लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

वाणी: कबीर

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वाणी

भगत कबीर

1398-1518 (परंपरा) · बनारस · 224 शबद + 243 सलोक

लालता-घाट, बनारस। एक जुलाहा मुस्लिम परिवार में जन्मा, हिंदू गुरु रामानंद का शिष्य बना। कबीर ने जान-बूझ कर हर खाँचा तोड़ा, जाति, मज़हब, शास्त्रीय दर्शन। उनका ढंग: "कागद कारे करते-करते किसी ने हरि नहीं पाया।"

करघे पर बैठे जुलाहे की छाया-आकृति, ताने के आर-पार रोशनी की एक अकेली लकीर
बनारस के लालता-घाट का जुलाहा अपने करघे पर। एक ताना, एक बाना, एक लकीर रोशनी।

दिल्ली के लोग कबीर को ज़्यादातर दोहों से जानते हैं, वो "कबीर साहब के दोहे।" मगर आदि ग्रंथ में 224 शबद और 243 सलोक हैं, बहुत बड़ा संग्रह। गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में संकलन के समय सोच-समझ कर इतना कुछ शामिल किया।

कबीर का स्वर पैना है, कभी व्यंग्य भरा, कभी सीधा और भावुक। उनकी एक पंक्ति: "जो सोता है सो खोता है, जो जागत है वही पावत है।" यह काम के बीच भी जागते रहना है, सिर्फ़ सुबह की नींद का मसला नहीं।

कबीर वाणी आदि ग्रंथ में मुख्यत: इन हिस्सों में:

आदि ग्रंथ में इनके शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, राग के अनुसार, ग्रंथ के क्रम में।

सिरी राग (2)
  1. जननी जानत सुतु बडा होतु है इतना कु न जानै जि दिन दिन अवध घटतु है ॥अंग 91
  2. अचरज एकु सुनहु रे पंडीआ अब किछु कहनु न जाई ॥अंग 92
गउड़ी (77)
  1. अब मोहि जलत राम जलु पाइआ ॥अंग 323
  2. माधउ जल की पिआस न जाइ ॥अंग 323
  3. जब हम एको एकु करि जानिआ ॥अंग 324
  4. नगन फिरत जौ पाईऐ जोगु ॥अंग 324
  5. संधिआ प्रात इस्नानु कराही ॥अंग 324
  6. कबीर जी गउड़ी ॥अंग 324
  7. गरभ वास महि कुलु नही जाती ॥अंग 324
  8. अंधकार सुखि कबहि न सोई है ॥अंग 325
  9. जोति की जाति जाति की जोती ॥अंग 325
  10. जो जन परमिति परमनु जाना ॥अंग 325
  11. उपजै निपजै निपजि समाई ॥अंग 325
  12. अवर मूए किआ सोगु करीजै ॥अंग 325
  13. असथावर जंगम कीट पतंगा ॥अंग 325
  14. जिउ जल छोडि बाहरि भइओ मीना ॥अंग 326
  15. चोआ चंदन मरदन अंगा ॥अंग 326
  16. जम ते उलटि भए है राम ॥अंग 326
  17. सबदि अतीति अनाहदि राता ॥अंग 327
  18. कंचन सिउ पाईऐ नही तोलि ॥अंग 327
  19. जिह मरनै सभु जगतु तरासिआ ॥अंग 327
  20. कत नही ठउर मूलु कत लावउ ॥अंग 327
  21. जा कै हरि सा ठाकुरु भाई ॥अंग 328
  22. बिनु सत सती होइ कैसे नारि ॥अंग 328
  23. बिखिआ बिआपिआ सगल संसारु ॥अंग 328
  24. जिह कुलि पूतु न गिआन बीचारी ॥अंग 328
  25. जो जन लेहि खसम का नाउ ॥ तिन कै सद बलिहारै जाउ ॥1॥अंग 328
  26. गगनि रसाल चुऐ मेरी भाठी ॥अंग 328
  27. मन का सुभाउ मनहि बिआपी ॥अंग 328
  28. ओइ जु दीसहि अंबरि तारे ॥अंग 329
  29. बेद की पुत्री सिंम्रिति भाई ॥अंग 329
  30. देइ मुहार लगामु पहिरावउ ॥अंग 329
  31. जिह मुखि पांचउ अंम्रित खाए ॥अंग 329
  32. आपे पावकु आपे पवना ॥अंग 329
  33. ना मै जोग धिआन चितु लाइआ ॥अंग 329
  34. जिह सिरि रचि रचि बाधत पाग ॥अंग 330
  35. गउड़ी गुआरेरी के पदे पैतीस ॥अंग 330
  36. गउड़ी गुआरेरी ॥अंग 330
  37. गउड़ी भी सोरठि भी ॥अंग 330
  38. कउनु को पूतु पिता को का को ॥अंग 331
  39. अब मो कउ भए राजा राम सहाई ॥अंग 331
  40. जलि है सूतकु थलि है सूतकु सूतक ओपति होई ॥अंग 331
  41. झगरा एकु निबेरहु राम ॥अंग 331
  42. देखौ भाई ग्यान की आई आंधी ॥अंग 331
  43. हरि जसु सुनहि न हरि गुन गावहि ॥अंग 332
  44. जीवत पितर न मानै कोऊ मूएं सिराध कराही ॥अंग 332
  45. जीवत मरै मरै फुनि जीवै ऐसे सुंनि समाइआ ॥अंग 332
