अंग 291

अंग
291
राग Gauree
राग: Gauree · रचयिता: गुरु अर्जन देव जी (महला 5)
पढ़ने का समय: लगभग 2-3 मिनट
सुखमनी साहिब का हिस्सा। पूरी 24 अष्टपदियों की हिन्दी टीका /sukhmani-sahib/ पर है।
ਆਪਨ ਖੇਲੁ ਆਪਿ ਵਰਤੀਜਾ ॥
ਨਾਨਕ ਕਰਨੈਹਾਰੁ ਨ ਦੂਜਾ ॥੧॥
आपन खेलु आपि वरतीजा ॥
नानक करनैहारु न दूजा ॥१॥

हिन्दी अर्थ: हे नानक ! (जगत रूपी) अपनी खेल प्रभू ने स्वयं बनाई है। (उसके बिना इस खेल को) बनाने वाला और कोई नहीं। 1।
ਜਬ ਹੋਵਤ ਪ੍ਰਭ ਕੇਵਲ ਧਨੀ ॥
ਤਬ ਬੰਧ ਮੁਕਤਿ ਕਹੁ ਕਿਸ ਕਉ ਗਨੀ ॥
ਜਬ ਏਕਹਿ ਹਰਿ ਅਗਮ ਅਪਾਰ ॥
ਤਬ ਨਰਕ ਸੁਰਗ ਕਹੁ ਕਉਨ ਅਉਤਾਰ ॥
ਜਬ ਨਿਰਗੁਨ ਪ੍ਰਭ ਸਹਜ ਸੁਭਾਇ ॥
ਤਬ ਸਿਵ ਸਕਤਿ ਕਹਹੁ ਕਿਤੁ ਠਾਇ ॥
ਜਬ ਆਪਹਿ ਆਪਿ ਅਪਨੀ ਜੋਤਿ ਧਰੈ ॥
ਤਬ ਕਵਨ ਨਿਡਰੁ ਕਵਨ ਕਤ ਡਰੈ ॥
ਆਪਨ ਚਲਿਤ ਆਪਿ ਕਰਨੈਹਾਰ ॥
ਨਾਨਕ ਠਾਕੁਰ ਅਗਮ ਅਪਾਰ ॥੨॥
जब होवत प्रभ केवल धनी ॥
तब बंध मुकति कहु किस कउ गनी ॥
जब एकहि हरि अगम अपार ॥
तब नरक सुरग कहु कउन अउतार ॥
जब निरगुन प्रभ सहज सुभाइ ॥
तब सिव सकति कहहु कितु ठाइ ॥
जब आपहि आपि अपनी जोति धरै ॥
तब कवन निडरु कवन कत डरै ॥
आपन चलित आपि करनैहार ॥
नानक ठाकुर अगम अपार ॥२॥

हिन्दी अर्थ: जब मालिक प्रभू सिर्फ (स्वयं ही) था। तब बताओ किसे बंधनों में फंसा हुआ। और किसे मुक्त समझें? जब अगम और बेअंत प्रभू एक खुद ही था। तब बताओ,नर्कों और स्वर्गों में आने वाले कौन से जीव थे? जब सहज स्वभाव ही प्रभू निर्गुण था (त्रिगुणी माया से परे था)। (भाव। जब उसने माया रची ही नहीं थी) तब बताओ, कहाँ थे जीव और कहाँ थी माया? जब प्रभू खुद ही अपनी ज्योति जगाए बैठा था। तब कौन निडर थे और कौन किससे डरते थे? अपने तमाश आप ही करने वाला है। हे नानक ! अकाल-पुरख अगम और बेअंत है; 2।
ਅਬਿਨਾਸੀ ਸੁਖ ਆਪਨ ਆਸਨ ॥
ਤਹ ਜਨਮ ਮਰਨ ਕਹੁ ਕਹਾ ਬਿਨਾਸਨ ॥
ਜਬ ਪੂਰਨ ਕਰਤਾ ਪ੍ਰਭੁ ਸੋਇ ॥
ਤਬ ਜਮ ਕੀ ਤ੍ਰਾਸ ਕਹਹੁ ਕਿਸੁ ਹੋਇ ॥
ਜਬ ਅਬਿਗਤ ਅਗੋਚਰ ਪ੍ਰਭ ਏਕਾ ॥
ਤਬ ਚਿਤ੍ਰ ਗੁਪਤ ਕਿਸੁ ਪੂਛਤ ਲੇਖਾ ॥
ਜਬ ਨਾਥ ਨਿਰੰਜਨ ਅਗੋਚਰ ਅਗਾਧੇ ॥
ਤਬ ਕਉਨ ਛੁਟੇ ਕਉਨ ਬੰਧਨ ਬਾਧੇ ॥
ਆਪਨ ਆਪ ਆਪ ਹੀ ਅਚਰਜਾ ॥
ਨਾਨਕ ਆਪਨ ਰੂਪ ਆਪ ਹੀ ਉਪਰਜਾ ॥੩॥
अबिनासी सुख आपन आसन ॥
तह जनम मरन कहु कहा बिनासन ॥
जब पूरन करता प्रभु सोइ ॥
तब जम की त्रास कहहु किसु होइ ॥
जब अबिगत अगोचर प्रभ एका ॥
तब चित्र गुपत किसु पूछत लेखा ॥
जब नाथ निरंजन अगोचर अगाधे ॥
तब कउन छुटे कउन बंधन बाधे ॥
आपन आप आप ही अचरजा ॥
नानक आपन रूप आप ही उपरजा ॥३॥

