श्रीमद्देवीभागवत

श्रीमद्देवीभागवत

देवी की कथाएँ, गीता प्रेस के श्रीमद्देवीभागवत महापुराण से, कहानी के रूप में। जैसे-जैसे और कथाएँ जुड़ती जाएँगी, यह संग्रह बढ़ता जाएगा।

प्रथम-द्वितीय स्कन्ध: व्यास-परम्परा और आदि-कथाएँ

मधु-कैटभ और योगनिद्रा देवीयोगनिद्रा के वश में सोए विष्णु के कानों के मैल से दो दानव जन्म लेते हैं, और देवी की माया हटते ही पाँच हजार वर्ष का युद्ध छिड़ जाता है।

तृतीय स्कन्ध: त्रिदेवी, भक्त सुदर्शन और नवरात्र

त्रिदेवी: महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वतीब्रह्मा, विष्णु और शिव देवीलोक पहुँचकर अपने ही जैसे अनगिनत त्रिदेव देखते हैं, और जगदम्बा उन्हें महाकाली, महालक्ष्मी तथा महासरस्वती सौंप देती हैं।

चतुर्थ-पञ्चम स्कन्ध: नर-नारायण और शक्ति का रणरूप

नर-नारायण और उर्वशी का प्राकट्यइन्द्र की भेजी अप्सराएँ नर-नारायण का तप भंग करने आती हैं, तो नारायण अपनी जंघा से उर्वशी को रचकर उनका गर्व चूर कर देते हैं।

षष्ठ स्कन्ध: वृत्रासुर और माया के रहस्य

वृत्रासुर-वध और नहुष का पतनछल से मारे गए वृत्रासुर की ब्रह्महत्या इन्द्र को घेर लेती है, और उसकी जगह बैठा अभिमानी नहुष ऋषियों के शाप से सर्प बन जाता है।

सप्तम स्कन्ध: राजर्षि-गाथाएँ और देवी गीता

सुकन्या और च्यवनअनजाने में बूढ़े तपस्वी च्यवन की आँखें फोड़ बैठी राजकन्या सुकन्या उनकी सेवा करती है, और अश्विनीकुमार उस मुनि को नया यौवन लौटा देते हैं।

अष्टम-नवम स्कन्ध: सृष्टि-भूगोल और देवी-आख्यान

भूमण्डल और गंगावतरणसप्त द्वीपों, पर्वतों और नदियों से सजे भूमण्डल का नक्शा खुलता है, और सुमेरु के शिखर पर गंगा का अवतरण होता है।

दशम-द्वादश स्कन्ध: मन्वन्तर, उपासना और मणिद्वीप

विन्ध्य का घमण्ड और अगस्त्यसूर्य के मार्ग को रोकने के लिए आकाश तक बढ़ते विन्ध्य को अगस्त्य लौटने तक झुके रहने का वचन लेकर सदा के लिए नत कर देते हैं।

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