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घर का पुस्तकालय · जीवित ब्रह्माण्ड
कहानियाँ जो
हज़ारों बरस से
जाग रही हैं
पेशे से इंजीनियर राजीव लुल्ला ने यह पुस्तकालय अपने घरवालों के लिए नोट्स की तरह शुरू किया था। आज इसमें रामायण, महाभारत और लगभग पचास दूसरे ग्रंथ हैं।
भारतीय ग्रंथों का एक अभियन्ता-पाठ
हर तारा एक संग्रह। रुकिए: उसका चित्र और उसके रिश्ते; छुइए: संग्रह खुलता है।
नौ तारामंडल, नौ समूह। एक को छुइए, उसके संग्रह यहाँ आ जाएँगे।
महाकाव्य और पुराण 9
वेदान्त और दर्शन 6
उपनिषद् 13
भक्ति और स्तोत्र 10
पात्र और संदर्भ 2
नींव और पढ़ने के रास्ते 4
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पढ़ने के लिए चुनिए
कथा, संवाद और वाणी
ये हमारे चुने हुए पुनर्कथन और व्याख्याएँ हैं। हर संग्रह में उसके स्रोत और पाठ का दायरा दिया गया है।
भगवद् गीता
चुने हुए मूल श्लोकों के साथ, एक-एक अध्याय की व्याख्या पढ़िए।
संग्रह खोलिए →आदि ग्रंथ
आदि ग्रंथ के अंग और बाणी पढ़िए। संग्रह की सूची से अपना पाठ चुन सकते हैं।
संग्रह खोलिए →वाल्मीकि रामायण
अयोध्या से दण्डकारण्य, किष्किन्धा और लंका तक, सात काण्डों का क्रमबद्ध पाठ।
संग्रह खोलिए →महाभारत
कुरुवंश, प्रतिज्ञाएँ, वनवास, कुरुक्षेत्र, शान्ति-पर्व की सीख और स्वर्गारोहण तक फैला हुआ इतिहास।
संग्रह खोलिए →श्रीमद्भागवतम्
राजा परीक्षित के सात दिनों में शुकदेव द्वारा सुनाई सृष्टि, अवतार और भक्ति की कथाएँ।
संग्रह खोलिए →योग वासिष्ठ
वसिष्ठ और राम का संवाद, जिसमें मन, जगत और मुक्ति को कथाओं से समझाया गया है।
संग्रह खोलिए →58 ठिकाने · 9 समूह
पूरा पुस्तकालय एक नज़र में
जहाँ आप हैं, वहीं से
आज किस रास्ते चलें?
कहाँ से शुरू करें?
एक सहज पाठ चुनिए। फिर अपनी जिज्ञासा के साथ अगला क़दम रखिए।
रास्ता देखिए →आज आधा घंटा है
समय थोड़ा हो तो भी पढ़ने की जगह निकल आती है। छोटे अंशों और विरामों का एक रास्ता।
रास्ता देखिए →जब मन भारी हो
धीमे पढ़ने के लिए कुछ पन्ने। जितना मन चाहे, उतना ही पढ़िए।
रास्ता देखिए →अनन्त बिल्व: चेतना का एक दृष्टान्त
एक बिल्वफल के दृष्टान्त के साथ मन और जगत के प्रश्न में उतरिए।
पढ़िए →जिज्ञासा के साथ
पुस्तकालय को तीन तरह से देखिए
परिवार से पाठक तक
पढ़ने की जगह, लौटने की जगह
इस पुस्तकालय के पीछे लुल्ला परिवार की पढ़ने और याद रखने की कहानी है। यहाँ ग्रंथों के साथ परिवार की स्मृतियों के लिए भी जगह है। परिचय में उस यात्रा को पढ़िए; स्रोतों में देखिए कि किसी पाठ की बुनियाद क्या है।
काम और उसका फल
काम पूरा हो जाता है, पर मन परिणाम के दरवाज़े पर बैठा रहता है। गीता के दो श्लोकों के साथ एक विराम।
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