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शब्द-कोश
Glossary. Key terms across Gita, Kena, Katha, and the Yoga Vasistha
यह उपनिषदों और गीता में बार-बार आने वाले शब्दों का एक छोटा सा संग्रह है। हर शब्द का अर्थ, मूल भाव, और कहाँ-कहाँ मिलेगा।
यह एक चुनिंदा सूची है, बस उन शब्दों की जो भगवद् गीता, केनोपनिषद्, कठोपनिषद्, और योग वासिष्ठ की कथाओं में बार-बार आते हैं और जिनका एक central role है। हर entry में मूल अर्थ, थोड़ा संदर्भ, और एक-दो उदाहरण दिए गए हैं।
अ
अध्यात्मadhyātma · “के संबंध में आत्मा”
आत्मा या व्यक्तिगत चेतना से जुड़ा हुआ। “अधि” का मतलब “के संबंध में”। तो जो कुछ भी आत्मा के स्तर पर हो रहा है, वो अध्यात्म है। उपनिषदों में अक्सर तीन समानांतर ढाँचे आते हैं: अधिदैव (देव-स्तर), अधिभूत (तत्त्व-स्तर), और अध्यात्म (आत्म-स्तर)।
अमृतamṛta · “जो मरता नहीं”
अ + मृत = “मृत नहीं”। मृत्यु-रहित, अमर। अमृत को सिर्फ़ शरीर का न मरना समझ लेना आसान है, पर यह उससे आगे जाता है: वह स्थिति जहाँ जन्म-मरण का चक्र ही टूट जाता है। उपनिषदों का सबसे ऊँचा लक्ष्य।
अव्यक्तavyakta · “जो प्रकट नहीं”
मूल प्रकृति,मगर सब कुछ जिससे निकलता है। सांख्य दर्शन का एक key term, जो कठोपनिषद् और गीता दोनों में दिखता है। एक तरह से “potential”, अभी रूप नहीं ले रहा, पर सब रूप उसी से निकलते हैं।
देखें: कठ 1.3.11
क
कर्मkarma · “क्रिया, कार्य”
शाब्दिक रूप से “जो किया जाता है”। पर भारतीय दर्शन में इसका तीहरा अर्थ है: (1) कोई भी क्रिया, (2) उस क्रिया का अदृश्य संस्कार जो भविष्य पर असर डालता है, और (3) पुनर्जन्म के संदर्भ में, पिछली क्रियाओं का कुल खाता। गीता का असली विषय है: कर्म कैसे किया जाए ताकि वो बँधे नहीं।
देखें: गीता 2.47, 3.27, 18.66
ग
त, द
तपtapas · “ताप, गर्मी”
शाब्दिक “गर्मी”। पर इसका मतलब है वो आंतरिक गर्मी जो अनुशासन से बनती है। तपस्या यानी अपने आप को कुछ कठिन में रखना, ताकि साधक की आंतरिक ऊर्जा बढ़े। तपस्या में शरीर को कष्ट देना मुख्य बात नहीं। विवेक और संयम का अभ्यास इसका असली रूप है।
देखें: केन 4.8
दमdama · “नियंत्रण”
इन्द्रिय-नियंत्रण। पाँचों ज्ञानेन्द्रियों को (आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा) उनके विषय की ओर भागने से रोकना। तप और दम साथ-साथ चलते हैं। तप भीतर की गर्मी है, दम बाहर की पकड़।
देखें: केन 4.8
ध
धर्मdharma · “धारण करने योग्य”
शब्द “धृ” से, जिसका मतलब है “धारण करना”। तो धर्म वो है जो जीवन को धारण करता है, टिकाए रखता है। यह कोई one-word translation नहीं माँगता। संदर्भ के हिसाब से इसका अर्थ कर्तव्य, नैतिकता, स्वभाव, सत्य-मार्ग, क़ानून, सब हो सकता है। गीता में इसका कई स्तर पर use है।
देखें: गीता 1.1, 18.66
प
पुरुषpuruṣa · “व्यक्ति, आत्मा”
यह शब्द बहुस्तरीय है। साधारण अर्थ में “व्यक्ति”। दर्शन में “चेतना”। सांख्य में “अव्यक्त प्रकृति” से अलग, चेतन तत्व। उपनिषदों में अक्सर “अंगूठे के बराबर पुरुष हृदय में स्थित है” का रूपक आता है, यानी आत्मा।
प्रेयpreya · “जो प्रिय हो”
जो अभी अच्छा लग रहा है, जो instant gratification देता है। मीठा खाना, दूसरी पेय, आराम, सब प्रेय हैं। ये गलत नहीं हैं, मगर इन्हें “श्रेय” समझ लेना गलती है। कठोपनिषद् का पहला सबक यही है।
देखें: कठ 1.2.1-2
प्राणprāṇa · “जीवन-शक्ति, साँस”
शाब्दिक “साँस”।वो शक्ति है जो जीवन को सक्रिय रखती है। पाँच प्राण माने गए हैं: प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान। साँस के पाँच काम।
देखें: कठ 2.2.3-5
ब, भ
ब्रह्मbrahman · “विशालता”
शब्द “बृह” से, जिसका मतलब है “विस्तार”। ब्रह्म वो परम सत्ता है जिसमें सब कुछ है। इसे personal God मानने की ज़रूरत नहीं। उपनिषदों में यह सब का substrate है, हर चीज़ ब्रह्म से निकली, ब्रह्म में है, ब्रह्म में लौटेगी।
देखें: पूरी केनोपनिषद्गीता 8.3
भक्तिbhakti · “विभाजन, हिस्सा, समर्पण”
शब्द “भज्” से, जिसका मतलब है “बाँटना, सेवा करना”। तो भक्ति है, किसी के साथ ख़ुद को बाँट देना, समर्पित कर देना। गीता तीन रास्ते देती है: कर्म, ज्ञान, भक्ति। भक्ति सबसे आसान कही गई है, क्योंकि इसमें बौद्धिक तैयारी की कम ज़रूरत है।
देखें: गीता 12 (पूरा अध्याय)
म
मननmanana · “विचार”
सुनी हुई बात पर गहराई से सोचना। उपनिषद् सीखने के तीन चरण बताते हैं: श्रवण (सुनना), मनन (सोचना), निदिध्यासन (ध्यान करना)। बिना मनन के सुना हुआ अधूरा रहता है।
मोक्षmokṣa · “मुक्ति”
मूल शब्द “मुच्” से, “छोड़ना, मुक्त होना”। संसार-चक्र से मुक्ति।एक स्थिति है। शरीर रहते हुए भी मोक्ष संभव है, इसे “जीवनमुक्ति” कहते हैं। कठोपनिषद् 2.3.14 कहता है: कामनाएँ छूटें, अभी अमर हो जाएँगे।
देखें: कठ 2.3.14
य, र
यक्षyakṣa · “रहस्यमय उपस्थिति”
एक दिव्य प्राणी जिसका रूप-स्वरूप साफ़ नहीं। केनोपनिषद् में ब्रह्म “यक्ष” के रूप में देवताओं के सामने आता है, ताकि देवता पहचान न पाएँ। यह intentional anonymity है।
देखें: केन खण्ड 3
योगyoga · “जोड़ना, साधना”
“युज्” शब्द से, जोड़ना। शाब्दिक रूप से दो चीज़ों को एक करना। कठोपनिषद् इसकी पहली स्पष्ट परिभाषा देती है: “जब पाँचों इन्द्रियाँ मन के साथ ठहर जाएँ, और बुद्धि भी हलचल न करे, उसे योग कहते हैं।” पतंजलि के योगसूत्र इसी पर खड़े हैं।
देखें: कठ 2.3.10-11
श, स
श्रद्धाśraddhā · “गहरा भरोसा”
“आस्था” से थोड़ी अलग। श्रद्धा वो भीतरी झुकाव है जो जिज्ञासा और भक्ति, दोनों को जोड़ता है। नचिकेता के मन में “श्रद्धा का प्रवेश” हुआ था, सिर्फ़ विश्वास नहीं, एक तीखी जागृति। बिना श्रद्धा के सीखना सतही है।
देखें: कठ 1.1.2
श्रेयśreya · “जो कल्याण लाए”
जो दूरगामी रूप से अच्छा है, कल्याणकारी। यह अक्सर अभी कठिन लगता है। अनुशासन, सच बोलना, मेहनत, ये सब श्रेय हैं। प्रेय का विपरीत। कठोपनिषद् का पहला practical सबक।
देखें: कठ 1.2.1-2
साधनाsādhanā · “साधन”
किसी लक्ष्य के लिए नियमित अभ्यास। ध्यान, मंत्र-जप, यज्ञ, स्वाध्याय, सेवा, सब साधना के रूप हैं। शब्द “साधक” इसी से है।
सत्यsatya · “जो है”
“सत्” से, यानी “होना”। सत्य वो है जो वास्तव में है, जिसका अस्तित्व अटूट है। केन कहती है, “सत्य उपनिषद् का घर है”, यानी बिना सत्यवादिता के यह विद्या टिकती नहीं।
देखें: केन 4.8
पूरी सूची
ऊपर के चुनिंदा शब्दों के आगे, यहाँ ग्रंथों में आने वाले 968 शब्दों का पूरा संग्रह है। हर शब्द पढ़ते समय उस पर छूने से उसका अर्थ वैसे भी दिख जाता है।
अ
अंकुशहाथी को हाँकने का नुकीला उपकरण
अंशदेव के आंशिक स्वरूप से हुआ प्राकट्य
अकर्ताकर्म करते हुए भी स्वयं को करने वाला न मानने वाला
अकर्मकर्म करते हुए भी भीतर अकर्ता और निष्काम भाव
अक्षतपूजा में चढ़ाए जाने वाले बिना टूटे चावल
अक्षरजो कभी नष्ट न हो; वर्ण भी
अक्षौहिणीसेना की सबसे बड़ी माप, हज़ारों रथ-हाथी और लाखों सैनिक
