लुल्ला परिवारLulla Family
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भागवतम् और पुराणलीला, भक्ति और अवतार

विष्णुपुराण

चुना हुआ पुनर्कथन

26 चुने हुए प्रसंग।

दायरा और आधार-संस्करण

पाठ-जाँच के लिए गीता प्रेस का सम्पूर्ण विष्णु पुराण, संस्कृत और हिन्दी अनुवाद सहित, उत्पाद 48, नामित संदर्भ है।

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विष्णुपुराण

विष्णु की कथाएँ, गीता प्रेस के विष्णुपुराण से, कहानी के रूप में। जैसे-जैसे और कथाएँ जुड़ती जाएँगी, यह संग्रह बढ़ता जाएगा।

कथा से मूल पाठ तक

इस संग्रह में छह अंशों से 26 चुनी हुई कथाएँ हैं। नीचे मूल ग्रन्थ के छह अंश हैं, हर अंश अपनी कथाओं तक ले जाता है। यह सम्पूर्ण विष्णुपुराण का अनुवाद नहीं है। पंचम अंश में अब जन्म और गोकुल-गोवर्धन के प्रसंग, यादववंश के अन्त वाले पुराने पाठ से पहले पढ़े जा सकते हैं।

  1. सृष्टि, काल और अवतार
    विष्णुपुराण, अंश 1
  2. भूगोल और ज्ञान
    विष्णुपुराण, अंश 2
  3. मन्वन्तर, वेद और धर्म
    विष्णुपुराण, अंश 3
  4. राजवंश और भविष्य
    विष्णुपुराण, अंश 4
  5. कृष्ण: जन्म, गोवर्धन और यादववंश का अन्त
    विष्णुपुराण, अंश 5
  6. कलियुग, प्रलय और ब्रह्मयोग
    विष्णुपुराण, अंश 6

संस्करण और तुलना: गीता प्रेस (विष्णुपुराण, अंश 1 से 6; पंचम अंश के नए पाठ 5.3 और 5.10 से 12); मैककोमस टेलर, एएनयू प्रेस (विष्णुपुराण, विषय-सूची और अंश 1 से 6; 5.3, 5.10 से 12)।

प्रथम अंश: सृष्टि, काल और अवतार

सृष्टि, काल और विष्णु की महिमा
सृष्टि, काल और विष्णु की महिमामैत्रेय के प्रश्न पर पराशर बताते हैं कि यह जगत् कहाँ से आया और काल किसे कहते हैं।
वराह अवतार और पृथ्वी का उद्धार
वराह अवतार और पृथ्वी का उद्धाररसातल में डूबी पृथ्वी को भगवान् वराह अपनी दाढ़ों पर उठा लाते हैं।
सर्ग, प्रजापति और स्वायम्भुव मनु
सर्ग, प्रजापति और स्वायम्भुव मनुब्रह्मा के मानस-पुत्र, प्रजापतियों का प्रकट होना और मनु-शतरूपा से सृष्टि का विस्तार।
लक्ष्मी और समुद्र-मन्थन
लक्ष्मी और समुद्र-मन्थनदुर्वासा के शाप से श्रीहीन हुए देवता क्षीरसागर मथते हैं और लक्ष्मीजी प्रकट होती हैं।
राजा वेन और पृथु का चरित्रअधर्मी वेन के बाद पृथु का प्राकट्य, जो पृथ्वी को दुहकर प्रजा का पालन करते हैं।
प्रचेता और दक्ष की उत्पत्ति
प्रचेता और दक्ष की उत्पत्तिसमुद्र के भीतर हज़ारों वर्ष तप करते प्रचेता, और दक्ष प्रजापति के वंश का आरम्भ।
मरुद्गण का जन्म और विष्णु की विभूति
मरुद्गण का जन्म और विष्णु की विभूतिदिति के गर्भ को इन्द्र चीरते हैं और उससे उनचास मरुत् उठते हैं; फिर विष्णु की जगद्व्यवस्था।

द्वितीय अंश: भूगोल और ज्ञान

भूगोल: सप्त द्वीप, पाताल और नरक
भूगोल: सप्त द्वीप, पाताल और नरकजम्बूद्वीप से लेकर सात पातालों और भिन्न-भिन्न नरकों तक फैले ब्रह्माण्ड का नक्शा।
ऊर्ध्वलोक और ज्योतिष्चक्र
ऊर्ध्वलोक और ज्योतिष्चक्रभूः से सत्यलोक तक के ऊपरी लोक, सूर्य का रथ और शिशुमार-चक्र में बँधे ग्रह-नक्षत्र।
भरत और जड़भरत की कथा
भरत और जड़भरत की कथामृग के मोह में अटके राजा भरत का पुनर्जन्म, और जड़ बने ज्ञानी की सौवीर-नरेश को सीख।
ऋभु का निदाघ को अद्वैत-उपदेश
ऋभु का निदाघ को अद्वैत-उपदेशगुरु ऋभु बार-बार लौटकर शिष्य निदाघ को 'आप और मैं' का भेद मिटाना सिखाते हैं।

