तुलसीदास · सोलहवीं शताब्दी · अवधी
श्रीरामचरितमानस
सात सोपान, प्रसंग-दर-प्रसंग: मूल चौपाई और दोहा, और उनके साथ वह कथा जो उन्हें खोलती है।
तुलसीदास का रामचरितमानस अवधी में रचा गया है। उसके सात सोपानों में कथा, भक्ति, संवाद और जीवन के प्रश्न साथ चलते हैं। यहाँ हर काण्ड प्रसंगों में बँटा है, और प्रत्येक प्रसंग अपने मूल पद्य तथा विस्तृत हिन्दी कथा के साथ एक पूरा पन्ना है।
मूल पाठ गीता प्रेस गोरखपुर के संस्करण से लिया गया है और जैसा छपा है वैसा ही दिया गया है, अक्षरशः। उसके साथ जो कथा चलती है वह हनुमानप्रसाद पोद्दार की टीका के सहारे पढ़कर लिखी गयी है।
सात सोपान
- बालकाण्डप्रथम सोपान · ४२ प्रसंग
मंगलाचरण, शिव और पार्वती की कथा, रामजन्म, जनकपुर के चार विवाह और अवध का स्वागत। - अयोध्याकाण्डद्वितीय सोपान · ३६ प्रसंग
दो वरदान, चौदह बरस, और वह घर जो एक रात में बदल जाता है। मानस का सबसे मानवीय हिस्सा। - अरण्यकाण्डतृतीय सोपान · ११ प्रसंग
वन आश्रय था, फिर वह जगह बन गया जहाँ से कोई उठा लिया जाता है और पुकार का उत्तर नहीं आता। - किष्किन्धाकाण्डचतुर्थ सोपान · ५ प्रसंग
राम के पास कोई सेना नहीं, सिर्फ़ एक मित्र है, और वह मित्र पहले अपना घर वापस माँगता है। - सुन्दरकाण्डपञ्चम सोपान · ९ प्रसंग
वह काण्ड जिसमें नायक राम नहीं, हनुमान हैं। घरों में सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला सोपान। - लङ्काकाण्डषष्ठ सोपान · १७ प्रसंग
दोनों ओर के योद्धा गिनती से बाहर हैं, और अन्त में सब कुछ दो व्यक्तियों के आमने-सामने आने पर टिकता है। - उत्तरकाण्डसप्तम सोपान · २२ प्रसंग
युद्ध के बाद का काण्ड, जिसमें तुलसीदास कथा कहना रोककर बताने लगते हैं कि कथा किसलिये कही गयी थी।
तुलसीदास की रामकथा
यहाँ कथा का आधार तुलसीदास का अवधी रामचरितमानस है। वाल्मीकि की संस्कृत रामायण इस स्थल पर अलग से पढ़ी जा सकती है। दोनों ग्रन्थों में कई प्रसंग मिलते हैं, और उनके क्रम, संवाद तथा विवरण में भेद भी हैं। इस संग्रह में हर प्रसंग को रामचरितमानस के अपने पाठ और उसकी पोद्दार टीका के साथ रखा गया है।
आधार: श्रीरामचरितमानस, गीता प्रेस गोरखपुर संस्करण; हनुमानप्रसाद पोद्दार की हिन्दी टीका के साथ पढ़ा गया।