  46. उलटत पवन चक्र खटु भेदे सुरति सुंन अनरागी ॥अंग 333
  47. तह पावस सिंधु धूप नही छहीआ तह उतपति परलउ नाही ॥अंग 333
  48. पापु पुंनु दुइ बैल बिसाहे पवनु पूजी परगासिओ ॥अंग 333
  49. गउड़ी पंचपदा ॥अंग 333
  50. जोगी कहहि जोगु भल मीठा अवरु न दूजा भाई ॥अंग 334
  51. जह कछु अहा तहा किछु नाही पंच ततु तह नाही ॥अंग 334
  52. सुरति सिम्रिति दुइ कंनी मुंदा परमिति बाहरि खिंथा ॥अंग 334
  53. गज नव गज दस गज इकीस पुरीआ एक तनाई ॥अंग 335
  54. एक जोति एका मिली किंबा होइ महोइ ॥अंग 335
  55. जेते जतन करत ते डूबे भव सागरु नही तारिओ रे ॥अंग 335
  56. कालबूत की हसतनी मन बउरा रे चलतु रचिओ जगदीस ॥अंग 335
  57. अगनि न दहै पवनु नही मगनै तसकरु नेरि न आवै ॥अंग 336
  58. जिउ कपि के कर मुसटि चनन की लुबधि न तिआगु दइओ ॥अंग 336
  59. पानी मैला माटी गोरी ॥अंग 336
  60. राम जपउ जीअ ऐसे ऐसे ॥ ध्रू प्रहिलाद जपिओ हरि जैसे ॥1॥अंग 337
  61. गउड़ी 9 ॥अंग 337
  62. गउड़ी पूरबी ॥अंग 337
  63. रे मन तेरो कोइ नही खिंचि लेइ जिनि भारु ॥अंग 337
  64. पंथु निहारै कामनी लोचन भरी ले उसासा ॥अंग 337
  65. आस पास घन तुरसी का बिरवा माझ बना रसि गाऊं रे ॥अंग 338
  66. गउड़ी पूरबी 12 ॥अंग 338
  67. गउड़ी 12 ॥अंग 338
  68. गउड़ी 13 ॥अंग 338
  69. लख चउरासीह जीअ जोनि महि भ्रमत नंदु बहु थाको रे ॥अंग 338
  70. निंदउ निंदउ मो कउ लोगु निंदउ ॥अंग 339
  71. राजा राम तूं ऐसा निरभउ तरन तारन राम राइआ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 339
  72. खट नेम करि कोठड़ी बांधी बसतु अनूपु बीच पाई ॥अंग 339
  73. माई मोहि अवरु न जानिओ आनानां ॥अंग 339
  74. बावन अछर लोक त्रै सभु कछु इन ही माहि ॥अंग 340
  75. पंद्रह थितंी सात वार ॥अंग 343
  76. अंमावस महि आस निवारहु ॥अंग 343
  77. बार बार हरि के गुन गावउ ॥अंग 344
आसा (36)
  1. कवन काजि जगु उपजै बिनसै कहहु मोहि समझाइआ ॥1॥अंग 475
  2. गज साढे तै तै धोतीआ तिहरे पाइनि तग ॥अंग 476
  3. बापि दिलासा मेरो कीन॑ा ॥ सेज सुखाली मुखि अंम्रितु दीन॑ा ॥अंग 476
  4. इकतु पतरि भरि उरकट कुरकट इकतु पतरि भरि पानी ॥अंग 476
  5. जोगी जती तपी संनिआसी बहु तीरथ भ्रमना ॥अंग 476
  6. फीलु रबाबी बलदु पखावज कऊआ ताल बजावै ॥अंग 477
  7. बटूआ एकु बहतरि आधारी एको जिसहि दुआरा ॥अंग 477
  8. हिंदू तुरक कहा ते आए किनि एह राह चलाई ॥अंग 477
  9. जब लगु तेलु दीवे मुखि बाती तब सूझै सभु कोई ॥अंग 477
  10. सनक सनंद अंतु नही पाइआ ॥अंग 478
  11. बाती सूकी तेलु निखूटा ॥अंग 478
  12. सुतु अपराध करत है जेते ॥अंग 478
  13. हज हमारी गोमती तीर ॥अंग 478
  14. भूली मालनी है एउ ॥अंग 479
  15. बारह बरस बालपन बीते बीस बरस कछु तपु न कीओ ॥अंग 479
  16. काहू दीन॑े पाट पटंबर काहू पलघ निवारा ॥अंग 479
  17. हम मसकीन खुदाई बंदे तुम राजसु मनि भावै ॥अंग 480
  18. गगन नगरि इक बूंद न बरखै नादु कहा जु समाना ॥अंग 480
  19. सरपनी ते ऊपरि नही बलीआ ॥अंग 480
  20. कहा सुआन कउ सिम्रिति सुनाए ॥अंग 481
  21. लंका सा कोटु समुंद सी खाई ॥अंग 481
  22. पहिला पूतु पिछैरी माई ॥अंग 481
  23. बिंदु ते जिनि पिंडु कीआ अगनि कुंड रहाइआ ॥अंग 481
  24. तनु रैनी मनु पुन रपि करि हउ पाचउ तत बराती ॥अंग 482
  25. सासु की दुखी ससुर की पिआरी जेठ के नामि डरउ रे ॥अंग 482
  26. हम घरि सूतु तनहि नित ताना कंठि जनेऊ तुमारे ॥अंग 482
  27. जगि जीवनु ऐसा सुपने जैसा जीवनु सुपन समानं ॥अंग 482
  28. रोजा धरै मनावै अलहु सुआदति जीअ संघारै ॥अंग 483
  29. कीओ सिंगारु मिलन के ताई ॥अंग 483
  30. हीरै हीरा बेधि पवन मनु सहजे रहिआ समाई ॥अंग 483