अग्निष्टोमसोम से किया जाने वाला एक प्रमुख वैदिक यज्ञ
अग्निहोत्रसुबह-शाम अग्नि में आहुति देने का नित्य कर्म
अग्रजबड़ा भाई
अग्रपूजासभा में सबसे पहले किया जाने वाला सम्मान
अचिन्त्यजो सोच और कल्पना से परे है
अच्युतअपने स्वरूपसे कभी न डिगनेवाले अविनाशी विष्णु
अजन्माजिसका जन्म नहीं होता
अज्ञातवासपहचान छिपाकर बिताया गया समय
अट्टहासगरजती हुई भयानक हँसी
अण्डजअण्डे से जन्म लेने वाले पक्षी, सर्प आदि प्राणी
अतिथिबिना तिथि आया पूज्य अभ्यागत
अतिरथीअनेक योद्धाओं से अकेला भिड़ने वाला उच्च रथ-योद्धा
अद्वैतजीव और ब्रह्म में भेद न मानने वाला दर्शन
अधर्मधर्म का विपरीत, अन्याय और पाप
अधिदैवसृष्टि में व्याप्त दिव्य पुरुष-तत्त्व
अधिभूतनश्वर और परिवर्तनशील भौतिक जगत का तत्त्व
अधियज्ञदेह में यज्ञ के अधिष्ठाता रूप में परमात्मा
अधिष्ठानजिस सत्य आधार पर भ्रम खड़ा होता है
अध्यात्मजीव के भीतर बसा अपना आत्म-स्वरूप
अध्वर्युयज्ञ की क्रियाएँ सँभालने वाला प्रमुख पुरोहित
अनङ्गशरीररहित; भस्म होने के बाद कामदेव का नाम
अनन्तशेषनागका नाम; विष्णुका असीम तमोमय विग्रह
अनन्यजिसका मन कहीं और न जाए, एकनिष्ठ
अनन्यभक्तिबिना किसी अन्य सहारे केवल ईश्वर में लगी भक्ति
अनलअग्नि
अनात्मबौद्ध सिद्धांत: कोई स्थायी आत्मा नहीं
अनादिजिसका कोई आरम्भ न हो
अनासक्तफल में आसक्ति-रहित; निर्लिप्त
अनित्यजो सदा न रहे, बदलता-मिटता हुआ
अनिलवायु, हवा
अनिष्टअनचाहा बुरा फल, अहित
अनीकिनीअक्षौहिणी का दसवाँ भाग, सेना की बड़ी इकाई
अनुग्रहबड़ों की ओर से मिली कृपा
अनुचरपीछे-पीछे चलने वाला सेवक
अनुजछोटा भाई
अनुष्टुपआठ अक्षरों के चार चरणों वाला प्रसिद्ध संस्कृत छन्द
अनुष्ठानविधि के अनुसार किया गया धार्मिक कार्य
अन्तःकरणमन, बुद्धि, चित्त और अहंकार का भीतरी उपकरण
अन्तःपुरमहल का भीतरी भाग, जहाँ रानियाँ रहती हैं
अन्तकालमृत्यु का अंतिम क्षण
अन्तर्धानदेखते-देखते अदृश्य हो जाना
अन्तर्यामीसबके भीतर बैठकर सब जानने वाला ईश्वर
अन्त्येष्टिअन्तिम संस्कार, दाह-कर्म की विधि
अपराजड़ पदार्थ वाली निम्न प्रकृति
अपरिग्रहआवश्यकता से अधिक न जोड़ने का व्रत
अपर्णापत्ते तक त्यागकर तप करने से पड़ा पार्वती का नाम
अपवर्गमोक्ष का दूसरा नाम, संसार से छूट जाना
अपाननीचे की ओर बहने वाली प्राण-वायु
अपौरुषेयकिसी मनुष्य द्वारा न रचा गया; वेदों का लक्षण
अप्सरास्वर्ग की नर्तकी
अभयदानभय से रक्षा करने का दिया गया वचन
अभिचारशत्रु-नाशके लिए किया जानेवाला तान्त्रिक अनुष्ठान
अभिजित्मध्याह्न का परम शुभ मुहूर्त
अभिज्ञानपहचान; पहचान कराने वाली निशानी
अभिमानअहंकार से भरा गर्व
अभिषेकजल आदि से स्नान कराकर पद या पूजा सौंपने की विधि
अभीष्टमन से चाहा हुआ
अभ्यासबार-बार मन को लक्ष्य पर लौटा लाने का सतत यत्न
अभ्यासयोगबार-बार मन लगाकर साधने का साधना-मार्ग
अमात्यराजा का मन्त्री
अमात्रॐ का मात्रा-रहित चौथा अंश; तुरीय
अमृतपीनेसे अमर करनेवाला दिव्य रस, सुधा
अम्बरआकाश; वस्त्र भी
अम्बिकामाता के रूप में पूजित देवी
अयनछः मासका काल; सूर्यका उत्तर अथवा दक्षिणकी ओर गमन
अरणिजिन लकड़ियों को रगड़कर यज्ञ की अग्नि जगाई जाती है
अरण्यवन, जंगल
अर्घ्यआदर में जल आदि अर्पित करने की विधि
अर्थपुरुषार्थों में धन-समृद्धि का लक्ष्य
अर्थशास्त्रराजनीति और धन-व्यवस्थाका शास्त्र
अर्थार्थीसांसारिक वस्तु की चाह से भजने वाला भक्त
अर्पणकर्म या वस्तु का ईश्वर को समर्पण
अवज्ञाआदर न देना, आज्ञा की अनदेखी
अवतारधर्म-रक्षा हेतु ईश्वर का देह धारण कर प्रकट होना
अवधीरामचरितमानस की अवध-भाषा
अवधूतसांसारिक सुध-बुध से परे रहने वाला परम त्यागी
अवध्यजिसका वध न किया जा सके
अवभृथयज्ञ पूरा होने पर किया जाने वाला समापन-स्नान
अविद्याअपने असली स्वरूप को न पहचानने का मूल अज्ञान
अविमुक्तजिसे शिव कभी नहीं छोड़ते, काशी का नाम
अव्यक्तजो अभी प्रकट न हुआ हो, बीज-रूप मूल
अश्रुआँसू
अश्वघोड़ा
अश्वत्थपीपल वृक्ष; उलटी जड़ों वाला संसार-रूपी वृक्ष
अश्वमेधघोड़ा छोड़कर किया जाने वाला बड़ा राजकीय यज्ञ
अष्टकआठ पद्यों का स्तोत्र
अष्टांगिक मार्गबौद्ध धर्म का आठ अंगों वाला दुःख-निवृत्ति मार्ग
असत्श्रद्धारहित और निष्फल कर्म; जो सत् नहीं
असुरदेवताओं का विरोधी, अधर्म-प्रवृत्ति वाला जीव
अस्तेयचोरी न करने का व्रत
अस्त्रमन्त्र से चलाया जाने वाला दिव्य हथियार
अहंकारमैं और मेरा मानने वाला भीतरी भाव
अहिंसाकिसी प्राणी को मन, वचन और कर्म से न सताना
आकाशवाणीआकाश से होने वाली अशरीरी दिव्य वाणी
आख्यानपुरानी कथा का विस्तृत वर्णन
आगमतंत्र-परंपरा के प्रकट धर्म-ग्रंथ
आग्नेय-अस्त्रअग्नि-देवता का अस्त्र; आग बरसाने वाला
आग्नेयास्त्रअग्नि उत्पन्न करने वाला दिव्य अस्त्र
आचमनमन्त्र बोलकर तीन बार जल पीने की शुद्धि-क्रिया
आजगवभगवान शिव के धनुष का नाम
आज्यआहुति के लिए तपाया हुआ घी
आज्यभागयज्ञ में घी की दो निश्चित आहुतियों का अंश
आत्मादेह से परे नित्य, अजन्मा चेतन स्वरूप
आत्यन्तिकज्ञानसे जीवका परमात्मामें सदाके लिए लीन होना, मोक्ष
आदित्यप्रत्येक मासमें सूर्य-रथपर विराजनेवाले बारह सूर्य-रूप
आदिशक्तिसमस्त सृष्टि का आदिकारण मूल शक्ति
आधिदैविकशीत-उष्ण और वर्षा आदि दैवी कारणोंसे होनेवाला कष्ट
आधिभौतिकपशु-सर्प और चोर आदि प्राणियोंसे मिलनेवाला कष्ट
आध्यात्मिकअपने शरीर और मनसे उपजा दुःख
आनन्दवनकाशी का प्राचीन नाम
आपद्-धर्मसंकट-काल में शिथिल किया गया धर्म
आयुर्वेदआयु और रोग-निवारणका शास्त्र, एक उपवेद
आरण्यकवन में पढ़े जाने वाले वैदिक ग्रन्थ
आरतीदीप घुमाकर की जाने वाली पूजा-क्रिया
आर्जवमन, वचन और व्यवहार की सीधाई
आर्तदुख में पड़कर पुकारने वाला
आर्यश्रेष्ठ और कुलीन जन के लिए आदर-सूचक शब्द
आर्य सत्यबुद्ध के चार आर्य सत्य; दुःख और उसकी निवृत्ति का सिद्धांत
आर्यपुत्रपति के लिए रानियों का आदर भरा सम्बोधन
आवरणब्रह्माण्डको घेरनेवाले जल-अग्नि आदि सात कोश
आवागमनजन्म-मृत्यु का बार-बार का चक्र
आवाहनपूजा के आरम्भ में देवता को बुलाने की विधि
आविर्भावप्रकट होना, सामने आ जाना
आश्रमब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास, जीवनके ये चार पड़ाव
आसक्तिविषयों या फल के प्रति मन की पकड़
आसनध्यान हेतु स्थिर बैठने की मुद्रा या बिछौना
आसुरीसंपदाबंधन में डालने वाली आसुरी वृत्तियाँ
आहवनीययज्ञभूमिके पूर्वकी वह अग्नि, जिसमें आहुति दी जाती है
आहुतिमन्त्र के साथ अग्नि में डाली गई भेंट
ऋक्षभालू; रामकथा में भालुओं की जाति
ऋचावेद का पद्य-मन्त्र
ऋतविश्व की शाश्वत नैतिक-भौतिक व्यवस्था; सत्य-नियम
ऋत्विजयज्ञ कराने के लिए वरण किया गया पुरोहित
ऋषिमंत्रद्रष्टा वैदिक सन्त
इ
इक ओंकारसिख मत में एकमात्र निराकार परमात्मा
इच्छा-मृत्युइच्छानुसार ही मृत्यु आने का वरदान
इतिहासरामायण और महाभारत जैसे ऐतिहासिक ग्रन्थ
इन्द्रियदेखने-सुनने आदि की ज्ञान और कर्म की शक्तियाँ
इष्टदेवजिस देवता को अपना मानकर पूजा जाए
