पतञ्जलि योग सूत्र · Yoga Sutras

पतञ्जलि योग सूत्र · Yoga Sutras of Patanjali

किसी ने, दो हज़ार साल पहले, पूरे मन की गुत्थी 196 छोटी-छोटी लाइनों में बाँध दी। न कोई भारी-भरकम ग्रंथ, न उपदेश। बस एक सवाल: मन है क्या, और शांत कैसे होता है।

196 सूत्र · 4 पाद · पूरा पढ़ें तो ~ 5 घंटे · पहले से कुछ जानना ज़रूरी नहीं · साथ में अच्छा लगेगा: भगवद् गीता, अष्टावक्र गीता

🟢 चारों पाद पूरे — सभी 196 सूत्र, भाष्य सहित।

पहले एक बात

पतञ्जलि कौन थे? सच कहें तो किसी को ठीक-ठीक नहीं पता। ईसा से दो-तीन सदी इधर या उधर, किसी एक इंसान ने (या शायद एक पूरी परम्परा ने) सोचा कि पूरे योग को इतना निचोड़ दें कि वह एक धागे में पिरोया जा सके। “सूत्र” का मतलब ही यही है — धागा। कम से कम शब्द, ज़्यादा से ज़्यादा अर्थ।

और यह कोई धार्मिक किताब नहीं है। न इसमें कोई कथा है, न आस्था की कोई शर्त। यह एक manual है, मन की मशीन का। पतञ्जलि लगभग एक engineer की तरह लिखते हैं: पहले बताते हैं मंज़िल क्या है, फिर रास्ता, फिर रास्ते की खूबियाँ और फिसलनें, और आख़िर में वह जगह जहाँ सब रुक जाता है।

एक छोटी सी ईमानदारी: अगर आपने कभी थोड़ा-बहुत भी मन को शांत करने की कोशिश की है — किसी भी तरह, किसी भी परम्परा में — तो यह किताब आपके लिए जगमगा उठेगी। और अगर नहीं की, तो भी कोई बात नहीं। पढ़ते-पढ़ते कोशिश अपने आप शुरू हो जाती है।

पूरा कैसे पढ़ें

पहली बार: पाद 1 से 4, क्रम से। जल्दी मत कीजिए। हर पाद के कुछ सूत्र असली खंभे हैं, बाक़ी उन्हीं के आसपास खड़े हैं।

सिर्फ़ एक पाद का समय है? पाद 2 लीजिए। सबसे ज़मीनी है, और मशहूर अष्टांग योग वहीं रहता है।

आप पहले से अभ्यास करते हैं? पाद 1 और पाद 4 साथ पढ़िए। दोनों एक ही बात के दो छोर हैं, और बीच का सब उन्हीं को जोड़ने वाला पुल है।

सिद्धियों का क्या? पाद 3 में कुछ हैरान करने वाली capabilities आती हैं। मज़ेदार ज़रूर हैं, पर मंज़िल नहीं। पतञ्जलि खुद उन्हें रास्ते का रोड़ा कहते हैं। एक catalogue की तरह पढ़िए, to-do list की तरह नहीं।

पाद 1

समाधि पाद · Samadhi Pada

51 सूत्र · ~75 मिनट · 🟢 पूरा

नक्शा। मन क्या है, उसमें उठने वाली लहरें क्या हैं, और शांत होने पर पीछे क्या बचता है। अभ्यास और वैराग्य का दो-शब्द का फ़ॉर्मूला यहीं मिलता है (1.12)।

रुक कर पढ़ें: 1.2, 1.3, 1.12, 1.14, 1.33, 1.41

पाद 2

साधन पाद · Sadhana Pada

55 सूत्र · ~85 मिनट · 🟢 पूरा

रास्ता। दुख कहाँ से आता है (पाँच क्लेश), और अष्टांग योग के पहले पाँच अंग — यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार। सबसे काम का पाद।

रुक कर पढ़ें: 2.1, 2.3, 2.16, 2.29, 2.30, 2.46, 2.47, 2.49

पाद 3

विभूति पाद · Vibhuti Pada

56 सूत्र · ~80 मिनट · 🟢 पूरा

खूबियाँ। अष्टांग के आख़िरी तीन अंग, संयम का तरीक़ा, और उससे खुलने वाली हैरान करने वाली सिद्धियाँ — जिन्हें पतञ्जलि बताते भी हैं और आगाह भी करते हैं।

रुक कर पढ़ें: 3.1-3.4, 3.9, 3.38, 3.50, 3.51, 3.53

पाद 4

कैवल्य पाद · Kaivalya Pada

34 सूत्र · ~55 मिनट · 🟢 पूरा

मंज़िल। मन का असली चेहरा (वह खुद नहीं चमकता), कर्म और वासना का तंत्र, धर्ममेघ समाधि, और कैवल्य। सबसे छोटा, सबसे गहरा।

रुक कर पढ़ें: 4.1, 4.3, 4.7, 4.18, 4.19, 4.22, 4.25, 4.29, 4.34

पूरी किताब का एक कमाल

चारों पाद असल में एक ही बात हैं, चार हिस्सों में कही गई।

दूसरे ही सूत्र (1.2) में पतञ्जलि पूरी बात रख देते हैं: योग का मतलब है मन की लहरों का थम जाना। और अगले सूत्र में इनाम बता देते हैं — तब “देखने वाला” अपने असली रूप में आ बैठता है।

पाद 2 और 3 बताते हैं वहाँ पहुँचा कैसे जाए। और फिर सबसे आख़िरी सूत्र (4.34) वही पहली बात लौटा कर लाता है, अब पूरी यात्रा के बाद, अपने सबसे साफ़ रूप में।

यानी पहला सूत्र और आख़िरी सूत्र एक ही चीज़ कह रहे हैं। बीच के 194 सूत्र वह रास्ता हैं जो एक को दूसरे से जोड़ता है। पूरी किताब एक बंद घेरा है — और यही उसकी असली ख़ूबसूरती है।

इसके बाद

इसी site पर: अष्टावक्र गीता ठीक यही मंज़िल एक उल्टे रास्ते से बताती है। पतञ्जलि का रास्ता कदम-दर-कदम है, अष्टावक्र का एक ही छलाँग। दोनों को साथ पढ़िए, दोनों एक-दूसरे को रोशन कर देंगे। और गीता का अध्याय 6 ध्यान पर है, पतञ्जलि से सीधी बातचीत करता हुआ।

पढ़ते-पढ़ते एक सवाल साथ रखिए: मेरा अपना मन सबसे ज़्यादा किस लहर में डूबा रहता है? बस यही देखना, हफ़्तों की पढ़ाई से ज़्यादा कर देता है।

मूल पाठ: पतञ्जलि योग सूत्र, मानक देवनागरी संस्करण (व्यास-भाष्य परम्परा)।

जिन भाष्यों से मदद ली: व्यास-भाष्य, स्वामी हरिहरानंद आरण्य, Edwin Bryant, स्वामी वेद भारती (हिमालयन इंस्टीट्यूट), B.K.S. Iyengar, Georg Feuerstein।

स्थायी URL: /yoga-sutras/

आख़िरी बार देखा गया: 2026-05-21