त्रिपुरा रहस्य में दत्तात्रेय, परशुराम के प्रश्नों का उत्तर कथा और तर्क के सहारे देते हैं। यहाँ संगति, वैराग्य, श्रद्धा, उपासना और आत्मविचार एक ही यात्रा के क्रमिक पड़ाव बनते हैं।
स्रोत-स्पष्टता: हेमचूड़ और हेमलेखा का प्रसंग त्रिपुरा रहस्य के अध्याय 3 से 10 में है।
ज्ञानखण्ड की तीन कथाएँ यहाँ हैं: हेमचूड़ और हेमलेखा (अध्याय 3 से 10), पहाड़ के भीतर एक संसार देखने वाले महासेन (12 से 14), और जनक की सभा में अष्टावक्र (15 और 16 का आरम्भ)। हर कथा के साथ उसका आधार-पाठ दिया है।