घर की लाइब्रेरी · जीवित ब्रह्मांड

कहानियाँ जो
हज़ारों बरस से
जाग रही हैं

महाकाव्य, उपनिषद् और दर्शन: मूल बनावट के साथ पढ़े हुए, और ऐसी हिन्दी में सुनाए हुए जैसे कोई अपना पास बैठकर क़िस्सा कहे।

भारतीय ग्रंथों का एक अभियन्ता-पाठ

उतरिए

तीन रास्ते · एक पुस्तकालय

कथा में उतरिए।
रिश्ते और संसार देखिए।

कथा-आकाश से कहानी चुनिए, जीवित कोश में रिश्ते समझिए, या कथा-गोले के भीतर पूरी चित्र-दीर्घा घुमाइए।

पहले से कोई ग्रंथ मन में है?

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आज का अंश

आज का स्रोत-सत्यापित अंश

हे महाभागे! मैं वानर हूँ और बुद्धिमान श्रीराम का दूत। देखिए, श्रीराम के नाम से अंकित यह देव-मुद्रिका (अँगूठी), जो उन महात्मा ने आपके विश्वास के लिए मुझे दी और मैं लाया हूँ। आश्वस्त हो जाइए, आपका कल्याण हो; आपके दुःखों का फल अब समाप्त हुआ।

वाल्मीकि रामायण · सुन्दरकाण्ड, सर्ग 14-40

हनुमान पहली बार सीता को अपनी पहचान बताते हैं और राम की मुद्रिका उनके सामने रखते हैं। अंश का पाठ और प्रसंग, दोनों स्रोतों से जाँचे गए हैं।

हमारा तरीक़ा

कहानी की गर्मी।
स्रोतों की रोशनी।

यह निजी घर की लाइब्रेरी है, लेकिन हर पाठ के पीछे का संपादकीय काम सार्वजनिक और जाँचने योग्य रखा गया है।

01 · स्वर

कहानीकार की ज़ुबान

अर्थ को सँभालते हुए ऐसी भाषा, जिसमें लंबा ग्रंथ भी पास बैठकर सुनाई कथा लगे।

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02 · संरचना

इंजीनियर की नज़र

नक़्शे, क्रम और कड़ियाँ, ताकि पात्रों और विचारों के बीच रास्ता कभी न खोए।

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03 · प्रमाण

स्रोत सामने

संस्करण, पाठ-साक्ष्य और संपादकीय निर्णय जहाँ संभव हो वहीं से खोले जा सकते हैं।

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पहला पन्ना आपका इंतज़ार कर रहा है।

कथा चुनिए, धीरे पढ़िए, और जब मन हो वहीं लौट आइए।

अपना रास्ता चुनिए
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