  31. पहिली करूपि कुजाति कुलखनी साहुरै पेईऐ बुरी ॥अंग 483
  32. मेरी बहुरीआ को धनीआ नाउ ॥अंग 484
  33. रहु रहु री बहुरीआ घूंघटु जिनि काढै ॥अंग 484
  34. करवतु भला न करवट तेरी ॥अंग 484
  35. कोरी को काहू मरमु न जानां ॥अंग 484
  36. अंतरि मैलु जे तीरथ नावै तिसु बैकुंठ न जानां ॥अंग 484
गूजरी (2)
  1. चारि पाव दुइ सिंग गुंग मुख तब कैसे गुन गईहै ॥अंग 524
  2. मुसि मुसि रोवै कबीर की माई ॥अंग 524
बिहागड़ा (1)
  1. कबीरा मरता मरता जगु मुआ मरि भि न जानै कोइ ॥अंग 555
सोरठ (11)
  1. बुत पूजि पूजि हिंदू मूए तुरक मूए सिरु नाई ॥अंग 654
  2. जब जरीऐ तब होइ भसम तनु रहै किरम दल खाई ॥अंग 654
  3. बेद पुरान सभै मत सुनि कै करी करम की आसा ॥अंग 654
  4. दुइ दुइ लोचन पेखा ॥अंग 655
  5. जा के निगम दूध के ठाटा ॥अंग 655
  6. जिह बाझु न जीआ जाई ॥अंग 655
  7. किआ पड़ीऐ किआ गुनीऐ ॥अंग 655
  8. ह्रिदै कपटु मुख गिआनी ॥अंग 656
  9. बहु परपंच करि पर धनु लिआवै ॥अंग 656
  10. संतहु मन पवनै सुखु बनिआ ॥अंग 656
  11. भूखे भगति न कीजै ॥अंग 656
धनासरी (5)
  1. सनक सनंद महेस समानां ॥ सेखनागि तेरो मरमु न जानां ॥1॥अंग 691
  2. दिन ते पहर पहर ते घरीआं आव घटै तनु छीजै ॥अंग 692
  3. जो जनु भाउ भगति कछु जानै ता कउ अचरजु काहो ॥अंग 692
  4. इंद्र लोक सिव लोकहि जैबो ॥अंग 692
  5. राम सिमरि राम सिमरि राम सिमरि भाई ॥अंग 692
तिलंग (1)
  1. बेद कतेब इफतरा भाई दिल का फिकरु न जाइ ॥अंग 727
सूही (5)
  1. अवतरि आइ कहा तुम कीना ॥अंग 792
  2. ना जानउ किआ करसी पीउ ॥1॥अंग 792
  3. अमलु सिरानो लेखा देना ॥अंग 792
  4. थाके नैन स्रवन सुनि थाके थाकी सुंदरि काइआ ॥अंग 793
  5. एकु कोटु पंच सिकदारा पंचे मागहि हाला ॥अंग 793
बिलावल (12)
  1. ऐसो इहु संसारु पेखना रहनु न कोऊ पईहै रे ॥अंग 855
  2. बिदिआ न परउ बादु नही जानउ ॥अंग 855
  3. ग्रिहु तजि बन खंड जाईऐ चुनि खाईऐ कंदा ॥अंग 855
  4. ताना बाना कछू न सूझै हरि हरि रसि लपटिओ ॥1॥अंग 856
  5. कोऊ हरि समानि नही राजा ॥अंग 856
  6. राखि लेहु हम ते बिगरी ॥अंग 856
  7. दरमादे ठाढे दरबारि ॥अंग 856
  8. डंडा मुंद्रा खिंथा आधारी ॥अंग 856
  9. इनि॑ माइआ जगदीस गुसाई तुम॑रे चरन बिसारे ॥अंग 857
  10. सरीर सरोवर भीतरे आछै कमल अनूप ॥अंग 857
  11. जनम मरन का भ्रमु गइआ गोबिद लिव लागी ॥अंग 857
  12. चरन कमल जा कै रिदै बसहि सो जनु किउ डोलै देव ॥अंग 857
गोंड (11)
  1. संतु मिलै किछु सुनीऐ कहीऐ ॥अंग 870
  2. नरू मरै नरु कामि न आवै ॥अंग 870
  3. आकासि गगनु पातालि गगनु है चहु दिसि गगनु रहाइले ॥अंग 870
  4. भुजा बांधि भिला करि डारिओ ॥अंग 870
  5. ना इहु मानसु ना इहु देउ ॥अंग 871
  6. तूटे तागे निखुटी पानि ॥अंग 871
  7. खसमु मरै तउ नारि न रोवै ॥अंग 871
  8. ग्रिहि सोभा जा कै रे नाहि ॥अंग 872
  9. जैसे मंदर महि बलहर ना ठाहरै ॥अंग 872
  10. कूटनु सोइ जु मन कउ कूटै ॥अंग 872
  11. धंनु गुपाल धंनु गुरदेव ॥अंग 873
रामकली (14)
  1. कबीर महिदी करि कै घालिआ आपु पीसाइ पीसाइ ॥अंग 947
  2. कबीर कसउटी राम की झूठा टिकै न कोइ ॥अंग 948
  3. काइआ कलालनि लाहनि मेलउ गुर का सबदु गुड़ु कीनु रे ॥अंग 968
  4. गुड़ु करि गिआनु धिआनु करि महूआ भउ भाठी मन धारा ॥अंग 969
  5. तूं मेरो मेरु परबतु सुआमी ओट गही मै तेरी ॥अंग 969
  6. संता मानउ दूता डानउ इह कुटवारी मेरी ॥अंग 969
  7. जिह मुख बेदु गाइत्री निकसै सो किउ ब्रहमनु बिसरु करै ॥अंग 970
  8. तरवरु एकु अनंत डार साखा पुहप पत्र रस भरीआ ॥अंग 970
  9. मुंद्रा मोनि दइआ करि झोली पत्र का करहु बीचारु रे ॥अंग 970
