 2 सूत्र-ग्रंथ, 4 महावाक्य, और कथाओं के 2 ग्रंथ।

ब्रह्म सूत्र16 पाठ

अब ब्रह्म की जिज्ञासा, इसी पहले सूत्र से बादरायण के 555 सूत्र खुलते हैं: 4 अध्याय, 16 पाद, शंकराचार्य के शारीरक-भाष्य के सहारे। वेदान्त का तीसरा प्रस्थान।

इस संग्रह के कुछ पाठ

विवेकचूडामणि19 पाठ

शिष्य पूछता है कि मैं संसार-बंधन से मुक्त कैसे होऊँ, और गुरु के उत्तर में पूरी अद्वैत-यात्रा। आदि शंकर के नाम से प्रसिद्ध 580 श्लोक, 19 भाग।

इस संग्रह के कुछ पाठ

महावाक्य1 पाठ

प्रज्ञान ब्रह्म, अहं ब्रह्मास्मि, तत्त्वमसि, अयमात्मा ब्रह्म: वेदान्त के चार महावाक्य, हर वेद से एक, अपने उपनिषद्-मूल और अर्थ के साथ।

पतञ्जलि योग सूत्र4 पाठ

पतञ्जलि के 196 सूत्रों में पूरे मन की गुत्थी बँधी है: मन है क्या, और शांत कैसे होता है। सभी 4 पाद, व्याख्या के साथ।

उपलब्ध पाठ

  1. योग सूत्र · पाद 1 · समाधि पाद
  2. योग सूत्र · पाद 2 · साधन पाद
  3. योग सूत्र · पाद 3 · विभूति पाद
  4. योग सूत्र · पाद 4 · कैवल्य पाद
वसिष्ठ की कथाएँ39 पाठ

राजा लवण घोड़े पर चढ़ते हैं, आँखें मूँदकर निश्चल हो जाते हैं, और एक रात में पूरा जीवन बीत जाता है। युवा श्रीराम और गुरु वसिष्ठ के संवाद से 39 कथाएँ, कौआ भुशुण्ड से चूडाला तक, किसी भी क्रम में।

इस संग्रह के कुछ पाठ

त्रिपुरा रहस्य3 पाठ

ज्ञानखण्ड से चुने गए 3 कथा-पाठ; हर कथा के साथ उसका स्रोत-परिचय।

उपलब्ध पाठ

  1. त्रिपुरा रहस्य · हेमचूड़ और हेमलेखा
  2. महासेन: पहाड़ के भीतर एक संसार
  3. जनक की सभा में अष्टावक्र: जानने का नया प्रश्न

उपनिषद्

बरगद के नीचे या अग्नि के सामने, शिष्य गुरु के समीप बैठते हैं और गुरु बोलते हैं। मुख-पृष्ठ के अलावा इस संग्रह में व्याख्या सहित 12 उपनिषद् हैं: 11 आदि से अन्त तक, ईशावास्य चुने हुए मन्त्रों में।

ईशावास्य उपनिषद्1 पाठ

छह विचार-खंड · मन्त्र 1, 2, 4 से 7, 9 से 11, 15 से 18; सभी 18 मन्त्रों का पूरा पाठ नहीं।

केनोपनिषद्1 पाठ

साम का लम्बा स्वर अभी थमा है, और उसी चुप्पी में कोई पूछता है कि मन को भेजता कौन है। सभी 4 खण्ड, पहले 2 छन्द में, अन्तिम 2 कथा में, व्याख्या सहित।

कठोपनिषद्1 पाठ

पिता के क्रोध में सौंपा गया एक लड़का तीन रात यम के द्वार पर भूखा बैठा रहता है, और तीसरे वर में वही माँगता है जो कोई नहीं माँगता। दोनों अध्याय, सभी 6 वल्ली, व्याख्या सहित।

प्रश्नोपनिषद्1 पाठ

छह जिज्ञासु हाथों में समिधा लिए आश्रम पहुँचते हैं, एक बरस प्रतीक्षा करते हैं, तब पिप्पलाद उत्तर देते हैं। सभी 6 प्रश्न, सृष्टि के किनारे से 16 कलाओं वाले पुरुष तक, व्याख्या सहित।

मुण्डक उपनिषद्1 पाठ

गृहस्थ शौनक विधि से अंगिरा के पास बैठते हैं और एक ही वाक्य पूछते हैं: वह क्या है जिसे जान लेने पर यह सब जाना हुआ हो जाए। सभी 3 मुण्डक, सभी 6 खण्ड, व्याख्या सहित; सत्यमेव जयते इसी का वाक्य है।

माण्डूक्य उपनिषद्1 पाठ

रात का तीसरा पहर, और एक ही सोया हुआ आदमी बारी बारी से तीन दुनियाओं से गुज़रता है। सभी 12 मन्त्र: जागना, सपना, गहरी नींद और उनसे परे चौथा, ॐ की मात्राओं में, व्याख्या सहित।

