वाल्मीकि रामायण
7 काण्ड, 500 सर्ग, 24,000 श्लोक · आदि-काव्य · पहली poem
पहले एक कथा
तमसा नदी के किनारे एक ऋषि बैठे थे। नाम वाल्मीकि। दूर एक पेड़ पर दो क्रौंच पक्षी, नर और मादा, प्रेम में लिप्त थे। उसी moment एक निषाद (शिकारी) ने नर को तीर मार दिया। मादा का विलाप ऋषि ने सुना। एक दर्द जो शब्दों में फूट पड़ा,
यत् क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम् ॥
“हे निषाद! आपको अनन्तकाल तक प्रतिष्ठा न मिले, जिसने काम-मोहित क्रौंच-जोड़े में से एक का वध किया।”
यह 32 अक्षरों का अनुष्टुप् छंद, अचानक, बिना design के, ऋषि के मुख से निकल पड़ा। उन्होंने रुक कर सोचा, “यह क्या निकला?” यह संस्कृत का पहला विधिवत् श्लोक था, यह पहला poem था। इसलिए वाल्मीकि “आदि-कवि” कहलाए और रामायण “आदि-काव्य।”
थोड़ी देर बाद ब्रह्मा प्रकट हुए, और कहा, “वाल्मीकि, यह संयोग नहीं था। आपके शोक (शोक) से ही श्लोक (श्लोक) पैदा हुआ। अब इसी छंद में राम की पूरी कथा लिखो।” यही रामायण की उत्पत्ति है, करुणा से।
यह कौनसी रामायण है
specifically वाल्मीकि की रामायण। TV-वाली रामायण, तुलसी का रामचरितमानस और अध्यात्म रामायण, तीनों अपनी जगह अनमोल हैं, मगर वाल्मीकि की कुछ और है। यह base text है, जिससे बाक़ी सब निकलीं।
तुलसीदास ने अवधी में रामचरितमानस 16वीं सदी में लिखा, devotional का स्वर में। वाल्मीकि ने संस्कृत में रामायण कब लिखी, यह exact ज्ञात नहीं। 5वीं-4वीं सदी ईसा-पूर्व का अनुमान। तुलसी से लगभग 2,000 साल पहले।
fairness के लिए: जो आप TV-वाली रामायण से जानते हैं (या अपने दादा-दादी से सुनी थी), उसमें कुछ details वाल्मीकि से अलग हैं। उदाहरण: “लक्ष्मण-रेखा” तुलसी में है, वाल्मीकि में नहीं। हम जहाँ-जहाँ ऐसा divergence आएगा, वहाँ एक line में bridge करेंगे।
सात काण्ड, एक यात्रा
वाल्मीकि की रामायण 7 काण्डों (chapters) में है। हर काण्ड का अपना mood है, अपनी weight है। नीचे map है।
बाल काण्ड
राम का जन्म, बचपन, विश्वामित्र-यज्ञ की रक्षा, ताड़का-वध, अहल्या-उद्धार, मिथिला, सीता-स्वयंवर। एक राजकुमार से एक राम तक का सफ़र।
पढ़ें →अयोध्या काण्ड
राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी का बदला, राम का 14 साल का वनवास, दशरथ की मृत्यु, भरत का चित्रकूट जाना, पादुका। प्रेम और कर्तव्य की टक्कर।
पढ़ें →अरण्य काण्ड
पंचवटी, सूर्पणखा, खर-दूषण-त्रिशिरा वध, मारीच का स्वर्ण-मृग, सीता-हरण, जटायु। पूरी कथा का pivot यहीं है।
पढ़ें →किष्किन्धा काण्ड
हनुमान का परिचय, सुग्रीव-पैक्ट, बाली-वध (moral complexity), तारा का शोक, खोजी-दल भेजे जाते हैं, सम्पाती, हनुमान को jump की याद।
पढ़ें →सुन्दर काण्ड
हनुमान का समुद्र-लंघन, मैनाक-सुरसा-सिंहिका, लंका, अशोक-वाटिका, सीता-दर्शन, अंगूठी, अक्ष-वध, ब्रह्मास्त्र, पूँछ-दहन, लंका-दहन। सबसे प्रिय काण्ड।
पढ़ें →युद्ध काण्ड
विभीषण का अलगाव, नल-सेतु, घेराव, इंद्रजित, कुम्भकर्ण-वध, संजीवनी, इंद्रजित-वध, आदित्य-हृदय, रावण-वध, विभीषण-राज्याभिषेक, अग्नि-परीक्षा।
पढ़ें →उत्तर काण्ड
रावण की पूरी back-story, राम-राज्य, सीता का वनवास, लव-कुश, अश्वमेध, सीता का अंतिम-प्रस्थान, राम की सरयू-यात्रा।
पढ़ें →कैसे पढ़ें
एक approach: हर हफ़्ते एक काण्ड। 7 हफ़्तों में पूरी रामायण। ध्यान-से, बिना hurry।
दूसरा approach: सिर्फ़ सुन्दर काण्ड (हनुमान का सफ़र) पढ़िए। यह self-contained है। बहुत-से लोग रोज़ इसका पाठ करते हैं।
तीसरा approach: बच्चे के साथ। शाम को 20 मिनट, कोई एक episode। कई पीढ़ियों से यही approach है।
एक ज़रूरी note। lulla.net पर तीन और texts हैं जिनका संबंध राम-कथा से है, मगर वो वाल्मीकि की नहीं हैं:
· हनुमान चालीसातुलसीदास की standalone रचना, 16वीं सदी।
· विभीषण गीतातुलसी के रामचरितमानस के लंका-काण्ड का धर्म-रथ-वाला अंश।
· श्री राम गीताअध्यात्म रामायण से, 14वीं-15वीं सदी।
तीनों beautiful हैं, मगर तीनों वाल्मीकि नहीं हैं। हम दिखाएँगे जहाँ-जहाँ overlap है।
साथ में पढ़ें
- महाभारतदूसरा महाकाव्य, larger and morally darker
- भगवद् गीतामहाभारत के भीतर, मगर अपनी जगह foundational
- श्री राम गीताराम के द्वारा लक्ष्मण को दिया गया वेदान्त उपदेश
- हनुमान चालीसातुलसी की 40 चौपाई
- विभीषण गीताधर्म-रथ का वर्णन