महाभारत · खिल-पर्व
हरिवंश
महाभारत की वह पूँछ जो एक पूरा महाकाव्य है, सृष्टि के पहले क्षण से ले कर कृष्ण के सम्पूर्ण जीवन तक, बीस कथाओं में
हरिवंश महाभारत का खिल-पर्व है, उसका परिशिष्ट, पर अपने आप में एक पूरा महाकाव्य। यहाँ सृष्टि से कथा उठती है, वंशों की नदियाँ बहती हैं, और फिर वह धारा कृष्ण पर आ कर ठहरती है, उनका जन्म, गोकुल, मथुरा, द्वारका, और वह सब जो गीता के नायक के पीछे की कहानी है। नीचे हर प्रसंग अपने पूरे विस्तार में, कहानी-रूप में, अलग पन्ने पर रखा है।

हरिवंश पर्व
विष्णु पर्व · कृष्ण-चरित
- 5. धरती की पुकार
- 6. कृष्ण-जन्म
- 7. पूतना-वध
- 8. तृणावर्त और शकट
- 9. यमलार्जुन (ओखल और दो वृक्ष)
- 10. कालिय-दमन
- 11. धेनुक और प्रलम्ब
- 12. गोवर्धन-धारण
- 13. अक्रूर और मथुरा की राह
- 14. कंस-वध
- 15. जरासंध और द्वारका
- 16. रुक्मिणी-हरण
- 17. नरकासुर-वध
- 18. पारिजात
- 19. बाण-युद्ध
उपसंहार
सम्पूर्ण हरिवंश समीक्षित संस्करण (पी. एल. वैद्य, भांडारकर प्राच्यविद्या संस्थान, पुणे) के पाठ-क्रम पर आधारित, कहानी-रूप में।