राग मारू
मध्याह्न का राग, मरुस्थल-स्वर।
मारू मध्याह्न का राग है, थोड़ा ज़ोरदार। मारवाड़-क्षेत्र (पश्चिमी राजस्थान) से नाम का सम्बन्ध है, मरुस्थल की कठोरता का स्वर।
ग्रंथ में मारू की रचनाएँ अंग नौ-सौ-नवासी के क़रीब से शुरू होती हैं, और गुरु नानक की एक प्रसिद्ध "मारू सोलहे" की रचना यहीं है।
"पांच बरख को अनाथु ध्रू बारिकु हरि सिमरत अमर अटारे ॥" मारू M5
इस राग के सब अंग
98999099199299399499599699799899910001001100210031004100510061007100810091010101110121013101410151016101710181019102010211022102310241025102610271028102910301031103210331034103510361037103810391040104110421043104410451046104710481049105010511052105310541055105610571058105910601061106210631064106510661067106810691070107110721073107410751076107710781079108010811082108310841085108610871088108910901091109210931094109510961097109810991100110111021103110411051106
इस राग के शबद
हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।
महला 1 (64)
- साजन तेरे चरन की होइ रहा सद धूरि ॥अंग 989
- पिछहु राती सदड़ा नामु खसम का लेहि ॥अंग 989
- मिलि मात पिता पिंडु कमाइआ ॥अंग 989
- करणी कागदु मनु मसवाणी बुरा भला दुइ लेख पए ॥अंग 990
- बिमल मझारि बससि निरमल जल पदमनि जावल रे ॥अंग 990
- पतित पुनीत असंख होहि हरि चरनी मनु लाग ॥अंग 990
- सखी सहेली गरबि गहेली ॥अंग 990
- मुल खरीदी लाला गोला मेरा नाउ सभागा ॥अंग 991
- कोई आखै भूतना को कहै बेताला ॥अंग 991
- इहु धनु सरब रहिआ भरपूरि ॥अंग 991
- सूर सरु सोसि लै सोम सरु पोखि लै जुगति करि मरतु सु सनबंधु कीजै ॥अंग 991
- माइआ मुई न मनु मुआ सरु लहरी मै मतु ॥अंग 992
- जोगी जुगति नामु निरमाइलु ता कै मैलु न राती ॥अंग 992
- अहिनिसि जागै नीद न सोवै ॥अंग 993
- बेद पुराण कथे सुणे हारे मुनी अनेका ॥अंग 1008
- बिखु बोहिथा लादिआ दीआ समुंद मंझारि ॥अंग 1009
- सबदि मरै ता मारि मरु भागो किसु पहि जाउ ॥अंग 1010
- साची कार कमावणी होरि लालच बादि ॥अंग 1010
- लालै गारबु छोडिआ गुर कै भै सहजि सुभाई ॥अंग 1011
- हुकमु भइआ रहणा नही धुरि फाटे चीरै ॥अंग 1012
- मनमुखु लहरि घरु तजि विगूचै अवरा के घर हेरै ॥अंग 1012
- मात पिता संजोगि उपाए रकतु बिंदु मिलि पिंडु करे ॥अंग 1013
- आवउ वंञउ डुंमणी किती मित्र करेउ ॥अंग 1014
- ना भैणा भरजाईआ ना से ससुड़ीआह ॥अंग 1015
- ना जाणा मूरखु है कोई ना जाणा सिआणा ॥अंग 1015
- साचा सचु सोई अवरु न कोई ॥अंग 1020
