अनन्त बिल्व: चेतना का एक दृष्टान्त
एक बिल्वफल के दृष्टान्त के साथ मन और जगत के प्रश्न में उतरिए।
घर की लाइब्रेरी · जीवित ब्रह्मांड
महाकाव्य, उपनिषद् और दर्शन: मूल बनावट के साथ पढ़े हुए, और ऐसी हिन्दी में सुनाए हुए जैसे कोई अपना पास बैठकर क़िस्सा कहे।
भारतीय ग्रंथों का एक अभियन्ता-पाठ
पढ़ने के लिए चुनिए
ये हमारे चुने हुए पुनर्कथन और व्याख्याएँ हैं। हर संग्रह में उसके स्रोत और पाठ का दायरा दिया गया है।
अयोध्या से दण्डकारण्य, किष्किन्धा और लंका तक, सात काण्डों का क्रमबद्ध पाठ।
संग्रह खोलिएकुरुवंश, प्रतिज्ञाएँ, वनवास, कुरुक्षेत्र और शान्ति-पर्व तक फैला हुआ इतिहास।
संग्रह खोलिएराजा परीक्षित के सात दिनों में शुकदेव द्वारा सुनाई सृष्टि, अवतार और भक्ति की कथाएँ।
संग्रह खोलिएवसिष्ठ और राम का संवाद, जिसमें मन, जगत और मुक्ति को कथाओं से समझाया गया है।
संग्रह खोलिएगन्धर्व मधुर गाने लगे, अप्सराएँ नाचने लगीं, देव-दुन्दुभियाँ बजने लगीं, और आकाश से पुष्प-वृष्टि हुई। अयोध्या में महान उत्सव हुआ, गलियाँ नट-नर्तकों और जन-समूह से भर गईं।
वाल्मीकि रामायण · बालकाण्ड 18.17–18 · गीता प्रेस
पुनर्कथित अंश · पाठ और स्रोत की टिप्पणी
दशरथ के पुत्रों के जन्म पर गन्धर्वों और अप्सराओं का उत्सव अयोध्या के उल्लास के साथ आता है। यह अंश उस अवसर के सार्वजनिक आनंद को दर्ज करता है।
इस प्रसंग को पढ़िएजहाँ आप हैं, वहीं से
एक सहज पाठ चुनिए। फिर अपनी जिज्ञासा के साथ अगला क़दम रखिए।
रास्ता देखिए 02समय थोड़ा हो तो भी पढ़ने की जगह निकल आती है। छोटे अंशों और विरामों का एक रास्ता।
रास्ता देखिए 03धीमे पढ़ने के लिए कुछ पन्ने। जितना मन चाहे, उतना ही पढ़िए।
रास्ता देखिएएक बिल्वफल के दृष्टान्त के साथ मन और जगत के प्रश्न में उतरिए।
जिज्ञासा के साथ
परिवार से पाठक तक
इस पुस्तकालय के पीछे लुल्ला परिवार की पढ़ने और याद रखने की कहानी है। यहाँ ग्रंथों के साथ परिवार की स्मृतियों के लिए भी जगह है। परिचय में उस यात्रा को पढ़िए; स्रोतों में देखिए कि किसी पाठ की बुनियाद क्या है।
नया विचार
काम पूरा हो जाता है, पर मन परिणाम के दरवाज़े पर बैठा रहता है। गीता के दो श्लोकों के साथ एक विराम।
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