हिन्दी अर्थ: जब अकाल-पुरख अपनी मौज में अपने ही स्वरूप में टिका बैठा था। तब बताओ, पैदा होना, मरना व मौत कहाँ थी? जब करतार पूरन प्रभू खुद ही था। तब बताओ, मौत का डर किस को हो सकता था? जब अदृष्य और अगोचर प्रभू एक खुद ही था। तब चित्रगुप्त किससे लेखा पूछ सकते थे? जब मालिक माया-रहित अथाह अगोचर स्वयं ही था। तो कौन माया के बंधनों से मुक्त था और कौन माया के बंधनों में बंधे हुए हैं? वह आश्चर्य जनक प्रभू अपने जैसा खुद ही है। हे नानक ! अपना आकार उसने स्वयं ही पैदा किया है। 3।
ਜਹ ਨਿਰਮਲ ਪੁਰਖੁ ਪੁਰਖ ਪਤਿ ਹੋਤਾ ॥
ਤਹ ਬਿਨੁ ਮੈਲੁ ਕਹਹੁ ਕਿਆ ਧੋਤਾ ॥
ਜਹ ਨਿਰੰਜਨ ਨਿਰੰਕਾਰ ਨਿਰਬਾਨ ॥
ਤਹ ਕਉਨ ਕਉ ਮਾਨ ਕਉਨ ਅਭਿਮਾਨ ॥
ਜਹ ਸਰੂਪ ਕੇਵਲ ਜਗਦੀਸ ॥
ਤਹ ਛਲ ਛਿਦ੍ਰ ਲਗਤ ਕਹੁ ਕੀਸ ॥
ਜਹ ਜੋਤਿ ਸਰੂਪੀ ਜੋਤਿ ਸੰਗਿ ਸਮਾਵੈ ॥
ਤਹ ਕਿਸਹਿ ਭੂਖ ਕਵਨੁ ਤ੍ਰਿਪਤਾਵੈ ॥
ਕਰਨ ਕਰਾਵਨ ਕਰਨੈਹਾਰੁ ॥
ਨਾਨਕ ਕਰਤੇ ਕਾ ਨਾਹਿ ਸੁਮਾਰੁ ॥੪॥
जह निरमल पुरखु पुरख पति होता ॥
तह बिनु मैलु कहहु किआ धोता ॥
जह निरंजन निरंकार निरबान ॥
तह कउन कउ मान कउन अभिमान ॥
जह सरूप केवल जगदीस ॥
तह छल छिद्र लगत कहु कीस ॥
जह जोति सरूपी जोति संगि समावै ॥
तह किसहि भूख कवनु त्रिपतावै ॥
करन करावन करनैहारु ॥
नानक करते का नाहि सुमारु ॥४॥