- आपे धरती धउलु अकासं ॥अंग 1021
- दूजी दुरमति अंनी बोली ॥अंग 1022
- आदि जुगादी अपर अपारे ॥अंग 1023
- साचै मेले सबदि मिलाए ॥अंग 1024
- आपे करता पुरखु बिधाता ॥अंग 1025
- केते जुग वरते गुबारै ॥अंग 1026
- हरि सा मीतु नाही मै कोई ॥अंग 1027
- असुर सघारण रामु हमारा ॥अंग 1028
- घरि रहु रे मन मुगध इआने ॥अंग 1030
- सरणि परे गुरदेव तुमारी ॥अंग 1031
- साचे साहिब सिरजणहारे ॥अंग 1032
- काइआ नगरु नगर गड़ अंदरि ॥अंग 1033
- दरसनु पावा जे तुधु भावा ॥अंग 1034
- अरबद नरबद धुंधूकारा ॥अंग 1035
- आपे आपु उपाइ निराला ॥अंग 1036
- सुंन कला अपरंपरि धारी ॥अंग 1037
- जह देखा तह दीन दइआला ॥अंग 1038
- हरि धनु संचहु रे जन भाई ॥अंग 1039
- सचु कहहु सचै घरि रहणा ॥अंग 1040
- कामु क्रोधु परहरु पर निंदा ॥अंग 1041
- कुदरति करनैहार अपारा ॥अंग 1042
- विणु गाहक गुणु वेचीऐ तउ गुणु सहघो जाइ ॥अंग 1086
- भूली भूली मै फिरी पाधरु कहै न कोइ ॥अंग 1087
- महल कुचजी मड़वड़ी काली मनहु कसुध ॥अंग 1088
- साचु सील सचु संजमी सा पूरी परवारि ॥अंग 1088
- ससुरै पेईऐ कंत की कंतु अगंमु अथाहु ॥अंग 1088
- ना मैला ना धुंधला ना भगवा ना कचु ॥अंग 1089
- हुकमि रजाई साखती दरगह सचु कबूलु ॥अंग 1090
- अलगउ जोइ मधूकड़उ सारंगपाणि सबाइ ॥अंग 1090
- सरबे जोइ अगछमी दूखु घनेरो आथि ॥अंग 1090
- पूंजी साचउ नामु तू अखुटउ दरबु अपारु ॥अंग 1090
- पूरब प्रीति पिराणि लै मोटउ ठाकुरु माणि ॥अंग 1090
- मांदलु बेदि सि बाजणो घणो धड़ीऐ जोइ ॥अंग 1091
- सागरु गुणी अथाहु किनि हाथाला देखीऐ ॥अंग 1091
- सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि ॥अंग 1091
- हउ मुआ मै मारिआ पउणु वहै दरीआउ ॥अंग 1091
- हउ मै करी तां तू नाही तू होवहि हउ नाहि ॥अंग 1092
- जिनि कीआ तिनि देखिआ आपे जाणै सोइ ॥अंग 1093
महला 2 (1)
- आपे जाणै करे आपि आपे आणै रासि ॥अंग 1093
महला 3 (75)
- जह बैसालहि तह बैसा सुआमी जह भेजहि तह जावा ॥अंग 993
- आवण जाणा ना थीऐ निज घरि वासा होइ ॥अंग 993
- हरि की चरणी लागि रहा विचहु आपु गवाइ ॥1॥अंग 994
- सचि रते से टोलि लहु से विरले संसारि ॥अंग 994
- मारू ते सीतलु करे मनूरहु कंचनु होइ ॥अंग 994
- जिस नो प्रेमु मंनि वसाए ॥अंग 1016
- हुकमी सहजे स्रिसटि उपाई ॥अंग 1043
- एको एकु वरतै सभु सोई ॥अंग 1044
- जगजीवनु साचा एको दाता ॥अंग 1045
- जो आइआ सो सभु को जासी ॥अंग 1047
- सचु सालाही गहिर गंभीरै ॥अंग 1048
- एको सेवी सदा थिरु साचा ॥अंग 1049
- सचै सचा तखतु रचाइआ ॥अंग 1050
