
विष्णु की कथाएँ, गीता प्रेस के विष्णुपुराण से, कहानी के रूप में। जैसे-जैसे और कथाएँ जुड़ती जाएँगी, यह संग्रह बढ़ता जाएगा।
कथा से मूल पाठ तक
इस संग्रह में छह अंशों से 26 चुनी हुई कथाएँ हैं। नीचे मूल ग्रन्थ के छह अंश हैं, हर अंश अपनी कथाओं तक ले जाता है। यह सम्पूर्ण विष्णुपुराण का अनुवाद नहीं है। पंचम अंश में अब जन्म और गोकुल-गोवर्धन के प्रसंग, यादववंश के अन्त वाले पुराने पाठ से पहले पढ़े जा सकते हैं।
- सृष्टि, काल और अवतार
विष्णुपुराण, अंश 1 - भूगोल और ज्ञान
विष्णुपुराण, अंश 2 - मन्वन्तर, वेद और धर्म
विष्णुपुराण, अंश 3 - राजवंश और भविष्य
विष्णुपुराण, अंश 4 - कृष्ण: जन्म, गोवर्धन और यादववंश का अन्त
विष्णुपुराण, अंश 5 - कलियुग, प्रलय और ब्रह्मयोग
विष्णुपुराण, अंश 6
संस्करण और तुलना: गीता प्रेस (विष्णुपुराण, अंश 1 से 6; पंचम अंश के नए पाठ 5.3 और 5.10 से 12); मैककोमस टेलर, एएनयू प्रेस (विष्णुपुराण, विषय-सूची और अंश 1 से 6; 5.3, 5.10 से 12)।
प्रथम अंश: सृष्टि, काल और अवतार
द्वितीय अंश: भूगोल और ज्ञान
तृतीय अंश: मन्वन्तर, वेद और धर्म
चतुर्थ अंश: राजवंश और भविष्य
पंचम अंश: श्रीकृष्ण-लीला
देवकी के सामने प्रकट हुए बालक को वसुदेव रात में लेकर निकलते हैं। विष्णुपुराण के इस प्रसंग में जन्म का आनन्द और उसे बचाने की चिंता साथ चलते हैं।
पंचम अंश · चुना हुआ कथा-पाठगोवर्धन: उत्सव से आश्रय तककृष्ण गोपों से उनके जीवन के आधार पर प्रश्न करते हैं। उत्सव बदलता है, इन्द्र क्रुद्ध होते हैं और पर्वत पूरे व्रज का आश्रय बनता है।
पंचम अंश · चुना हुआ कथा-पाठ



















