लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग गउड़ी

राग · M1-M5 + कबीर, नामदेव, रविदास, बेणी

राग गउड़ी

एक शान्त कमरे में उतरती दिन की कोमल रोशनी: राग गउड़ी
रात की धुन, चिंतन के घंटों की।

गौड़ी राग ग्रंथ साहिब का सबसे विस्तृत राग है, अंग चौरानवें से लेकर तीन-सौ-छियालिस तक चलता है। कुल अंगों का क़रीब अठारह प्रतिशत हिस्सा इसी एक राग के नाम है।

शास्त्रीय परम्परा में यह रात्रि का राग है, गहरा, चिंतन-प्रवण। एकांत में बैठने का सुर, अंदर की ओर मुड़ने का। उत्तर-भारतीय परम्परा में अनेकानेक उप-राग गौड़ी से निकले हैं, और हर एक की अपनी विशेषता है।

"सिमरि सिमरि सिमरि सुखु पाइआ ॥" गउड़ी M5
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 1 (40)
  1. भउ मुचु भारा वडा तोलु ॥अंग 151
  2. डरि घरु घरि डरु डरि डरु जाइ ॥अंग 151
  3. माता मति पिता संतोखु ॥अंग 151
  4. पउणै पाणी अगनी का मेलु ॥अंग 152
  5. सुणि सुणि बूझै मानै नाउ ॥ ता कै सद बलिहारै जाउ ॥अंग 152
  6. जातो जाइ कहा ते आवै ॥अंग 152
  7. कामु क्रोधु माइआ महि चीतु ॥अंग 153
  8. उलटिओ कमलु ब्रहमु बीचारि ॥अंग 153
  9. सतिगुरु मिलै सु मरणु दिखाए ॥अंग 153
  10. किरतु पइआ नह मेटै कोइ ॥अंग 154
  11. जिनि अकथु कहाइआ अपिओ पीआइआ ॥अंग 154
  12. जनमि मरै त्रै गुण हितकारु ॥अंग 154
  13. अंम्रित काइआ रहै सुखाली बाजी इहु संसारो ॥अंग 154
  14. अवरि पंच हम एक जना किउ राखउ घर बारु मना ॥अंग 155
  15. मुंद्रा ते घट भीतरि मुंद्रा कांइआ कीजै खिंथाता ॥अंग 155
  16. अउखध मंत्र मूलु मन एकै जे करि द्रिड़ु चितु कीजै रे ॥अंग 156
  17. कत की माई बापु कत केरा किदू थावहु हम आए ॥अंग 156
  18. रैणि गवाई सोइ कै दिवसु गवाइआ खाइ ॥अंग 156
  19. हरणी होवा बनि बसा कंद मूल चुणि खाउ ॥अंग 157
  20. जै घरि कीरति आखीऐ करते का होइ बीचारो ॥अंग 157
  21. निधि सिधि निरमल नामु बीचारु ॥अंग 220
  22. मनु कुंचरु काइआ उदिआनै ॥अंग 221
  23. ना मनु मरै न कारजु होइ ॥अंग 222
  24. हउमै करतिआ नह सुखु होइ ॥अंग 222
  25. दूजी माइआ जगत चित वासु ॥अंग 223
  26. अधिआतम करम करे ता साचा ॥अंग 223
  27. खिमा गही ब्रतु सील संतोखं ॥अंग 223
  28. ऐसो दासु मिलै सुखु होई ॥अंग 224
  29. ब्रहमै गरबु कीआ नही जानिआ ॥अंग 224
  30. चोआ चंदनु अंकि चड़ावउ ॥अंग 225
  31. सेवा एक न जानसि अवरे ॥अंग 225
  32. हठु करि मरै न लेखै पावै ॥अंग 226
  33. हउमै करत भेखी नही जानिआ ॥अंग 226
  34. प्रथमे ब्रहमा कालै घरि आइआ ॥अंग 227
  35. बोलहि साचु मिथिआ नही राई ॥अंग 227
  36. रामि नामि चितु रापै जा का ॥अंग 228
  37. जिउ गाई कउ गोइली राखहि करि सारा ॥ अहिनिसि पालहि राखि लेहि आतम सुखु धारा ॥1॥अंग 228
  38. गुर परसादी बूझि ले तउ होइ निबेरा ॥अंग 229
  39. धन थीई दुबलि कंत हावै केव नैणी देखए ॥अंग 242
  40. किउ धीरैगी नाह बिना प्रभ वेपरवाहे ॥अंग 243
महला 3 (39)
  1. गुरि मिलिऐ हरि मेला होई ॥अंग 157
  2. गुर ते गिआनु पाए जनु कोइ ॥अंग 158
  3. सु थाउ सचु मनु निरमलु होइ ॥अंग 158
  4. इकि गावत रहे मनि सादु न पाइ ॥अंग 158
  5. मनु मारे धातु मरि जाइ ॥अंग 159
  6. हउमै विचि सभु जगु बउराना ॥अंग 159
  7. सो किउ विसरै जिस के जीअ पराना ॥अंग 159
  8. तूं अकथु किउ कथिआ जाहि ॥अंग 160
  9. एकसु ते सभि रूप हहि रंगा ॥अंग 160
  10. मनमुखि सूता माइआ मोहि पिआरि ॥अंग 160
  11. सचा अमरु सचा पातिसाहु ॥अंग 161
  12. जिना गुरमुखि धिआइआ तिन पूछउ जाइ ॥अंग 161
  13. गुर सेवा जुग चारे होई ॥अंग 161
  14. सतिगुरु मिलै वडभागि संजोग ॥अंग 162
  15. जैसी धरती ऊपरिमेघुला बरसतु है किआ धरती मधे पाणी नाही ॥अंग 162
  16. सभु जगु कालै वसि है बाधा दूजै भाइ ॥अंग 162
  17. पेईअड़ै दिन चारि है हरि हरि लिखि पाइआ ॥अंग 162
  18. सतिगुर ते गिआनु पाइआ हरि ततु बीचारा ॥अंग 163
  19. मन का सूतकु दूजा भाउ ॥अंग 229
  20. गुरमुखि सेवा प्रान अधारा ॥अंग 229
  21. इसु जुग का धरमु पड़हु तुम भाई ॥अंग 230
  22. ब्रहमा मूलु वेद अभिआसा ॥अंग 230
  23. ब्रहमा वेदु पड़ै वादु वखाणै ॥अंग 231
  24. त्रै गुण वखाणै भरमु न जाइ ॥अंग 231
  25. नामु अमोलकु गुरमुखि पावै ॥अंग 232
  26. मन ही मनु सवारिआ भै सहजि सुभाइ ॥अंग 232
  27. सतिगुर ते जो मुह फेरे ते वेमुख बुरे दिसंनि ॥अंग 233
  28. बिनु हरि पिआरे रहि न साकै गुर बिनु महलु न पाईऐ ॥अंग 243
  29. कापरु तनि सुहावै जा पिर भावै गुरमती चितु लाईऐ ॥अंग 244
  30. दुबिधा सहजि समाए कामणि वरु पाए गुरमती रंगु लाए ॥अंग 245
  31. सबदु खेवटु विचि पाए हरि आपि लघाए इन बिधि दुतरु तरीऐ ॥अंग 245
  32. घरि बैठिआ हरि पाए सदा चितु लाए सहजे सति सुभाए ॥अंग 246
  33. गउड़ी रागि सुलखणी जे खसमै चिति करेइ ॥अंग 311
  34. हउमै जगतु भुलाइआ दुरमति बिखिआ बिकार ॥अंग 312
  35. माइआधारी अति अंना बोला ॥अंग 313
  36. मनमुखु अहंकारी महलु न जाणै खिनु आगै खिनु पीछै ॥अंग 314
  37. जिनि गुरु गोपिआ आपणा तिसु ठउर न ठाउ ॥अंग 314
  38. मनमुखु अगिआनु दुरमति अहंकारी ॥अंग 314
  39. गुरमुखि गिआनु बिबेक बुधि होइ ॥अंग 317
महला 4 (109)
  1. पंडितु सासत सिम्रिति पड़िआ ॥अंग 163
  2. निरगुण कथा कथा है हरि की ॥अंग 164
  3. माता प्रीति करे पुतु खाइ ॥अंग 164
  4. भीखक प्रीति भीख प्रभ पाइ ॥अंग 164
  5. सतिगुर सेवा सफल है बणी ॥अंग 165
  6. हरि आपे जोगी डंडाधारी ॥अंग 165
  7. साहु हमारा तूं धणी जैसी तूं रासि देहि तैसी हम लेहि ॥अंग 165
  8. जिउ जननी गरभु पालती सुत की करि आसा ॥अंग 165
  9. हलु जोतै उदमु करे मेरा पुतु धी खाइ ॥अंग 166
  10. नित दिनसु राति लालचु करे भरमै भरमाइआ ॥अंग 166
  11. हमरै मनि चिति हरि आस नित किउ देखा हरि दरसु तुमारा ॥अंग 167
  12. घर मंदर घोड़े खुसी मनु अन रसि लाइआ ॥अंग 167
  13. जिउ जननी सुतु जणि पालती राखै नदरि मझारि ॥अंग 168
  14. जिसु मिलिऐ मनि होइ अनंदु सो सतिगुरु कहीऐ ॥अंग 168
  15. हरि दइआलि दइआ प्रभि कीनी मेरै मनि तनि मुखि हरि बोली ॥अंग 168
  16. जगजीवन अपरंपर सुआमी जगदीसुर पुरख बिधाते ॥अंग 169
  17. करहु क्रिपा जगजीवन दाते मेरा मनु हरि सेती राचे ॥अंग 169
  18. तुम दइआल सरब दुख भंजन इक बिनउ सुनहु दे काने ॥अंग 169
  19. मेरे मन सो प्रभु सदा नालि है सुआमी कहु किथै हरि पहु नसीऐ ॥अंग 170