- आपे आपु उपाइ उपंना ॥अंग 1051
- मारू सोलहे 3 ॥अंग 1052
- सो सचु सेविहु सिरजणहारा ॥अंग 1053
- सतिगुरु सेवनि से वडभागी ॥अंग 1054
- तिस दा अंतु न पाईऐ पारावारा ॥अंग 1055
- मेरै प्रभि साचै इकु खेलु रचाइआ ॥अंग 1056
- निहचलु एकु सदा सचु सोई ॥अंग 1057
- गुरमुखि नाद बेद बीचारु ॥अंग 1058
- आपे निआउ करे सभु साचा साचे साचि मिलाइदा ॥1॥अंग 1059
- आदि जुगादि दइआपति दाता ॥अंग 1060
- जुग छतीह कीओ गुबारा ॥अंग 1061
- ओसु तिलु न तमाइ वेपरवाहा ॥अंग 1062
- जो तुधु करणा सो करि पाइआ ॥अंग 1063
- काइआ कंचनु सबदु वीचारा ॥अंग 1064
- निरंकारि आकारु उपाइआ ॥अंग 1066
- अगम अगोचर वेपरवाहे ॥अंग 1067
- नदरी भगता लैहु मिलाए ॥अंग 1068
- गुर ते गिआनु पाइआ अति खड़गु करारा ॥अंग 1087
- केदारा रागा विचि जाणीऐ भाई सबदे करे पिआरु ॥अंग 1087
- निहकंटक राजु भुंचि तू गुरमुखि सचु कमाई ॥अंग 1087
- आपे करणी कार आपि आपे करे रजाइ ॥अंग 1087
- माइआ वेखि न भुलु तू मनमुख मूरखा ॥अंग 1087
- जिना गुरु नही भेटिआ भै की नाही बिंद ॥अंग 1088
- त्रिभवण ढूढी सजणा हउमै बुरी जगति ॥अंग 1088
- गुरमुखि आपे बखसिओनु हरि नामि समाणे ॥अंग 1088
- आपणा आपु पछाणिआ नामु निधानु पाइआ ॥अंग 1088
- पिर खुसीए धन रावीए धन उरि नामु सीगारु ॥अंग 1088
- तखति राजा सो बहै जि तखतै लाइक होई ॥अंग 1088
- सभना का पिरु एकु है पिर बिनु खाली नाहि ॥अंग 1088
- मन के अधिक तरंग किउ दरि साहिब छुटीऐ ॥अंग 1088
- हरि का नामु अमोलु है किउ कीमति कीजै ॥अंग 1088
- सहजि वणसपति फुलु फलु भवरु वसै भै खंडि ॥अंग 1089
- जो जन लूझहि मनै सिउ से सूरे परधाना ॥अंग 1089
- जोगी होवा जगि भवा घरि घरि भीखिआ लेउ ॥अंग 1089
- जितु दरि लेखा मंगीऐ सो दरु सेविहु न कोइ ॥अंग 1089
- सूरे एहि न आखीअहि अहंकारि मरहि दुखु पावहि ॥अंग 1089
- कागउ होइ न ऊजला लोहे नाव न पारु ॥अंग 1089
- मारू मारण जो गए मारि न सकहि गवार ॥अंग 1089
- दोवै तरफा उपाईओनु विचि सकति सिव वासा ॥अंग 1090
- होवा पंडितु जोतकी वेद पड़ा मुखि चारि ॥अंग 1090
- आपि उपाए करे आपि आपे नदरि करेइ ॥अंग 1090
- कंटकु कालु एकु है होरु कंटकु न सूझै ॥अंग 1090
- मनमुख कालु विआपदा मोहि माइआ लागे ॥अंग 1090
- आपे पिंडु सवारिओनु विचि नव निधि नामु ॥अंग 1090
- जिनी अंदरु भालिआ गुर सबदि सुहावै ॥अंग 1091
- इसु जुग महि नामु निधानु है नामो नालि चलै ॥अंग 1091
- मनमुख वापारै सार न जाणनी बिखु विहाझहि बिखु संग्रहहि बिख सिउ धरहि पिआरु ॥अंग 1091