  10. कवन काज सिरजे जग भीतरि जनमि कवन फलु पाइआ ॥अंग 970
  11. जिह सिमरनि होइ मुकति दुआरु ॥अंग 971
  12. बंधचि बंधनु पाइआ ॥अंग 971
  13. चंदु सूरजु दुइ जोति सरूपु ॥अंग 972
  14. दुनीआ हुसीआर बेदार जागत मुसीअत हउ रे भाई ॥अंग 972
मारू (12)
  1. पडीआ कवन कुमति तुम लागे ॥अंग 1102
  2. बनहि बसे किउ पाईऐ जउ लउ मनहु न तजहि बिकार ॥अंग 1103
  3. रिधि सिधि जा कउ फुरी तब काहू सिउ किआ काज ॥अंग 1103
  4. उदक समुंद सलल की साखिआ नदी तरंग समावहिगे ॥अंग 1103
  5. जउ तुम॑ मो कउ दूरि करत हउ तउ तुम मुकति बतावहु ॥अंग 1104
  6. जिनि गड़ कोट कीए कंचन के छोडि गइआ सो रावनु ॥1॥अंग 1104
  7. नैनू नकटू स्रवनू रसपति इंद्री कहिआ न माना ॥1॥अंग 1104
  8. अनभउ किनै न देखिआ बैरागीअड़े ॥अंग 1104
  9. राजन कउनु तुमारै आवै ॥अंग 1105
  10. गगन दमामा बाजिओ परिओ नीसानै घाउ ॥अंग 1105
  11. दीनु बिसारिओ रे दिवाने दीनु बिसारिओ रे ॥अंग 1105
  12. कबीरु ॥ मारू ॥अंग 1106
केदारा (6)
  1. उसतति निंदा दोऊ बिबरजित तजहु मानु अभिमाना ॥अंग 1123
  2. किनही बनजिआ कांसी तांबा किनही लउग सुपारी ॥अंग 1123
  3. री कलवारि गवारि मूढ मति उलटो पवनु फिरावउ ॥अंग 1123
  4. काम क्रोध त्रिसना के लीने गति नही एकै जानी ॥अंग 1123
  5. टेढी पाग टेढे चले लागे बीरे खान ॥अंग 1124
  6. चारि दिन अपनी नउबति चले बजाइ ॥अंग 1124
भैरों (13)
  1. इहु धनु मेरे हरि को नाउ ॥अंग 1157
  2. नांगे आवनु नांगे जाना ॥अंग 1157
  3. मैला ब्रहमा मैला इंदु ॥अंग 1158
  4. मनु करि मका किबला करि देही ॥अंग 1158
  5. गंगा कै संगि सलिता बिगरी ॥ सो सलिता गंगा होइ निबरी ॥1॥अंग 1158
  6. माथे तिलकु हथि माला बानां ॥अंग 1158
  7. उलटि जाति कुल दोऊ बिसारी ॥अंग 1158
  8. निरधन आदरु कोई न देइ ॥अंग 1159
  9. गुर सेवा ते भगति कमाई ॥अंग 1159
  10. सिव की पुरी बसै बुधि सारु ॥अंग 1159
  11. सो मुलां जो मन सिउ लरै ॥अंग 1159
  12. अगम द्रुगम गड़ि रचिओ बास ॥अंग 1162
  13. कोटि सूर जा कै परगास ॥अंग 1162
बसंत (8)
  1. मउली धरती मउलिआ अकासु ॥अंग 1193
  2. पंडित जन माते पड़ि॑ पुरान ॥अंग 1193
  3. जोइ खसमु है जाइआ ॥अंग 1194
  4. प्रहलाद पठाए पड़न साल ॥अंग 1194
  5. इसु तन मन मधे मदन चोर ॥अंग 1194
  6. नाइकु एकु बनजारे पाच ॥अंग 1194
  7. माता जूठी पिता भी जूठा जूठे ही फल लागे ॥अंग 1195
  8. सुरह की जैसी तेरी चाल ॥अंग 1196
सारंग (3)
  1. कहा नर गरबसि थोरी बात ॥अंग 1251
  2. राजास्रम मिति नही जानी तेरी ॥अंग 1252
  3. हरि बिनु कउनु सहाई मन का ॥अंग 1253
प्रभाती (5)
  1. मरन जीवन की संका नासी ॥अंग 1349
  2. अलहु एकु मसीति बसतु है अवरु मुलखु किसु केरा ॥अंग 1349
  3. अवलि अलह नूरु उपाइआ कुदरति के सभ बंदे ॥अंग 1349
  4. बेद कतेब कहहु मत झूठे झूठा जो न बिचारै ॥अंग 1350
  5. सुंन संधिआ तेरी देव देवाकर अधपति आदि समाई ॥अंग 1350
सलोक और अन्य वाणी (235)
  1. कबीर मेरी सिमरनी रसना ऊपरि रामु ॥अंग 1364
  2. कबीर मेरी जाति कउ सभु को हसनेहारु ॥अंग 1364
  3. सरब सूख को नाइको राम नाम रसु पीउ ॥3॥अंग 1364
  4. कबीर कंचन के कुंडल बने ऊपरि लाल जड़ाउ ॥अंग 1364
  5. कबीर ऐसा एकु आधु जो जीवत मिरतकु होइ ॥अंग 1364
  6. कबीर जा दिन हउ मूआ पाछै भइआ अनंदु ॥अंग 1364
  7. कबीर सभ ते हम बुरे हम तजि भलो सभु कोइ ॥अंग 1364
  8. कबीर आई मुझहि पहि अनिक करे करि भेस ॥अंग 1364
  9. कबीर सोई मारीऐ जिह मूऐ सुखु होइ ॥अंग 1364
  10. कबीर राती होवहि कारीआ कारे ऊभे जंत ॥अंग 1364
  11. कबीर चंदन का बिरवा भला बेड़ि॑ओ ढाक पलास ॥अंग 1365
  12. कबीर बांसु बडाई बूडिआ इउ मत डूबहु कोइ ॥अंग 1365