इष्टिकिसी कामना से किया गया छोटा यज्ञ
ईश्वरसृष्टि का रचयिता और नियंता, परम प्रभु
उ
उत्तरायणसूर्य के उत्तर की ओर चलने के छह महीने
उत्पातअशुभ लक्षण; उपद्रव-सूचक घटना
उदासीनराग-द्वेष से रहित तटस्थ साक्षी-भाव
उद्गातायज्ञ में सामवेद के मन्त्र गाने वाला पुरोहित
उद्गीथसामगान में ऊँचे स्वर से गाया जाने वाला ओम्
उद्भिज्जभूमि फोड़कर उगने वाले वृक्ष आदि प्राणी
उद्यापनव्रत की समाप्ति पर किया जाने वाला विधान
उद्विग्नघबराया हुआ, बेचैन
उपनयनजनेऊ देकर विद्या आरम्भ कराने का संस्कार
उपपुराणअठारह महापुराणोंके अतिरिक्त गौण पुराण
उपरतिविषयों से लौटकर मन का भीतर ठहर जाना
उपवासव्रत हेतु अन्न-त्याग
उपाख्यानमुख्य कथा के बीच आई छोटी कथा
उपाधिआत्मा पर चढ़ा देह-मन जैसा आवरण, जो असली रूप ढक दे
उपाध्यायविद्या पढ़ाने वाला गुरु
उपासनाश्रद्धा के साथ की गई नियमित पूजा और ध्यान
उमापार्वती का नाम, माता के उ मा अर्थात तप मत कर कहने से पड़ा
उरगसाँप, छाती के बल रेंगने वाला प्राणी
उष्णीषसिर पर बाँधी जाने वाली पगड़ी
ऊर्ध्वमूलजिसकी जड़ें ऊपर हों; उलटा संसार-वृक्ष
ए
एकांतनिर्जन और शांत अकेलेपन का स्थान
एकार्णवप्रलयमें सारी सृष्टिको डुबो देनेवाला एकमात्र महासागर
ऐन्द्र-अस्त्रइन्द्र का अस्त्र
ऐरावतइन्द्रका श्वेत गजराज
ऐश्वर्यप्रभुता, वैभव और स्वामित्व की शक्ति
ओ
औरसअपने वीर्य से उत्पन्न सगा पुत्र
और्ध्वदैहिकमृत्युके पश्चात् किए जानेवाले अन्त्येष्टि-संस्कार
क
कञ्चुकीअन्तःपुर की देखरेख करने वाला वृद्ध सेवक
कनिष्ठआयु में सबसे छोटा
कन्यादानविवाह में कन्या को वर के हाथ सौंपना
कपालहाथ में धारण की जाने वाली खोपड़ी या भिक्षापात्र
कमण्डलुतपस्वियों का जल-पात्र
करदविजेता को कर देने वाला अधीनस्थ राजा
करुणादूसरों के दुख में द्रवित होने का भाव
कर्ताकर्म करने वाला; मैं करता हूँ का भाव
कर्मक्रिया या कर्तव्य, और फल देने वाला नियम
कर्मकाण्डयज्ञ-पूजा की विधियों वाला शास्त्र-भाग
कर्मफलकर्म का परिणाम या मिलने वाला फल
कर्मयोगफल की चाह छोड़ कर्तव्य करते हुए मुक्त रहने की राह
कर्मेन्द्रियहाथ-पैर आदि पाँच कर्म-इन्द्रियाँ
कलातीस काष्ठाका कालमान; चन्द्रमाका अंश
कलियुगचार युगों में अन्तिम, अभी चलता युग
कल्किकलियुगके अन्तमें म्लेच्छोंका नाश करनेवाला विष्णुका आगामी अवतार
कल्पब्रह्मा का एक दिन, सृष्टि की बहुत लम्बी अवधि
कल्पवृक्षमाँगते ही सब कुछ देने वाला स्वर्गिक वृक्ष
कवचरक्षा-मन्त्रों का पाठ; युद्ध का रक्षक वस्त्र भी
कव्यपितरों को अर्पित की जाने वाली आहुति
काण्डरामायण जैसे ग्रन्थ का बड़ा खण्ड
काननघना वन
कामभोग की तीव्र इच्छा, तृप्त न होने वाली वासना
कामधेनुहर कामना पूरी करने वाली दिव्य गाय
कायव्यूहशेष कर्मभोग के लिए धारण किया जाने वाला शरीर-समूह
कालविष्णुका वह शक्ति-रूप, जो सृष्टि, स्थिति और प्रलयको चलाता है; समय
कालचक्रऋतु और अयन आदिमें घूमता समयका चक्र
कालभैरवकाशी के रक्षक, शिव का कालरूप भैरव
कालातीतकाल से परे; समयातीत
कालीश्याम वर्ण वाली देवी; पार्वती का बालरूपी नाम
काशीमोक्षदायिनी शिवनगरी, वाराणसी
काष्ठापन्द्रह निमेषका कालमान
किन्नरगीत-संगीत में निपुण एक दिव्य जाति
किरतसिख आदर्श: ईमानदार परिश्रम से आजीविका
कीर्तनभगवान्के नाम और गुणोंका गान
कुञ्जरहाथी
कुण्डहवन की अग्नि के लिए बनाया गया गड्ढा
कुण्डलकान में पहना जाने वाला गोल आभूषण
कुम्भकप्राणायाममें श्वासको भीतर रोकना
कुशपूजा और यज्ञ में बिछाई जाने वाली पवित्र घास
कुसुमफूल
कूर्ममन्दराचलको पीठपर धारण करनेवाला विष्णुका कछुआ-रूप अवतार
कृच्छ्रकठोर नियमों वाला प्रायश्चित्त-व्रत
कृतघ्नकिए हुए उपकार को भूल जाने वाला
कृतार्थधन्य, जिसका प्रयोजन सफल हो गया
कृत्तिवासागजासुर का चर्म धारण करने वाले शिव
कृष्णपक्षचन्द्रमा के घटने वाला अँधेरा पखवाड़ा
केशवसुन्दर केशोंवाले, ब्रह्मा-शिवके भी स्वामी विष्णु
कैलासभगवान शिव का हिमालयी निवासस्थान
कैवल्यसबसे अलग शुद्ध आत्म-स्थिति, परम मुक्ति
कोहबरविवाह-गृह का सजाया हुआ भीतरी कक्ष
कौशिकीपार्वती के कोश से प्रकट हुई गौर देवी
कौस्तुभविष्णुके वक्षपर धारण दिव्य मणि, शुद्ध जीवका प्रतीक
क्रतुयज्ञ का एक शास्त्रीय नाम
क्रियमाणअभी किए जा रहे कर्म
क्रोधइच्छा के टूटने से उठने वाला आवेश, नरक का एक द्वार
क्रौंचद्वीपदहीके समुद्रसे घिरा एक द्वीप
क्षणभंगुरपल भर में मिट जाने वाला
क्षत्रियरक्षा और शासन का दायित्व निभाने वाला वर्ण
क्षत्रिय-धर्मक्षत्रिय का कर्तव्य: प्रजा-रक्षा और युद्ध
क्षमासहनशीलता, अपराध को माफ़ करने का भाव
क्षरनाशवान और परिवर्तनशील जगत या पुरुष
क्षात्रधर्मक्षत्रिय का युद्ध और रक्षा का धर्म
क्षीरसागरदूध का सागर, विष्णु का विश्राम-स्थल
क्षुब्धभीतर तक हिला हुआ
क्षेत्रशरीर, जो जाना और देखा जाता है
क्षेत्रज्ञदेह रूपी खेत को भीतर से जानने वाली चेतना
क्षेत्रपालकिसी स्थान या क्षेत्र की रक्षा करने वाला देव
क्षेपणीयफेंककर मारा जाने वाला प्रक्षेपास्त्र
ख
खगपक्षी
खट्वांगऊपर मस्तक जड़े दण्ड के रूप में शिव का आयुध
खड्गतलवार
खण्डग्रंथ का एक भाग या विभाग
ग
गँठजोड़वर-वधू के वस्त्रों को परस्पर बाँधने की गाँठ
गंगाधरजटाओं में गंगा धारण करने वाले शिव
गजचर्महाथी का चमड़ा, जिसे शिव वस्त्ररूप में धारण करते हैं
गणशिव के सेवक और अनुचरों का समूह
गणाध्यक्षसमस्त गणों का अधिपति
गतिमृत्यु के बाद जीव की प्राप्त अवस्था या मार्ग
गदाविष्णुकी कौमोदकी नामक मुख्य आयुध
गन्धर्वस्वर्ग के गायक उपदेवता
गरुडविष्णुका वाहन, पक्षिराज
गाण्डीवअर्जुन का दिव्य धनुष
गान्धर्व विवाहपरस्पर सम्मति से हुआ विवाह
गान्धर्ववेदसंगीत और गानका शास्त्र, एक उपवेद
गायत्रीतीन चरणों वाला वैदिक छन्द; उसी में रचा प्रसिद्ध मन्त्र
गार्हपत्यगृहस्थकी नित्य पूजित घरेलू यज्ञाग्नि
गिरिपर्वत
गिरिजापर्वतराज की पुत्री, पार्वती
गुणप्रकृति के तीन मूल स्वभाव, सत्त्व, रजस् और तमस्
गुणत्रयसत्त्व, रजस् और तमस् इन तीन गुणों का समूह
गुणातीतसत्त्व, रज और तम तीनों गुणों से परे
गुरुआत्मज्ञान देने वाला शिक्षक और मार्गदर्शक
गुरुदक्षिणाविद्या पूरी होने पर गुरु को दी जाने वाली भेंट
गुल्मसेना की छोटी टुकड़ी
गुह्यककुबेर के सेवक अर्धदेव वर्ग
गृध्रगिद्ध
गृहस्थघर-परिवार में रहकर धर्म निभाने की जीवन-अवस्था
गोत्रऋषि-परम्परासे चली आई कुल-पहचान
गोदानगौ का दान, जो बड़ा पुण्य माना गया
गोलोकश्रीकृष्ण का सर्वोच्च दिव्य धाम
गोविन्दगौ और इन्द्रियोंके स्वामी, विष्णु अथवा कृष्ण
गोहत्यागोवध का महापाप
गौरीगौर वर्ण वाली देवी पार्वती
ग्रहपूजनशुभकार्य से पूर्व ग्रहों की पूजा
घ
घृतघी
घोषयात्रागौशालाओं के निरीक्षण के बहाने की गई राजसी सैर
च
चक्रवर्तीसमस्त पृथ्वी का सार्वभौम सम्राट
चक्रव्यूहपहिये की तरह घूमता हुआ सेना का घेरा
चण्डिकादेवी का प्रचण्ड कोपमय रूप
चण्डीदुर्गा का उग्र रूप; देवीमाहात्म्य का प्रचलित नाम
चतुरंगिणीहाथी, रथ, घुड़सवार और पैदल, चार अंगों वाली सेना