- दुखु लगा बिनु सेविऐ हुकमु मंने दुखु जाइ ॥अंग 1091
- हरि नाम बिना जगतु है निरधनु बिनु नावै त्रिपति नाही ॥अंग 1091
- इसु जग महि संती धनु खटिआ जिना सतिगुरु मिलिआ प्रभु आइ ॥अंग 1092
- जिनि उपाई मेदनी सोई सार करेइ ॥अंग 1092
- अंतरि जपु तपु संजमो गुर सबदी जापै ॥अंग 1092
- लोकु अवगणा की बंन॑ै गंठड़ी गुण न विहाझै कोइ ॥अंग 1092
- गुण अवगुण समानि हहि जि आपि कीते करतारि ॥अंग 1092
- अंदरि राजा तखतु है आपे करे निआउ ॥अंग 1092
- मनु माणकु जिनि परखिआ गुर सबदी वीचारि ॥अंग 1093
- मनमुख अंदरु न भालनी मुठे अहंमते ॥अंग 1093
- सभे थोक विसारि इको मितु करि ॥अंग 1093
- भाणै हुकमु मनाइओनु भाणै सुखु पाइआ ॥अंग 1093
- जिन कउ अंदरि गिआनु नही भै की नाही बिंद ॥अंग 1093
- मन की पत्री वाचणी सुखी हू सुखु सारु ॥अंग 1093
- आपे करि करि वेखदा आपे सभु सचा ॥अंग 1094
महला 4 (13)
- जपिओ नामु सुक जनक गुर बचनी हरि हरि सरणि परे ॥अंग 995
- सिध समाधि जपिओ लिव लाई साधिक मुनि जपिआ ॥अंग 995
- हरि हरि नामु निधानु लै गुरमति हरि पति पाइ ॥अंग 996
- हउ पूंजी नामु दसाइदा को दसे हरि धनु रासि ॥अंग 996
- हरि हरि कथा सुणाइ प्रभ गुरमति हरि रिदै समाणी ॥अंग 996
- हरि भाउ लगा बैरागीआ वडभागी हरि मनि राखु ॥अंग 997
- हरि हरि भगति भरे भंडारा ॥अंग 997
- हरि हरि नामु जपहु मन मेरे ॥अंग 998
- सचा आपि सवारणहारा ॥अंग 1069
- हरि अगम अगोचरु सदा अबिनासी ॥अंग 1070
- नाम विहूणे भरमसहि आवहि जावहि नीत ॥अंग 1087
- सागरु देखउ डरि मरउ भै तेरै डरु नाहि ॥अंग 1087
- चड़ि बोहिथै चालसउ सागरु लहरी देइ ॥अंग 1087
महला 5 (147)
- डरपै धरति अकासु नख्यत्रा सिर ऊपरि अमरु करारा ॥अंग 998
- पांच बरख को अनाथु ध्रू बारिकु हरि सिमरत अमर अटारे ॥अंग 999
- वित नवित भ्रमिओ बहु भाती अनिक जतन करि धाए ॥अंग 999
- कवन थान धीरिओ है नामा कवन बसतु अहंकारा ॥अंग 999
- मान मोह अरु लोभ विकारा बीओ चीति न घालिओ ॥अंग 1000
- खुलिआ करमु क्रिपा भई ठाकुर कीरतनु हरि हरि गाई ॥अंग 1000
- जो समरथु सरब गुण नाइकु तिस कउ कबहु न गावसि रे ॥अंग 1000
- अंतरजामी सभ बिधि जानै तिस ते कहा दुलारिओ ॥अंग 1000
- चरन कमल प्रभ राखे चीति ॥अंग 1001
- प्रान सुखदाता जीअ सुखदाता तुम काहे बिसारिओ अगिआनथ ॥अंग 1001
- गुपतु करता संगि सो प्रभु डहकावए मनुखाइ ॥अंग 1001
- बाहरि ढूढन ते छूटि परे गुरि घर ही माहि दिखाइआ था ॥अंग 1002
- जिसहि साजि निवाजिआ तिसहि सिउ रुच नाहि ॥अंग 1002
- फूटो आंडा भरम का मनहि भइओ परगासु ॥अंग 1002