  13. कबीर दीनु गवाइआ दुनी सिउ दुनी न चाली साथि ॥अंग 1365
  14. कबीर जह जह हउ फिरिओ कउतक ठाओ ठाइ ॥अंग 1365
  15. कबीर संतन की झुंगीआ भली भठि कुसती गाउ ॥अंग 1365
  16. कबीर संत मूए किआ रोईऐ जो अपुने ग्रिहि जाइ ॥अंग 1365
  17. कबीर साकतु ऐसा है जैसी लसन की खानि ॥अंग 1365
  18. कबीर माइआ डोलनी पवनु झकोलनहारु ॥अंग 1365
  19. कबीर माइआ डोलनी पवनु वहै हिव धार ॥अंग 1365
  20. कबीर माइआ चोरटी मुसि मुसि लावै हाटि ॥अंग 1365
  21. कबीर सूखु न एंह जुगि करहि जु बहुतै मीत ॥अंग 1365
  22. कबीर जिसु मरने ते जगु डरै मेरे मनि आनंदु ॥अंग 1365
  23. राम पदारथु पाइ कै कबीरा गांठि न खोल॑ ॥अंग 1365
  24. कबीर ता सिउ प्रीति करि जा को ठाकुरु रामु ॥अंग 1365
  25. कबीर प्रीति इक सिउ कीए आन दुबिधा जाइ ॥अंग 1365
  26. कबीर जगु काजल की कोठरी अंध परे तिस माहि ॥अंग 1365
  27. कबीर इहु तनु जाइगा सकहु त लेहु बहोरि ॥अंग 1365
  28. कबीर इहु तनु जाइगा कवनै मारगि लाइ ॥अंग 1365
  29. कबीर मरता मरता जगु मूआ मरि भी न जानिआ कोइ ॥अंग 1365
  30. कबीर मानस जनमु दुलंभु है होइ न बारै बार ॥अंग 1366
  31. कबीरा तुही कबीरु तू तेरो नाउ कबीरु ॥अंग 1366
  32. कबीर झंखु न झंखीऐ तुमरो कहिओ न होइ ॥अंग 1366
  33. कबीर कसउटी राम की झूठा टिकै न कोइ ॥अंग 1366
  34. कबीर ऊजल पहिरहि कापरे पान सुपारी खाहि ॥अंग 1366
  35. कबीर बेड़ा जरजरा फूटे छेंक हजार ॥अंग 1366
  36. कबीर हाड जरे जिउ लाकरी केस जरे जिउ घासु ॥अंग 1366
  37. कबीर गरबु न कीजीऐ चाम लपेटे हाड ॥अंग 1366
  38. कबीर गरबु न कीजीऐ ऊचा देखि अवासु ॥अंग 1366
  39. कबीर गरबु न कीजीऐ रंकु न हसीऐ कोइ ॥अंग 1366
  40. कबीर गरबु न कीजीऐ देही देखि सुरंग ॥अंग 1366
  41. कबीर लूटना है त लूटि लै राम नाम है लूटि ॥अंग 1366
  42. कबीर ऐसा कोई न जनमिओ अपनै घरि लावै आगि ॥अंग 1366
  43. को है लरिका बेचई लरिकी बेचै कोइ ॥अंग 1366
  44. कबीर इह चेतावनी मत सहसा रहि जाइ ॥अंग 1366
  45. कबीर मै जानिओ पड़िबो भलो पड़िबे सिउ भल जोगु ॥अंग 1366
  46. कबीर लोगु कि निंदै बपुड़ा जिह मनि नाही गिआनु ॥अंग 1366
  47. कबीर परदेसी कै घाघरै चहु दिसि लागी आगि ॥अंग 1366
  48. कबीर खिंथा जलि कोइला भई खापरु फूट मफूट ॥अंग 1366
  49. कबीर थोरै जलि माछुली झीवरि मेलिओ जालु ॥अंग 1367
  50. कबीर समुंदु न छोडीऐ जउ अति खारो होइ ॥अंग 1367
  51. कबीर निगुसांएं बहि गए थांघी नाही कोइ ॥अंग 1367
  52. कबीर बैसनउ की कूकरि भली साकत की बुरी माइ ॥अंग 1367
  53. कबीर हरना दूबला इहु हरीआरा तालु ॥अंग 1367
  54. कबीर गंगा तीर जु घरु करहि पीवहि निरमल नीरु ॥अंग 1367
  55. कबीर मनु निरमलु भइआ जैसा गंगा नीरु ॥अंग 1367
  56. कबीर हरदी पीअरी चूंनां ऊजल भाइ ॥अंग 1367
  57. कबीर हरदी पीरतनु हरै चून चिहनु न रहाइ ॥अंग 1367
  58. कबीर मुकति दुआरा संकुरा राई दसएं भाइ ॥अंग 1367
  59. कबीर ऐसा सतिगुरु जे मिलै तुठा करे पसाउ ॥अंग 1367
  60. कबीर ना मोुहि छानि न छापरी ना मोुहि घरु नही गाउ ॥अंग 1367
  61. कबीर मुहि मरने का चाउ है मरउ त हरि कै दुआर ॥अंग 1367
  62. कबीर ना हम कीआ न करहिगे ना करि सकै सरीरु ॥अंग 1367
  63. कबीर सुपनै हू बरड़ाइ कै जिह मुखि निकसै रामु ॥अंग 1367
  64. कबीर माटी के हम पूतरे मानसु राखिओु नाउ ॥अंग 1367
  65. कबीर महिदी करि घालिआ आपु पीसाइ पीसाइ ॥अंग 1367
  66. कबीर जिह दरि आवत जातिअहु हटकै नाही कोइ ॥अंग 1367
  67. कबीर डूबा था पै उबरिओ गुन की लहरि झबकि ॥अंग 1367
  68. कबीर पापी भगति न भावई हरि पूजा न सुहाइ ॥अंग 1368
  69. कबीर बैदु मूआ रोगी मूआ मूआ सभु संसारु ॥अंग 1368
  70. कबीर रामु न धिआइओ मोटी लागी खोरि ॥अंग 1368
