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वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण
वाल्मीकि रामायण · आदि-काव्य

वाल्मीकि रामायण

सात काण्ड, लगभग पाँच सौ सर्ग, चौबीस हज़ार श्लोक · संस्कृत का आदि-काव्य

यहाँ वाल्मीकि की मूल कथा को चौंतीस अध्यायों में, एक सतत प्रवाह में, हिन्दी में कहा गया है।

पहले एक कथा

तमसा नदी के किनारे एक ऋषि बैठे थे, नाम वाल्मीकि। दूर एक वृक्ष पर क्रौंच पक्षियों का एक जोड़ा, नर और मादा, प्रेम में लीन था। उसी क्षण एक निषाद ने नर को बाण मार गिराया। मादा का विलाप सुन कर ऋषि के भीतर एक पीड़ा उठी, और वही पीड़ा अपने-आप शब्दों में फूट पड़ी।

रामायण की यात्रा का मानचित्र: अयोध्या, वन, जटायु, लंका का सेतु, और विमान से वापसी
मा निषाद प्रतिष्ठां त्वम् अगमः शाश्वतीः समाः ।
यत् क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम् ॥

हे निषाद, आपको अनन्त काल तक प्रतिष्ठा न मिले, क्योंकि आपने काम-मोहित क्रौंच-जोड़े में से एक का वध कर दिया।

बत्तीस अक्षरों का यह अनुष्टुप् छंद, बिना किसी पूर्व-योजना के, ऋषि के मुख से निकल पड़ा। यही संस्कृत का पहला विधिवत् श्लोक माना जाता है। इसी से वाल्मीकि आदि-कवि कहलाए और रामायण आदि-काव्य।

थोड़ी देर बाद ब्रह्मा प्रकट हुए और बोले, वाल्मीकि, यह संयोग नहीं था; आपके शोक से ही यह श्लोक उपजा है। अब इसी छंद में राम का सम्पूर्ण चरित कहिए। रामायण का जन्म इसी करुणा से हुआ।

यह कौन-सी रामायण है

यह विशेष रूप से वाल्मीकि की रामायण है। तुलसीदास का रामचरितमानस और अध्यात्म रामायण, दोनों अपनी जगह अनमोल हैं, पर वाल्मीकि की रचना मूल है, वही आधार जिससे आगे की सारी राम-कथाएँ निकलीं।

तुलसीदास ने अवधी में रामचरितमानस सोलहवीं शताब्दी में, भक्ति के स्वर में रचा। वाल्मीकि ने संस्कृत में रामायण कब रची, यह निश्चित नहीं; अनुमान है पाँचवीं-चौथी शताब्दी ईसा-पूर्व, अर्थात् तुलसी से लगभग दो हज़ार वर्ष पहले।

इसी कारण कहीं-कहीं वह कथा, जो आपने बचपन में सुनी होगी, वाल्मीकि से थोड़ी भिन्न मिलेगी। जैसे लक्ष्मण-रेखा तुलसी की परम्परा में है, वाल्मीकि में नहीं। यह सतत कथा पूरी तरह वाल्मीकि के मूल का अनुसरण करती है।

सात काण्ड, चौंतीस अध्याय

वाल्मीकि की रामायण सात काण्डों में है। हर काण्ड का अपना रंग है, अपना भार। नीचे प्रत्येक काण्ड के अध्याय क्रम से दिए हैं।

काण्ड 1 · बाल काण्ड

राम का जन्म, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, ताड़का-वध, अहल्या-उद्धार, मिथिला और सीता-स्वयंवर। एक राजकुमार के राम बनने का आरम्भ।

काण्ड 2 · अयोध्या काण्ड

राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी के दो वरदान, चौदह वर्ष का वनवास, दशरथ की मृत्यु, भरत का चित्रकूट आना और पादुका। प्रेम और कर्तव्य का आमना-सामना।

काण्ड 3 · अरण्य काण्ड

पंचवटी, शूर्पणखा, खर-दूषण-वध, मारीच का स्वर्ण-मृग, सीता-हरण और जटायु। यहीं से कथा मुड़ती है।

काण्ड 4 · किष्किन्धा काण्ड

हनुमान से भेंट, सुग्रीव से मैत्री, वाली-वध की धर्म-गुत्थी, तारा का शोक और सीता की खोज में वानरों का प्रस्थान।

काण्ड 5 · सुन्दर काण्ड

हनुमान का समुद्र-लंघन, लंका-प्रवेश, अशोक-वाटिका में सीता-दर्शन, मुद्रिका, अक्ष-वध और लंका-दहन। सबसे प्रिय काण्ड।

काण्ड 6 · युद्ध काण्ड

विभीषण-शरणागति, सेतु-बंध, लंका का घेरा, कुम्भकर्ण और इन्द्रजित का वध, रावण-वध, और अग्नि की साक्षी।

काण्ड 7 · उत्तर काण्ड

रावण की पूर्व-कथा, राम-राज्य, सीता का वनवास, लव और कुश, अश्वमेध, और सरयू में राम का महाप्रस्थान।

कैसे पढ़ें

एक रीति, हर सप्ताह एक काण्ड; सात सप्ताह में पूरी रामायण, बिना किसी जल्दी के। दूसरी रीति, केवल सुन्दर काण्ड, हनुमान की यात्रा, जो अपने-आप में पूर्ण है और जिसका बहुत-से लोग नित्य पाठ करते हैं। तीसरी रीति, बच्चों के साथ, सन्ध्या को बीस मिनट, एक प्रसंग। पीढ़ियों से यही चला आया है।

एक आवश्यक सूचना। lulla.net पर तीन और रचनाएँ राम-कथा से जुड़ी हैं, पर वे वाल्मीकि की नहीं हैं:

· हनुमान चालीसा, तुलसीदास की स्वतन्त्र रचना, सोलहवीं शताब्दी।

· विभीषण गीता, तुलसी के रामचरितमानस के लंका-काण्ड का धर्म-रथ वाला अंश।

· श्री राम गीता, अध्यात्म रामायण से, राम का लक्ष्मण को वेदान्त-उपदेश।

तीनों सुन्दर हैं, पर तीनों वाल्मीकि नहीं हैं।

साथ में पढ़ें

स्रोत: वाल्मीकि रामायण, संस्कृत मूल (गीता प्रेस, गोरखपुर)।

परम्परा: महर्षि वाल्मीकि, आदि-कवि। सात काण्ड, लगभग पाँच सौ सर्ग, चौबीस हज़ार अनुष्टुप् श्लोक।

अनुमति: मूल संस्कृत पाठ सार्वजनिक डोमेन में। हिन्दी पुनर्कथन, lulla.net, CC BY-NC 4.0।

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