आदि ग्रंथ
आदि ग्रंथ को सिख परंपरा “गुरु” कहती है, “किताब” नहीं। 1604 में गुरु अर्जन देव जी ने इसे संकलित किया, और 1708 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने इसे “गुरुगद्दी” सौंप दी, ताकि कोई इंसान गुरु न रहे, सिर्फ़ शब्द रहे।

इसे शुरू से अंत तक पढ़ने की ज़रूरत नहीं। कहीं भी खोलिए। जो अंग सामने आए, वही आज का संदेश है। यह random access design intentional है। सिखों में इसे “हुकमनामा” कहते हैं, ईश्वर का आदेश जो हर सुबह तय होता है कि आज क्या सुनना है।

lulla.net पर पूरे 1,430 अंगों का श्लोक-दर-श्लोक हिंदी टीका मौजूद है। हर अंग पर शबद, उसका हिन्दी अर्थ, और आज के context (दिल्ली के लोगों के लिए) में explanation।

लंबी रचनाओं की पूरी टीका
कुछ रचनाएँ अलग-अलग pages पर हैं, ताकि पूरी रचना एक सीधे flow में पढ़ी जा सके:
- जपजी साहिब · गुरु नानक देव जी · अंग 1-8 · 38 पउड़ियाँ
- आनंद साहिब · गुरु अमर दास जी · अंग 917-922 · 40 पउड़ियाँ
- सुखमनी साहिब · गुरु अर्जन देव जी · अंग 262-296 · 24 अष्टपदियाँ
- आसा-दी-वार · गुरु नानक देव जी · अंग 462-475 · 24 पउड़ियाँ + 59 सलोक
- सलोक महला 9 · गुरु तेग बहादुर जी · अंग 1426-1429 · 57 सलोक
31 रागों में संगठित वाणी
आदि ग्रंथ अंग 14 से 1352 तक 31 शास्त्रीय रागों में संगठित है। हर राग एक specific time-of-day और mood carry करता है। हर राग का link उसके सब अंगों पर ले जाएगा:
वाणी के रचयिता (Mahallas + भगत)
आदि ग्रंथ में पाँच Sikh गुरुओं (M1, M2, M3, M4, M5), नौवें गुरु (M9), और 15 भगतों की वाणी है, साथ ही 11 भट्टों के सवैये:
- महला 1 · गुरु नानक देव जी (1469-1539) · संस्थापक, जपजी साहिब के रचयिता
- महला 2 · गुरु अंगद देव जी (1504-1552) · गुरमुखी लिपि के developer
- महला 3 · गुरु अमर दास जी (1479-1574) · आनंद साहिब के रचयिता
- महला 4 · गुरु राम दास जी (1534-1581) · विवाह-लावां के रचयिता
- महला 5 · गुरु अर्जन देव जी (1563-1606) · आदि ग्रंथ के संकलनकर्ता, सुखमनी के रचयिता
- महला 9 · गुरु तेग बहादुर जी (1621-1675) · 57 सलोक के रचयिता
- भगत कबीर · 15वीं सदी · 224 शबद
- शेख़ फ़रीद · 12वीं सदी · 134 सलोक
- भगत नामदेव · 13वीं सदी · 60 शबद
- भगत रविदास · 15वीं सदी · 40 शबद
- ग्यारह भट्ट · 16वीं सदी · 123 सवैये
हर अंग पर सीधे जाएँ
नीचे 1 से 1430 तक हर अंग का सीधा link है। हर अंग पर शबद-by-शबद हिन्दी टीका है:
अंग 1-100 100-200 200-300 300-400 400-500 500-600 600-700 700-800 800-900 900-1000 1000-1100 1100-1200 1200-1300 1300-1430
हर अंग के URL का format: /adi-granth/ang/N/ जहाँ N = 1 से 1430 तक कोई भी संख्या।
“हुकमनामा” परंपरा
हर सुबह दिल्ली के gurdwaras में एक अंग random select होता है। यह “हुकमनामा” (आदेश) है, ईश्वर का आज का संदेश। अगर आप online यह practice करना चाहो, हर रोज़ किसी भी ang link पर browser back-forward से navigate करते जाएँ, या एक specific अंग पर daily focus करो।
यह श्लोक-दर-श्लोक टीका slow reading के लिए है। हर अंग में 25+ paragraphs होंगे, हर पंक्ति का हिन्दी अर्थ + दिल्ली के लिए relevant context।
साथ में पढ़ें · Companion Texts
- भगवद् गीता parallel canon, similar foundational role।
- हनुमान चालीसा भक्ति का shared register।
- कठोपनिषद् मृत्यु-aware wisdom, similar mood to सलोक M9।