चतुर्थीकर्मविवाह के चौथे दिन किया जाने वाला संस्कार
चतुर्भुजशंख-चक्र-गदा-पद्म धारण किए चार भुजाओंवाले विष्णु
चतुर्युगसत्य, त्रेता, द्वापर और कलि, ये चार युग मिलकर एक महायुग
चन्द्रलोकसकाम कर्मियों का स्वर्गिक लोक, जहाँ से लौटना होता है
चन्द्रवंशचन्द्रमासे चली आई राजवंश-परम्परा
चन्द्रशेखरमस्तक पर चन्द्रमा धारण करने वाले शिव
चमूसेना की एक बड़ी इकाई
चरणामृतदेवता के चरण धोकर पान किया जाने वाला जल
चरमश्लोकगीता का अंतिम सार-श्लोक, पूर्ण शरणागति का वचन
चराचरचलने-फिरने वाले और स्थिर, समस्त जीव-जगत
चरुयज्ञ के लिए दूध में पकाया गया अन्न
चाण्डालवर्ण-व्यवस्थासे बाहर समझी गई अन्त्यज जाति
चामरचँवर, जो राजा के ऊपर डुलाया जाता है
चामुण्डाचण्ड-मुण्ड का वध करने वाली उग्र देवी
चारणदेवलोक के स्तुति-गायक; यश गाने वाले घुमन्तू भी
चालीसाचालीस चौपाइयों में रची देव-स्तुति
चितिशुद्ध चैतन्य; शक्ति-रूप चेतना
चित्तमन का वह तल जहाँ स्मृतियाँ और संस्कार रहते हैं
चिदाकाशचेतना का असीम भीतरी आकाश
चिन्तामणिसोचते ही इच्छा पूरी करने वाला दिव्य रत्न
चूड़ामणिजूड़े में पहना जाने वाला श्रेष्ठ रत्न
चेतनाप्राणियों में व्याप्त जानने वाली जीवन-शक्ति
चैतन्यजानने-देखने वाली शुद्ध चेतना
चौपाईचार चरणों का मात्रिक छन्द
छ
छत्रराजा के सिर पर तना राजसी छाता
छन्दपद्य की मात्रा और लय का नियम
ज
जंगमचल-फिर सकनेवाले प्राणी
जगदम्बाजगत की माता, देवी पार्वती
जटातपस्वी की उलझी हुई बड़ी लट
जटामुकुटजटाओं का मुकुट के आकार में बँधा जूड़ा
जठराग्निपेट में स्थित पाचन करने वाली अग्नि
जनलोकमहर्लोकसे ऊपर सनन्दन आदि ब्रह्मपुत्रोंका लोक
जनार्दनप्राणियोंसे प्रार्थित, सबका संहार-रक्षण करनेवाले विष्णु
जनेऊयज्ञोपवीत; द्विजों का पवित्र सूत्र
जन्मकुण्डलीजन्मकालीन ग्रहस्थिति की पत्री
जपमन्त्र या नाम का बार-बार स्मरण
जम्बूद्वीपसात द्वीपोंमें मध्यवर्ती द्वीप, जिसके केन्द्रमें सुमेरु और भीतर भारतवर्ष है
जरायुजजेर से जन्म लेने वाले मनुष्य, पशु आदि प्राणी
जाग्रतजागते रहने की अवस्था
जातकर्मजन्म के समय किया जाने वाला संस्कार
जातिस्मरपूर्वजन्मोंका स्मरण रखनेवाला
जाम्बूनदजम्बू नदीकी मिट्टीसे बना उत्तम सोना
जिज्ञासुजानने की गहरी इच्छा रखने वाला
जितेन्द्रियजिसने अपनी इन्द्रियों को जीत लिया हो
जीवदेह में बँधी चेतना, प्राणी की आत्मा
जीवन्मुक्तजो देह रहते ही मुक्त हो चुका हो
जीवात्मादेहधारी आत्मा; व्यष्टि जीव
जृम्भणास्त्रजँभाई और मोहनिद्रा उत्पन्न करने वाला अस्त्र
ज्ञानआत्म-स्वरूप का बोध, तत्त्वज्ञान
ज्ञानकाण्डआत्म-ज्ञान की चर्चा वाला वेद-भाग
ज्ञानयोगआत्मज्ञान और विवेक के द्वारा मुक्ति का मार्ग
ज्ञानीतत्त्व को जान लेने वाला, आत्मज्ञ
ज्ञानेन्द्रियदेखने-सुनने आदि की पाँच ज्ञान-इन्द्रियाँ
ज्येष्ठआयु में सबसे बड़ा
ज्योतिर्लिंगशिव के स्वयंप्रकट तेजोमय बारह प्रमुख लिंगों में से एक
ज्योतिषकाल-गणना और ग्रह-नक्षत्र का वेदांग
ज्योतिष्चक्रध्रुवको केन्द्र मानकर घूमता ग्रह-नक्षत्रोंका आकाश-मण्डल
ट
टंकारधनुष की डोरी की गूँज
टीकाग्रन्थ को समझाने वाली व्याख्या
ड
डमरूशिव का दो मुख वाला छोटा वाद्य
त
तंत्रसाधना-प्रधान गूढ़ शास्त्र और परंपरा
तड़ागतालाब
तत्त्वकिसी वस्तु का असली स्वरूप, मूल सत्य
तत्त्वदर्शीसत्य का साक्षात् अनुभव करने वाला ज्ञानी
तन्मात्राशब्द-स्पर्श आदि पाँच सूक्ष्म विषय, जिनसे महाभूत बनते हैं
तपशरीर, वाणी और मन का संयमपूर्ण साधना-कर्म
तपस्याकठोर साधना; तप
तपोबलतप से अर्जित आध्यात्मिक शक्ति
तपोलोकजनलोकसे ऊपर वैराज देवताओंका लोक
तपोवनवह शान्त वन जहाँ ऋषि तप करते हैं
तमस्आलस, जड़ता और अँधेरा लाने वाला गुण
तर्पणजल देकर देवताओं और पितरों को तृप्त करने की विधि
ताण्डवभगवान शिव का प्रचण्ड आवेगपूर्ण नृत्य
तापसतप करने वाला साधक
तामसतमोगुण-प्रधान; जड़ और अंधकारमय
तामसिकतमोगुण से युक्त, अज्ञान, आलस्य और मोह से भरा
ताम्बूलपूजा में अर्पित पान का बीड़ा
तितिक्षासुख-दुख को शान्त भाव से सह लेने की शक्ति
तिथिचांद्र दिन; पक्ष की एक कला-अवस्था
तिर्यक्तिरछे चलनेवाले प्राणी, अर्थात् पशु-पक्षी
तीर्थपवित्र पूजनीय स्थान जहाँ स्नान-दर्शन किया जाता है
तुरीयजागृति, स्वप्न और गहरी नींद से परे चौथी अवस्था
तुरीयातीततुरीय अवस्था से भी परे परमतत्त्व
तूणीरबाण रखने का तरकश
तृतीय नेत्रशिव के ललाट का तीसरा नेत्र, जिससे प्रलयाग्नि निकलती है
तेजआत्मिक ओज और भीतरी कांति
तोमरफेंककर मारा जाने वाला भाले जैसा हथियार
तोरणद्वार के ऊपर बनी सजावटी मेहराब
त्यागकर्म के फल और आसक्ति का परित्याग
त्यागीफल और आसक्ति का त्याग करने वाला
त्रयीऋक्, यजु और साम, ये तीन वेद
त्रिगुणसत्त्व, रज और तम, प्रकृतिके ये तीन गुण
त्रिपुरारितीन पुरों का नाश करने वाले शिव
त्रिलोकीस्वर्ग, मर्त्य और पाताल, तीनों लोक
त्रिशूलतीन नोकों वाला शिव का प्रधान आयुध
त्रेताचार युगों में दूसरा युग, राम-कथा का काल
त्र्यम्बकतीन नेत्रों वाले शिव; एक ज्योतिर्लिंग
द
दंभधार्मिकता का दिखावा, पाखंड
दक्षिणाधार्मिक कार्य के बाद पुरोहित को दी गई भेंट
दक्षिणाग्नियज्ञ की दक्षिण दिशा की अग्नि
दक्षिणायनसूर्य के दक्षिण की ओर चलने के छह महीने
दयाप्राणियों पर करुणा और कोमलता
दर्भकुश घास का ही दूसरा नाम
दर्शनसाक्षात् अनुभव या दिव्य रूप का देखना
दानबिना प्रत्युपकार की चाह योग्य पात्र को देना
दानवदनु के वंश के असुर
दिक्पालआठों दिशाओंके रक्षक देव
दिगम्बरदिशाओं को ही वस्त्र मानने वाले, नग्न शिव
दिग्गजदिशाओंको धारण करनेवाले गजराज
दिग्विजयचारों दिशाओं के राज्य जीतने का अभियान
दिव्यदृष्टिदिव्य और अलौकिक दर्शन की शक्ति
दिव्यास्त्रदेवताओं से मिला मन्त्र-सिद्ध अस्त्र
दीक्षागुरु से मन्त्र या व्रत ग्रहण करने का संस्कार
दुकूलबारीक रेशमी वस्त्र
दुन्दुभिबड़ा नगाड़ा, जो युद्ध और उत्सव में बजता है
दुराधर्षजिस पर चढ़ाई करना भी कठिन हो
दुर्गतिअधम योनि या नरकमय गति
दुर्धर्षजिसे दबाना या हराना कठिन हो
दूर्वापूजा में चढ़ाई जाने वाली कोमल हरी घास
दृष्टान्तबात समझाने के लिए दिया गया उदाहरण
देवयज्ञअग्निमें देवताओंको आहुति देनेका नित्यकर्म
देवर्षिदेवताओं में गिने जाने वाले ऋषि, जैसे नारद
देवालयदेवता का मन्दिर
देहातीतदेह से परे; शरीर-भाव से मुक्त
देहीदेह में बसा हुआ आत्मा, शरीरधारी जीव
दैत्यदिति के वंश के असुर
दैवीसंपदामुक्ति की ओर ले जाने वाले दिव्य गुणों का धन
दोहादो पंक्तियों का मात्रिक छन्द
दौहित्रपुत्री का पुत्र, नाती
द्युलोकआकाश अथवा स्वर्गलोक
द्यूतपासों का जुआ
द्रष्टादेखने वाला, दृश्य से अलग चेतन तत्त्व
द्वन्द्वसुख-दुख, सर्दी-गर्मी जैसे विरोधी जोड़े
द्वन्द्व-युद्धदो योद्धाओं के बीच आमने-सामने का युद्ध
द्वापरचार युगों में तीसरा युग, कृष्ण-कथा का काल
द्विजसंस्कार से दूसरा जन्म पाने वाला, प्रायः ब्राह्मण
द्वेषकिसी के प्रति घृणा और विमुखता
द्वैतजीव और ईश्वर को अलग-अलग मानने वाला दर्शन
ध