- कोटि लाख सरब को राजा जिसु हिरदै नामु तुमारा ॥अंग 1003
- ओअंकारि उतपाती ॥अंग 1003
- मोहनी मोहि लीए त्रै गुनीआ ॥अंग 1004
- सिमरहु एकु निरंजन सोऊ ॥अंग 1004
- कत कउ डहकावहु लोगा मोहन दीन किरपाई ॥1॥अंग 1005
- मेरा ठाकुरु अति भारा ॥अंग 1005
- पतित उधारन तारन बलि बलि बले बलि जाईऐ ॥अंग 1005
- त्रिपति आघाए संता ॥अंग 1006
- छोडि सगल सिआणपा मिलि साध तिआगि गुमानु ॥अंग 1006
- जिनी नामु विसारिआ से होत देखे खेह ॥अंग 1006
- पुरखु पूरन सुखह दाता संगि बसतो नीत ॥अंग 1006
- चलत बैसत सोवत जागत गुर मंत्रु रिदै चितारि ॥अंग 1006
- तजि आपु बिनसी तापु रेण साधू थीउ ॥अंग 1007
- प्रतिपालि माता उदरि राखै लगनि देत न सेक ॥अंग 1007
- पतित पावन नामु जा को अनाथ को है नाथु ॥अंग 1007
- संजोगु विजोगु धुरहु ही हूआ ॥अंग 1007
- वैदो न वाई भैणो न भाई एको सहाई रामु हे ॥1॥अंग 1008
- लख चउरासीह भ्रमते भ्रमते दुलभ जनमु अब पाइओ ॥1॥अंग 1017
- करि अनुग्रहु राखि लीनो भइओ साधू संगु ॥अंग 1017
- ससत्रि तीखणि काटि डारिओ मनि न कीनो रोसु ॥अंग 1017
- आराधना अराधनु नीका हरि हरि नामु अराधना ॥2॥अंग 1018
- आउ जी तू आउ हमारै हरि जसु स्रवन सुनावना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1018
- जीवना सफल जीवन सुनि हरि जपि जपि सद जीवना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1019
- जिसु ग्रिहि बहुतु तिसै ग्रिहि चिंता ॥अंग 1019
- बिरखै हेठि सभि जंत इकठे ॥अंग 1019
- कला उपाइ धरी जिनि धरणा ॥अंग 1071
- संगी जोगी नारि लपटाणी ॥अंग 1072
- करै अनंदु अनंदी मेरा ॥अंग 1073
- गुरु गोपालु गुरु गोविंदा ॥अंग 1074
- आदि निरंजनु प्रभु निरंकारा ॥अंग 1075
- जो दीसै सो एको तूहै ॥अंग 1076
- सूरति देखि न भूलु गवारा ॥अंग 1077
- सिमरै धरती अरु आकासा ॥अंग 1078
- प्रभ समरथ सरब सुख दाना ॥अंग 1080
- तू साहिबु हउ सेवकु कीता ॥अंग 1081
- अचुत पारब्रहम परमेसुर अंतरजामी ॥अंग 1082
- अलह अगम खुदाई बंदे ॥अंग 1083
- पारब्रहम सभ ऊच बिराजे ॥अंग 1084
- चरन कमल हिरदै नित धारी ॥अंग 1085
- माइआ मनहु न वीसरै मांगै दंमा दंम ॥अंग 1093
- माइआ साथि न चलई किआ लपटावहि अंध ॥अंग 1093
- तू चउ सजण मैडिआ डेई सिसु उतारि ॥अंग 1094
- नीहु महिंजा तऊ नालि बिआ नेह कूड़ावे डेखु ॥अंग 1094
- उठी झालू कंतड़े हउ पसी तउ दीदारु ॥अंग 1094
- तू सचा साहिबु सचु सचु सभु धारिआ ॥अंग 1094
- जे तू मित्रु असाडड़ा हिक भोरी ना वेछोड़ि ॥अंग 1094
- दुरजन तू जलु भाहड़ी विछोड़े मरि जाहि ॥अंग 1094