  71. कबीर ऐसी होइ परी मन को भावतु कीनु ॥अंग 1368
  72. कबीर रस को गांडो चूसीऐ गुन कउ मरीऐ रोइ ॥अंग 1368
  73. कबीर गागरि जल भरी आजु कालि॑ जैहै फूटि ॥अंग 1368
  74. कबीर कूकरु राम को मुतीआ मेरो नाउ ॥अंग 1368
  75. कबीर जपनी काठ की किआ दिखलावहि लोइ ॥अंग 1368
  76. कबीर बिरहु भुयंगमु मनि बसै मंतु न मानै कोइ ॥अंग 1368
  77. कबीर पारस चंदनै तिन॑ है एक सुगंध ॥अंग 1368
  78. कबीर जम का ठेंगा बुरा है ओहु नही सहिआ जाइ ॥अंग 1368
  79. कबीर बैदु कहै हउ ही भला दारू मेरै वसि ॥अंग 1368
  80. कबीर नउबति आपनी दिन दस लेहु बजाइ ॥अंग 1368
  81. कबीर सात समुंदहि मसु करउ कलम करउ बनराइ ॥अंग 1368
  82. कबीर जाति जुलाहा किआ करै हिरदै बसे गुपाल ॥अंग 1368
  83. कबीर ऐसा को नही मंदरु देइ जराइ ॥अंग 1368
  84. कबीर ऐसा को नही इहु तनु देवै फूकि ॥अंग 1368
  85. कबीर सती पुकारै चिह चड़ी सुनु हो बीर मसान ॥अंग 1368
  86. कबीर मनु पंखी भइओ उडि उडि दह दिस जाइ ॥अंग 1369
  87. कबीर जा कउ खोजते पाइओ सोई ठउरु ॥अंग 1369
  88. कबीर मारी मरउ कुसंग की केले निकटि जु बेरि ॥अंग 1369
  89. कबीर भार पराई सिरि चरै चलिओ चाहै बाट ॥अंग 1369
  90. कबीर बन की दाधी लाकरी ठाढी करै पुकार ॥अंग 1369
  91. कबीर एक मरंते दुइ मूए दोइ मरंतह चारि ॥अंग 1369
  92. कबीर देखि देखि जगु ढूंढिआ कहूं न पाइआ ठउरु ॥अंग 1369
  93. कबीर संगति करीऐ साध की अंति करै निरबाहु ॥अंग 1369
  94. कबीर जग महि चेतिओ जानि कै जग महि रहिओ समाइ ॥अंग 1369
  95. कबीर आसा करीऐ राम की अवरै आस निरास ॥अंग 1369
  96. कबीर सिख साखा बहुते कीए केसो कीओ न मीतु ॥अंग 1369
  97. कबीर कारनु बपुरा किआ करै जउ रामु न करै सहाइ ॥अंग 1369
  98. कबीर अवरह कउ उपदेसते मुख मै परि है रेतु ॥अंग 1369
  99. कबीर साधू की संगति रहउ जउ की भूसी खाउ ॥अंग 1369
  100. कबीर संगति साध की दिन दिन दूना हेतु ॥अंग 1369
  101. कबीर मनु मूंडिआ नही केस मुंडाए कांइ ॥अंग 1369
  102. कबीर रामु न छोडीऐ तनु धनु जाइ त जाउ ॥अंग 1369
  103. कबीर जो हम जंतु बजावते टूटि गईं सभ तार ॥अंग 1369
  104. कबीर माइ मूंडउ तिह गुरू की जा ते भरमु न जाइ ॥अंग 1369
  105. कबीर जेते पाप कीए राखे तलै दुराइ ॥अंग 1370
  106. कबीर हरि का सिमरनु छाडि कै पालिओ बहुतु कुटंबु ॥अंग 1370
  107. कबीर हरि का सिमरनु छाडि कै राति जगावन जाइ ॥अंग 1370
  108. कबीर हरि का सिमरनु छाडि कै अहोई राखै नारि ॥अंग 1370
  109. कबीर चतुराई अति घनी हरि जपि हिरदै माहि ॥अंग 1370
  110. कबीर सोुई मुखु धंनि है जा मुखि कहीऐ रामु ॥अंग 1370
  111. कबीर सोई कुल भली जा कुल हरि को दासु ॥अंग 1370
  112. कबीर है गइ बाहन सघन घन लाख धजा फहराहि ॥अंग 1370
  113. कबीर सभु जगु हउ फिरिओ मांदलु कंध चढाइ ॥अंग 1370
  114. मारगि मोती बीथरे अंधा निकसिओ आइ ॥अंग 1370
  115. बूडा बंसु कबीर का उपजिओ पूतु कमालु ॥अंग 1370
  116. कबीर साधू कउ मिलने जाईऐ साथि न लीजै कोइ ॥अंग 1370
  117. कबीर जगु बाधिओ जिह जेवरी तिह मत बंधहु कबीर ॥अंग 1370
  118. कबीर हंसु उडिओ तनु गाडिओ सोझाई सैनाह ॥अंग 1370
  119. कबीर नैन निहारउ तुझ कउ स्रवन सुनउ तुअ नाउ ॥अंग 1370
  120. कबीर सुरग नरक ते मै रहिओ सतिगुर के परसादि ॥अंग 1370
  121. कबीर चरन कमल की मउज को कहि कैसे उनमान ॥अंग 1370
  122. कबीर देखि कै किह कहउ कहे न को पतीआइ ॥अंग 1370
  123. कबीर चुगै चितारै भी चुगै चुगि चुगि चितारे ॥ जैसे बचरहि कूंज मन माइआ ममता रे ॥123॥अंग 1371
  124. कबीर अंबर घनहरु छाइआ बरखि भरे सर ताल ॥अंग 1371
  125. कबीर चकई जउ निसि बीछुरै आइ मिलै परभाति ॥अंग 1371
