Reading guides

पथ-दर्शिकाएँ

लम्बे ग्रंथ पढ़ने में सबसे आम भूल यही है, कहीं से भी शुरू कर देना। नीचे हर दर्शिका एक तयशुदा रास्ता बताती है, समय के हिसाब से और विषय के हिसाब से। आपके पास जितना भी समय है, उसी से शुरू कीजिए।

Three arched doorways side by side, each opening onto a different path — garden, mountain trail, library cave
तीन दरवाज़े। तीनों भीतर ले जाते हैं, मगर रास्ता हर एक का अलग है।
जितना समय आपके पास है

30 मिनट · शुरुआत

अगर आपके पास 30 मिनट हैं

गीता, जपजी और हनुमान चालीसा से छह श्लोक। हर एक पर 5 मिनट। एक नक़्शा मिल जाएगा, फिर आप ख़ुद तय कर सकेंगे कि आगे कहाँ जाना है।

गीता 2.47, जपजी पउड़ी 1, चालीसा दोहा 1, …

पढ़ना शुरू करें →

90 मिनट · साधक

निर्णय लेने वालों के लिए कर्म-योग

गीता के दूसरे और तीसरे अध्याय से सात श्लोक, दल, उत्पाद और अदला-बदली के संदर्भ में रखे गए। फल से जुड़े बिना निर्णय लेना।

गीता 2.47, 2.48, 2.50, 3.19, 3.21, 3.25, 3.30

पढ़ना शुरू करें →

2 घंटे · विद्वान

12 पउड़ियों में जपजी साहिब

गुरु नानक का आधार-ग्रंथ, समेटा हुआ। सृष्टि-विद्या, नैतिक नियम, और मार्ग, सब 12 पउड़ियों में।

पउड़ी 1, 4, 7, 16, 19, 22, 25, 28, 30, 33, 38, सलोक

पढ़ना शुरू करें →
विषय के हिसाब से

अगर आपने इनमें से कुछ नहीं पढ़ा

शुरुआत कहाँ से

पहली बार भारतीय परम्परा में प्रवेश करना है? यह सबसे सहज रास्ता है। पहले एक छोटा ग्रंथ पूरा करना, फिर तय करना कि अगला कौन। डर मत खाइए, यह दो-सौ पन्नों की पाठ्य-पुस्तक नहीं।

शुरू में: हनुमान चालीसा (40 चौपाई), फिर केनोपनिषद् (34 मन्त्र), फिर अष्टावक्र प्रकरण 1

चालीसा से शुरू करें →

मृत्यु और शोक

मृत्यु, शोक, अमृत

किसी अपने को खोया है? या ख़ुद की मृत्यु के बारे में सोचने लगे हैं? यह ग्रंथ इस बातचीत से सीधे जुड़ते हैं। बिना सान्त्वना, बिना टाल-मटोल।

कठोपनिषद् (नचिकेता-यम), सलोक महला 9वडहंस-राग (अलाहणी), आनंद साहिब

कठ से शुरू करें →

अहंकार का गलना

अहंकार-त्याग

अहंकार को गम्भीरता से सम्बोधित करने वाले ग्रंथ। ख़ुद को नीचा दिखाए बिना, “मैं” की रचना को शान्ति से परखना।

अष्टावक्र गीता (20 प्रकरण), कबीर वाणीसुखमनी अष्टपदी 8

अष्टावक्र से शुरू करें →

अनिश्चितता में निर्णय

अनिश्चितता में निर्णय

संस्थापक हो, चिकित्सक, वकील या माता-पिता, सब को रोज़ अनिश्चित निर्णय लेने पड़ते हैं। यह ग्रंथ ठीक उसी मनोदशा पर चोट करते हैं।

गीता अध्याय 2-3विभीषण गीतायोग सूत्र पाद 2

कर्म-योग पथ शुरू करें →

भक्ति, बिना मत-मज़हब

भक्ति, बिना मज़हब

क्या भक्ति आज भी प्रासंगिक है, इस तर्क-प्रधान इक्कीसवीं सदी में? यह ग्रंथ कहते हैं, हाँ, और इस तरह।

नारद भक्ति सूत्रगीता अध्याय 12सौन्दर्य लहरीचालीसा गहरी डुबकी

नारद से शुरू करें →

कथाएँ, दर्शन नहीं

कथा-राह

कोरा दर्शन-ग्रंथ डरावना लगता है? यह सब कथाएँ हैं, कहानी के रूप में गहरी समझ। हर कथा अपने भीतर एक अलग सीख लिए चलती है।

भागवतम् की 60 कथाएँवसिष्ठ की 40 कथाएँ

गजेन्द्र से शुरू करें →

रोज़ की 10-मिनट साधना

रोज़ की 10-मिनट दिनचर्या

भोर-वेले का अनुशासन नहीं है? यह सबसे छोटा संकल्प है। रोज़ 10 मिनट, बस एक धागे को पकड़ कर रखने के लिए।

रोज़: एक अंग आदि ग्रंथ से (/adi-granth/आज का हुकमनामा मुखपृष्ठ पर); या एक कथा भागवतम् से (पहले से पढ़ी हुई नहीं)। दोनों 8-12 मिनट में पूरे।

आज का हुकमनामा →

गृहस्थ-जीवन और साधना

गृहस्थ-जीवन और साधना

परिवार, काम, दोस्त और ज़िम्मेदारियों के बीच साधना को कैसे बिठाएँ? यह ग्रंथ ख़ास तौर पर गृहस्थ के संदर्भ से बात करते हैं।

श्री राम गीता (राम राज-गद्दी पर), सुखमनी साहिबसुदामा-कथा

राम गीता से शुरू करें →
ग्रंथ-परिवार के हिसाब से

वेदान्त

अद्वैत-वेदान्त पथ

शंकराचार्य की परंपरा, अद्वैत वेदान्त। एक जुड़ा हुआ पाठ-क्रम।

ईशाकेनकठमाण्डूक्यअष्टावक्रराम गीता

वेदान्त-क्रम शुरू करें →

योग

योग-पथ

पतञ्जलि से शुरू, गीता के अध्याय 6 (ध्यान-योग) और वसिष्ठ की कथाओं तक।

पतञ्जलि योग सूत्रगीता अध्याय 6वसिष्ठ की कथाएँ

योग-क्रम शुरू करें →

सिख-परम्परा

श्री गुरु ग्रंथ साहिब पथ

सिख परम्परा, पाँच गुरुओं की आधार-रचनाएँ, फिर 1430 अंगों में जहाँ से चाहें वहाँ से।

जपजी साहिब (M1) → आनंद साहिब (M3) → आसा-दी-वार (M1) → सुखमनी साहिब (M5) → सलोक महला 91430 अंग

जपजी से शुरू करें →

भक्ति-स्तुति

भक्ति-स्तुति पथ

भक्ति-काव्य, शास्त्रीय स्तोत्र और लोक-भजन। पाठ और ध्यान, दोनों के लिए।

हनुमान चालीसाविष्णु सहस्रनामसौन्दर्य लहरीनारद भक्ति सूत्र

चालीसा से शुरू करें →

और दर्शिकाएँ बनती रहेंगी, समय के साथ। कोई ख़ास रास्ता चाहिए जो इस सूची में नहीं है? सम्पर्क पर बता दीजिए।