जिनके बिना ये कथाएँ अधूरी हैं। इन चुने हुए परिचयों में कुछ प्रसंग, संबंध और प्रश्न पिरोए गए हैं; साथ में मूल कथा तक जाने की राह है। हर परिचय अपना दायरा बताता है। यह बढ़ता हुआ संग्रह है, सभी पात्रों की सम्पूर्ण जीवनियाँ नहीं।
दो नई पात्र-यात्राएँ
- राम: एक प्रश्न से खुलती हुई यात्रा हिन्दी
वाल्मीकि के प्रश्न से चलिए और वनगमन के संक्षेप तक आइए। साथ रखने का मूल पाठ है बालकाण्ड 1.1 से 8 और 1.19 से 28।
- Arjuna: learning to ask, learning to choose अंग्रेज़ी
युद्धभूमि के प्रश्न, शिक्षा की प्रार्थना और अंत के उत्तर तक एक यात्रा; गीता 1.21 से 31, 2.7 और 18.63 से 73 साथ पढ़िए। यह विशेष परिचय अभी अंग्रेज़ी में उपलब्ध है।
एक संबंध के साथ आगे चलिए
राम के बाद सीता को साथ पढ़िए। अर्जुन के प्रश्न के लिए गीता का दूसरा अध्याय खोलिए। किसी और कठिनाई की ओर मन हो तो कर्ण से कृष्ण और कुन्ती के साथ उनके संवाद तक चलिए। अपने दिन की ओर लौटते हुए काम और उसके फल पर भी ठहर सकते हैं।
नए परिचयों में मूल प्रसंग का ठीक पता और स्वतंत्र पाठों की तुलना दी गई है। पाठकीय प्रश्न हमारी ओर से हैं; वे पात्रों के संवाद में जोड़े गए नए वचन नहीं हैं।