  126. कबीर रैनाइर बिछोरिआ रहु रे संख मझूरि ॥अंग 1371
  127. कबीर सूता किआ करहि जागु रोइ भै दुख ॥अंग 1371
  128. कबीर सूता किआ करहि उठि कि न जपहि मुरारि ॥अंग 1371
  129. कबीर सूता किआ करहि बैठा रहु अरु जागु ॥अंग 1371
  130. कबीर संत की गैल न छोडीऐ मारगि लागा जाउ ॥अंग 1371
  131. कबीर साकत संगु न कीजीऐ दूरहि जाईऐ भागि ॥अंग 1371
  132. कबीरा रामु न चेतिओ जरा पहूंचिओ आइ ॥अंग 1371
  133. कबीर कारनु सो भइओ जो कीनो करतारि ॥अंग 1371
  134. कबीर फल लागे फलनि पाकनि लागे आंब ॥अंग 1371
  135. कबीर ठाकुरु पूजहि मोलि ले मनहठि तीरथ जाहि ॥अंग 1371
  136. कबीर पाहनु परमेसुरु कीआ पूजै सभु संसारु ॥अंग 1371
  137. कबीर कागद की ओबरी मसु के करम कपाट ॥अंग 1371
  138. कबीर कालि करंता अबहि करु अब करता सुइ ताल ॥अंग 1371
  139. कबीर ऐसा जंतु इकु देखिआ जैसी धोई लाख ॥अंग 1371
  140. कबीर मेरी बुधि कउ जमु न करै तिसकार ॥अंग 1371
  141. कबीरु कसतूरी भइआ भवर भए सभ दास ॥अंग 1371
  142. कबीर गहगचि परिओ कुटंब कै कांठै रहि गइओ रामु ॥अंग 1372
  143. कबीर साकत ते सूकर भला राखै आछा गाउ ॥अंग 1372
  144. कबीर कउडी कउडी जोरि कै जोरे लाख करोरि ॥अंग 1372
  145. कबीर बैसनो हूआ त किआ भइआ माला मेलीं चारि ॥अंग 1372
  146. कबीर रोड़ा होइ रहु बाट का तजि मन का अभिमानु ॥अंग 1372
  147. कबीर रोड़ा हूआ त किआ भइआ पंथी कउ दुखु देइ ॥अंग 1372
  148. कबीर खेह हूई तउ किआ भइआ जउ उडि लागै अंग ॥अंग 1372
  149. कबीर पानी हूआ त किआ भइआ सीरा ताता होइ ॥अंग 1372
  150. ऊच भवन कनकामनी सिखरि धजा फहराइ ॥अंग 1372
  151. कबीर पाटन ते ऊजरु भला राम भगत जिह ठाइ ॥अंग 1372
  152. कबीर गंग जमुन के अंतरे सहज सुंन के घाट ॥अंग 1372
  153. कबीर जैसी उपजी पेड ते जउ तैसी निबहै ओड़ि ॥अंग 1372
  154. कबीरा एकु अचंभउ देखिओ हीरा हाट बिकाइ ॥अंग 1372
  155. कबीरा जहा गिआनु तह धरमु है जहा झूठु तह पापु ॥अंग 1372
  156. कबीर माइआ तजी त किआ भइआ जउ मानु तजिआ नही जाइ ॥अंग 1372
  157. कबीर साचा सतिगुरु मै मिलिआ सबदु जु बाहिआ एकु ॥अंग 1372
  158. कबीर साचा सतिगुरु किआ करै जउ सिखा महि चूक ॥अंग 1372
  159. कबीर है गै बाहन सघन घन छत्रपती की नारि ॥अंग 1372
  160. कबीर न्रिप नारी किउ निंदीऐ किउ हरि चेरी कउ मानु ॥अंग 1373
  161. कबीर थूनी पाई थिति भई सतिगुर बंधी धीर ॥अंग 1373
  162. कबीर हरि हीरा जन जउहरी ले कै मांडै हाट ॥अंग 1373
  163. कबीर काम परे हरि सिमरीऐ ऐसा सिमरहु नित ॥अंग 1373
  164. कबीर सेवा कउ दुइ भले एकु संतु इकु रामु ॥अंग 1373
  165. कबीर जिह मारगि पंडित गए पाछै परी बहीर ॥अंग 1373
  166. कबीर दुनीआ के दोखे मूआ चालत कुल की कानि ॥अंग 1373
  167. कबीर डूबहिगो रे बापुरे बहु लोगन की कानि ॥अंग 1373
  168. कबीर भली मधूकरी नाना बिधि को नाजु ॥अंग 1373
  169. कबीर दावै दाझनु होतु है निरदावै रहै निसंक ॥अंग 1373
  170. कबीर पालि समुहा सरवरु भरा पी न सकै कोई नीरु ॥अंग 1373
  171. कबीर परभाते तारे खिसहि तिउ इहु खिसै सरीरु ॥अंग 1373
  172. कबीर कोठी काठ की दह दिसि लागी आगि ॥अंग 1373
  173. कबीर संसा दूरि करु कागद देह बिहाइ ॥अंग 1373
  174. कबीर संतु न छाडै संतई जउ कोटिक मिलहि असंत ॥अंग 1373
  175. कबीर मनु सीतलु भइआ पाइआ ब्रहम गिआनु ॥अंग 1373
  176. कबीर सारी सिरजनहार की जानै नाही कोइ ॥अंग 1373
  177. कबीर भली भई जो भउ परिआ दिसा गइंी सभ भुलि ॥अंग 1373
  178. कबीरा धूरि सकेलि कै पुरीआ बांधी देह ॥अंग 1374
  179. कबीर सूरज चांद कै उदै भई सभ देह ॥अंग 1374
  180. जह अनभउ तह भै नही जह भउ तह हरि नाहि ॥अंग 1374