  20. दइआ करहु हरि दरसु दिखावहु मेरै मनि तनि लोच घणेरी ॥1॥अंग 170
  21. इहु मनूआ खिनु न टिकै बहु रंगी दह दह दिसि चलि चलि हाढे ॥अंग 170
  22. कामि करोधि नगरु बहु भरिआ मिलि साधू खंडल खंडा हे ॥अंग 171
  23. इसु गड़ महि हरि राम राइ है किछु सादु न पावै धीठा ॥अंग 171
  24. हरि हरि अरथि सरीरु हम बेचिआ पूरे गुर कै आगे ॥अंग 171
  25. हम अहंकारी अहंकार अगिआन मति गुरि मिलिऐ आपु गवाइआ ॥अंग 172
  26. गुरमति बाजै सबदु अनाहदु गुरमति मनूआ गावै ॥अंग 172
  27. गुरमुखि जिंदू जपि नामु करंमा ॥अंग 172
  28. करहले मन परदेसीआ किउ मिलीऐ हरि माइ ॥अंग 234
  29. मन करहला वीचारीआ वीचारि देखु समालि ॥अंग 234
  30. सतिगुरु पुरखु दइआलु है जिस नो समतु सभु कोइ ॥अंग 300
  31. हउमै माइआ सभ बिखु है नित जगि तोटा संसारि ॥अंग 300
  32. तू सचा साहिबु सचु है सचु सचा गोसाई ॥अंग 301
  33. विणु नावै होरु सलाहणा सभु बोलणु फिका सादु ॥अंग 301
  34. सतिगुर हरि प्रभु दसि नामु धिआई मनि हरी ॥अंग 301
  35. तू आपे आपि निरंकारु है निरंजन हरि राइआ ॥अंग 301
  36. मन अंतरि हउमै रोगु है भ्रमि भूले मनमुख दुरजना ॥अंग 301
  37. मनु तनु रता रंग सिउ गुरमुखि हरि गुणतासु ॥अंग 301
  38. तू करता पुरखु अगंमु है किसु नालि तू वड़ीऐ ॥अंग 301
  39. मै मनि तनि प्रेमु पिरंम का अठे पहर लगंनि ॥अंग 301
  40. जिन अंदरि प्रीति पिरंम की जिउ बोलनि तिवै सोहंनि ॥अंग 301
  41. तू करता आपि अभुलु है भुलण विचि नाही ॥अंग 301
  42. सुणि साजन प्रेम संदेसरा अखी तार लगंनि ॥अंग 302
  43. सतिगुरु दाता दइआलु है जिस नो दइआ सदा होइ ॥अंग 302
  44. जिस नो साहिबु वडा करे सोई वड जाणी ॥अंग 302
  45. हरि सति निरंजन अमरु है निरभउ निरवैरु निरंकारु ॥अंग 302
  46. आपे धरती साजीअनु आपे आकासु ॥अंग 302
  47. तू सचा साहिबु सचु है सचु सचे भावै ॥अंग 302
  48. सतिगुरु धरती धरम है तिसु विचि जेहा को बीजे तेहा फलु पाए ॥अंग 302
  49. इकु मनु इकु वरतदा जितु लगै सो थाइ पाइ ॥अंग 303
  50. जिन हरि हिरदै सेविआ तिन हरि आपि मिलाए ॥अंग 303
  51. सतिगुर विचि वडी वडिआई जो अनदिनु हरि हरि नामु धिआवै ॥अंग 303
  52. पूरे गुर का हुकमु न मंनै ओहु मनमुखु अगिआनु मुठा बिखु माइआ ॥अंग 303
  53. सचु सचा सभ दू वडा है सो लए जिसु सतिगुरु टिके ॥अंग 304
  54. हरि प्रभ का सभु खेतु है हरि आपि किरसाणी लाइआ ॥अंग 304
  55. सारा दिनु लालचि अटिआ मनमुखि होरे गला ॥अंग 304
  56. तू वेपरवाहु अथाहु है अतुलु किउ तुलीऐ ॥अंग 304
  57. सतिगुर की सेवा निरमली निरमल जनु होइ सु सेवा घाले ॥अंग 304
  58. जिना अंदरि नामु निधानु हरि तिन के काज दयि आदे रासि ॥अंग 305
  59. तू साहिबु अगम दइआलु है वड दाता दाणा ॥अंग 305
  60. अगो दे सत भाउ न दिचै पिछो दे आखिआ कंमि न आवै ॥अंग 305
  61. गुर सतिगुर का जो सिखु अखाए सु भलके उठि हरि नामु धिआवै ॥अंग 305
  62. जो तुधु सचु धिआइदे से विरले थोड़े ॥अंग 306
  63. मलु जूई भरिआ नीला काला खिधोलड़ा तिनि वेमुखि वेमुखै नो पाइआ ॥अंग 306
  64. साहिबु जिस का नंगा भुखा होवै तिस दा नफरु किथहु रजि खाए ॥अंग 306
  65. नानक वीचारहि संत जन चारि वेद कहंदे ॥अंग 306
  66. सतिगुर सेती गणत जि रखै हलतु पलतु सभु तिस का गइआ ॥अंग 307
  67. तूहै सचा सचु तू सभ दू उपरि तू दीबाणु ॥अंग 307
  68. धुरि मारे पूरै सतिगुरू सेई हुणि सतिगुरि मारे ॥अंग 307
  69. जिन कउ आपि देइ वडिआई जगतु भी आपे आणि तिन कउ पैरी पाए ॥अंग 308
  70. तू सचा साहिबु आपि है सचु साह हमारे ॥अंग 308
  71. जिसु अंदरि ताति पराई होवै तिस दा कदे न होवी भला ॥अंग 308
  72. होदै परतखि गुरू जो विछुड़े तिन कउ दरि ढोई नाही ॥अंग 308
  73. जि होंदै गुरू बहि टिकिआ तिसु जन की वडिआई वडी होई ॥अंग 309
  74. काइआ कोटु अपारु है अंदरि हटनाले ॥अंग 309
  75. जो निंदा करे सतिगुर पूरे की सु अउखा जग महि होइआ ॥अंग 309
  76. वडभागीआ सोहागणी जिना गुरमुखि मिलिआ हरि राइ ॥अंग 309
  77. इहु सरीरु सभु धरमु है जिसु अंदरि सचे की विचि जोति ॥अंग 309
  78. सभि रस तिन कै रिदै हहि जिन हरि वसिआ मन माहि ॥अंग 310
  79. सा धरती भई हरीआवली जिथै मेरा सतिगुरु बैठा आइ ॥अंग 310
  80. सचु सचा सतिगुरु अमरु है जिसु अंदरि हरि उरि धारिआ ॥अंग 310
  81. करि किरपा सतिगुरु मेलिओनु मुखि गुरमुखि नामु धिआइसी ॥अंग 310
  82. गुरसिखा कै मनि भावदी गुर सतिगुर की वडिआई ॥अंग 310
  83. हउ आखि सलाही सिफति सचु सचु सचे की वडिआई ॥अंग 310
  84. जिना अंदरि उमरथल सेई जाणनि सूलीआ ॥अंग 311
  85. अउगणी भरिआ सरीरु है किउ संतहु निरमलु होइ ॥अंग 311
  86. सालाही सचु सालाहणा सचु सचा पुरखु निराले ॥अंग 311
  87. सतसंगति महि हरि उसतति है संगि साधू मिले पिआरिआ ॥अंग 311
  88. सचु सचे की सिफति सलाह है सो करे जिसु अंदरु भिजै ॥अंग 312
  89. साकत जाइ निवहि गुर आगै मनि खोटे कूड़ि कूड़िआरे ॥अंग 312
  90. सतिगुरु पुरखु अगंमु है जिसु अंदरि हरि उरि धारिआ ॥अंग 312
  91. सचु सुतिआ जिनी अराधिआ जा उठे ता सचु चवे ॥अंग 312
  92. किआ सवणा किआ जागणा गुरमुखि ते परवाणु ॥अंग 312
  93. सतिगुरु सेवीऐ आपणा पाईऐ नामु अपारु ॥अंग 313
  94. सचु सचे के जन भगत हहि सचु सचा जिनी अराधिआ ॥अंग 313
  95. मनमुखु प्राणी मुगधु है नामहीण भरमाइ ॥अंग 313
  96. गुरु सालाही आपणा बहु बिधि रंगि सुभाइ ॥अंग 313
  97. सचु सचा कुदरति जाणीऐ दिनु राती जिनि बणाईआ ॥अंग 313
  98. मै मनु तनु खोजि खोजेदिआ सो प्रभु लधा लोड़ि ॥अंग 313
  99. तू करता सभु किछु जाणदा जो जीआ अंदरि वरतै ॥अंग 314
  100. इहु मनूआ द्रिड़ु करि रखीऐ गुरमुखि लाईऐ चितु ॥अंग 314
  101. सा सेवा कीती सफल है जितु सतिगुर का मनु मंने ॥अंग 314
  102. जिन के चित कठोर हहि से बहहि न सतिगुर पासि ॥अंग 314
  103. तपा न होवै अंद्रहु लोभी नित माइआ नो फिरै जजमालिआ ॥अंग 315
  104. हरि भगतां हरि आराधिआ हरि की वडिआई ॥अंग 316
  105. मनमुख मूलहु भुलिआ विचि लबु लोभु अहंकारु ॥अंग 316
  106. जिना अंदरि दूजा भाउ है तिन॑ा गुरमुखि प्रीति न होइ ॥अंग 316
  107. जेवेहे करम कमावदा तेवेहे फलते ॥अंग 317
  108. सतिगुर के जीअ की सार न जापै कि पूरै सतिगुर भावै ॥अंग 317
  109. तूं सचा साहिबु अति वडा तुहि जेवडु तूं वड वडे ॥अंग 317
महला 5 (624)
  1. किन बिधि कुसलु होत मेरे भाई ॥अंग 175
