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वेदान्त और दर्शन देवी, विवेक और आत्मविचार

त्रिपुरा रहस्य

देवी, विवेक और आत्मविचार की कथा-परम्परा

त्रिपुरा रहस्य वन के आश्रम में हेमचूड़ और हेमलेखा शांत संवाद में बैठे हैं
  • 3कथाएँ
  • हारितायन संहिता · ज्ञानखण्ड

हेमचूड़ और हेमलेखा की एक कथा · मूल अध्याय 3 से 10

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दायरा और आधार-संस्करणत्रिपुरारहस्य ज्ञानखण्ड, श्रीनिवासभट्ट की तात्पर्यदीपिका सहित, अध्याय 3 से 10। स्रोत और सीमाएँ → संग्रह का पूरा नक़्शा →

त्रिपुरा रहस्य वन के आश्रम में हेमचूड़ और हेमलेखा शांत संवाद में बैठे हैं

वेदान्त और दर्शन समूह में त्रिपुरा रहस्य, अपने 5 साथी संग्रहों के बीच

कथाएँ

  1. 1हेमचूड़ और हेमलेखादत्तात्रेय के कथन में एक राजकुमार को उसकी पत्नी वैराग्य से आत्मविचार और स्थिर बोध तक ले जाती है।पढ़ने में लगभग 35 मिनट

दो और कथाओं से आगे चलिए

  1. 2महासेन: पहाड़ के भीतर एक संसारएक राजकुमार बंदियों को छुड़ाने जाता है। काम पूरा होने पर वह एक और प्रश्न पूछता है: पहाड़ के भीतर वे रहे कहाँ थे?पढ़ने में लगभग 5 मिनट
  2. 3जनक की सभा में अष्टावक्र: जानने का नया प्रश्नअष्टावक्र सभा में विजयी होते हैं। फिर एक तपस्विनी ऐसा प्रश्न रखती हैं जिसका उत्तर केवल विजय से नहीं मिलता।पढ़ने में लगभग 5 मिनट

पढ़ने की राहें

त्रिपुरा रहस्य में दत्तात्रेय, परशुराम के प्रश्नों का उत्तर कथा और तर्क के सहारे देते हैं। यहाँ संगति, वैराग्य, श्रद्धा, उपासना और आत्मविचार एक ही यात्रा के क्रमिक पड़ाव बनते हैं।

स्रोत-स्पष्टता: हेमचूड़ और हेमलेखा का प्रसंग त्रिपुरा रहस्य के अध्याय 3 से 10 में है।

ज्ञानखण्ड की तीन कथाएँ यहाँ हैं: हेमचूड़ और हेमलेखा (अध्याय 3 से 10), पहाड़ के भीतर एक संसार देखने वाले महासेन (12 से 14), और जनक की सभा में अष्टावक्र (15 और 16 का आरम्भ)। हर कथा के साथ उसका आधार-पाठ दिया है।