श्रीरामचरितमानस
तुलसीदास का रामचरितमानस अवधी में रचा गया है। उसके सात सोपानों में कथा, भक्ति, संवाद और जीवन के प्रश्न साथ चलते हैं। यहाँ हर काण्ड प्रसंगों में बँटा है, और प्रत्येक प्रसंग अपनी विस्तृत हिन्दी कथा के साथ एक पूरा पन्ना है।
कथा गीता प्रेस गोरखपुर संस्करण के पाठ और हनुमानप्रसाद पोद्दार की टीका के सहारे लिखी गयी है।
तुलसीदास की रामकथा
यहाँ कथा का आधार तुलसीदास का अवधी रामचरितमानस है। वाल्मीकि की संस्कृत रामायण इस स्थल पर अलग से पढ़ी जा सकती है। दोनों ग्रन्थों में कई प्रसंग मिलते हैं, और उनके क्रम, संवाद तथा विवरण में भेद भी हैं। इस संग्रह में हर प्रसंग रामचरितमानस के अपने पाठ और उसकी पोद्दार टीका के सहारे लिखा गया है।
आधार: श्रीरामचरितमानस, गीता प्रेस गोरखपुर संस्करण, हनुमानप्रसाद पोद्दार की हिन्दी टीका के साथ पढ़ा गया।