  2. किउ भ्रमीऐ भ्रमु किस का होई ॥अंग 176
  3. कई जनम भए कीट पतंगा ॥अंग 176
  4. करम भूमि महि बोअहु नामु ॥अंग 176
  5. गुर का बचनु सदा अबिनासी ॥अंग 177
  6. जिनि कीता माटी ते रतनु ॥अंग 177
  7. तिस की सरणि नाही भउ सोगु ॥अंग 177
  8. सुणि हरि कथा उतारी मैलु ॥अंग 178
  9. अगले मुए सि पाछै परे ॥अंग 178
  10. अनिक जतन नही होत छुटारा ॥अंग 178
  11. बहुतु दरबु करि मनु न अघाना ॥अंग 179
  12. बहु रंग माइआ बहु बिधि पेखी ॥अंग 179
  13. तउ किरपा ते मारगु पाईऐ ॥अंग 180
  14. आन रसा जेते तै चाखे ॥अंग 180
  15. मनु मंदरु तनु साजी बारि ॥अंग 180
  16. रैणि दिनसु रहै इक रंगा ॥अंग 181
  17. तूं मेरा सखा तूंही मेरा मीतु ॥अंग 181
  18. नैनहु नीद पर द्रिसटि विकार ॥अंग 182
  19. जा कै वसि खान सुलतान ॥अंग 182
  20. सतिगुर दरसनि अगनि निवारी ॥अंग 183
  21. साधसंगि जपिओ भगवंतु ॥अंग 183
  22. बंधन तोड़ि बोलावै रामु ॥अंग 183
  23. जिसु मनि वसै तरै जनु सोइ ॥अंग 184
  24. जीअ जुगति जा कै है हाथ ॥अंग 184
  25. गुर परसादि नामि मनु लागा ॥अंग 184
  26. हसत पुनीत होहि ततकाल ॥अंग 185
  27. जो पराइओ सोई अपना ॥अंग 185
  28. कलिजुग महि मिलि आए संजोग ॥अंग 185
  29. हम धनवंत भागठ सच नाइ ॥अंग 185
  30. डरि डरि मरते जब जानीऐ दूरि ॥अंग 186
  31. जा का मीतु साजनु है समीआ ॥अंग 186
  32. जा कै दुखु सुखु सम करि जापै ॥अंग 186
  33. अगम रूप का मन महि थाना ॥अंग 186
  34. कवन रूपु तेरा आराधउ ॥अंग 186
  35. आपन तनु नही जा को गरबा ॥अंग 187
  36. गुर के चरण ऊपरि मेरे माथे ॥अंग 187
  37. रे मन मेरे तूं ता कउ आहि ॥ जा कै ऊणा कछहू नाहि ॥1॥अंग 187
  38. मीतु करै सोई हम माना ॥अंग 187
  39. जा कउ तुम भए समरथ अंगा ॥अंग 188
  40. दुलभ देह पाई वडभागी ॥अंग 188
  41. का की माई का को बाप ॥अंग 188
  42. वडे वडे जो दीसहि लोग ॥अंग 188
  43. पूरा मारगु पूरा इसनानु ॥अंग 188
  44. संत की धूरि मिटे अघ कोट ॥अंग 188
  45. हरि गुण जपत कमलु परगासै ॥अंग 189
  46. एकसु सिउ जा का मनु राता ॥अंग 189
  47. नामु भगत कै प्रान अधारु ॥अंग 189
  48. संत प्रसादि हरि नामु धिआइआ ॥अंग 189
  49. कर करि टहल रसना गुण गावउ ॥अंग 189
  50. जा कउ अपनी किरपा धारै ॥अंग 190
  51. छाडि सिआनप बहु चतुराई ॥अंग 190
  52. राखि लीआ गुरि पूरै आपि ॥अंग 190
  53. अनिक रसा खाए जैसे ढोर ॥अंग 190
  54. साधसंगि ता की सरनी परहु ॥अंग 191
  55. सूके हरे कीए खिन माहे ॥अंग 191
  56. ताप गए पाई प्रभि सांति ॥अंग 191
  57. भले दिनस भले संजोग ॥अंग 191
  58. गुर का सबदु राखु मन माहि ॥अंग 192
  59. जिसु सिमरत दूखु सभु जाइ ॥अंग 192
  60. भै महि रचिओ सभु संसारा ॥अंग 192
  61. तुमरी क्रिपा ते जपीऐ नाउ ॥अंग 192
  62. कण बिना जैसे थोथर तुखा ॥अंग 192
  63. तूं समरथु तूंहै मेरा सुआमी ॥अंग 193
  64. ता का दरसु पाईऐ वडभागी ॥अंग 193
  65. हरि सिमरत तेरी जाइ बलाइ ॥अंग 193
  66. हिरदै चरन कमल प्रभ धारे ॥अंग 193
  67. गुर जी के दरसन कउ बलि जाउ ॥अंग 193
  68. करै दुहकरम दिखावै होरु ॥अंग 194
  69. राम रंगु कदे उतरि न जाइ ॥अंग 194
  70. सिमरत सुआमी किलविख नासे ॥अंग 194
  71. हरि चरणी जा का मनु लागा ॥अंग 194
  72. हरि सिमरत सभि मिटहि कलेस ॥अंग 194
  73. जिस का दीआ पैनै खाइ ॥अंग 195
  74. प्रभ के चरन मन माहि धिआनु ॥अंग 195
  75. खादा पैनदा मूकरि पाइ ॥अंग 195
  76. अपने लोभ कउ कीनो मीतु ॥अंग 195
  77. कोटि बिघन हिरे खिन माहि ॥अंग 195
  78. करि किरपा भेटे गुर सोई ॥अंग 196
  79. बिखै राज ते अंधुला भारी ॥अंग 196
  80. आठ पहर संगी बटवारे ॥अंग 196
  81. थाती पाई हरि को नाम ॥अंग 196
  82. जलि थलि महीअलि पूरन हरि मीत ॥अंग 196
  83. हरि हरि नामि मजनु करि सूचे ॥अंग 197
  84. पउ सरणाई जिनि हरि जाते ॥अंग 197
  85. बाहरि राखिओ रिदै समालि ॥अंग 197
  86. धंनु इहु थानु गोविंद गुण गाए ॥अंग 197
  87. जो प्राणी गोविंदु धिआवै ॥अंग 197
  88. हरि के दास सिउ साकत नही संगु ॥अंग 198
  89. सा मति निरमल कहीअत धीर ॥अंग 198
  90. ऐसी प्रीति गोविंद सिउ लागी ॥अंग 198
  91. राम रसाइणि जो जन गीधे ॥अंग 198
  92. नितप्रति नावणु राम सरि कीजै ॥अंग 198
  93. सो किछु करि जितु मैलु न लागै ॥अंग 199
  94. जीवत छाडि जाहि देवाने ॥अंग 199
  95. गरीबा उपरि जि खिंजै दाड़ी ॥अंग 199
  96. महजरु झूठा कीतोनु आपि ॥अंग 199
  97. जन की धूरि मन मीठ खटानी ॥अंग 199
  98. जीवन पदवी हरि के दास ॥अंग 200
  99. सांति भई गुर गोबिदि पाई ॥अंग 200
  100. नेत्र प्रगासु कीआ गुरदेव ॥अंग 200
  101. धनु ओहु मसतकु धनु तेरे नेत ॥अंग 200
  102. तूंहै मसलति तूंहै नालि ॥अंग 200
  103. सतिगुरु पूरा भइआ क्रिपालु ॥अंग 200
  104. धोती खोलि विछाए हेठि ॥अंग 201
  105. थिरु घरि बैसहु हरि जन पिआरे ॥अंग 201
  106. हरि संगि राते भाहि न जलै ॥अंग 201
  107. उदमु करत सीतल मन भए ॥अंग 201
  108. कोटि मजन कीनो इसनान ॥अंग 202
  109. सिमरि सिमरि सिमरि सुखु पाइआ ॥अंग 202
  110. अपने सेवक कउ आपि सहाई ॥अंग 202
  111. राम को बलु पूरन भाई ॥अंग 202
  112. भुज बल बीर ब्रहम सुख सागर गरत परत गहि लेहु अंगुरीआ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 203
  113. तुझ बिनु घरी न जीवना ध्रिगु रहणा संसारि ॥अंग 203
  114. है कोई राम पिआरो गावै ॥अंग 203
  115. कवन गुन प्रानपति मिलउ मेरी माई ॥1॥ रहाउ ॥अंग 204
  116. प्रभ मिलबे कउ प्रीति मनि लागी ॥अंग 204
  117. निकसु रे पंखी सिमरि हरि पांख ॥अंग 204
  118. हरि पेखन कउ सिमरत मनु मेरा ॥अंग 204
  119. किन बिधि मिलै गुसाई मेरे राम राइ ॥अंग 204
  120. ऐसो परचउ पाइओ ॥अंग 205
  121. अउध घटै दिनसु रैनारे ॥अंग 205
  122. राखु पिता प्रभ मेरे ॥अंग 205
  123. ओहु अबिनासी राइआ ॥अंग 206
  124. छोडि छोडि रे बिखिआ के रसूआ ॥अंग 206
  125. तुझ बिनु कवनु हमारा ॥अंग 206
  126. तुझ बिनु कवनु रीझावै तोही ॥अंग 207
  127. मिलहु पिआरे जीआ ॥अंग 207
  128. हउ ता कै बलिहारी ॥अंग 207
  129. जोग जुगति सुनि आइओ गुर ते ॥अंग 208
  130. अनूप पदारथु नामु सुनहु सगल धिआइले मीता ॥अंग 208
  131. दइआ मइआ करि प्रानपति मोरे मोहि अनाथ सरणि प्रभ तोरी ॥अंग 208
  132. तुम हरि सेती राते संतहु ॥अंग 209
  133. सहजि समाइओ देव ॥अंग 209