हिन्दी अर्थ: जिस अवस्था में जीवों का मालिक निर्मल प्रभू स्वयं ही था वहाँ वह मैल-रहित था। तो बताओ, उसने कौन सी मैल धोनी थी? जहाँ माया रहित आकार रहित और वासना रहित प्रभू ही था। वहाँ गुमान-अहंकार किसे होना था? जहाँ केवल जगत के मालिक प्रभू की ही हस्ती थी। वहाँ बताएं, छल और ऐब किसे लग सकते थे? जब ज्योति-रूप प्रभू खुद ही ज्योति में लीन था। तब किसे (माया की) भूख हो सकती थी और कौन तृप्त था? करतार खुद ही सब कुछ करने वाला और जीवों से कराने वाला है। हे नानक ! करतार का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। 4।
ਜਬ ਅਪਨੀ ਸੋਭਾ ਆਪਨ ਸੰਗਿ ਬਨਾਈ ॥
ਤਬ ਕਵਨ ਮਾਇ ਬਾਪ ਮਿਤ੍ਰ ਸੁਤ ਭਾਈ ॥
ਜਹ ਸਰਬ ਕਲਾ ਆਪਹਿ ਪਰਬੀਨ ॥
ਤਹ ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਕਹਾ ਕੋਊ ਚੀਨ ॥
ਜਬ ਆਪਨ ਆਪੁ ਆਪਿ ਉਰਿ ਧਾਰੈ ॥
ਤਉ ਸਗਨ ਅਪਸਗਨ ਕਹਾ ਬੀਚਾਰੈ ॥
ਜਹ ਆਪਨ ਊਚ ਆਪਨ ਆਪਿ ਨੇਰਾ ॥
ਤਹ ਕਉਨ ਠਾਕੁਰੁ ਕਉਨੁ ਕਹੀਐ ਚੇਰਾ ॥
ਬਿਸਮਨ ਬਿਸਮ ਰਹੇ ਬਿਸਮਾਦ ॥
ਨਾਨਕ ਅਪਨੀ ਗਤਿ ਜਾਨਹੁ ਆਪਿ ॥੫॥
जब अपनी सोभा आपन संगि बनाई ॥
तब कवन माइ बाप मित्र सुत भाई ॥
जह सरब कला आपहि परबीन ॥
तह बेद कतेब कहा कोऊ चीन ॥
जब आपन आपु आपि उरि धारै ॥
तउ सगन अपसगन कहा बीचारै ॥
जह आपन ऊच आपन आपि नेरा ॥
तह कउन ठाकुरु कउनु कहीऐ चेरा ॥
बिसमन बिसम रहे बिसमाद ॥
नानक अपनी गति जानहु आपि ॥५॥

हिन्दी अर्थ: जब प्रभू ने अपनी शोभा अपने साथ बनाई थी (भाव- जब कोई और उसकी शोभा करने वाला नहीं था) तो कौन माँ, पिता, मित्र, पुत्र अथवा भाई थे? जब अकाल पुरख स्वयं ही सारी ताकतों में प्रवीण था। तब कहाँ कोई वेद (हिंदू धर्म पुस्तक) और कतेबों को (मुसलमानों की धर्म पुस्तकें) विचारता था? जब प्रभू अपने आप को खुद ही अपने आप में टिकाए बैठा था। अच्छे-बुरे शगुन (अपशगुन) कौन सोचता था? बताएं, जब प्रभू अपने आप ही उच्च और निम्न था तब मालिक कौन था और सेवक कौन था? जीव तेरी गति तलाशते हुए हैरान और आश्चर्यचकित हो रहे हैं। हे नानक ! (प्रभू के आगे अरदास कर और कह, हे प्रभू !) तू अपनी गति आप ही जानता है। 5।
ਜਹ ਅਛਲ ਅਛੇਦ ਅਭੇਦ ਸਮਾਇਆ ॥
ਊਹਾ ਕਿਸਹਿ ਬਿਆਪਤ ਮਾਇਆ ॥
ਆਪਸ ਕਉ ਆਪਹਿ ਆਦੇਸੁ ॥
ਤਿਹੁ ਗੁਣ ਕਾ ਨਾਹੀ ਪਰਵੇਸੁ ॥
ਜਹ ਏਕਹਿ ਏਕ ਏਕ ਭਗਵੰਤਾ ॥
ਤਹ ਕਉਨੁ ਅਚਿੰਤੁ ਕਿਸੁ ਲਾਗੈ ਚਿੰਤਾ ॥
ਜਹ ਆਪਨ ਆਪੁ ਆਪਿ ਪਤੀਆਰਾ ॥
ਤਹ ਕਉਨੁ ਕਥੈ ਕਉਨੁ ਸੁਨਨੈਹਾਰਾ ॥
ਬਹੁ ਬੇਅੰਤ ਊਚ ਤੇ ਊਚਾ ॥
ਨਾਨਕ ਆਪਸ ਕਉ ਆਪਹਿ ਪਹੂਚਾ ॥੬॥
जह अछल अछेद अभेद समाइआ ॥
ऊहा किसहि बिआपत माइआ ॥
आपस कउ आपहि आदेसु ॥
तिहु गुण का नाही परवेसु ॥
जह एकहि एक एक भगवंता ॥
तह कउनु अचिंतु किसु लागै चिंता ॥
जह आपन आपु आपि पतीआरा ॥
तह कउनु कथै कउनु सुननैहारा ॥
बहु बेअंत ऊच ते ऊचा ॥
नानक आपस कउ आपहि पहूचा ॥६॥