तैत्तिरीय उपनिषद्1 पाठ

बरसों आचार्य के घर रहकर वेद कण्ठस्थ करने वाले विद्यार्थी की विदाई का दिन, और विदा का वचन: सत्य बोलिए, धर्म पर चलिए। सभी 3 वल्ली, हर अनुवाक, 5 कोश और भृगु की 5 बार की लौट, व्याख्या सहित।

ऐतरेय उपनिषद्1 पाठ

एक महासागर में गिरे पड़े देवता अपने कर्ता से निवास माँगते हैं; गाय और घोड़ा लौटा देते हैं, मनुष्य को स्वीकार करते हैं। सभी 3 अध्याय, सृष्टि से लेकर उस प्रश्न तक कि मैं कौन हूँ, और उसके 4 शब्दों के उत्तर तक।

छान्दोग्य उपनिषद्8 पाठ

बारह बरस गुरुकुल में बिताकर श्वेतकेतु गर्व से घर लौटा है, और पिता एक ही प्रश्न पूछते हैं। सभी 8 अध्याय, हर अध्याय अपना पूरा पाठ, भोर से पहले के साम-गायकों से प्रजापति के द्वार तक।

बृहदारण्यक उपनिषद्6 पाठ

भरी सभा को अकेले चुप करा देने वाले याज्ञवल्क्य जनक की सभा में सोने के सींगों वाली हज़ार गायों के लिए आठ प्रश्नकर्ताओं का सामना करते हैं। सभी 6 अध्याय, हर अध्याय अपना पूरा पाठ, भोर के यज्ञ-अश्व से आरम्भ।

श्वेताश्वतर उपनिषद्1 पाठ

जंगल के किनारे जुटी ब्रह्मवादियों की सभा पूछती है कि सबका कारण क्या है: काल, स्वभाव, नियति या संयोग। सभी 6 अध्याय, माया और रुद्र से होते हुए भक्ति के पहले स्वर तक, व्याख्या सहित।

कैवल्य उपनिषद्1 पाठ

आश्वलायन सृष्टि के आरम्भ में बैठे परमेष्ठी पितामह के पास आते हैं और ब्रह्मविद्या माँगते हैं; उत्तर में पहले श्रद्धा, फिर भक्ति, तब ध्यान। दोनों खण्ड, छब्बीसों मन्त्र, हृदय-कमल में शिव के ध्यान से सदाशिव की पहचान तक।

भक्ति और स्तोत्र

नारद के भक्ति-सूत्र, 2 सहस्रनाम, और ऋग्वेद से तुलसीदास तक के 7 पाठ।

विष्णु सहस्रनाम1 पाठ

युद्ध के बाद बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म पितामह युधिष्ठिर को हज़ार नाम सुनाते हैं। पूरा स्तोत्र: न्यास, ध्यान, 108 नाम-श्लोक हर समूह के भाव सहित, फलश्रुति और उत्तर-पीठिका।

श्री ललिता सहस्रनाम10 पाठ

ब्रह्माण्ड पुराण में अगस्त्य पूछते हैं और हयग्रीव उत्तर में देवी के हज़ार नाम देते हैं। सभी 1000 नाम 10 खण्डों में, टीका सहित; बीच के लगभग सौ नाम भण्डासुर-युद्ध की कथा कहते हैं।

इस संग्रह के कुछ पाठ

नारद भक्ति सूत्र5 पाठ

सनकादि ऋषि नारद से पूछते हैं कि भक्ति क्या है, और वीणा थामे नारद छोटे छोटे सूत्रों में उत्तर देते हैं: परमेश्वर में परम प्रेम। सभी 84 सूत्र 5 प्रकरणों में, हर समूह के साथ भाव।

उपलब्ध पाठ

  1. नारद भक्ति सूत्र · अध्याय 1: भक्ति का स्वरूप
  2. नारद भक्ति सूत्र · अध्याय 2: भक्ति की महिमा
  3. नारद भक्ति सूत्र · अध्याय 3: साधन
  4. नारद भक्ति सूत्र · अध्याय 4: प्रेम के रूप
  5. नारद भक्ति सूत्र · अध्याय 5: भक्त-संग, उपसंहार
सौन्दर्य लहरी2 पाठ

कथा कैलास से खुलती है: शंकराचार्य शिव से स्तोत्र पाते हैं, द्वारपाल उसे छीन लेता है, और इकतालीस श्लोक बच रहते हैं। सभी 100 श्लोक और 3 श्लोकों का अनुबंध, 2 भागों में, अर्थ और भीतरी भाव सहित।