  134. पारब्रहम पूरन परमेसुर मन ता की ओट गहीजै रे ॥अंग 209
  135. हरि हरि कबहू न मनहु बिसारे ॥अंग 210
  136. सुखु नाही रे हरि भगति बिना ॥अंग 210
  137. मन धर तरबे हरि नाम नो ॥अंग 210
  138. दीबानु हमारो तुही एक ॥अंग 210
  139. जीअरे ओल॑ा नाम का ॥अंग 211
  140. बारनै बलिहारनै लख बरीआ ॥अंग 211
  141. हरि हरि हरि आराधीऐ ॥अंग 211
  142. मन राम नाम गुन गाईऐ ॥अंग 211
  143. रसना जपीऐ एकु नाम ॥अंग 211
  144. जा कउ बिसरै राम नाम ताहू कउ पीर ॥अंग 212
  145. गरबु बडो मूलु इतनो ॥अंग 212
  146. मोहि दासरो ठाकुर को ॥अंग 212
  147. है कोई ऐसा हउमै तोरै ॥अंग 212
  148. चिंतामणि करुणा मए ॥1॥ रहाउ ॥अंग 212
  149. मेरे मन सरणि प्रभू सुख पाए ॥अंग 212
  150. मेरे मन गुरु गुरु गुरु सद करीऐ ॥अंग 213
  151. त्रिसना बिरले ही की बुझी हे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 213
  152. सभहू को रसु हरि हो ॥1॥ रहाउ ॥अंग 213
  153. गुन कीरति निधि मोरी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 213
  154. मातो हरि रंगि मातो ॥1॥ रहाउ ॥अंग 214
  155. हरि नामु लेहु मीता लेहु आगै बिखम पंथु भैआन ॥1॥ रहाउ ॥अंग 214
  156. पाइओ बाल बुधि सुखु रे ॥अंग 214
  157. भावनु तिआगिओ री तिआगिओ ॥अंग 214
  158. पाइआ लालु रतनु मनि पाइआ ॥अंग 215
  159. उबरत राजा राम की सरणी ॥अंग 215
  160. मो कउ इह बिधि को समझावै ॥अंग 215
  161. हरि बिनु अवर क्रिआ बिरथे ॥अंग 216
  162. गउड़ी माला 5 ॥अंग 216
  163. तूं मेरा बहु माणु करते तूं मेरा बहु माणु ॥अंग 217
  164. दुख भंजनु तेरा नामु जी दुख भंजनु तेरा नामु ॥अंग 218
  165. हरि राम राम राम रामा ॥अंग 218
  166. मीठे हरि गुण गाउ जिंदू तूं मीठे हरि गुण गाउ ॥अंग 218
  167. जब इहु मन महि करत गुमाना ॥अंग 235
  168. गुर सेवा ते नामे लागा ॥अंग 236
  169. गुर का सबदु रिद अंतरि धारै ॥अंग 236
  170. प्रथमे गरभ वास ते टरिआ ॥अंग 237
  171. जो इसु मारे सोई सूरा ॥अंग 237
  172. हरि सिउ जुरै त सभु को मीतु ॥अंग 238
  173. बिनु सिमरन जैसे सरप आरजारी ॥अंग 239
  174. गुर कै बचनि मोहि परम गति पाई ॥अंग 239
  175. तिसु गुर कउ सिमरउ सासि सासि ॥अंग 239
  176. मिलु मेरे गोबिंद अपना नामु देहु ॥अंग 240
  177. आदि मधि जो अंति निबाहै ॥ सो साजनु मेरा मनु चाहै ॥1॥अंग 240
  178. खोजत फिरे असंख अंतु न पारीआ ॥अंग 240
  179. नाराइण हरि रंग रंगो ॥अंग 241
  180. हरि हरि गुरु गुरु करत भरम गए ॥अंग 241
  181. रंग संगि बिखिआ के भोगा इन संगि अंध न जानी ॥1॥अंग 242
  182. पुरखो बिधाता एकु स्रीधरु किउ मिलह तुझै उडीणीआ ॥अंग 247
  183. मोहन तेरे ऊचे मंदर महल अपारा ॥अंग 248
  184. पतित असंख पुनीत करि पुनह पुनह बलिहार ॥अंग 248
  185. जपि मना तूं राम नराइणु गोविंदा हरि माधो ॥अंग 248
  186. सुणि सखीए मिलि उदमु करेहा मनाइ लैहि हरि कंतै ॥अंग 249
  187. गुरदेव माता गुरदेव पिता गुरदेव सुआमी परमेसुरा ॥अंग 250
  188. आपहि कीआ कराइआ आपहि करनै जोगु ॥अंग 250
  189. ओअं साध सतिगुर नमसकारं ॥अंग 250
  190. निरंकार आकार आपि निरगुन सरगुन एक ॥अंग 250
  191. ओअं गुरमुखि कीओ अकारा ॥अंग 250
  192. सेई साह भगवंत से सचु संपै हरि रासि ॥अंग 250
  193. ससा सति सति सति सोऊ ॥अंग 250
  194. धनु धनु कहा पुकारते माइआ मोह सभ कूर ॥अंग 250
  195. धधा धूरि पुनीत तेरे जनूआ ॥अंग 251
  196. अनिक भेख अरु ङिआन धिआन मनहठि मिलिअउ न कोइ ॥अंग 251
  197. ङंङा ङिआनु नही मुख बातउ ॥अंग 251
  198. आवन आए स्रिसटि महि बिनु बूझे पसु ढोर ॥अंग 251
  199. या जुग महि एकहि कउ आइआ ॥अंग 251
  200. आवत हुकमि बिनास हुकमि आगिआ भिंन न कोइ ॥अंग 251
  201. एऊ जीअ बहुतु ग्रभ वासे ॥अंग 251
  202. किरत कमावन सुभ असुभ कीने तिनि प्रभि आपि ॥अंग 251
  203. एकहि आपि करावनहारा ॥अंग 251
  204. राचि रहे बनिता बिनोद कुसम रंग बिख सोर ॥अंग 251
  205. रे मन बिनु हरि जह रचहु तह तह बंधन पाहि ॥अंग 252
  206. टूटे बंधन जासु के होआ साधू संगु ॥अंग 252
  207. रारा रंगहु इआ मनु अपना ॥अंग 252
  208. लालच झूठ बिकार मोह बिआपत मूड़े अंध ॥अंग 252
  209. लला लपटि बिखै रस राते ॥अंग 252
  210. लाल गुपाल गोबिंद प्रभ गहिर गंभीर अथाह ॥अंग 252
  211. लला ता कै लवै न कोऊ ॥अंग 252
  212. आतम रसु जिह जानिआ हरि रंग सहजे माणु ॥अंग 252
  213. आइआ सफल ताहू को गनीऐ ॥अंग 252
  214. यासु जपत मनि होइ अनंदु बिनसै दूजा भाउ ॥ दूख दरद त्रिसना बुझै नानक नामि समाउ ॥1॥अंग 252
  215. यया जारउ दुरमति दोऊ ॥अंग 253
  216. अंतरि मन तन बसि रहे ईत ऊत के मीत ॥अंग 253
  217. अनदिनु सिमरहु तासु कउ जो अंति सहाई होइ ॥अंग 253
  218. अति सुंदर कुलीन चतुर मुखि ङिआनी धनवंत ॥अंग 253
  219. ङंङा खटु सासत्र होइ ङिआता ॥अंग 253
  220. कुंट चारि दह दिसि भ्रमे करम किरति की रेख ॥अंग 253
  221. कका कारन करता सोऊ ॥अंग 253
  222. खात खरचत बिलछत रहे टूटि न जाहि भंडार ॥अंग 253
  223. खखा खूना कछु नही तिसु संम्रथ कै पाहि ॥अंग 253
  224. गनि मिनि देखहु मनै माहि सरपर चलनो लोग ॥अंग 254
  225. गगा गोबिद गुण रवहु सासि सासि जपि नीत ॥अंग 254
  226. घोखे सासत्र बेद सभ आन न कथतउ कोइ ॥अंग 254
  227. घघा घालहु मनहि एह बिनु हरि दूसर नाहि ॥अंग 254
  228. ङणि घाले सभ दिवस सास नह बढन घटन तिलु सार ॥अंग 254
  229. ङंङा ङ्रासै कालु तिह जो साकत प्रभि कीन ॥अंग 254
  230. चिति चितवउ चरणारबिंद ऊध कवल बिगसांत ॥अंग 254
  231. चचा चरन कमल गुर लागा ॥ धनि धनि उआ दिन संजोग सभागा ॥अंग 254
  232. छाती सीतल मनु सुखी छंत गोबिद गुन गाइ ॥अंग 254
  233. छछा छोहरे दास तुमारे ॥अंग 254
  234. जोर जुलम फूलहि घनो काची देह बिकार ॥अंग 255
  235. जजा जानै हउ कछु हूआ ॥अंग 255
  236. झालाघे उठि नामु जपि निसि बासुर आराधि ॥अंग 255
  237. झझा झूरनु मिटै तुमारो ॥अंग 255
  238. ञतन करहु तुम अनिक बिधि रहनु न पावहु मीत ॥अंग 255
  239. ञंञा ञाणहु द्रिड़ु सही बिनसि जात एह हेत ॥अंग 255
  240. टूटे बंधन जनम मरन साध सेव सुखु पाइ ॥अंग 255
  241. टहल करहु तउ एक की जा ते ब्रिथा न कोइ ॥अंग 255
  242. ठाक न होती तिनहु दरि जिह होवहु सुप्रसंन ॥अंग 255
  243. ठठा मनूआ ठाहहि नाही ॥ जो सगल तिआगि एकहि लपटाही ॥अंग 256
  244. डंडउति बंदन अनिक बार सरब कला समरथ ॥अंग 256