धनुर्वेदधनुर्विद्या और युद्धका शास्त्र, एक उपवेद
धनुषबाण चलाने का धनु
धन्वन्तरिसमुद्र-मन्थनसे अमृत-कलश लिए प्रकट देवताओंके वैद्य
धर्मधारण करने योग्य कर्तव्य और शाश्वत नैतिक व्यवस्था
धर्मज्ञधर्म का मर्म जानने वाला
धर्मशास्त्रआचार-विधि का प्रतिपादन करने वाला स्मृति-ग्रंथ
धारणामन को एक जगह टिकाए रखने का अभ्यास
धृतिधीरज, मन की दृढ़ता
ध्यानमन को एक बिंदु पर एकाग्र कर भीतर टिकाना
ध्यानयोगमन को एकाग्र कर भीतर टिकाने की साधना का मार्ग
ध्रुवज्योतिष्चक्रकी नाभिपर अचल तारा; विष्णुका तीसरा धाम
ध्वजऊँचा फहराया जाने वाला झण्डा
न
नक्षत्रअश्विनी आदि सत्ताईस तारा-समूह, चन्द्रमाके पथके पड़ाव
नन्दीशिव का वृषभरूप प्रधान गण और वाहन
नरकपापियोंको दण्ड भोगानेके लिए यमके अधीन अधोलोक
नवग्रहसूर्य, चन्द्र, मंगल आदि नौ ग्रह
नवरात्रदेवी की नौ रातों का पर्व
नागपातालमें बसनेवाली फणधारी सर्प-जाति
नागपाशसर्पों का बना बन्धनकारी अस्त्र
नाडिकापन्द्रह कलाका कालमान, ताँबेके जल-पात्रसे नापा जानेवाला
नाम-सिमरनप्रभु के नाम का निरंतर स्मरण-जप
नारायणजल में शयन करने वाले भगवान विष्णु
नारायणास्त्रविष्णु का अमोघ दिव्य अस्त्र
निग्रहरोक, संयम में रखना
नित्यजो सदा रहता है, कालातीत और अविनाशी
नित्यकर्मप्रतिदिन करने योग्य अनिवार्य धार्मिक कर्तव्य
निदिध्यासनमनन के बाद उसी सत्य में डूबे रहना
निमित्तजिसके बहाने काम होता है, तात्कालिक कारण
निमेषपलक झपकने भर का समय
नियोगपुत्रहीन घर में सन्तान पाने की प्राचीन शास्त्रीय व्यवस्था
निरवैरुसिख मूलमंत्र में ईश्वर का गुण: वैर-रहित
निराकाररूप और आकार से रहित ब्रह्म
निरुक्तशब्दों की व्युत्पत्ति का वेदांग
निर्गुणरूप और गुणों से परे ईश्वर का स्वरूप
निर्झरपहाड़ से गिरता झरना
निर्भउसिख मूलमंत्र में ईश्वर का गुण: भय-रहित
निर्भयताभय का पूर्ण अभाव, निर्भीक मनोदशा
निर्वाणबुझ जाना, परम शांति में लीनता
निर्विकल्पजहाँ विचार की कोई हलचल न बचे, वैसी समाधि
निवृत्तिकर्म-फल त्यागकर मोक्षकी ओर मुड़नेका मार्ग
निशाचररात में विचरने वाला राक्षस
निषादनदी-वनों में बसने वाली शिकारी-केवट जाति
निष्कण्टककाँटों यानी बाधाओं से रहित, निर्विघ्न
निष्कर्तामैं करने वाला नहीं, इस अकर्तापन का भाव
निष्कामफल की कामना से रहित
निष्ठाकिसी मार्ग या भाव में दृढ़ और अटल लगन
निष्णातकिसी विद्या में पूरी तरह पारंगत
नीतिराजनीति और व्यवहार-कुशल आचार
नीलकण्ठविषपान से नीले कण्ठ वाले शिव
नेति-नेतियह भी नहीं, वह भी नहीं, कहकर सत्य खोजने की रीति
नेतीमथानीको घुमानेकी रस्सी
नैमित्तिककिसी निमित्तसे समय-समयपर होनेवाला; कल्पान्तमें ब्रह्माके शयनका प्रलय
नैवेद्यभगवान को अर्पित किया जाने वाला भोजन
नैष्ठिकआजीवन दृढ़ ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला
न्यग्रोधबरगद का पेड़
न्यासमन्त्र बोलकर अंगों में देव-शक्ति बैठाने की विधि
प
पंचभूतपृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश, ये पाँच महाभूत
पंचाक्षरशिव का नमः शिवाय, पाँच अक्षरों वाला मन्त्र
पञ्चकोशआत्मा को ढकने वाली पाँच परतें
पञ्चमुखपाँच मुखों वाला सदाशिव का स्वरूप
पञ्चलक्षणपुराण के पाँच अनिवार्य विषय
पञ्चाग्निचारों ओर अग्नि और ऊपर सूर्य के बीच बैठकर की जाने वाली तपस्या
पञ्चामृतदूध, दही, घी, शहद और शक्कर का पवित्र मिश्रण
पट्टाभिषेकराजगद्दी पर बैठाने का अभिषेक-समारोह
पतिव्रतापति के प्रति एकनिष्ठ साध्वी स्त्री
पत्तिसेना की सबसे छोटी इकाई, एक रथ-हाथी और कुछ सैनिक
परधर्मदूसरे का धर्म, जिसे अपनाना उचित नहीं
परब्रह्मनिर्गुण, निर्विकार परम ब्रह्म
परमगतिसर्वोच्च गति, परम धाम की प्राप्ति
परमधामजहाँ पहुँचकर लौटना नहीं, ईश्वर का शाश्वत धाम
परमात्मासबका आधार, परम चेतन ईश्वर
परमार्थसबसे ऊँचा, अविनाशी तत्त्व; सच्चा प्रयोजन
परमेश्वरसर्वोच्च ईश्वर, सबका स्वामी
परशुयुद्ध-कुल्हाड़ी
पराचेतन जीव-रूप उच्च प्रकृति
परात्परजो सबसे उत्कृष्ट से भी परे हो
परार्धब्रह्माकी सौ वर्षकी आयुका आधा भाग, अति विशाल कालमान
परिखानगर या दुर्ग के चारों ओर खुदी रक्षा-खाई
परिघगदा जैसा भारी लोहे का हथियार
पर्णकुटीपत्तों से छाई छोटी कुटिया
पर्वमहाभारत जैसे ग्रन्थ का बड़ा खण्ड
पल्लवनई कोमल पत्ती
पशुत्वजीव का बन्धनयुक्त पशुभाव, जिससे शिव मुक्त करते हैं
पशुपतिसमस्त जीवरूपी पशुओं के स्वामी शिव
पश्यन्तीवाणी का और सूक्ष्म दर्शन-स्तर
पाखण्डधर्मका ढोंग, वेदविरोधी मिथ्या मत
पाणिग्रहणविवाह में वर का वधू का हाथ थामना
पातालपृथ्वीके नीचे बसे सात अधोलोक, जहाँ नाग और दैत्य रहते हैं
पाद्यअतिथि के चरण धोने के लिए दिया गया जल
पापअशुभ कर्म और उसका अशुभ फल
पायसखीर, दूध में पकाया मीठा अन्न
पारायणग्रन्थ का आरम्भ से अन्त तक क्रमबद्ध पाठ
पारिजातसमुद्र-मन्थनसे निकला स्वर्गका सुगन्धित दिव्य वृक्ष
पार्थिवपूजा के लिए मिट्टी से बनाया हुआ (लिंग या मूर्ति)
पार्षददेवता या राजा के पास रहने वाले गण-सभासद
पाशफँसाने वाला फन्दा
पाशुपतशिव से सम्बन्धित कठोर व्रत तथा उनका अमोघ अस्त्र
पाशुपतास्त्रशिव का सर्वसंहारक दुर्जय दिव्य अस्त्र
पिण्डश्राद्ध में पितरों को अर्पित अन्न का गोला
पितामहपिता के पिता, दादा
पितृदिवंगत पूर्वज, जिन्हें जल और अन्न अर्पित किया जाता है
पिनाकभगवान शिव का धनुष
पिशाचमांसाहारी भयंकर प्रेतयोनि
पीताम्बरपीला रेशमी वस्त्र, विष्णु-कृष्ण का परिधान
पुण्डरीकाक्षकमलके समान नेत्रोंवाले भगवान् विष्णु
पुण्यशुभ कर्म और उसका शुभ फल
पुण्याह-वाचनशुभ दिन की घोषणा का मांगलिक कर्म
पुत्रेष्टिपुत्र पाने की कामना से किया जाने वाला यज्ञ
पुरश्चरणमन्त्रसिद्धि हेतु किया जाने वाला विधिवत जप-अनुष्ठान
पुराणसर्ग और प्रतिसर्ग आदि पाँच लक्षणोंवाला प्राचीन धर्मग्रन्थ
पुरुषचेतन आत्मतत्त्व, प्रकृति का भोक्ता और साक्षी
पुरुषार्थधर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, जीवन के चार लक्ष्य
पुरुषोत्तमक्षर और अक्षरसे परे उत्तम पुरुष, परमेश्वर
पुरोडाशयज्ञ के लिए बनाई गई अन्न की विशेष रोटी
पुष्करप्रसिद्ध तीर्थस्थल
पुष्करद्वीपमीठे जलके समुद्रसे घिरा अन्तिम और सबसे बड़ा द्वीप
पुष्करावर्तकप्रलयकाल में मूसलाधार बरसने वाले मेघ
पूजादेवता की उपचारों सहित आराधना
पूरकप्राणायाममें श्वास भीतर लेना
पूर्णपात्रदान में दिया जाने वाला अन्न से भरा पात्र
पूर्णाहुतियज्ञ के अन्त में दी जाने वाली अन्तिम आहुति
पृतनासेना की एक बड़ी टुकड़ी
पौरुषअपना उद्यम और बल
प्रकृतितीन गुणों से बुनी जगत की मूल सामग्री
प्रजापतिप्रजा और सृष्टि के स्वामी की उपाधि
प्रणवओम् अक्षर का शास्त्रीय नाम
प्रणिपातगुरु के आगे विनम्र प्रणाम और समर्पण
प्रतिसर्गप्रलयके पश्चात्की पुनः सृष्टि; पुराणका एक लक्षण
प्रतिहारीराजद्वार पर खड़ा रहने वाला रक्षक
प्रतीत्यसमुत्पादबौद्ध सिद्धांत: हर वस्तु कारणों पर आश्रित होकर उत्पन्न होती है
प्रत्यञ्चाधनुष की डोरी
प्रत्याहारइन्द्रियों को विषयों से समेट लेना