उपलब्ध पाठ

  1. सौन्दर्य लहरी · भाग 1 · आनन्द लहरी
  2. सौन्दर्य लहरी · भाग 2 · सौन्दर्य वर्णन
पुरुष सूक्त1 पाठ

एक देह की कल्पना कीजिए जो पूरी धरती को ढक ले: हज़ार सिर, हज़ार आँखें, हज़ार पैर, और देवता उसी को पहले यज्ञ की आहुति बनाते हैं। ऋग्वेद 10.90 की 16 ऋचाओं का परिचय और व्याख्या, आरेख और पढ़ने की सूची सहित।

हनुमान चालीसा1 पाठ

लोक-कथा कहती है कि तुलसीदास ने इसे बन्दीगृह में रचा, ऐसी अवधी में जो कोई भी कण्ठ कर ले। आरम्भ के 2 दोहे, 40 चौपाइयाँ और समापन का दोहा, हर चौपाई में हनुमान जी का कोई रूप या कथा, भाव सहित।

शिव महिम्न स्तोत्र1 पाठ

गन्धर्व पुष्पदन्त अदृश्य होकर रोज़ एक राजा के बग़ीचे से शिव-पूजा के फूल चुराते हैं; पकड़े जाने पर पश्चात्ताप में यह स्तोत्र रचते हैं। सभी 43 श्लोक समूहों में भाव सहित, बीच में त्रिपुर और कामदहन की पुराण-कथाएँ।

श्री रुद्रम् और चमकम्1 पाठ

रुद्र जैसे ऋग्वेद उन्हें देखता है: तूफ़ान, पर्वत, और वैद्यों के वैद्य। नमकम् और चमकम् का परिचय और व्याख्या, 11-11 अनुवाक, दक्ष-यज्ञ की कथा और पाठ की चढ़ती सीढ़ी के आरेख सहित।

गणेश अथर्वशीर्ष1 पाठ

अथर्ववेद का उपनिषद् जो कहता है कि गणेश वही ब्रह्म है जो सब कुछ है; आरम्भ भद्रं कर्णेभिः के शान्ति-पाठ से। आदि और अन्त के 2 शान्ति-पाठों के बीच 14 खण्ड, हर खण्ड पहले खोला गया, फिर मूल देवनागरी, फलश्रुति सहित।

भज गोविन्दम्1 पाठ

काशी में शंकराचार्य अस्सी बरस के एक पंडित को व्याकरण का सूत्र रटते सुनते हैं, और मोह तोड़ने वाला हथौड़ा, मोह-मुद्गर, जन्म लेता है। सभी 33 श्लोक, शंकर के 12, शिष्यों के 14 और समापन, जोड़ियों में टीका सहित।

पात्र और संदर्भ

अपने प्रसंगों और रिश्तों के साथ 40 पात्र, और बार बार आने वाले 965 शब्द।

पात्र40 पाठ

महेन्द्र पर्वत के शिखर पर हनुमान, लंका में चिता के पास सीता, आधी रात की मथुरा के कारागार में कृष्ण। चुने हुए 40 पात्र-परिचय, प्रसंग, रिश्ते और प्रश्न, हर एक से मूल पाठ तक की राह।

उपलब्ध पाठ

  1. हनुमान
  2. सीता
  3. कृष्ण
  4. द्रौपदी
  5. कर्ण
  6. भीष्म
  7. देवी
  8. राम
शब्द-कोश965 शब्द

अमृत: अ और मृत, जो मरता नहीं। ग्रंथों में बार बार आने वाले 965 शब्द, हर एक का एक पंक्ति का अर्थ; ऊपर 22 मुख्य शब्द संदर्भ, उदाहरण और श्लोक-संकेत सहित।

अन्य शिक्षाएँ

महाभारत से उपदेश के 3 प्रसंग, हर एक विस्तृत कहानी के रूप में।

यक्ष-प्रश्न · वन पर्व1 पाठ

वनवास के बारहवें बरस के अन्तिम दिन, सरोवर के किनारे चार पाण्डव पड़े हैं, और अकेले युधिष्ठिर उस अनदेखे स्वर के एक एक प्रश्न का उत्तर देते हैं। वन पर्व का एक प्रसंग, विस्तृत कहानी के रूप में।

विदुर-नीति · उद्योग पर्व1 पाठ

युद्ध एक क़दम दूर है; आधी रात नींद से वंचित धृतराष्ट्र उस भाई को बुलाते हैं जो सच कहने से कभी नहीं डरा, और विदुर पूछते हैं कि रात को नींद किनकी उड़ती है। उद्योग पर्व के प्रजागर-पर्व का नीति-संवाद, विस्तृत कहानी के रूप में।

अनुगीता · अश्वमेध पर्व1 पाठ

युद्ध के बाद इन्द्रप्रस्थ की सभा में मित्र बनकर बैठे अर्जुन स्वीकार करते हैं कि रणभूमि के किनारे मिला उपदेश मन से निकल गया; कृष्ण वही सार पुरानी कथाओं से लौटाते हैं। अश्वमेध पर्व का प्रसंग, विस्तृत कहानी के रूप में।

