आदि ग्रंथ
1,430 अंग। 31 राग। 5,894 शब्द। छह सिख गुरु और पंद्रह भगत, जिनमें कबीर, फ़रीद, रविदास, नामदेव, और दूसरे। एक पुस्तक नहीं, एक शरीर। हर पन्ना उसका एक अंग।
आदि ग्रंथ को सिख परंपरा “गुरु” कहती है, “किताब” नहीं। 1604 में गुरु अर्जन देव जी ने इसे संकलित किया, और 1708 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने इसे “गुरुगद्दी” सौंप दी, ताकि कोई इंसान गुरु न रहे, सिर्फ़ शब्द रहे।
इसे शुरू से अंत तक पढ़ने की ज़रूरत नहीं। कहीं भी खोलिए। जो अंग सामने आए, वही आज का संदेश है। यह random access design intentional है। सिखों में इसे “हुकमनामा” कहते हैं, ईश्वर का आदेश जो हर सुबह तय होता है कि आज क्या सुनना है।
lulla.net पर इस ग्रंथ का verse-by-verse हिंदी अनुवाद धीरे-धीरे आता रहेगा। अभी जपजी साहिब (अंग 1-8) और सुखमनी साहिब (अंग 262-296) पूरे हो चुके हैं। नीचे जो लिंक हैं, वो Phase 1 का काम है। बाक़ी अंग समय के साथ जुड़ते रहेंगे।
मुख्य रचनाएँ
शुरुआत के लिए ये पाँच अंश सबसे अच्छे हैं
हुकमनामा
सिख परंपरा में हर सुबह “हुकम” लिया जाता है, ग्रंथ साहिब किसी भी पन्ने पर खोलो, वही आज का संदेश। आप भी एक कोशिश कर सकते हैं।
कोई एक अंग खोलें31 राग
ग्रंथ साहिब में रचनाएँ राग के क्रम से सजाई गयी हैं, संगीत के mood के हिसाब से
कवि और गुरु
कौन क्या लिखता है, और कितना