प्रदक्षिणादेवता के चारों ओर आदर से घूमना
प्रदोषसन्ध्या का शिवपूजन हेतु शुभ काल
प्रधानसत्त्व-रज-तमकी साम्यावस्था, मूल प्रकृति; जगत्का परम कारण
प्रपंचनाम-रूपवाला दृश्य जगत्का विस्तार
प्रभाससोमनाथ का पवित्र समुद्रतटीय क्षेत्र
प्रमथशिव के प्रमुख गणों का वर्ग
प्रमादकर्तव्य के प्रति असावधानी और आलस्य
प्रलयसृष्टि का सिमटकर लीन हो जाना
प्रवृत्तिफल-कामनासे किए जानेवाले कर्मका मार्ग
प्रसाददेवता को अर्पित कर लौटाया गया पवित्र भोग
प्रहरदिन-रात का आठवाँ भाग, लगभग 3 घंटे
प्रहृष्टआनन्द से खिला हुआ
प्राकारनगर या दुर्ग की ऊँची चारदीवारी
प्राकृतजिसमें सारी सृष्टि मूल प्रकृतिमें लीन हो जाती है, वह प्रलय
प्राणदेह में बहने वाली जीवन-वायु, श्वास-शक्ति
प्राणप्रतिष्ठामूर्ति में देव-शक्ति जगाने की विधि
प्राणायामश्वास और प्रश्वासके निग्रहका योगाभ्यास
प्रायश्चित्तपाप धोने के लिए किया गया शास्त्रोक्त कर्म
प्रारब्धपिछले कर्मों का वह भाग जो इस जन्म में फल देता है
प्रेतमृत्यु के बाद भटकती अतृप्त आत्मा
प्रेयजो तुरन्त प्रिय लगे, पर सदा हितकर न हो
प्लक्षद्वीपजम्बूद्वीपके आगेका, इक्षुरसके समुद्रसे घिरा द्वीप
फ
फलश्रुतिपाठ का फल बताने वाला अन्तिम अंश
ब
बंधनकर्म और आसक्ति से जीव का बँधना
बन्धनजन्म-मरण और कर्म का बंधन
बहुश्रुतजिसने बहुत सुना-पढ़ा हो, बड़ा ज्ञानी
बिल्वबेल का पेड़ और फल, शिव को प्रिय
बीज-मन्त्रएक अक्षर में देवता की शक्ति समेटे छोटा मन्त्र
बुद्धिनिश्चय करने वाली अन्तःकरण की विवेक-शक्ति
ब्रजभाषाकृष्ण-भक्ति काव्य की ब्रज-भाषा
ब्रह्मसारे जगत का मूल, एक निराकार परम तत्त्व
ब्रह्मघोषवेदमन्त्रों के सामूहिक उच्चारण का घोष
ब्रह्मचर्यसंयम और विद्या-अर्जन की पहली जीवन-अवस्था
ब्रह्मतेजब्राह्मणत्व या तप से उपजा आध्यात्मिक तेज
ब्रह्मदण्डब्रह्मा का अमोघ दण्ड-अस्त्र
ब्रह्मनिर्वाणब्रह्म में लीन हो जाने वाली परम शांति
ब्रह्ममुहूर्तसूर्योदय से पूर्व का पवित्र प्रातःकाल
ब्रह्मयज्ञनित्य वेदपाठ रूप यज्ञ
ब्रह्मयोगपरब्रह्ममें चित्त लगानेका योग
ब्रह्मराक्षसदुराचारी ब्राह्मण के मरने पर बनी राक्षसयोनि
ब्रह्मर्षितप से ब्रह्म-पद पाया हुआ सर्वोच्च ऋषि
ब्रह्मलोकब्रह्मा का सर्वोच्च लोक
ब्रह्मविद्याब्रह्म को जानने वाली सर्वोच्च विद्या
ब्रह्मशिरब्रह्मास्त्र से भी बढ़कर माना गया घातक अस्त्र
ब्रह्मासृष्टि के रचयिता देव, जिनका एक दिन हज़ार युगों का
ब्रह्माण्डसात आवरणोंसे घिरा गोलाकार विश्व, कैथके बीजके समान
ब्रह्मास्त्रब्रह्मा की शक्ति से जुड़ा सबसे भयानक दिव्य अस्त्र
ब्राह्मणवर्णों में अध्ययन और यज्ञ करने वाला प्रथम वर्ग
भ
भक्तईश्वर में अनन्य प्रेम रखने वाला उपासक
भक्तवत्सलभक्तों पर सदा स्नेह रखने वाले (शिव)
भक्तिईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण
भक्तियोगप्रेम और समर्पण से ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग
भगऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य, ये छः दिव्य गुण
भजनईश-महिमा का भक्ति-गीत
भद्रकालीदेवी का उग्र संग्रामकारी रूप
भवानीजगज्जननी देवी पार्वती
भस्मराख; जलकर राख हुआ रूप
भार्यापत्नी
भाष्यकठिन ग्रन्थ की विस्तार से लिखी व्याख्या
भिन्दिपालगोफन-जैसा फेंककर मारने वाला अस्त्र
भुवर्लोकभूलोक और स्वर्गके बीचका अन्तरिक्ष-लोक
भूतनाथभूत-प्रेतादि गणों के स्वामी शिव
भृंगीशिव का एक प्रमुख गण
भेरीयुद्ध में बजाया जाने वाला बड़ा ढोल
भैरवशिव का उग्र और भयंकर रूप
भोक्ताभोगने वाला; अनुभव करने वाला आत्मा
भौमवारमंगलवार
म
मंगलाचरणग्रन्थ के आरम्भ में किया गया देव-वन्दन
मणिकर्णिकाकाशी का प्रसिद्ध महातीर्थ घाट
मण्डपविवाह आदि के लिए सजाया गया मण्डपाकार स्थल
मत्स्यविष्णुका मछली-रूप अवतार
मदधन, बल या पद का घमंड-नशा
मदनकाम, प्रेम का देवता
मधुपर्कदही, घी और शहद मिलाकर अतिथि को दी जाने वाली भेंट
मधुसूदनमधु नामक दैत्यको मारनेवाले विष्णु
मध्यमावाणी का सूक्ष्म मानसिक स्तर
मध्याह्नदोपहर का समय
मनसंकल्प-विकल्प करने वाली अन्तःकरण की शक्ति
मननसुने हुए ज्ञान पर गहरा विचार
मनुप्रत्येक मन्वन्तरमें धर्म-मर्यादा स्थापित करनेवाला आदिपुरुष
मन्त्रदेवता या तत्त्व का पवित्र शब्द-सूत्र
मन्त्रणागुप्त सलाह, विचार-विमर्श
मन्दराचलसमुद्र-मन्थनमें मथानी बना पर्वत; मेरुको थामनेवाला गिरि
मन्वन्तरएक मनु के अधिकार की लम्बी कालावधि
मरणधर्मामृत्यु के अधीन; नाशवान मर्त्य
मरुत्इन्द्रके सहायक उनचास वायु-देवता
महत्सांख्य में प्रकृति से उत्पन्न प्रथम तत्त्व; समष्टि बुद्धि
महत्तत्त्वप्रकृतिके क्षोभसे उपजा पहला तत्त्व, बुद्धि-तत्त्व
महर्लोकध्रुवसे ऊपर वह लोक, जहाँ भृगु आदि सिद्ध कल्पभर रहते हैं
महर्षिमहान् तपस्वी और द्रष्टा ऋषि
महाकालउज्जयिनी में काल-रूप से रक्षा करने वाले शिव
महाकाव्यविशाल कथानक वाला महान काव्य
महात्म्यदेवता, तीर्थ या ग्रन्थ की महिमा का वर्णन
महापातकअत्यन्त गुरु पाप
महापुराणब्रह्म आदि अठारह प्रधान पुराणोंमेंसे एक
महाप्रलयसमस्त सृष्टि का महान विनाश
महाप्रस्थानसंसार छोड़ने के लिए अन्तिम पैदल यात्रा
महाप्राज्ञबहुत बड़ी बुद्धि वाला
महाभूतपृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, पाँच स्थूल तत्त्व
महामायाजगत को मोहने वाली देवी की महाशक्ति
महायुगचारों युगों का एक पूर्ण चक्र
महारथीअकेले हज़ारों योद्धाओं से लड़ने में समर्थ रथ-योद्धा
महावाक्यउपनिषदों के चार मूल ज्ञान-वाक्य
महिषभैंसा
महिषीराजा की प्रधान रानी
महेश्वरसब प्राणियों का महान् ईश्वर
मागधराजाकी स्तुति और वंशावली गानेवाला बन्दीजन
मातामहमाता के पिता, नाना
मातुलमामा
मातृकादेवशक्तियों के रूप में प्रकट मातृस्वरूपा देवियाँ
माधुर्यमिठास; भक्ति का मधुर प्रेम-भाव
मानसपुत्रब्रह्माके संकल्पमात्रसे उत्पन्न पुत्र
मायाजगत को सत्य दिखाने वाली ब्रह्म की अद्भुत शक्ति
मासचांद्र मास; महीना
मिथ्याजो सच जैसा दिखे पर टिके नहीं
मीमांसावेदके कर्मकाण्डका विचार करनेवाला दर्शन
मुक्तिबंधन से छूटना, जन्म-मरण से छुटकारा
मुद्गरहथौड़े जैसा भारी हथियार
मुनिमौन और मनन में स्थित तपस्वी ऋषि
मुमुक्षुमोक्ष की गहरी चाह रखने वाला साधक
मुहूर्तलगभग 48 मिनट की कालावधि; शुभ घड़ी
मूँजयज्ञोपवीत और मेखला बनाने वाली पवित्र घास
मूसलमूसल-रूपी भारी अस्त्र
मृगचर्महिरण की खाल, जो आसन और वस्त्र बनती थी
मृगयाराजाओं का शिकार-विहार
मृत्युंजयमृत्यु को जीतने वाले शिव तथा उनका मन्त्र
मृत्युलोकमरणधर्मा प्राणियोंका लोक, पृथ्वी
मेखलाकमर में बाँधी जाने वाली मूँज की करधनी
मेधाधारण करने वाली तीव्र बुद्धि
मेरुजम्बूद्वीपके मध्यमें खड़ा सुवर्णमय महापर्वत, सुमेरु
मैत्रीसब प्राणियों के प्रति मित्रता का भाव
मोक्षजन्म-मरण के बन्धन से सदा के लिए छुटकारा
मोहअज्ञान से उपजा भ्रम और आसक्ति
मोहिनीविष्णु का मोहित कर लेने वाला स्त्री-रूप
मौनवाणी का संयम, चुप्पी की साधना
म्लेच्छवैदिक आचारसे बाहरका अनार्य जन
य