तृतीय अंश: मन्वन्तर, वेद और धर्म

चौदह मन्वन्तर, व्यास और अठारह पुराण
चौदह मन्वन्तर, व्यास और अठारह पुराणएक-एक कल्प में बदलते मनु और इन्द्र, हर युग के अलग व्यास, और वेद-शाखाओं का बँटवारा।
यम मुकुट और गदा धारण किए महिष पर विराजमान हैं और पाश लिए कुछ कह रहे हैं, सामने एक तेजोमय भक्त हाथ जोड़े खड़े हैं, पीछे उनके गण खड़े हैं।
यमगीतायमराज अपने दूतों को समझाते हैं कि विष्णु के भक्त को छूने का साहस मत करना।
मायामोह और राजा शतधनु
मायामोह और राजा शतधनुदेवों के कहने पर भगवान् मायामोह को रचते हैं, और पत्नी शैव्या की निष्ठा से शतधनु का उद्धार होता है।

चतुर्थ अंश: राजवंश और भविष्य

सूर्यवंश: सौभरि, त्रिशंकु और सगर
सूर्यवंश: सौभरि, त्रिशंकु और सगरइक्ष्वाकु का वंश, जल में तप करते सौभरि का मोह, त्रिशंकु का स्वर्ग और सगर की विजय।
गंगावतरण, राम और निमिपुरूरवा और उर्वशी।
पुरूरवा और उर्वशीचन्द्रवंश का आरम्भ, और अप्सरा उर्वशी से पुरूरवा का प्रेम तथा वियोग।
सिंहासन पर बैठे वृद्ध राजा और सामने घुटनों के बल बैठे तरुण राजकुमार के हाथों के बीच प्रकाश का आदान-प्रदान हो रहा है, पास दरबारी और एक ऋषि खड़े हैं।
ययाति की कथाशाप से बूढ़े हुए ययाति अपने पुत्र पुरु से यौवन उधार लेते हैं, फिर भोग की व्यर्थता समझते हैं।
स्यमन्तक मणि की कथा।भविष्य के राजा और कलियुग का आगमन
भविष्य के राजा और कलियुग का आगमनपराशर पहले ही बता देते हैं कि आगे कौन-कौन राजा होंगे, मगध का वंश, और कलियुग के लक्षण।

पंचम अंश: श्रीकृष्ण-लीला

कृष्ण-जन्म: रात में यमुना के पार

देवकी के सामने प्रकट हुए बालक को वसुदेव रात में लेकर निकलते हैं। विष्णुपुराण के इस प्रसंग में जन्म का आनन्द और उसे बचाने की चिंता साथ चलते हैं।

पंचम अंश · चुना हुआ कथा-पाठ
गोवर्धन: उत्सव से आश्रय तक

कृष्ण गोपों से उनके जीवन के आधार पर प्रश्न करते हैं। उत्सव बदलता है, इन्द्र क्रुद्ध होते हैं और पर्वत पूरे व्रज का आश्रय बनता है।

पंचम अंश · चुना हुआ कथा-पाठ
यदुवंश का अन्त और श्रीकृष्ण का स्वधामगमन
यदुवंश का अन्त और श्रीकृष्ण का स्वधामगमनऋषियों के शाप से यादवों का नाश, श्रीकृष्ण का धाम-गमन और परीक्षित का राज्याभिषेक।

षष्ठ अंश: कलियुग, प्रलय और ब्रह्मयोग

कलियुग का धर्म।
कलियुग का धर्मपराशर बताते हैं कि कलियुग में थोड़े से भजन का भी बड़ा फल, और स्त्री-शूद्र का सहज कल्याण।
चार प्रकार के प्रलय।
चार प्रकार के प्रलयनैमित्तिक, प्राकृत, आत्यन्तिक और नित्य, सृष्टि किन-किन रूपों में समेटी जाती है।
केशिध्वज, खाण्डिक्य और ब्रह्मयोग
केशिध्वज, खाण्डिक्य और ब्रह्मयोगदो प्रतिद्वंद्वी राजाओं की भेंट, जहाँ शत्रु ही गुरु बनकर मोक्ष का मार्ग देता है; और ग्रन्थ का उपसंहार।