हिन्दी अर्थ: जिस अवस्था में अछल-अबिनाशी और अभेद प्रभू (अपने आप में) टिका हुआ है। वहाँ किसे माया छू सकती है? (जब) प्रभू अपने आप को ही नमस्कार करता है। (माया के) तीन गुणों का (उस पर) असर नहीं पड़ता। जब भगवान केवल एक खुद ही था। तब कौन बेफिक्र था और किसको कोई चिंता लगती थी। जब अपने आप को पतियाने वाला प्रभू स्वयं ही था। तब कौन बोलता था और कौन सुनने वाला था? हे नानक ! प्रभू बड़ा बेअंत है। सबसे ऊँचा है। अपने आप तक आप ही पहुँचने वाला है। 6।
ਜਹ ਆਪਿ ਰਚਿਓ ਪਰਪੰਚੁ ਅਕਾਰੁ ॥
ਤਿਹੁ ਗੁਣ ਮਹਿ ਕੀਨੋ ਬਿਸਥਾਰੁ ॥
ਪਾਪੁ ਪੁੰਨੁ ਤਹ ਭਈ ਕਹਾਵਤ ॥
जह आपि रचिओ परपंचु अकारु ॥
तिहु गुण महि कीनो बिसथारु ॥
पापु पुंनु तह भई कहावत ॥

हिन्दी अर्थ: जब प्रभू ने स्वयं जगत की खेल रच दी। और माया के तीन गुणों का पसारा पसार दिया; तब ये बात चल पड़ी कि ये पाप है ये पुंन है।

संदर्भ: यह अंग 291 है, राग Gauree का हिस्सा। मुख्य रचयिता: गुरु अर्जन देव जी (महला 5)।

M5 की वाणी, courtly-intimate, settled-mature।

Civil Services के interview के बाद का wait, घर का माहौल।

ऊपर दिखाए गए शबद आदि ग्रंथ की मूल वाणी हैं, गुरमुखी में original और साथ में देवनागरी transliteration। हिन्दी अर्थ banidb.com के verified translation (मुख्यत: प्रोफ़ेसर साहिब सिंह की टीका) से लिया गया है।

यह अंग कुल 55 पंक्तियों का है, 7 शबद में बँटा। ग्रंथ साहिब की पारंपरिक pagination में यही “अंग 291” है। हर ang एक leaf है, “पन्ना” नहीं, क्योंकि सिख परंपरा में पूरी पोथी को एक जीवित-शरीर (Guru) माना जाता है, और हर पन्ना उसका एक अंग।

राग के context में: Gauree राग का स्वर specific है, समय और mood दोनों define करता है। पूरे राग का full background /adi-granth/raag/… पर है।

पाठ का तरीक़ा: ऊपर के शबद को धीरे-धीरे एक बार पढ़िए, हिन्दी अर्थ के साथ। फिर एक बार बिना अर्थ के सिर्फ़ देवनागरी पढ़िए, rhythm के लिए। यह दोनों pass एक साथ ज़्यादा देते हैं।

अगर इस शबद की कोई पंक्ति आज की ज़िंदगी में सीधे लगती है, उसे note कर लीजिए। ग्रंथ साहिब का design ही यही है, हर अंग पर कुछ-न-कुछ हर पाठक के लिए होता है।

“हुकमनामा” परंपरा: हर सुबह gurdwara में रागी जी एक अंग खोलते हैं randomly, और जो शबद पहले आता है, वो दिन का “हुकमनामा” (आदेश) कहलाता है। आप भी यही कर सकते हैं, online, हर रोज़ एक अलग ang पर click करते जाइए।

नई दिल्ली के पुराने gurdwaras (बंगला साहिब, सीस-गंज, रकाब-गंज, बाबा साहिब का गुरुद्वारा) में रोज़ अंग-by-अंग पाठ चलता है। अगर वहाँ कभी समय बिताया है, यह commentary उस आदत को रिफ़्रेश करेगी।