  245. डडा डेरा इहु नही जह डेरा तह जानु ॥अंग 256
  246. ढाहन लागे धरम राइ किनहि न घालिओ बंध ॥अंग 256
  247. ढढा ढूढत कह फिरहु ढूढनु इआ मन माहि ॥अंग 256
  248. जह साधू गोबिद भजनु कीरतनु नानक नीत ॥अंग 256
  249. णाणा रण ते सीझीऐ आतम जीतै कोइ ॥अंग 256
  250. तनु मनु धनु अरपउ तिसै प्रभू मिलावै मोहि ॥अंग 256
  251. तता ता सिउ प्रीति करि गुण निधि गोबिद राइ ॥अंग 256
  252. थाके बहु बिधि घालते त्रिपति न त्रिसना लाथ ॥अंग 257
  253. थथा थिरु कोऊ नही काइ पसारहु पाव ॥अंग 257
  254. दासह एकु निहारिआ सभु कछु देवनहार ॥अंग 257
  255. ददा दाता एकु है सभ कउ देवनहार ॥अंग 257
  256. धर जीअरे इक टेक तू लाहि बिडानी आस ॥अंग 257
  257. धधा धावत तउ मिटै संतसंगि होइ बासु ॥अंग 257
  258. नानक नामु नामु जपु जपिआ अंतरि बाहरि रंगि ॥अंग 257
  259. नंना नरकि परहि ते नाही ॥ जा कै मनि तनि नामु बसाही ॥अंग 257
  260. पति राखी गुरि पारब्रहम तजि परपंच मोह बिकार ॥अंग 258
  261. पपा परमिति पारु न पाइआ ॥अंग 258
  262. फाहे काटे मिटे गवन फतिह भई मनि जीत ॥अंग 258
  263. फफा फिरत फिरत तू आइआ ॥अंग 258
  264. बिनउ सुनहु तुम पारब्रहम दीन दइआल गुपाल ॥अंग 258
  265. बबा ब्रहमु जानत ते ब्रहमा ॥अंग 258
  266. भै भंजन अघ दूख नास मनहि अराधि हरे ॥अंग 258
  267. भभा भरमु मिटावहु अपना ॥अंग 258
  268. माइआ डोलै बहु बिधी मनु लपटिओ तिह संग ॥अंग 258
  269. ममा मागनहार इआना ॥अंग 258
  270. मति पूरी परधान ते गुर पूरे मन मंत ॥अंग 259
  271. ममा जाहू मरमु पछाना ॥ भेटत साधसंग पतीआना ॥अंग 259
  272. यार मीत सुनि साजनहु बिनु हरि छूटनु नाहि ॥अंग 259
  273. यया जतन करत बहु बिधीआ ॥अंग 259
  274. रोसु न काहू संग करहु आपन आपु बीचारि ॥अंग 259
  275. रारा रेन होत सभ जा की ॥अंग 259
  276. लालच झूठ बिखै बिआधि इआ देही महि बास ॥अंग 259
  277. लला लावउ अउखध जाहू ॥अंग 259
  278. वासुदेव सरबत्र मै ऊन न कतहू ठाइ ॥अंग 259
  279. ववा वैरु न करीऐ काहू ॥अंग 259
  280. हउ हउ करत बिहानीआ साकत मुगध अजान ॥अंग 260
  281. ड़ाड़ा ड़ाड़ि मिटै संगि साधू ॥अंग 260
  282. साधू की मन ओट गहु उकति सिआनप तिआगु ॥अंग 260
  283. ससा सरनि परे अब हारे ॥ सासत्र सिम्रिति बेद पूकारे ॥अंग 260
  284. खुदी मिटी तब सुख भए मन तन भए अरोग ॥अंग 260
  285. खखा खरा सराहउ ताहू ॥अंग 260
  286. सति कहउ सुनि मन मेरे सरनि परहु हरि राइ ॥अंग 260
  287. ससा सिआनप छाडु इआना ॥अंग 260
  288. हरि हरि मुख ते बोलना मनि वूठै सुखु होइ ॥अंग 260
  289. हेरउ घटि घटि सगल कै पूरि रहे भगवान ॥अंग 260
  290. लेखै कतहि न छूटीऐ खिनु खिनु भूलनहार ॥अंग 261
  291. लूण हरामी गुनहगार बेगाना अलप मति ॥अंग 261
  292. खात पीत खेलत हसत भरमे जनम अनेक ॥अंग 261
  293. खेलत खेलत आइओ अनिक जोनि दुख पाइ ॥अंग 261
  294. आए प्रभ सरनागती किरपा निधि दइआल ॥अंग 261
  295. अखर महि त्रिभवन प्रभि धारे ॥अंग 261
  296. हथि कलंम अगंम मसतकि लिखावती ॥अंग 261
  297. हे अचुत हे पारब्रहम अबिनासी अघनास ॥अंग 261
  298. गुरदेव माता गुरदेव पिता गुरदेव सुआमी परमेसुरा ॥अंग 262
  299. आदि गुरए नमह ॥अंग 262
  300. सिमरउ सिमरि सिमरि सुखु पावउ ॥अंग 262
  301. सुखमनी सुख अंम्रित प्रभ नामु ॥अंग 262
  302. प्रभ कै सिमरनि रिधि सिधि नउ निधि ॥अंग 262
  303. प्रभ का सिमरनु सभ ते ऊचा ॥अंग 263
  304. प्रभ कउ सिमरहि से धनवंते ॥अंग 263
  305. प्रभ कउ सिमरहि से परउपकारी ॥अंग 263
  306. प्रभ कै सिमरनि कारज पूरे ॥अंग 263
  307. हरि सिमरनु करि भगत प्रगटाए ॥अंग 263
  308. दीन दरद दुख भंजना घटि घटि नाथ अनाथ ॥अंग 263
  309. जह मात पिता सुत मीत न भाई ॥अंग 264
  310. सगल स्रिसटि को राजा दुखीआ ॥अंग 264
  311. छूटत नही कोटि लख बाही ॥अंग 264
  312. जिह मारग के गने जाहि न कोसा ॥अंग 264
  313. भगत जना की बरतनि नामु ॥अंग 264
  314. हरि का नामु जन कउ मुकति जुगति ॥अंग 264
  315. हरि हरि जन कै मालु खजीना ॥अंग 265
  316. पारजातु इहु हरि को नाम ॥अंग 265
  317. बहु सासत्र बहु सिम्रिती पेखे सरब ढढोलि ॥अंग 265
  318. जाप ताप गिआन सभि धिआन ॥अंग 265
  319. नउ खंड प्रिथमी फिरै चिरु जीवै ॥अंग 265
  320. मन कामना तीरथ देह छुटै ॥अंग 265
  321. बहुतु सिआणप जम का भउ बिआपै ॥अंग 265
  322. चारि पदारथ जे को मागै ॥अंग 266
  323. सगल पुरख महि पुरखु प्रधानु ॥अंग 266
  324. निरधन कउ धनु तेरो नाउ ॥अंग 266
  325. सरब धरम महि स्रेसट धरमु ॥अंग 266
  326. निरगुनीआर इआनिआ सो प्रभु सदा समालि ॥अंग 266
  327. रमईआ के गुन चेति परानी ॥अंग 266
  328. जिह प्रसादि धर ऊपरि सुखि बसहि ॥अंग 267
  329. आदि अंति जो राखनहारु ॥अंग 267
  330. रतनु तिआगि कउडी संगि रचै ॥अंग 267
  331. करतूति पसू की मानस जाति ॥अंग 267
  332. सुनि अंधा कैसे मारगु पावै ॥अंग 267
  333. संगि सहाई सु आवै न चीति ॥अंग 267
  334. तू ठाकुरु तुम पहि अरदासि ॥अंग 268
  335. देनहारु प्रभ छोडि कै लागहि आन सुआइ ॥अंग 268
  336. दस बसतू ले पाछै पावै ॥अंग 268
  337. अगनत साहु अपनी दे रासि ॥अंग 268
  338. अनिक भाति माइआ के हेत ॥ सरपर होवत जानु अनेत ॥अंग 268
  339. मिथिआ तनु धनु कुटंबु सबाइआ ॥अंग 268
  340. मिथिआ स्रवन पर निंदा सुनहि ॥अंग 268
  341. बिरथी साकत की आरजा ॥अंग 269
  342. रहत अवर कछु अवर कमावत ॥अंग 269
  343. करउ बेनती पारब्रहमु सभु जानै ॥अंग 269
  344. काम क्रोध अरु लोभ मोह बिनसि जाइ अहंमेव ॥अंग 269
  345. जिह प्रसादि छतीह अंम्रित खाहि ॥अंग 269
  346. जिह प्रसादि पाट पटंबर हढावहि ॥अंग 269
  347. जिह प्रसादि आरोग कंचन देही ॥अंग 270
  348. जिह प्रसादि आभूखन पहिरीजै ॥अंग 270
  349. जिह प्रसादि करहि पुंन बहु दान ॥अंग 270
  350. जिह प्रसादि सुनहि करन नाद ॥अंग 270
  351. जिह प्रसादि तूं प्रगटु संसारि ॥अंग 270
  352. आपि जपाए जपै सो नाउ ॥अंग 270
  353. अगम अगाधि पारब्रहमु सोइ ॥अंग 271
  354. साध कै संगि मुख ऊजल होत ॥अंग 271
  355. साध कै संगि अगोचरु मिलै ॥अंग 271
  356. साधसंगि दुसमन सभि मीत ॥अंग 271
  357. साध कै संगि न कबहू धावै ॥अंग 271
  358. साध कै संगि सभ कुल उधारै ॥अंग 271
  359. साध कै संगि नही कछु घाल ॥अंग 272
  360. साध कै संगि सुनउ हरि नाउ ॥अंग 272
