यहीं से शुरू कीजिए
एक सहज शुरुआत
बैठकर ताड़ासन, अंजलि और सहज श्वास के पूरे निर्देश एक जगह खोलिए। कोई एक चुनिए, या इसी क्रम में पढ़िए।
एक सहज शुरुआत कीजिएअपनी शुरुआत चुनिए
कुर्सी पर योग
बैठकर और सहारे के साथ 23 गतियाँ। उठना, बैठना, हाथ बढ़ाना और भार बदलना, अपने शरीर की आज की स्थिति के अनुसार।
आगे पढ़िएप्राणायाम
सहज श्वास से शुरुआत। पूरक और रेचक का क्रम समझें; कुम्भक और बलपूर्वक विधियों का प्रसंग अलग पढ़ें।
आगे पढ़िएमुद्राएँ
हाथ की एक सहज मुद्रा से शुरू कीजिए। सात अभ्यासों में साफ़ चरण, सरल विकल्प और श्वास पर ध्यान का साथ है; मन हो तो शास्त्रीय स्रोतों की ओर भी चलिए।
हाथ की मुद्रा से शुरू कीजिएचक्र
कमल, तत्त्व, बीज और देवता की पारम्परिक भाषा। शास्त्रीय स्रोत, आधुनिक अर्थ और समग्र योग की व्याख्या साथ, पर अलग पहचान के साथ।
आगे पढ़िएखेल और सीख
कहानी पहचानिए, वक्ता और शब्द के अर्थ चुनिए, या अलग-अलग पाठों से चुनी हुई जोड़ियाँ मिलाइए। पाँच खेल, पुस्तकालय में लौटने के पाँच बहाने।
खेल चुनिए
दिन की आवाजाही में कुछ पल अपने लिए रख लीजिए। एक कुर्सी का सहारा हो, साँस अपनी रवानी में चले, और आपको अपने तन-मन की ख़बर लेने की फ़ुर्सत मिले। जहाँ सहज लगे, वहीं से शुरू कीजिए।
कुर्सी पर योग से शुरू करेंअभ्यास का भाव
प्रतिदिन थोड़ा।
हर बार सजग।
लौट आने में भी एक हुनर है
पतञ्जलि अभ्यास के साथ वैराग्य रखते हैं। बार-बार लौटने की लगन हो, मगर हर बार किसी ख़ास फल की ज़िद न हो। यही बात रोज़ की इस छोटी बैठक में भी काम आती है। आज जितनी गति सहज है, उसे कल की उपलब्धि से कम मत आँकिए।
स्थिरता हो, मगर अकड़ न हो
आसन के लिए योगसूत्र स्थिरता और सुख का संकेत देते हैं। कुर्सी पर दिए ये आधुनिक रूप उस मूल आसन-विधि का दावा नहीं करते। इन्हें एक छोटे सवाल के साथ आज़माइए: सहारा लेते हुए क्या शरीर कुछ सहज हो सकता है और ध्यान कुछ साफ़?
जिस राह से मन लगे
शरीर की हल्की गति से शुरू कीजिए, आती-जाती साँस के पास ठहरिए, या चक्रों के अर्थ में उतरिए। तीनों राहें एक ही दिन तय करना ज़रूरी नहीं। इतना काफ़ी है कि लौट आने के लिए अपने दिन में थोड़ी-सी जगह बची रहे।
पाठ-संदर्भ: योगसूत्र 1.12 से 14 और 2.46। ऊपर का दैनिक अभ्यास-संबंधी विचार इन सूत्रों का सम्पादकीय अनुप्रयोग है। मूल पाठ · साइट पर योगसूत्र पढ़िए
पढ़िए, फिर पास रखिए
हिन्दी अभ्यास-दर्शिका
कुर्सी पर योग, आरम्भिक श्वास और चक्रों की मूल हिन्दी दर्शिका। विस्तृत प्राणायाम और मुद्रा-संग्रह इन वेब पृष्ठों पर उपलब्ध हैं।