यक्षधन के रक्षक माने गए उपदेवता
यजमानजिसके लिए और जिसके धन से यज्ञ हो, वह गृहस्थ
यज्ञअग्नि में आहुति देकर किया वैदिक हवन-अनुष्ठान
यज्ञपुरुषयज्ञके रूपमें प्रकट भगवान् विष्णु
यज्ञभागयज्ञमें देवताओंको मिलनेवाला हविका भाग
यज्ञशालायज्ञ के लिए बना मण्डप
यज्ञोपवीतजनेऊ, संस्कार में मिलने वाला पवित्र सूत्र
यमपाप-पुण्यका विचार करनेवाले, मृत्यु और धर्मके अधिपति देव
यमदूतप्राणीको यमलोक ले जानेवाले यमराजके दूत
यादवयदुके वंशज, श्रीकृष्णका कुल
युगकाल-चक्र का एक चरण: सत्य, त्रेता, द्वापर या कलि
युग-धर्मकिसी युग के अनुरूप धर्म
युवराजराजगद्दी का घोषित उत्तराधिकारी
यूथपतिसेना या समूह का नायक
यूपयज्ञ-स्थल पर गड़ा पवित्र स्तम्भ
योगचित्तको वश कर आत्माका परमात्मासे संयोग करनेकी साधना
योग-निद्राप्रलय-काल में विष्णु की योगमयी दिव्य निद्रा
योगक्षेमजो नहीं है उसे पाना, जो है उसे सँभालना
योगमायाभगवान की वह शक्ति जो लीला पर पर्दा डालती है
योगिनीदेवी की सहचरी सिद्ध स्त्री-शक्ति
योगीयोग में स्थित साधक, समत्व को प्राप्त पुरुष
योगेश्वरसब योगों के स्वामी, ईश्वर
योजनदूरी की प्राचीन माप, लगभग 12 से 15 किलोमीटर
योनिजन्म की जाति या प्रकार, देह-रूप
र
रजस्दौड़-धूप, कामना और चंचलता जगाने वाला गुण
रजस्वलामासिक धर्म के दिनों वाली स्त्री
रणभूमियुद्ध का मैदान
रथीरथ पर चढ़कर लड़ने वाला योद्धा
रसातलपातालका सबसे गहरा तल
राक्षसमांसभक्षी क्रूर निशाचर वर्ग
रागविषयों के प्रति खिंचाव और लगाव
राजकोषराजा का कोष; राजकीय खजाना
राजगुह्यरहस्यों का राजा, परम गोपनीय ज्ञान
राजतिलकराज्याभिषेक का तिलक; राजपद का चिह्न
राजर्षिराजा होते हुए ऋषि-पद पाया हुआ महापुरुष
राजविद्याविद्याओं का राजा, सर्वश्रेष्ठ आत्मज्ञान
राजसरजोगुण-प्रधान; क्रियाशील और आवेगी
राजसिकरजोगुण से युक्त, चंचल, कामना और फल से भरा
राजसूयचक्रवर्ती पद के लिए किया जाने वाला महान यज्ञ
राज्याभिषेकराजा के रूप में जल-अभिषेक से अभिषेचन
राहुग्रहण करने वाला छाया-ग्रह; नवग्रहों में एक
रुद्रसंहारकारी स्वरूप में भगवान शिव
रुद्राक्षशिव-पूजा में पहने जाने वाले पवित्र बीज-दाने
रेचकप्राणायाममें श्वास बाहर छोड़ना
रौद्र-अस्त्ररुद्र-शिव का अस्त्र
ल
लकुटमोटी लाठी या गदा जैसा दण्ड
लग्नविवाह का शुभ मुहूर्त तथा जन्मकालीन राशि
लयसृष्टि का विलीन होना, प्रलय
लाक्षागृहलाख से बनाया गया घर, जो पल में भड़क उठे
लावाविवाह की अग्नि में होमा जाने वाला भुना धान
लीलाभगवान का सहज दिव्य खेल
लोकपालदिशाओंकी रक्षा करनेवाले इन्द्र आदि अधिष्ठाता देव
लोकसंग्रहलोक-कल्याण हेतु श्रेष्ठ पुरुष का कर्म करते रहना
लोकालोकभूमण्डलके छोरपर प्रकाश और अन्धकारको बाँटनेवाला वलयाकार पर्वत
लोभधन-संग्रह की अतृप्त लालसा
व
वंडसिख आदर्श: अपनी कमाई का अंश बाँटना
वंशपुराणमें वर्णित देव-ऋषि-राजाओंकी वंशावली; पाँच पुराण-लक्षणोंमें एक
वंशानुचरितवंशों के चरित्र-वर्णन; पुराण का लक्षण
वज्रइन्द्र का हथियार; कठोरतम वस्तु
वरणकिसी को आदरपूर्वक कार्य के लिए चुनना
वरदानप्रसन्न होकर दिया गया वर; आशीर्वचन
वराहजलमें डूबी पृथ्वीको दाढ़ोंपर उठानेवाला विष्णुका सूअर-रूप अवतार
वर्णब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र, समाजके ये चार विभाग
वर्णधर्मअपने वर्ण-स्वभाव के अनुसार नियत कर्तव्य
वर्णाश्रमवर्ण और आश्रमके अनुसार बँधा धर्म-विधान
वल्कलपेड़ की छाल से बना तपस्वियों का वस्त्र
वषट्कारआहुति डालते समय बोला जानेवाला 'वषट्' शब्द
वसुधापृथ्वी
वाग्दानकन्या देने का वचन, सगाई
वाजपेयसोम से जुड़ा एक बड़ा वैदिक यज्ञ
वात्सल्यसन्तान के लिए उमड़ने वाला माता-पिता का प्रेम
वानप्रस्थगृहस्थी छोड़कर वन में तप की तीसरी जीवन-अवस्था
वामनबलिसे तीन डग भूमि माँगनेवाला विष्णुका बौना अवतार
वामांगशरीर का बायाँ भाग, जहाँ से शिव ने विष्णु को प्रकट किया
वासनामन में गहरे बैठी इच्छा की पुरानी छाप
वासुदेवसब भूतोंमें बसनेवाले परमेश्वर विष्णु
वाहिनीसेना की मध्यम इकाई
विकर्मनिषिद्ध, दूषित और अनुचित कर्म
विज्ञानज्ञान का साक्षात् अनुभव में उतरना, अपरोक्ष बोध
विद्याज्ञान; विशेषतः ब्रह्म-ज्ञान
विद्याधरआकाश में विचरने वाली विद्या-सिद्ध दिव्य जाति
विनयनम्रता और झुकाव का भाव
विनियोगपाठ से पहले उसका ऋषि, छन्द और प्रयोजन बताना
विभूतिईश्वर की प्रकट महिमा; पवित्र भस्म भी
विमानदेवताओंका आकाशगामी दिव्य रथ
विराटईश्वर का विश्वव्यापी विशाल रूप
विवेकनित्य और अनित्य को अलग-अलग पहचानने वाली दृष्टि
विश्वनाथकाशी में विराजमान, विश्व के स्वामी शिव
विश्वरूपसारा जगत अपने में समेटे भगवान का विशाल रूप
विषयइन्द्रियों के भोग्य पदार्थ, रूप-रस-शब्द आदि
विषादगहरा दुख, मन का बैठ जाना
विसर्जनपूजा के अन्त में देवता को विदा करने की विधि
वीरभद्रशिव के क्रोध से उत्पन्न प्रचण्ड वीर गण
वृत्तान्तआदि से अन्त तक का पूरा हाल
वृत्तिमन में उठने वाली विचार-लहर
वृषभबैल
वृषभध्वजवृषभ की ध्वजा वाले भगवान शिव
वेदसनातन ज्ञान के मूल श्रुति-ग्रंथ
वेदांगवेद समझने में सहायक छह शास्त्र
वेदान्तवेदों का अन्तिम ज्ञान-भाग, आत्मा और ब्रह्म की विद्या
वेदीयज्ञ या पूजा के लिए बना ऊँचा पवित्र चबूतरा
वैकुण्ठविष्णुका परमधाम; एक मन्वन्तरमें उनका रूप
वैखरीवाणी का स्थूल मुखर स्तर; बोली गई ध्वनि
वैजयन्तीपाँच रत्नोंसे बनी विष्णुकी वनमाला
वैतरणीपरलोक के मार्ग में आने वाली मानी गई नदी
वैराग्यभोगों से मन का अपने आप उठ जाना
वैवस्वतवर्तमान सातवें मन्वन्तर के मनु; सूर्यपुत्र
वैश्यकृषि, गोपालन और व्यापार करने वाला वर्ण
वैश्वदेवभोजनसे पूर्व सब देवोंको दी जानेवाली नित्य आहुति
वैष्णवविष्णु-नारायण का उपासक सम्प्रदाय
व्याकरणशब्द-रचना का वेदांग
व्याघ्रबाघ
व्याघ्रचर्मबाघ की खाल, शिव का आसन और परिधान
व्याधजंगली पशुओंका शिकारी, बहेलिया
व्यासहर द्वापरमें वेदका विभाग करनेवाला ऋषि-पद
व्यूहसेना की सोची-समझी रचना, घेरे की बनावट
व्योमआकाश
व्रतनियम और श्रद्धा से लिया गया धार्मिक बन्धन
व्रात्यसंस्कार-भ्रष्ट, पतित द्विज
श
शंखयुद्ध-घोष और पूजा में बजाया जाने वाला शंख
शक्तिसृष्टि की मूल दिव्य स्त्री-ऊर्जा; शिव की सहचरी
शङ्खसमुद्री जीव का कोश, पूजा और युद्ध में बजाया जाने वाला
शतनामकिसी देवता के सौ नामों का स्तोत्र
शब्दब्रह्मशब्द अथवा ओंकार के रूप में ब्रह्म
शममन को शान्त और वश में रखने का अभ्यास
शम्भुकल्याण करने वाले भगवान शिव
शरणागतिअपने को पूरी तरह भगवान की शरण में सौंप देना
शरशय्याबाणों की नोकों पर बनी सेज
शस्त्रहाथ में लेकर चलाया जाने वाला हथियार
शाकद्वीपदूधके समुद्रसे घिरा वह द्वीप, जिसपर विशाल शाक वृक्ष है
शाकम्भरीशाक-फल से जगत् का पोषण करने वाली देवी
शाक्तशक्ति-देवी का उपासक सम्प्रदाय
शाखाकिसी वेद की पाठ-परंपरा; वैदिक शाखा
शाखामृगबन्दर, डाल-डाल घूमने वाला
शान्तिपाठपाठ के आदि-अन्त में बोला जाने वाला शान्ति-मन्त्र
शापक्रोध से दिया गया अभिशाप
शार्ङ्गभगवान विष्णु का धनुष
