सनातन धर्म क्या है
एक शब्द को दो टुकड़ों में बाँटिए, फिर उसका दावा सुनिए, फिर देखिए कि आज उसका इस्तेमाल कैसे होता है
ज़रा ठहरिए, साहब। एक शब्द है जो बहुत सुना जाता है और कम खोला जाता है। आइए, पहले उसे दो हिस्सों में रख कर देखें, फिर उसका दावा समझें, और फिर यह कि आज उसके साथ कैसा बरताव होता है।
शब्द को खोलिए
शब्द है सनातन धर्म। इसे दो हिस्सों में रखिए। सनातन (sanātana), यानी जिसका आदि नहीं, जो सदा से है, शाश्वत। और धर्म (dharma), जो √धृ (√dhṛ) से बना है, धारण करने की क्रिया से, थामने से। तो धर्म वह है जो थामे रहता है, जो किसी चीज़ को बिखरने नहीं देता। दोनों को जोड़िए, और सनातन धर्म पढ़ा जाता है शाश्वत व्यवस्था, वह नियम जो सदा से चला आता है।
धर्म का फैलाव
धर्म किसी एक अंग्रेज़ी शब्द में नहीं समाता। यह एक साथ कई अर्थ उठाए चलता है। यह वह विश्व-व्यवस्था है जिसे पुराने वेद ऋत (ṛta) कहते थे, उसी की विरासत। यह किसी वस्तु का अपना स्वभाव भी है, जैसे आग का धर्म जलाना। यह कर्तव्य और सही आचरण भी है। और यह समाज और नीति का नियम भी। एक ही शब्द, और इतनी थालियाँ एक साथ हाथ में।
सनातन क्यों
अब सनातन पर आइए। यह तारीख़ का दावा नहीं, दर्जे का दावा है। परंपरा वेद को अपौरुषेय (apauruṣeya) मानती है, यानी किसी पुरुष का रचा हुआ नहीं। ऋषियों ने उसे गढ़ा नहीं, सुना और देखा। गीता आत्मा को सनातन कहती है (2.24), और जीव को उस परम का सनातन अंश (15.7)। महाभारत बार-बार एक टेक दोहराता है, एष धर्मः सनातनः (eṣa dharmaḥ sanātanaḥ), और इसी से कुछ बातों पर मुहर लगाता है, अहिंसा, सत्य और क्षमा, कि ये सदा के हैं।
जो बदलता है, और जो ठहरता है
अब इसे एक तंत्र की तरह देखिए, साहब। सनातन धर्म वे स्थिरांक हैं जो हर हाल में एक से रहते हैं। इनके चारों ओर परंपरा कुछ परतें रखती है जो समय और जगह से बँधी हैं। युग-धर्म, जो किसी युग के लायक़ हो। देश-काल धर्म, जो जगह और समय देख कर चले। आपद्-धर्म, जो संकट में लागू हो। और स्वधर्म, अपनी भूमिका और अपने स्वभाव का कर्तव्य। ये परतें सन्दर्भ की सेटिंग हैं। सेटिंग बदलती है, परतें बदल जाती हैं, और जो तब भी बचा रह जाता है, वही सनातन है।
नाम की कहानी
नाम पर भी एक कहानी है। हिन्दू शब्द पहले एक भूगोल का नाम था। फ़ारसी और यूनानी सिन्धु नदी के पार रहने वालों को इसी से पुकारते थे। सनातन धर्म नाम बाद में अपनाया गया, अपने भीतर से दिया हुआ एक नाम, जो कहता है कि इसका कोई एक संस्थापक नहीं और कोई एक जन्म-तिथि नहीं। उन्नीसवीं सदी में इसका एक छोटा अर्थ भी चला, जब परंपरावादी सनातनी हिन्दू आर्य समाज के सुधारकों से अलग खड़े हुए।
और एक बात ईमानदारी से। कई विद्वान कहते हैं कि परंपरा को एक, शाश्वत और संस्थापक-रहित मान कर देखना अपने आप में कुछ हद तक एक आधुनिक रचना है, जो धर्म की पश्चिमी कोटियों के साथ बातचीत में आकार लेती गई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सनातन धर्म और हिन्दू धर्म एक ही हैं?
रोज़मर्रा में दोनों एक जैसे चलते हैं। फ़र्क़ इतना कि हिन्दू नाम भूगोल से आया, और सनातन धर्म नाम परंपरा ने अपने भीतर से दिया, इस ज़ोर के साथ कि इसका कोई एक आरंभ नहीं।
सनातन का मतलब बहुत पुराना है?
पुराने से आगे की बात है, बिना आदि का। यह उम्र का शब्द कम, दर्जे का शब्द ज़्यादा है।
तो क्या इसमें कुछ बदलता ही नहीं?
बहुत कुछ बदलता है। युग, देश, काल और भूमिका के हिसाब से परतें बदलती रहती हैं। सनातन वह है जो इन सब के बदलने पर भी ठहरा रहता है।
धर्म का सीधा अनुवाद क्या है?
कोई एक सीधा अनुवाद हाथ नहीं आता। व्यवस्था, स्वभाव, कर्तव्य और नीति, यह सब एक साथ इसमें बसा है।
पढ़ने के लिए
- मोनियर-विलियम्स, A Sanskrit-English Dictionary
- गैविन फ़्लड, An Introduction to Hinduism
जो तंत्र में सोचता है, उसके लिए इस पन्ने का काम इतना है। सनातन धर्म को एक स्थिर अंतरफलक की तरह पढ़िए, और युग, देश, काल तथा स्वधर्म को उसके ऊपर चलने वाली बदलती परतों की तरह। फिर परंपरा की कोई भी बहस उठे, आप पूछ सकते हैं कि यह स्थिरांक की बात है या किसी एक सेटिंग की। यही एक सवाल आधा भ्रम वहीं उतार देता है।