अगर आप ग्रंथ साहिब को पहली बार पढ़ रहे हैं: किसी एक specific राग को चुनिए (जैसे राग सूही की लावां, M4 की), उसकी सब अंगों को क्रम से पढ़िए। यह random-click से बेहतर है शुरुआत के लिए।

तीसरा approach: अगर आप किसी एक रचयिता (जैसे कबीर) में specifically interested हो, उनकी वाणी की सूची देखिए और वहीं से अंगों पर जाइए।

हर शबद का अपना mood, अपनी कहानी, अपनी historical setting। 16वीं-17वीं सदी की पंजाब-context सब वाणी में बैठी है, मगर underlying claims universal हैं।

ग्रंथ साहिब का format unique है: 31 रागों में organize, 5 गुरुओं + 9वें गुरु की वाणी, plus 15 भगतों की वाणी (कबीर, फ़रीद, नामदेव, रविदास, etc.)। यह pan-Indian + pan-class + pan-religious आवाज़ें एक साथ हैं।

दिल्ली के context में ग्रंथ साहिब विशेष है: सीस-गंज और रकाब-गंज दिल्ली में हैं (शाहजहाँनाबाद के दिल में), गुरु तेग बहादुर जी की शहादत यहीं हुई, गुरु हरकिशन साहिब का गुरुद्वारा बाला साहिब भी यहीं।

“एक ओंकार” से शुरू, “सलोक महला 9” + “मुंदावनी M5” से समाप्त, बीच में 1430 अंग। यह एक sustained spiritual document है, sixteenth-seventeenth century में compile, मगर अब भी fully living।

हर अंग पर आप दो-तीन बार वापस आ सकते हैं अलग-अलग times पर, और हर बार कुछ नया दिखेगा। यही reading-design है।

अगर specific verses की deeper commentary चाहिए, या किसी विशेष शबद का context, contact कर सकते हैं lulla.net से।

आगे का अंग: अंग 292 →, पीछे का: ← अंग 290

हर रोज़ एक नया अंग, धीरे-धीरे, बिना hurry के। यही ग्रंथ-साहिब-reading का सबसे sensible approach है।

(यह अंग की commentary संक्षेप में। पूरी verse-by-verse interpretation के लिए traditional steek/teeka resources भी available हैं, जो SGGS के scholarly commentary में deep जाते हैं।)

शबद को पढ़ने का एक और तरीक़ा: किसी भी पंक्ति को धीरे-धीरे तीन-चार बार पढ़िए, अर्थ खुलने दीजिए। हर बार थोड़ा अलग layer सामने आता है। यह “slow reading” है, scanning नहीं।

संगति का अहम role: ग्रंथ साहिब को अकेले भी पढ़ा जा सकता है, मगर कीर्तन-संगति में सुनना एक अलग depth देता है। दिल्ली के gurdwaras में रोज़ शाम 7 बजे की रहिरास और सुबह की आसा-दी-वार, दोनों openings हैं।

शबद का audio: SikhiToTheMax जैसी apps पर हर अंग का audio available है, classical raagis की voices में। एक बार audio साथ पढ़ कर देखिए, शबद की rhythm पकड़ने लगती है।

संदर्भ पर थोड़ा और: यह अंग 16वीं-17वीं सदी के Punjab में compose हुआ। उस वक़्त की सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक स्थिति काफ़ी अलग थी, मगर मन-की-mechanics universal हैं। इसीलिए आज भी relevant है।

एक practice suggestion: अगर आज कोई specific मुद्दा/decision/feeling आपको परेशान कर रहा है, इस शबद को पढ़ कर बैठिए। कोई एक line आज की state से directly speak कर सकती है। ग्रंथ-साहिब का “हुकमनामा” design यही करता है।

अंत में एक छोटी-सी note: यह commentary helper है, substitute नहीं। genuine sant-समाज, granthi साहिबान, और experienced kirtaniye जी से सीखना सबसे ऊँचा रास्ता है। यह site उस path का supplement है, replacement नहीं।

स्रोत: मूल गुरमुखी पाठ banidb.com (Khalis Foundation, open-source SGGS database) से। हिन्दी अर्थ प्रोफ़ेसर साहिब सिंह की टीका पर आधारित। देवनागरी transliteration lulla.net पर automated।