शालिग्रामविष्णु के प्रतीक रूप में पूजा जाने वाला काला पत्थर
शाल्मलमदिराके समुद्रसे घिरा एक द्वीप
शाश्वतजो कभी नष्ट नहीं होता, चिरस्थायी
शास्त्रधर्म और कर्तव्य का प्रमाणभूत ग्रंथ
शिक्षास्वर-उच्चारण का वेदांग; ध्वनि-विज्ञान
शिबिकाहाथसे उठाकर ढोई जानेवाली पालकी
शिवतत्त्वशिव के परम स्वरूप का ज्ञान या सिद्धान्त
शिवलिंगभगवान शिव का निराकार पूजनीय प्रतीक
शिवाशिव की शक्तिस्वरूपा सहचरी देवी
शिवालयभगवान शिव का मन्दिर
शिशुमारआकाशमें घड़ियालके आकारका तारामय विष्णु-रूप, जिसकी पूँछपर ध्रुव है
शिष्यगुरु से ज्ञान ग्रहण करने वाला
शुक्लपक्षचन्द्रमा के बढ़ने वाला उजला पखवाड़ा
शूद्रसेवा-कर्म से समाज की सहायता करने वाला वर्ण
शूलत्रिशूल; भाला-जैसा अस्त्र
शेषपातालके मूलमें पृथ्वीको धारण किए विष्णुका सहस्रफण नाग, अनन्त
शेषशय्याप्रलय-जलपर विष्णुका शेषनागरूपी शयन-आसन
शैलपर्वत
शैवशिव का उपासक सम्प्रदाय
श्रद्धागहरी आस्था और विश्वास
श्रवणगुरु से ज्ञान को ध्यान लगाकर सुनना
श्राद्धपितरों की तृप्ति के लिए किया जाने वाला कर्म
श्रीवत्सविष्णुके वक्षःस्थलका दिव्य चिह्न, प्रकृतिका प्रतीक
श्रुतिसुनने की परम्परा से सुरक्षित वेद-वचन
श्रेयजो अन्त में सचमुच हित करे, वही उत्तम राह
श्रौतश्रुति अर्थात् वेदपर आधारित यज्ञ-कर्म
श्लोकछन्दोबद्ध पद्य; अनुष्टुप् द्विपदी
श्वसुरससुर
ष
षण्मुखछह मुखों वाले भगवान कार्तिकेय
षोडशोपचार16 उपचारों से की जाने वाली पूरी पूजा
स
संकर्षणकल्पान्तमें शेषके मुखसे प्रकट होकर संहार करनेवाला रुद्ररूप; विष्णुका एक व्यूह
संकल्पमन में लिया गया दृढ़ निश्चय
संचितपिछले जन्मों के जमा हुए कर्म
संजीवनीमरे हुए को जिला देने वाली विद्या
संतभक्ति-मार्ग का सिद्ध महात्मा
संतोषजो मिला उसी में तृप्ति, अकामना
संन्याससब कुछ त्यागकर मोक्ष की ओर चलने की अवस्था
संयमइन्द्रियों और मन पर नियंत्रण
संवत्सरवर्ष का शास्त्रीय नाम
संशयमन का द्वंद्व और अनिश्चय
संसारजन्म और मृत्यु का चलता रहने वाला चक्र
संस्कारशुद्धि की धार्मिक विधि; मन पर पड़ी पुरानी छाप भी
संहारपूरा विनाश कर देना
संहितामन्त्रों या श्लोकों का व्यवस्थित संग्रह
सगुणरूप और गुणों सहित ईश्वर का स्वरूप
सच्चिदानन्दसत्य, चेतना और आनन्द स्वरूप परम तत्त्व
सतीपति के साथ चिता में प्राण त्यागने वाली स्त्री अथवा वह प्रथा
सत्ताहोने का मूल तत्त्व, अस्तित्व
सत्त्वप्रकाश, शान्ति और निर्मलता देने वाला गुण
सत्ययथार्थ और हितकारी वचन; असत्य का त्याग
सत्ययुगचार युगों में पहला, धर्म-प्रधान युग
सत्यलोकसबसे ऊपरका ब्रह्मलोक, जहाँ फिर न मरनेवाले अमर बसते हैं
सदाशिवनिराकार परब्रह्म का मूर्तिमान परम शिवस्वरूप
सद्गतिमृत्यु के बाद मिलने वाली अच्छी गति
सनातनजो सदा से है और सदा रहेगा
सन्ध्यासुबह-शाम की नित्य उपासना; दिन ढलने की बेला
सपत्नीएक ही पति की दूसरी पत्नी
सप्त-मातृकाब्राह्मी आदि सात मातृ-देवियाँ
सप्तपदीविवाह में अग्नि के साक्ष्य में सात पग चलने की रीति
सप्तर्षिसात महान ऋषि; आकाश में उनके नाम के सात तारे
सप्तशतीदेवीमाहात्म्य; सात सौ श्लोकों में देवी-महिमा
समत्वसुख-दुख, लाभ-हानि में एक जैसा भाव
समदर्शनसब प्राणियों में एक ही चेतना का समान दर्शन
समादृतआदर के साथ अपनाया हुआ
समाधिध्यान की वह गहराई जहाँ मन पूरी तरह ठहर जाए
समिधायज्ञ की अग्नि में डाली जाने वाली सूखी पवित्र लकड़ी
सरितानदी
सर्गमहाकाव्य का एक अध्याय
सर्पसत्रसाँपों के नाश के संकल्प से किया गया लम्बा यज्ञ
सर्वज्ञसब कुछ जानने वाला
सलिलजल
सव्यसाचीदोनों हाथों से बाण चलाने वाला; अर्जुन का विशेषण
सहस्रनामदेवता के 1000 नामों का क्रमबद्ध पाठ
सांख्यआत्मा और प्रकृति के भेद को समझाने वाला विवेक-दर्शन
साकाररूप और आकार सहित ईश्वर का स्वरूप
साक्षात्कारतत्त्व का प्रत्यक्ष अनुभव; आत्म-दर्शन
साक्षीबिना बदले सब कुछ देखती रहने वाली भीतरी चेतना
सात्त्विकसत्त्वगुण से युक्त, शुद्ध, शांत और ज्ञानप्रद
साधकसाधना-पथ पर चलने वाला अभ्यासी
साधनालक्ष्य हेतु किया गया नियमित आध्यात्मिक अभ्यास
साधुसदाचरण वाला संत-पुरुष
सामवेदगान-रूप में गाया जाने वाला वेद
सायुज्यभगवान में एकाकार हो जाने वाली सर्वोच्च मुक्ति
सारथिरथ हाँकने वाला
सारथ्यरथ हाँकने का कार्य, सारथी का काम
सालोक्यइष्टदेव के लोक में निवास रूप मुक्ति
सिंहनादसिंह की गरज जैसी योद्धा की हुंकार
सिद्धतप से अलौकिक शक्तियाँ पाए हुए दिव्य साधक
सिद्धिसाधना से मिलने वाली अलौकिक शक्ति
सीमन्तगर्भवती के लिए किया जाने वाला सीमन्तोन्नयन संस्कार
सुदर्शनभगवान विष्णु का चक्र नामक आयुध
सुधाअमृत का दूसरा नाम
सुषुप्तिबिना सपनों वाली गहरी नींद की अवस्था
सुहृदसच्चे मन से भला चाहने वाला मित्र
सूक्तएक ही देवता या विषय की ऋचाओं का समूह
सूक्ष्मइतना बारीक कि आँख से न दिखे
सूतकथा सुनाने वाला वाचक; रथ हाँकने वाला भी
सूत्रथोड़े शब्दों में गहरा अर्थ बाँधने वाला छोटा वाक्य
सूर्यवंशइक्ष्वाकुसे चली आई सूर्यकी राजवंश-परम्परा
सृष्टिजगत् की रचना; सर्जन
सेतुपुल; विशेषतः राम का लंका-सेतु
सेनापतिसेना का प्रधान संचालक
सोमयज्ञ में निचोड़ी जाने वाली पवित्र लता और उसका रस
सोमरससोम लता से निकाला गया यज्ञ का पवित्र रस
स्कन्धपुराण, विशेषतः भागवत का बड़ा विभाग
स्तुतिगुणों का आदर भरा गान
स्तोत्रदेवता की स्तुति में रचा पद्य-पाठ
स्थाणुस्तम्भ-सा अचल, भगवान शिव का नाम
स्थावरएक स्थानपर स्थिर रहनेवाले जीव, जैसे वृक्ष-लता
स्थितप्रज्ञजिसकी बुद्धि सुख-दुख में डिगती नहीं
स्थूलइन्द्रियों से दिखने वाला मोटा रूप
स्मरणईश्वर का निरंतर मन में स्मरण, नाम-चिंतन
स्मार्तस्मृति-परंपरा को मानने वाला पंचदेव-उपासक सम्प्रदाय
स्मृतिऋषियों की रची धर्म-पुस्तकें; स्मरण-शक्ति भी
स्रष्टारचने वाला, सृष्टि करने वाला
स्रुवाआहुति डालने का लम्बा काठ का चम्मच
स्वजनअपने कुटुम्ब और नाते के लोग
स्वधर्मअपने स्वभाव और स्थान के अनुसार अपना कर्तव्य
स्वधापितरोंको आहुति देते समयका उद्गार
स्वभावप्रकृति और गुणों से बनी सहज प्रवृत्ति
स्वयंवरकन्या के स्वयं वर चुनने का समारोह
स्वयम्भूजो अपने आप प्रकट हुआ हो
स्वर्गारोहणसदेह स्वर्ग की ओर चढ़ना
स्वस्तिवाचनशुभ कार्य से पहले कल्याण-मन्त्रों का पाठ
स्वाध्यायशास्त्र का नियमित पाठ और स्वयं का अध्ययन
स्वाहादेवताओंको आहुति देते समयका मन्त्र-उद्गार
स्वेदजपसीने या सील से उत्पन्न होने वाले कीट आदि प्राणी
ह
हउमैसिख विचार में अहंकार, मैं-पन
हरणछल या बल से उठा ले जाना
हरिपाप और दुःख हरनेवाले भगवान् विष्णु
हलाहलसमुद्र-मन्थन से निकला भीषण विष
हवनअग्नि में आहुति; होम
हविअग्नि में अर्पित की जाने वाली सामग्री, जैसे घी और अन्न
हविष्ययज्ञ में चढ़ाने योग्य पवित्र अन्न
हिरण्यगर्भसृष्टि का सुनहला बीज-रूप, सबसे पहला प्रकट तत्त्व
हृषीकेशइन्द्रियोंके अधिपति भगवान् विष्णु
होमअग्नि में आहुति देने की क्रिया
ॐ
ॐ तत् सत्ब्रह्म का तीन-अक्षरी नाम, हर शुभ कर्म का आरंभ