पढ़िए · सुनिए
अनन्त बिल्व: चितिशक्ति का स्वरूप
वसिष्ठ का अमाप्य बिल्व: अखण्ड चेतना में प्रकट होते जगत का दृष्टान्त। पाठ पढ़िए या वाचन के साथ सुनिए।
कथा खोलिए और सुनिए →घर की लाइब्रेरी · जीवित ब्रह्मांड
महाकाव्य, उपनिषद् और दर्शन: मूल बनावट के साथ पढ़े हुए, और ऐसी हिन्दी में सुनाए हुए जैसे कोई अपना पास बैठकर क़िस्सा कहे।
भारतीय ग्रंथों का एक अभियन्ता-पाठ
डूबकर अनुभव कीजिए
जीवित कोशपात्र, स्थान, विचार और समय: पूरे पुस्तकालय के रिश्ते एक जगहऔर भी: पोथी · कथाओं का मानचित्र · रामायण, एक नज़र में · लीला
पुस्तकालय
हर ग्रंथ अपनी पूरी बनावट के साथ, कहानी की ज़ुबान में। डेस्कटॉप पर स्क्रॉल कीजिए, फ़ोन पर उँगली से सरकाइए।
तरीक़ा
श्लोक का अर्थ भी बचा रहे और कहानी की रवानी भी। हर पन्ना ऐसे, जैसे शाम की चाय पर कोई अपना सुना रहा हो।
पहले ग्रंथ की बनावट, फिर पाठ। नक़्शे, कड़ियाँ और पढ़ने के क्रम, ताकि लंबे ग्रंथ में रास्ता न भटके।
फ़ोन पर इंस्टॉल कीजिए और बिना इंटरनेट भी पढ़िए। दिन में उजली थीम, रात में स्याही जैसी गहरी।
झलकियाँ
पन्नों के बीच बैठे चित्र, जो कहानी के ठीक उसी मोड़ पर मिलते हैं। किसी पर भी उँगली रखिए, कथा खुल जाएगी।
आज का वचन
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
भगवद्गीता · अध्याय 2 · श्लोक 47
हक़ काम पर है, फल पर नहीं। बस यही एक बात गाँठ बाँध लीजिए, बाक़ी गीता इसी की शरह है।
पूरा अध्याय पढ़िए →रास्ते
तीन रास्ते, तीन मिज़ाज। जो आपका हो, वही ठीक है।
हनुमान चालीसा से गीता के दूसरे अध्याय तक, हल्के क़दमों से। छोटे पाठ, पूरी मिठास।
रास्ता देखिए → 2भागवतम् की पैंसठ कहानियों से शुरू कीजिए, फिर महाभारत के अठारह पर्व आपका इंतज़ार करेंगे।
रास्ता देखिए → 3उपनिषदों के सवालों से योग वासिष्ठ की कहानियों तक। धीमा पाठ, गहरा पानी।
रास्ता देखिए →दो रास्ते · एक पुस्तकालय
कभी एक कहानी आपका हाथ पकड़ती है। कभी पात्रों, स्थानों और विचारों का पूरा ताना-बाना। शुरुआत के दोनों रास्ते यहीं हैं।
ग्रंथों की सूची से नहीं, जुड़े हुए तारों से खोजिए। जिस कथा की रोशनी बुलाए, वहीं से पढ़ना शुरू कीजिए।
आकाश खोलिए →पात्र, स्थान, विचार और समय: पूरे पुस्तकालय के रिश्ते एक जगह देखिए, फिर सीधे पाठ तक पहुँचिए।
जीवित कोश खोलिए →पहले से कोई ग्रंथ मन में है?
पूरा पुस्तकालय देखिएआरम्भ
तीन संपादित रास्ते। कोई पूर्वज्ञान नहीं चाहिए, केवल उतना समय और मन जितना आज आपके पास है।
पहली बार आए हैं तो इस सरल क्रम से पुस्तकालय को जानिए।
रास्ता खोलिए → 02 · आधा घंटातीस मिनट में पढ़े जा सकने वाले चुने हुए प्रवेश-द्वार।
रास्ता खोलिए → 03 · कठिन समयदुख के समय साथ बैठने वाले पाठों का शांत क्रम।
रास्ता खोलिए →पढ़िए · सुनिए
वसिष्ठ का अमाप्य बिल्व: अखण्ड चेतना में प्रकट होते जगत का दृष्टान्त। पाठ पढ़िए या वाचन के साथ सुनिए।
कथा खोलिए और सुनिए →हमारा तरीक़ा
यह निजी घर की लाइब्रेरी है, लेकिन हर पाठ के पीछे का संपादकीय काम सार्वजनिक और जाँचने योग्य रखा गया है।
अर्थ को सँभालते हुए ऐसी भाषा, जिसमें लंबा ग्रंथ भी पास बैठकर सुनाई कथा लगे।
हमारे बारे में →नक़्शे, क्रम और कड़ियाँ, ताकि पात्रों और विचारों के बीच रास्ता कभी न खोए।
जीवित कोश देखिए →संस्करण, पाठ-साक्ष्य और संपादकीय निर्णय जहाँ संभव हो वहीं से खोले जा सकते हैं।
स्रोत देखिए →कथा चुनिए, धीरे पढ़िए, और जब मन हो वहीं लौट आइए।
अपना रास्ता चुनिए →