  361. साध की महिमा बेद न जानहि ॥अंग 272
  362. मनि साचा मुखि साचा सोइ ॥अंग 272
  363. ब्रहम गिआनी सदा निरलेप ॥अंग 272
  364. ब्रहम गिआनी निरमल ते निरमला ॥अंग 272
  365. ब्रहम गिआनी सगल की रीना ॥अंग 272
  366. ब्रहम गिआनी एक ऊपरि आस ॥अंग 273
  367. ब्रहम गिआनी कै एकै रंग ॥अंग 273
  368. ब्रहम गिआनी ब्रहम का बेता ॥अंग 273
  369. ब्रहम गिआनी की कीमति नाहि ॥अंग 273
  370. ब्रहम गिआनी सभ स्रिसटि का करता ॥अंग 273
  371. उरि धारै जो अंतरि नामु ॥अंग 274
  372. मिथिआ नाही रसना परस ॥अंग 274
  373. बैसनो सो जिसु ऊपरि सुप्रसंन ॥अंग 274
  374. भगउती भगवंत भगति का रंगु ॥अंग 274
  375. सो पंडितु जो मनु परबोधै ॥अंग 274
  376. बीज मंत्रु सरब को गिआनु ॥अंग 274
  377. जिस कै मनि पारब्रहम का निवासु ॥अंग 274
  378. प्रभ की आगिआ आतम हितावै ॥अंग 275
  379. पारब्रहम के सगले ठाउ ॥अंग 275
  380. उसतति करहि अनेक जन अंतु न पारावार ॥अंग 275
  381. कई कोटि होए पूजारी ॥अंग 275
  382. कई कोटि भए अभिमानी ॥अंग 275
  383. कई कोटि सिध जती जोगी ॥अंग 275
  384. कई कोटि राजस तामस सातक ॥अंग 276
  385. कई कोटि पाताल के वासी ॥अंग 276
  386. कई कोटि भए बैरागी ॥अंग 276
  387. कई कोटि खाणी अरु खंड ॥अंग 276
  388. कई कोटि पारब्रहम के दास ॥अंग 276
  389. करण कारण प्रभु एकु है दूसर नाही कोइ ॥अंग 276
  390. करन करावन करनै जोगु ॥अंग 276
  391. प्रभ भावै मानुख गति पावै ॥अंग 277
  392. कहु मानुख ते किआ होइ आवै ॥अंग 277
  393. खिन महि नीच कीट कउ राज ॥अंग 277
  394. इस का बलु नाही इसु हाथ ॥अंग 277
  395. कबहू निरति करै बहु भाति ॥अंग 277
  396. कबहू होइ पंडितु करे बख्यानु ॥अंग 277
  397. कबहू साधसंगति इहु पावै ॥अंग 278
  398. सुखी बसै मसकीनीआ आपु निवारि तले ॥अंग 278
  399. जिस कै अंतरि राज अभिमानु ॥अंग 278
  400. धनवंता होइ करि गरबावै ॥अंग 278
  401. कोटि करम करै हउ धारे ॥अंग 278
  402. जब लगु जानै मुझ ते कछु होइ ॥अंग 278
  403. सहस खटे लख कउ उठि धावै ॥अंग 278
  404. करन करावन करनैहारु ॥अंग 279
  405. आपि उपदेसै समझै आपि ॥अंग 279
  406. सति सति सति प्रभु सुआमी ॥अंग 279
  407. संत सरनि जो जनु परै सो जनु उधरनहार ॥अंग 279
  408. संत कै दूखनि आरजा घटै ॥अंग 279
  409. संत के दूखन ते मुखु भवै ॥अंग 279
  410. संत का निंदकु महा अतताई ॥अंग 280
  411. संत का दोखी सदा अपवितु ॥अंग 280
  412. संत का दोखी अध बीच ते टूटै ॥अंग 280
  413. संत का दोखी इउ बिललाइ ॥अंग 280
  414. संत का दोखी बिगड़ रूपु होइ जाइ ॥अंग 280
  415. सभ घट तिस के ओहु करनैहारु ॥अंग 280
  416. तजहु सिआनप सुरि जनहु सिमरहु हरि हरि राइ ॥अंग 281
  417. मानुख की टेक ब्रिथी सभ जानु ॥अंग 281
  418. उसतति मन महि करि निरंकार ॥अंग 281
  419. बडभागी ते जन जग माहि ॥अंग 281
  420. गुर प्रसादि आपन आपु सुझै ॥अंग 281
  421. जिस कउ हरि प्रभु मनि चिति आवै ॥अंग 281
  422. नह किछु जनमै नह किछु मरै ॥अंग 281
  423. जिन प्रभु जाता सु सोभावंत ॥अंग 282
  424. जो किछु करै सु प्रभ कै रंगि ॥अंग 282
  425. सरब कला भरपूर प्रभ बिरथा जाननहार ॥अंग 282
  426. टूटी गाढनहार गोुपाल ॥अंग 282
  427. रूपवंतु होइ नाही मोहै ॥अंग 282
  428. जिउ मंदर कउ थामै थंमनु ॥अंग 282
  429. मन मूरख काहे बिललाईऐ ॥अंग 282
  430. जिसु वखर कउ लैनि तू आइआ ॥अंग 283
  431. चरन साध के धोइ धोइ पीउ ॥अंग 283
  432. मिरतक कउ जीवालनहार ॥अंग 283
  433. जा कै मनि गुर की परतीति ॥अंग 283
  434. रूपु न रेख न रंगु किछु त्रिहु गुण ते प्रभ भिंन ॥अंग 283
  435. अबिनासी प्रभु मन महि राखु ॥अंग 283
  436. मनसा पूरन सरना जोग ॥अंग 284
  437. जा की लीला की मिति नाहि ॥अंग 284
  438. नाना रूप नाना जा के रंग ॥अंग 284
  439. नाम के धारे सगले जंत ॥अंग 284
  440. रूपु सति जा का सति असथानु ॥अंग 284
  441. सति बचन साधू उपदेस ॥अंग 284
  442. बिसमन बिसम भए बिसमाद ॥अंग 285
  443. आदि सचु जुगादि सचु ॥अंग 285
  444. चरन सति सति परसनहार ॥अंग 285
  445. सति सरूपु रिदै जिनि मानिआ ॥अंग 285
  446. ठाकुर का सेवकु आगिआकारी ॥अंग 285
  447. अपुने जन का परदा ढाकै ॥अंग 285
  448. नीकी कीरी महि कल राखै ॥अंग 285
  449. बारं बार बार प्रभु जपीऐ ॥अंग 286
  450. बोलहु जसु जिहबा दिनु राति ॥अंग 286
  451. मन मेरे तिन की ओट लेहि ॥अंग 286
  452. सति पुरखु जिनि जानिआ सतिगुरु तिस का नाउ ॥अंग 286
  453. सतिगुरु सिख की करै प्रतिपाल ॥अंग 286
  454. गुर कै ग्रिहि सेवकु जो रहै ॥अंग 286
  455. बीस बिसवे गुर का मनु मानै ॥अंग 287
  456. सफल दरसनु पेखत पुनीत ॥अंग 287
  457. जिहबा एक उसतति अनेक ॥अंग 287
  458. इहु हरि रसु पावै जनु कोइ ॥अंग 287
  459. तपति माहि ठाढि वरताई ॥अंग 287
  460. निरगुनु आपि सरगुनु भी ओही ॥अंग 287
  461. साथि न चालै बिनु भजन बिखिआ सगली छारु ॥अंग 288
  462. संत जना मिलि करहु बीचारु ॥अंग 288
  463. जिसु धन कउ चारि कुंट उठि धावहि ॥अंग 288
  464. मनु परबोधहु हरि कै नाइ ॥अंग 288
  465. ततु बीचारु कहै जनु साचा ॥अंग 288
  466. संगि न चालसि तेरै धना ॥अंग 288
  467. गुर की मति तूं लेहि इआने ॥अंग 288
  468. गुन गावत तेरी उतरसि मैलु ॥अंग 289
  469. एको जपि एको सालाहि ॥अंग 289
  470. फिरत फिरत प्रभ आइआ परिआ तउ सरनाइ ॥अंग 289
  471. जाचक जनु जाचै प्रभ दानु ॥अंग 289
  472. प्रभ की द्रिसटि महा सुखु होइ ॥अंग 289
  473. सेवक की मनसा पूरी भई ॥अंग 289
  474. सो किउ बिसरै जि घाल न भानै ॥अंग 289
  475. साजन संत करहु इहु कामु ॥अंग 290
  476. उपजी प्रीति प्रेम रसु चाउ ॥अंग 290
  477. प्रभ बखसंद दीन दइआल ॥अंग 290
  478. सरब बैकुंठ मुकति मोख पाए ॥अंग 290
  479. सरगुन निरगुन निरंकार सुंन समाधी आपि ॥अंग 290
  480. जब अकारु इहु कछु न द्रिसटेता ॥अंग 290
  481. जब होवत प्रभ केवल धनी ॥अंग 291
  482. अबिनासी सुख आपन आसन ॥अंग 291
  483. जह निरमल पुरखु पुरख पति होता ॥अंग 291
  484. जब अपनी सोभा आपन संगि बनाई ॥अंग 291
  485. जह अछल अछेद अभेद समाइआ ॥अंग 291
  486. जह आपि रचिओ परपंचु अकारु ॥अंग 291
  487. जह अबिगतु भगतु तह आपि ॥अंग 292
  488. जीअ जंत के ठाकुरा आपे वरतणहार ॥अंग 292
  489. आपि कथै आपि सुननैहारु ॥अंग 292
