आसा-दी-वार

आसा-दी-वार

गुरु नानक देव जी (M1) · आसा राग · 24 पउड़ियाँ + 59 सलोक · अंग 462-475

अगर एक पंक्ति याद रखनी हो

सोई सोई सदा सचु साहिबु साचा साची नाई ॥

“वही, वही, हमेशा सच्चा साहिब, सच्चा है, उसका नाम सच्चा है।”

आसा-दी-वार, सलोक M1

यह आज, दिल्ली में

दिल्ली के बंगला साहिब में रोज़ अमृत-वेले (4-5 AM) आसा-दी-वार बजती है। 90 मिनट का path, classical raagis की voice में। अगर एक बार आपने attend किया हो, बाकी morning का mood ही बदल जाता है।

आसा-दी-वार गुरु नानक देव जी की एक 24-पउड़ी “वार” है, आसा राग में, अंग 462 से 475 तक।

“वार” एक specific Punjabi-काव्य-format है, मगर गुरुओं ने इसे spiritual content के लिए adapt किया। हर वार में पउड़ियाँ + सलोक का mix होता है। आसा-दी-वार में 24 पउड़ियाँ + 59 सलोक हैं।

यह रचना daily Sikh worship का backbone है। हर gurdwara में रोज़ सुबह अमृत-वेले बजती है। दिल्ली के बंगला साहिब, सीस-गंज, रकाब-गंज, सब में।

गुरु नानक देव जी ने यह वाणी अपनी पहली उदासी (travel) के दौरान compose की, लगभग 1499-1518 के बीच। संगीत में राग आसा एक morning-राग है, और इस वार की पंक्तियाँ उसी morning-energy के साथ चलती हैं।

थीम: सच्चा साहिब कौन है? और उसे कैसे जाना जाए? 24 पउड़ियाँ + सलोक मिल कर इस प्रश्न का एक comprehensive जवाब बनाती हैं।

सब अंग, क्रम से

पूरी रचना verse-by-verse इन अंगों पर है:

कैसे पढ़ें

एक approach: पहले इस intro page को पढ़िए, फिर अंगों पर क्रम से जाइए। हर अंग पर 5-10 मिनट लगेंगे। पूरी रचना 90-120 मिनट में पूरी होती है।

दूसरा approach: अगर समय कम है, सिर्फ़ पहले अंग और आख़िरी अंग पढ़िए। बीच का flow आप mentally fill कर सकते हैं अगर context पता है।

तीसरा approach: कोई एक अंग जो आज resonate करे, उसी पर ध्यान दीजिए। ग्रंथ साहिब का design “हुकमनामा” वाला है, हर रोज़ कुछ एक अंग आज के लिए है।

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