पुराण का अर्थ है, जो पुराना होकर भी नया बना रहे। ये वे ग्रंथ हैं जिन्होंने वेद की गहरी बातों को कथा के रूप में ढालकर घर-घर पहुँचाया। परम्परा कहती है कि व्यासजी ने पुराणों का संकलन किया और उनके शिष्य रोमहर्षण तथा उनके पुत्र उग्रश्रवा (सूतजी) ने इन्हें नैमिषारण्य की सभा में ऋषियों को सुनाया। यहीं से ये आगे बढ़ते-बढ़ते हम तक आए।
पुराण किसे कहते हैं
प्राचीन लक्षण के अनुसार एक पुराण में पाँच बातें होनी चाहिए, जिन्हें पंचलक्षण कहते हैं। सर्ग, यानी सृष्टि की रचना; प्रतिसर्ग, यानी प्रलय और पुनर्रचना; वंश, यानी देवताओं और ऋषियों की परम्परा; मन्वन्तर, यानी मनुओं के युग; और वंशानुचरित, यानी राजाओं की कथाएँ। बड़े पुराण इन पाँचों को समेटते हैं, और इन्हीं के बीच वे कथाएँ बहती हैं जिनके लिए इन्हें सबसे अधिक पढ़ा जाता है।
अठारह महापुराण
महापुराण अठारह माने गए हैं। परम्परा इन्हें तीन गुणों में बाँटती है, यह देखते हुए कि किस देवता की महिमा प्रमुख है। सात्त्विक पुराणों में प्रायः विष्णु, राजस में ब्रह्मा, और तामस में शिव की महिमा आगे रहती है। नीचे तीनों वर्ग, और साथ में परम्परा से मानी गई श्लोक-संख्या दी गई है। ये संख्याएँ आदर्श हैं, हस्तलेखों में थोड़ा अन्तर मिलता है।
सात्त्विक (विष्णु-प्रधान)
- विष्णु पुराण (लगभग 23,000 श्लोक): छह अंशों में सृष्टि, ध्रुव और प्रह्लाद की कथाएँ, और अन्त में कृष्ण-चरित।
- भागवत पुराण (लगभग 18,000): बारह स्कन्ध, जिनका हृदय दसवाँ स्कन्ध, कृष्ण की लीला है।
- नारद पुराण (लगभग 25,000): भक्ति और व्रत-तीर्थ का विस्तार।
- गरुड़ पुराण (लगभग 19,000): मृत्यु के बाद की गति और श्राद्ध का विवेचन।
- पद्म पुराण (लगभग 55,000): सृष्टि-खण्ड से लेकर अनेक तीर्थ-माहात्म्य।
- वराह पुराण (लगभग 24,000): वराह अवतार के प्रसंग में पृथ्वी और व्रत।
राजस (ब्रह्मा-प्रधान)
- ब्रह्म पुराण (लगभग 10,000): सृष्टि और अनेक तीर्थ, विशेषकर उत्कल और कोणार्क।
- ब्रह्माण्ड पुराण (लगभग 12,000): ब्रह्माण्ड का विस्तार; ललिता सहस्रनाम इसी से आता है।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण (लगभग 18,000): गणेश और कृष्ण के खण्ड, राधा-कृष्ण की लीला।
- मार्कण्डेय पुराण (लगभग 9,000): पक्षियों की फ़्रेम-कथा और हरिश्चन्द्र; इसी के भीतर देवी माहात्म्य है।
- भविष्य पुराण (लगभग 14,500): व्रत, सूर्य-उपासना और भविष्य की बातें।
- वामन पुराण (लगभग 10,000): वामन अवतार के प्रसंग में शिव-पार्वती की कथाएँ भी।
तामस (शिव-प्रधान)
- शिव पुराण (लगभग 24,000): संहिताओं में बँटा, सती-पार्वती, कार्तिकेय-गणेश, और बारह ज्योतिर्लिंग।
- लिंग पुराण (लगभग 11,000): शिवलिंग का माहात्म्य और सृष्टि।
- स्कन्द पुराण (लगभग 81,000): सबसे बड़ा; कार्तिकेय के प्रसंग में असंख्य तीर्थ-माहात्म्य, जैसे काशी और सेतु।
- अग्नि पुराण (लगभग 15,000): एक विश्वकोश-सा पुराण, अनेक विद्याओं का संग्रह।
- मत्स्य पुराण (लगभग 14,000): मत्स्य अवतार के प्रसंग में प्रलय और वंश।
- कूर्म पुराण (लगभग 17,000): कूर्म अवतार के प्रसंग में ईश्वर-गीता और व्यास-गीता।
इस पुस्तकालय में पुराण
पुराणों का संसार समुद्र-सा है, और हम उसमें से चुनी हुई कथाएँ, कहानी के रूप में, धीरे-धीरे यहाँ ला रहे हैं। अभी जो पढ़ा जा सकता है:
- भागवत की कथाएँ, चुनी हुई कहानियाँ, ध्रुव और प्रह्लाद से लेकर कृष्ण-लीला तक।
- देवी माहात्म्य, मार्कण्डेय पुराण का वह भाग जिसमें देवी के तीन चरित हैं।
- हरिवंश, महाभारत का खिल-पर्व, जिसे पुराण-सी कृष्ण-कथा माना जाता है।
- शिव पुराण की 32 कथाएँ अब पढ़ने के लिए तैयार हैं।
आगे विष्णु पुराण और मार्कण्डेय की शेष कथाएँ भी इसी क्रम में आती जाएँगी।