  490. जीअ जंत्र सभ ता कै हाथ ॥अंग 292
  491. पूरन पूरि रहे दइआल ॥अंग 292
  492. जनु लागा हरि एकै नाइ ॥अंग 292
  493. साधसंगि मिलि करहु अनंद ॥अंग 293
  494. हलतु पलतु दुइ लेहु सवारि ॥अंग 293
  495. तिस ते दूरि कहा को जाइ ॥अंग 293
  496. मति पूरी अंम्रितु जा की द्रिसटि ॥अंग 293
  497. गिआन अंजनु गुरि दीआ अगिआन अंधेर बिनासु ॥अंग 293
  498. संतसंगि अंतरि प्रभु डीठा ॥अंग 293
  499. सो अंतरि सो बाहरि अनंत ॥अंग 293
  500. बेद पुरान सिंम्रिति महि देखु ॥अंग 294
  501. संत जना का पेखनु सभु ब्रहम ॥अंग 294
  502. आपि सति कीआ सभु सति ॥अंग 294
  503. सरब भूत आपि वरतारा ॥अंग 294
  504. इस ते होइ सु नाही बुरा ॥अंग 294
  505. जो जानै तिसु सदा सुखु होइ ॥अंग 294
  506. पूरा प्रभु आराधिआ पूरा जा का नाउ ॥अंग 295
  507. पूरे गुर का सुनि उपदेसु ॥अंग 295
  508. खेम कुसल सहज आनंद ॥अंग 295
  509. उतम सलोक साध के बचन ॥अंग 295
  510. सरनि जोगु सुनि सरनी आए ॥अंग 295
  511. प्रभ की उसतति करहु संत मीत ॥अंग 295
  512. खेम सांति रिधि नव निधि ॥अंग 295
  513. इहु निधानु जपै मनि कोइ ॥अंग 296
  514. जिसु मनि बसै सुनै लाइ प्रीति ॥अंग 296
  515. जलि थलि महीअलि पूरिआ सुआमी सिरजनहारु ॥अंग 296
  516. एकम एकंकारु प्रभु करउ बंदना धिआइ ॥अंग 296
  517. करउ बंदना अनिक वार सरनि परउ हरि राइ ॥अंग 296
  518. दुतीआ दुरमति दूरि करि गुर सेवा करि नीत ॥अंग 296
  519. तीनि बिआपहि जगत कउ तुरीआ पावै कोइ ॥अंग 297
  520. त्रितीआ त्रै गुण बिखै फल कब उतम कब नीचु ॥अंग 297
  521. चतुर सिआणा सुघड़ु सोइ जिनि तजिआ अभिमानु ॥अंग 297
  522. चतुरथि चारे बेद सुणि सोधिओ ततु बीचारु ॥अंग 297
  523. पंच बिकार मन महि बसे राचे माइआ संगि ॥अंग 297
  524. पंचमि पंच प्रधान ते जिह जानिओ परपंचु ॥अंग 297
  525. खट सासत्र ऊचौ कहहि अंतु न पारावार ॥अंग 297
  526. खसटमि खट सासत्र कहहि सिंम्रिति कथहि अनेक ॥अंग 297
  527. संत मंडल हरि जसु कथहि बोलहि सति सुभाइ ॥अंग 298
  528. सपतमि संचहु नाम धनु टूटि न जाहि भंडार ॥अंग 298
  529. आठ पहर गुन गाईअहि तजीअहि अवरि जंजाल ॥अंग 298
  530. असटमी असट सिधि नव निधि ॥अंग 298
  531. नाराइणु नह सिमरिओ मोहिओ सुआद बिकार ॥अंग 298
  532. नउमी नवे छिद्र अपवीत ॥अंग 298
  533. दस दिस खोजत मै फिरिओ जत देखउ तत सोइ ॥अंग 298
  534. दसमी दस दुआर बसि कीने ॥अंग 298
  535. एको एकु बखानीऐ बिरला जाणै स्वादु ॥अंग 299
  536. एकादसी निकटि पेखहु हरि रामु ॥अंग 299
  537. दुरमति हरी सेवा करी भेटे साध क्रिपाल ॥अंग 299
  538. दुआदसी दानु नामु इसनानु ॥अंग 299
  539. तीनि गुणा महि बिआपिआ पूरन होत न काम ॥अंग 299
  540. त्रउदसी तीनि ताप संसार ॥अंग 299
  541. चारि कुंट चउदह भवन सगल बिआपत राम ॥अंग 299
  542. चउदहि चारि कुंट प्रभ आप ॥अंग 299
  543. आतमु जीता गुरमती गुण गाए गोबिंद ॥अंग 299
  544. अमावस आतम सुखी भए संतोखु दीआ गुरदेव ॥अंग 299
  545. पूरनु कबहु न डोलता पूरा कीआ प्रभ आपि ॥अंग 300
  546. पूरनमा पूरन प्रभ एकु करण कारण समरथु ॥अंग 300
  547. दुख बिनसे सहसा गइओ सरनि गही हरि राइ ॥अंग 300
  548. कोई गावै को सुणै कोई करै बीचारु ॥अंग 300
  549. रहदे खुहदे निंदक मारिअनु करि आपे आहरु ॥अंग 315
  550. मुंढहु भुले मुंढ ते किथै पाइनि हथु ॥अंग 315
  551. पउड़ी 5 ॥अंग 315
  552. सेवक सचे साह के सेई परवाणु ॥अंग 315
  553. जो धुरि लिखिआ लेखु प्रभ मेटणा न जाइ ॥अंग 315
  554. पउड़ी 5 ॥अंग 315
  555. नरक घोर बहु दुख घणे अकिरतघणा का थानु ॥अंग 315
  556. अवखध सभे कीतिअनु निंदक का दारू नाहि ॥अंग 315
  557. पउड़ी 5 ॥अंग 315
  558. भगत जनां का राखा हरि आपि है किआ पापी करीऐ ॥अंग 316
  559. नानक वीचारहि संत मुनि जनां चारि वेद कहंदे ॥अंग 316
  560. गुर नानक हरि नामु द्रिड़ाइआ भंनण घड़ण समरथु ॥अंग 317
  561. खुधिआवंतु न जाणई लाज कुलाज कुबोलु ॥अंग 317
  562. हरि हरि नामु जो जनु जपै सो आइआ परवाणु ॥अंग 318
  563. भलके उठि पराहुणा मेरै घरि आवउ ॥अंग 318
  564. जो तुधु भावै सो भला सचु तेरा भाणा ॥अंग 318
  565. चेता ई तां चेति साहिबु सचा सो धणी ॥अंग 318
  566. वाऊ संदे कपड़े पहिरहि गरबि गवार ॥अंग 318
  567. सेई उबरे जगै विचि जो सचै रखे ॥अंग 318
  568. नानक सोई दिनसु सुहावड़ा जितु प्रभु आवै चिति ॥अंग 318
  569. नानक मित्राई तिसु सिउ सभ किछु जिस कै हाथि ॥अंग 318
  570. अंम्रितु नामु निधानु है मिलि पीवहु भाई ॥अंग 318
  571. डिठड़ो हभ ठाइ ऊण न काई जाइ ॥अंग 318
  572. दामनी चमतकार तिउ वरतारा जग खे ॥अंग 319
  573. सिम्रिति सासत्र सोधि सभि किनै कीम न जाणी ॥अंग 319
  574. अंतरि चिंता नैणी सुखी मूलि न उतरै भुख ॥अंग 319
  575. मुठड़े सेई साथ जिनी सचु न लदिआ ॥अंग 319
  576. जिथै बैसनि साध जन सो थानु सुहंदा ॥अंग 319
  577. चिड़ी चुहकी पहु फुटी वगनि बहुतु तरंग ॥अंग 319
  578. घर मंदर खुसीआ तही जह तू आवहि चिति ॥अंग 319
  579. हरि धनु सची रासि है किनै विरलै जाता ॥अंग 319
  580. खखड़ीआ सुहावीआ लगड़ीआ अक कंठि ॥अंग 319
  581. विसारेदे मरि गए मरि भि न सकहि मूलि ॥अंग 319
  582. सुख निधानु प्रभु एकु है अबिनासी सुणिआ ॥अंग 319
  583. जिना सासि गिरासि न विसरै हरि नामां मनि मंतु ॥अंग 319
  584. अठे पहर भउदा फिरै खावण संदड़ै सूलि ॥अंग 319
  585. तिसै सरेवहु प्राणीहो जिस दै नाउ पलै ॥अंग 320
  586. जाचकु मंगै दानु देहि पिआरिआ ॥अंग 320
  587. सिखहु सबदु पिआरिहो जनम मरन की टेक ॥अंग 320
  588. ओथै अंम्रितु वंडीऐ सुखीआ हरि करणे ॥अंग 320
  589. सतिगुरि पूरै सेविऐ दूखा का होइ नासु ॥अंग 320
  590. जिसु सिमरत संकट छुटहि अनद मंगल बिस्राम ॥अंग 320
  591. तिन की सोभा किआ गणी जिनी हरि हरि लधा ॥अंग 320
  592. कामु न करही आपणा फिरहि अवता लोइ ॥अंग 320
  593. बिखै कउड़तणि सगल माहि जगति रही लपटाइ ॥अंग 320
  594. इह नीसाणी साध की जिसु भेटत तरीऐ ॥अंग 320
  595. नानक आए से परवाणु है जिन हरि वुठा चिति ॥अंग 320
  596. पारब्रहमु प्रभु द्रिसटी आइआ पूरन अगम बिसमाद ॥अंग 320
  597. धोहु न चली खसम नालि लबि मोहि विगुते ॥अंग 321
  598. उठंदिआ बहंदिआ सवंदिआ सुखु सोइ ॥अंग 321
  599. लालचि अटिआ नित फिरै सुआरथु करे न कोइ ॥अंग 321
  600. सभे वसतू कउड़ीआ सचे नाउ मिठा ॥अंग 321