  181. कबीर जिनहु किछू जानिआ नही तिन सुख नीद बिहाइ ॥अंग 1374
  182. कबीर मारे बहुतु पुकारिआ पीर पुकारै अउर ॥अंग 1374
  183. कबीर चोट सुहेली सेल की लागत लेइ उसास ॥अंग 1374
  184. कबीर मुलां मुनारे किआ चढहि सांई न बहरा होइ ॥अंग 1374
  185. सेख सबूरी बाहरा किआ हज काबे जाइ ॥अंग 1374
  186. कबीर अलह की करि बंदगी जिह सिमरत दुखु जाइ ॥अंग 1374
  187. कबीर जोरी कीए जुलमु है कहता नाउ हलालु ॥अंग 1374
  188. कबीर खूबु खाना खीचरी जा महि अंम्रितु लोनु ॥अंग 1374
  189. कबीर गुरु लागा तब जानीऐ मिटै मोहु तन ताप ॥अंग 1374
  190. कबीर राम कहन महि भेदु है ता महि एकु बिचारु ॥अंग 1374
  191. कबीर रामै राम कहु कहिबे माहि बिबेक ॥अंग 1374
  192. कबीर जा घर साध न सेवीअहि हरि की सेवा नाहि ॥अंग 1374
  193. कबीर गूंगा हूआ बावरा बहरा हूआ कान ॥अंग 1374
  194. कबीर सतिगुर सूरमे बाहिआ बानु जु एकु ॥अंग 1374
  195. कबीर निरमल बूंद अकास की परि गई भूमि बिकार ॥अंग 1374
  196. कबीर निरमल बूंद अकास की लीनी भूमि मिलाइ ॥अंग 1375
  197. कबीर हज काबे हउ जाइ था आगै मिलिआ खुदाइ ॥अंग 1375
  198. कबीर हज काबै होइ होइ गइआ केती बार कबीर ॥अंग 1375
  199. कबीर जीअ जु मारहि जोरु करि कहते हहि जु हलालु ॥अंग 1375
  200. कबीर जोरु कीआ सो जुलमु है लेइ जबाबु खुदाइ ॥अंग 1375
  201. कबीर लेखा देना सुहेला जउ दिल सूची होइ ॥अंग 1375
  202. कबीर धरती अरु आकास महि दुइ तूं बरी अबध ॥अंग 1375
  203. कबीर मेरा मुझ महि किछु नही जो किछु है सो तेरा ॥अंग 1375
  204. कबीर तूं तूं करता तू हूआ मुझ महि रहा न हूं ॥अंग 1375
  205. कबीर बिकारह चितवते झूठे करते आस ॥अंग 1375
  206. कबीर हरि का सिमरनु जो करै सो सुखीआ संसारि ॥अंग 1375
  207. कबीर घाणी पीड़ते सतिगुर लीए छडाइ ॥अंग 1375
  208. कबीर टालै टोलै दिनु गइआ बिआजु बढंतउ जाइ ॥अंग 1375
  209. नामा माइआ मोहिआ कहै तिलोचनु मीत ॥अंग 1375
  210. कबीर कीचड़ि आटा गिरि परिआ किछू न आइओ हाथ ॥अंग 1376
  211. कबीर मनु जानै सभ बात जानत ही अउगनु करै ॥अंग 1376
  212. कबीर लागी प्रीति सुजान सिउ बरजै लोगु अजानु ॥अंग 1376
  213. कबीर कोठे मंडप हेतु करि काहे मरहु सवारि ॥अंग 1376
  214. कबीर जो मै चितवउ ना करै किआ मेरे चितवे होइ ॥अंग 1376
  215. कबीर काइआ काची कारवी केवल काची धातु ॥अंग 1376
  216. कबीर केसो केसो कूकीऐ न सोईऐ असार ॥अंग 1376
  217. कबीर काइआ कजली बनु भइआ मनु कुंचरु मय मंतु ॥अंग 1376
  218. कबीर राम रतनु मुखु कोथरी पारख आगै खोलि ॥अंग 1376
  219. कबीर राम नामु जानिओ नही पालिओ कटकु कुटंबु ॥अंग 1376
  220. कबीर आखी केरे माटुके पलु पलु गई बिहाइ ॥अंग 1376
  221. छाइआ रूपी साधु है जिनि तजिआ बादु बिबादु ॥228॥अंग 1376
  222. कबीर ऐसा बीजु बोइ बारह मास फलंत ॥अंग 1376
  223. कबीर दाता तरवरु दया फलु उपकारी जीवंत ॥अंग 1376
  224. कबीर साधू संगु परापती लिखिआ होइ लिलाट ॥अंग 1376
  225. कबीर एक घड़ी आधी घरी आधी हूं ते आध ॥अंग 1377
  226. कबीर भांग माछुली सुरा पानि जो जो प्रानी खांहि ॥अंग 1377
  227. नीचे लोइन करि रहउ ले साजन घट माहि ॥अंग 1377
  228. नीचे लोइन किउ करउ सभ घट देखउ पीउ ॥235॥अंग 1377
  229. कबीर बामनु गुरू है जगत का भगतन का गुरु नाहि ॥अंग 1377
  230. हरि है खांडु रेतु महि बिखरी हाथी चुनी न जाइ ॥अंग 1377
  231. कबीर जउ तुहि साध पिरंम की सीसु काटि करि गोइ ॥अंग 1377
  232. कबीर जउ तुहि साध पिरंम की पाके सेती खेलु ॥अंग 1377
  233. ढूंढत डोलहि अंध गति अरु चीनत नाही संत ॥अंग 1377
  234. हरि सो हीरा छाडि कै करहि आन की आस ॥अंग 1377
  235. बैरागी बंधनु करै ता को बडो अभागु ॥243॥अंग 1377