सिख वाणी

सुखमनी साहिब, पूरी 4 बाणियाँ, और आदि ग्रंथ अंग दर अंग।

आनंद साहिब1 पाठ

तिहत्तर बरस की उम्र में गुरु-गद्दी सँभालने वाले गुरु अमरदास जी माँ को पुकारते हैं: आनंद आया है, गुरु मिल गए हैं। राग रामकली की सभी 40 पउड़ियाँ, अंग 917 से 922, हर एक का भाव।

सलोक महला 91 पाठ

गुरु तेग बहादुर जी के सलोक, जिन्हें गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1706 में ग्रंथ पूरा करते हुए जोड़ा: संसार बीत जाता है, नाम ही रहता है। सभी 57 सलोक क्रम से, अंग 1426 से 1429, आख़िरी 5 उपदेश से प्रार्थना की ओर मुड़ते हुए।

जपजी साहिब1 पाठ

गुरु नानक की सुबह की प्रार्थना, गुरु ग्रंथ साहिब का पहला अंग; नदी किनारे नानक और मरदाना, रबाब की पहली तार, और प्रश्न कि सच्चा कैसे हुआ जाए। मूल मंत्र, सभी 38 पउड़ियाँ और अन्त का सलोक, भाव सहित।

सुखमनी साहिब25 पाठ

अमृतसर के रामसर सरोवर के किनारे गुरु अर्जन देव जी की रचना, जिसकी पहली पंक्ति कहती है कि सिमरन से सुख मिलता है। सभी 24 अष्टपदियाँ, 192 पउड़ियाँ, हर एक सलोक और रहाउ के साथ, व्याख्या सहित।

आसा दी वार1 पाठ

राग आसा में हर सुबह संगत साथ गाती है; पहला सलोक कहता है कि हम अपने गुरु पर दिन में सौ बार सदके जाते हैं। गुरु नानक और गुरु अंगद के सभी 59 सलोक और 24 पउड़ियाँ क्रम से, अंग 462 से 475, भाव सहित।

आदि ग्रंथ1474 पाठ

अंग 1 पर मूल मन्त्र और जपु का आरम्भ; पूरा संकलन गुरु अर्जन देव जी के निर्देशन में 1604 में हुआ। सभी 1430 अंग देवनागरी पाठ और हिन्दी अर्थ के साथ, रचना, अंग, रचनाकार या 31 रागों के क्रम से।

इस संग्रह के कुछ पाठ

नींव और पढ़ने के रास्ते

पहली यात्रा, कोश का नक़्शा, समय में रखे ग्रंथ, और भाव और विषय की राहें।

आधार4 पाठ

आधार-लेख 4 हैं: हिन्दू धर्म क्या है, अठारह पुराणों का परिचय, गुरु ग्रंथ साहिब से एक पहला पाठ (अंग्रेज़ी में), और सनातन धर्म क्या है; साथ में पहली यात्रा, जो कोश के नक़्शे से चलकर एक प्रश्न को उसके स्रोत तक लौटाती है।

उपलब्ध पाठ

  1. हिन्दू धर्म क्या है
  2. अठारह पुराण: एक परिचय
  3. गुरु ग्रंथ साहिब से एक पहला पाठ (अंग्रेज़ी में)
  4. सनातन धर्म क्या है
कोश का नक़्शा1 पाठ

ऊँचाई से देखिए तो सामने पूरा पुस्तकालय है, ताड़-पत्र के बंडल सीढ़ीदार ताक़ों पर; और पहली लकीर श्रुति और स्मृति के बीच, जो सुनी गई और जो याद रखी गई। कोश की 4 धाराएँ और बीच का सेतु, आरेख और व्याख्या सहित, सात ग्रंथों की पढ़ने की सूची।

समय में यह कोश1 पाठ

ऊपर से देखिए तो एक लंबा किनारा है, और उस पर जगह जगह निशान, हर निशान किसी सदी का एक पाठ; हर तिथि को लगभग पढ़िए। पुराने से नए की ओर क्रम में 38 पाठ, दर्जे और तिथि सहित, और साथ में परंपरा की घड़ी, कल्प, मन्वन्तर और युग।

भाव-द्वार · रास्ते10 पाठ

शोक में 3 पड़ाव: अर्जुन का प्रश्न, नचिकेता की जिज्ञासा, चित्रकेतु का शोकाकुल घर। ऐसे 7 भाव-द्वार, 30 मिनट से 2 घंटे तक की 3 समय-बद्ध राहें, 8 विषय-मार्ग और 4 ग्रंथ-परिवारों के रास्ते।

इस संग्रह के कुछ पाठ