  601. जाचड़ी सा सारु जो जाचंदी हेकड़ो ॥अंग 321
  602. नीहि जि विधा मंनु पछाणू विरलो थिओ ॥अंग 321
  603. सोई सेविहु जीअड़े दाता बखसिंदु ॥अंग 321
  604. वत लगी सचे नाम की जो बीजे सो खाइ ॥अंग 321
  605. मंगणा त सचु इकु जिसु तुसि देवै आपि ॥अंग 321
  606. लाहा जग महि से खटहि जिन हरि धनु रासि ॥अंग 321
  607. पारब्रहमि फुरमाइआ मीहु वुठा सहजि सुभाइ ॥अंग 321
  608. जंमणु मरणु न तिन॑ कउ जो हरि लड़ि लागे ॥अंग 322
  609. धरणि सुवंनी खड़ रतन जड़ावी हरि प्रेम पुरखु मनि वुठा ॥अंग 322
  610. फिरदी फिरदी दह दिसा जल परबत बनराइ ॥अंग 322
  611. जिसु सरब सुखा फल लोड़ीअहि सो सचु कमावउ ॥अंग 322
  612. एकु जि साजनु मै कीआ सरब कला समरथु ॥अंग 322
  613. जे करु गहहि पिआरड़े तुधु न छोडा मूलि ॥अंग 322
  614. सभि निधान घरि जिस दै हरि करे सु होवै ॥अंग 322
  615. भोरी भरमु वञाइ पिरी मुहबति हिकु तू ॥अंग 322
  616. चड़ि कै घोड़ड़ै कुंदे पकड़हि खूंडी दी खेडारी ॥अंग 322
  617. रसना उचरै हरि स्रवणी सुणै सो उधरै मिता ॥अंग 322
  618. धंधड़े कुलाह चिति न आवै हेकड़ो ॥अंग 323
  619. परेतहु कीतोनु देवता तिनि करणैहारे ॥अंग 323
  620. प्रभु बेअंतु किछु अंतु नाहि सभु तिसै करणा ॥अंग 323
  621. तिंना भुख न का रही जिस दा प्रभु है सोइ ॥अंग 323
  622. जाचिकु मंगै नित नामु साहिबु करे कबूलु ॥अंग 323
  623. मनु रता गोविंद संगि सचु भोजनु जोड़े ॥अंग 323
  624. ऐसो अचरजु देखिओ कबीर ॥अंग 326
महला 9 (9)
  1. साधो मन का मानु तिआगउ ॥अंग 219
  2. साधो रचना राम बनाई ॥अंग 219
  3. प्रानी कउ हरि जसु मनि नही आवै ॥अंग 219
  4. साधो इहु मनु गहिओ न जाई ॥अंग 219
  5. साधो गोबिंद के गुन गावउ ॥अंग 219
  6. कोऊ माई भूलिओ मनु समझावै ॥अंग 219
  7. साधो राम सरनि बिसरामा ॥अंग 220
  8. मन रे कहा भइओ तै बउरा ॥अंग 220
  9. नर अचेत पाप ते डरु रे ॥अंग 220
भगत कबीर जी (77)
  1. अब मोहि जलत राम जलु पाइआ ॥अंग 323
  2. माधउ जल की पिआस न जाइ ॥अंग 323
  3. जब हम एको एकु करि जानिआ ॥अंग 324
  4. नगन फिरत जौ पाईऐ जोगु ॥अंग 324
  5. संधिआ प्रात इस्नानु कराही ॥अंग 324
  6. कबीर जी गउड़ी ॥अंग 324
  7. गरभ वास महि कुलु नही जाती ॥अंग 324
  8. अंधकार सुखि कबहि न सोई है ॥अंग 325
  9. जोति की जाति जाति की जोती ॥अंग 325
  10. जो जन परमिति परमनु जाना ॥अंग 325
  11. उपजै निपजै निपजि समाई ॥अंग 325
  12. अवर मूए किआ सोगु करीजै ॥अंग 325
  13. असथावर जंगम कीट पतंगा ॥अंग 325
  14. जिउ जल छोडि बाहरि भइओ मीना ॥अंग 326
  15. चोआ चंदन मरदन अंगा ॥अंग 326
  16. जम ते उलटि भए है राम ॥अंग 326
  17. सबदि अतीति अनाहदि राता ॥अंग 327
  18. कंचन सिउ पाईऐ नही तोलि ॥अंग 327
  19. जिह मरनै सभु जगतु तरासिआ ॥अंग 327
  20. कत नही ठउर मूलु कत लावउ ॥अंग 327
  21. जा कै हरि सा ठाकुरु भाई ॥अंग 328
  22. बिनु सत सती होइ कैसे नारि ॥अंग 328
  23. बिखिआ बिआपिआ सगल संसारु ॥अंग 328
  24. जिह कुलि पूतु न गिआन बीचारी ॥अंग 328
  25. जो जन लेहि खसम का नाउ ॥ तिन कै सद बलिहारै जाउ ॥1॥अंग 328
  26. गगनि रसाल चुऐ मेरी भाठी ॥अंग 328
  27. मन का सुभाउ मनहि बिआपी ॥अंग 328
  28. ओइ जु दीसहि अंबरि तारे ॥अंग 329
  29. बेद की पुत्री सिंम्रिति भाई ॥अंग 329
  30. देइ मुहार लगामु पहिरावउ ॥अंग 329
  31. जिह मुखि पांचउ अंम्रित खाए ॥अंग 329
  32. आपे पावकु आपे पवना ॥अंग 329
  33. ना मै जोग धिआन चितु लाइआ ॥अंग 329
  34. जिह सिरि रचि रचि बाधत पाग ॥अंग 330
  35. गउड़ी गुआरेरी के पदे पैतीस ॥अंग 330
  36. गउड़ी गुआरेरी ॥अंग 330
  37. गउड़ी भी सोरठि भी ॥अंग 330
  38. कउनु को पूतु पिता को का को ॥अंग 331
  39. अब मो कउ भए राजा राम सहाई ॥अंग 331
  40. जलि है सूतकु थलि है सूतकु सूतक ओपति होई ॥अंग 331
  41. झगरा एकु निबेरहु राम ॥अंग 331
  42. देखौ भाई ग्यान की आई आंधी ॥अंग 331
  43. हरि जसु सुनहि न हरि गुन गावहि ॥अंग 332
  44. जीवत पितर न मानै कोऊ मूएं सिराध कराही ॥अंग 332
  45. जीवत मरै मरै फुनि जीवै ऐसे सुंनि समाइआ ॥अंग 332
  46. उलटत पवन चक्र खटु भेदे सुरति सुंन अनरागी ॥अंग 333
  47. तह पावस सिंधु धूप नही छहीआ तह उतपति परलउ नाही ॥अंग 333
  48. पापु पुंनु दुइ बैल बिसाहे पवनु पूजी परगासिओ ॥अंग 333
  49. गउड़ी पंचपदा ॥अंग 333
  50. जोगी कहहि जोगु भल मीठा अवरु न दूजा भाई ॥अंग 334
  51. जह कछु अहा तहा किछु नाही पंच ततु तह नाही ॥अंग 334
  52. सुरति सिम्रिति दुइ कंनी मुंदा परमिति बाहरि खिंथा ॥अंग 334
  53. गज नव गज दस गज इकीस पुरीआ एक तनाई ॥अंग 335
  54. एक जोति एका मिली किंबा होइ महोइ ॥अंग 335
  55. जेते जतन करत ते डूबे भव सागरु नही तारिओ रे ॥अंग 335
  56. कालबूत की हसतनी मन बउरा रे चलतु रचिओ जगदीस ॥अंग 335
  57. अगनि न दहै पवनु नही मगनै तसकरु नेरि न आवै ॥अंग 336
  58. जिउ कपि के कर मुसटि चनन की लुबधि न तिआगु दइओ ॥अंग 336
  59. पानी मैला माटी गोरी ॥अंग 336
  60. राम जपउ जीअ ऐसे ऐसे ॥ ध्रू प्रहिलाद जपिओ हरि जैसे ॥1॥अंग 337
  61. गउड़ी 9 ॥अंग 337
  62. गउड़ी पूरबी ॥अंग 337
  63. रे मन तेरो कोइ नही खिंचि लेइ जिनि भारु ॥अंग 337
  64. पंथु निहारै कामनी लोचन भरी ले उसासा ॥अंग 337
  65. आस पास घन तुरसी का बिरवा माझ बना रसि गाऊं रे ॥अंग 338
  66. गउड़ी पूरबी 12 ॥अंग 338
  67. गउड़ी 12 ॥अंग 338
  68. गउड़ी 13 ॥अंग 338
  69. लख चउरासीह जीअ जोनि महि भ्रमत नंदु बहु थाको रे ॥अंग 338
  70. निंदउ निंदउ मो कउ लोगु निंदउ ॥अंग 339
  71. राजा राम तूं ऐसा निरभउ तरन तारन राम राइआ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 339
  72. खट नेम करि कोठड़ी बांधी बसतु अनूपु बीच पाई ॥अंग 339
  73. माई मोहि अवरु न जानिओ आनानां ॥अंग 339
  74. बावन अछर लोक त्रै सभु कछु इन ही माहि ॥अंग 340
  75. पंद्रह थितंी सात वार ॥अंग 343
  76. अंमावस महि आस निवारहु ॥अंग 343
  77. बार बार हरि के गुन गावउ ॥अंग 344
भगत नामदेव जी (1)
  1. देवा पाहन तारीअले ॥अंग 345
भगत रविदास जी (4)
  1. मेरी संगति पोच सोच दिनु राती ॥अंग 345
  2. घट अवघट डूगर घणा इकु निरगुणु बैलु हमार ॥अंग 345
  3. कूपु भरिओ जैसे दादिरा कछु देसु बिदेसु न बूझ ॥अंग 346
  4. सतजुगि सतु तेता जगी दुआपरि पूजाचार ॥अंग 346