Lulla Family

वाणी: कबीर

वाणी

भगत कबीर

1398-1518 (परंपरा) · Banaras · 224 शबद + 243 सलोक

लालता-घाट, बनारस। एक जुलाहा (weaver) मुस्लिम परिवार में जन्मा, हिंदू गुरु रामानंद का शिष्य बना। कबीर ने जान-बूझ कर हर category तोड़ी, जाति, मज़हब, formal-philosophy। उनका approach: “कागद कारे करते-करते किसी ने हरि नहीं पाया।”

A weaver silhouetted at his handloom, a single thread of light across the warp
बनारस के लालता-घाट का जुलाहा अपने करघे पर। एक ताना, एक बाना, एक लकीर रोशनी।

दिल्ली के लोग कबीर को Mostly दोहों से जानते हैं, वो “कबीर साहब के दोहे।” मगर आदि ग्रंथ में 224 शबद और 243 सलोक हैं, बहुत बड़ा corpus। गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में compilation के time पर सोच-समझ कर इतना include किया।

कबीर का स्वर sharp है, कभी sarcastic, कभी direct-emotional। उनकी एक phrase: “जो सोता है सो खोता है, जो जागत है वही पावत है।” यह काम के बीच भी जागते रहना है, सिर्फ़ सुबह की नींद का मसला नहीं।

कबीर वाणी आदि ग्रंथ में मुख्यत: इन sections में: