
Background
योग वासिष्ठ की रचना का अनुमानित काल विद्वानों के बीच विवादास्पद है। कुछ इसे 6वीं शताब्दी ईस्वी का मानते हैं, कुछ 14वीं शताब्दी का। पर मेरे ख्याल से – वाल्मीकि रामायण के अनुसार राजा राम लगभग ग्यारह हज़ार वर्ष जिए, और उनके जाने के बाद भी कई हज़ार वर्ष बीत चुके थे जब कृष्ण का अवतार हुआ। कृष्ण के जाने को भी अब लगभग पाँच-सात हज़ार वर्ष हो चुके। इस गणना से, यह ग्रन्थ छठी या चौदहवीं शताब्दी का नहीं हो सकता।
ग्रंथ की मूल भाषा संस्कृत है। इसका लघु रूप “लघु योग वासिष्ठ” अभिनवगुप्त के शिष्य अभिनन्द ने ग्यारहवीं शताब्दी में संकलित किया था, जिसमें छह हज़ार श्लोक हैं। यह ग्रन्थ इस वेबसाइट पर आज दिखता है, इसका यह अर्थ नहीं कि यह आज लिखा गया है। वर्तमान भाषा में पुरानी कथाएँ बहुत बार दोबारा कही जाती हैं, और उनकी मूल आयु यथावत् रहती है।
ग्रंथ छह प्रकरणों में बँटा है: वैराग्य, मुमुक्षु, उत्पत्ति, स्थिति, उपशम, और निर्वाण। पहले दो प्रकरण साधक की मानसिक तैयारी की बात करते हैं। बाक़ी चार प्रकरण सृष्टि-स्थिति-संहार और मुक्ति की दार्शनिक दृष्टि देते हैं। पूरी शिक्षा अद्वैत वेदान्त के दृष्टिकोण से है।
पर योग वासिष्ठ की असली पहचान यह है कि वो दर्शन को कहानियों के माध्यम से सिखाता है। हर एक कहानी एक दार्शनिक बिंदु पर टिकी है। राजा लवण की एक रात में पूरा जीवन बीत जाता है। कौआ भुशुण्ड कई कल्प जी चुका है। चूड़ाला अपने पति राजा शिखिध्वज को छद्म-वेश में आकर शिक्षा देती है। हर कहानी एक प्रयोग है, एक विचार-प्रयोग, जो पाठक को अपनी पकड़ छोड़ने की ओर धकेलता है।
यहाँ चालीस कहानियाँ हैं, हिन्दी में, सरल भाषा में। हर कहानी का अपना मन्थन है। पढ़ने में कोई क्रम ज़रूरी नहीं। जिस कहानी का शीर्षक खींचे, वहीं से शुरू कर सकते हैं।
चालीस कहानियाँ
हर कार्ड एक स्वतंत्र कहानी पर ले जाता है।विषय-गहराई के एक ढीले धागे पर है।
साथ में पढ़ें · Companion Texts
- भागवतम् की कथाएँ narrative-रूप spiritual teaching, similar register।
- अष्टावक्र गीता योग वासिष्ठ का formal counterpart।
- कठोपनिषद् नचिकेता-यम संवाद, similar mortality-meditation।