- दुरजनु दूजा भाउ है वेछोड़ा हउमै रोगु ॥अंग 1094
- तू अगम दइआलु बेअंतु तेरी कीमति कहै कउणु ॥अंग 1094
- जे तू वतहि अंङणे हभ धरति सुहावी होइ ॥अंग 1095
- हभे टोल सुहावणे सहु बैठा अंङणु मलि ॥अंग 1095
- सेज विछाई कंत कू कीआ हभु सीगारु ॥अंग 1095
- तू पारब्रहमु परमेसरु जोनि न आवही ॥अंग 1095
- जा मू पसी हठ मै पिरी महिजै नालि ॥अंग 1095
- नानक बैठा भखे वाउ लंमे सेवहि दरु खड़ा ॥अंग 1095
- किआ गालाइओ भूछ पर वेलि न जोहे कंत तू ॥अंग 1095
- सुघड़ु सुजाणु सरूपु तू सभ महि वरतंता ॥अंग 1095
- कुरीए कुरीए वैदिआ तलि गाड़ा महरेरु ॥अंग 1095
- सचु जाणै कचु वैदिओ तू आघू आघे सलवे ॥अंग 1095
- भोरे भोरे रूहड़े सेवेदे आलकु ॥अंग 1095
- तुधु रूपु न रेखिआ जाति तू वरना बाहरा ॥अंग 1096
- गहडड़ड़ा त्रिणि छाइआ गाफल जलिओहु भाहि ॥अंग 1096
- नानक पीठा पका साजिआ धरिआ आणि मउजूदु ॥अंग 1096
- नानक भुसरीआ पकाईआ पाईआ थालै माहि ॥अंग 1096
- तुधु जग महि खेलु रचाइआ विचि हउमै पाईआ ॥अंग 1096
- आगाहा कू त्राघि पिछा फेरि न मुहडड़ा ॥अंग 1096
- सजणु मैडा चाईआ हभ कही दा मितु ॥अंग 1096
- गुझड़ा लधमु लालु मथै ही परगटु थिआ ॥अंग 1096
- जा तू मेरै वलि है ता किआ मुहछंदा ॥अंग 1096
- डेखण कू मुसताकु मुखु किजेहा तउ धणी ॥अंग 1096
- दुखीआ दरद घणे वेदन जाणे तू धणी ॥अंग 1097
- ढहदी जाइ करारि वहणि वहंदे मै डिठिआ ॥अंग 1097
- जिसु जन तेरी भुख है तिसु दुखु न विआपै ॥अंग 1097
- जिना पिछै हउ गई से मै पिछै भी रविआसु ॥अंग 1097
- गिली गिली रोडड़ी भउदी भवि भवि आइ ॥अंग 1097
- डिठा हभ मझाहि खाली कोइ न जाणीऐ ॥अंग 1097
- हउ ढाढी दरि गुण गावदा जे हरि प्रभ भावै ॥अंग 1097
- जा छुटे ता खाकु तू सुंञी कंतु न जाणही ॥अंग 1097
- नानक जिसु बिनु घड़ी न जीवणा विसरे सरै न बिंद ॥अंग 1097
- रते रंगि पारब्रहम कै मनु तनु अति गुलालु ॥अंग 1097
- जिनी ठगी जगु ठगिआ से तुधु मारि निवाड़ा ॥अंग 1097
- जा मूं आवहि चिति तू ता हभे सुख लहाउ ॥अंग 1098
- कपड़ भोग विकार ए हभे ही छार ॥अंग 1098
- किआ तकहि बिआ पास करि हीअड़े हिकु अधारु ॥अंग 1098
- धरमु धीरा कलि अंदरे इहु पापी मूलि न तगै ॥अंग 1098
- लोड़ीदो हभ जाइ सो मीरा मीरंन सिरि ॥अंग 1098
- माणिकू मोहि माउ डिंना धणी अपाहि ॥अंग 1098
- मू थीआऊ सेज नैणा पिरी विछावणा ॥अंग 1098
- मनु लोचै हरि मिलण कउ किउ दरसनु पाईआ ॥अंग 1098
- मू थीआऊ तखतु पिरी महिंजे पातिसाह ॥अंग 1098
- पिरीआ संदड़ी भुख मू लावण थी विथरा ॥अंग 1098
- ठगा नीहु मत्रोड़ि जाणु गंध्रबा नगरी ॥अंग 1098
- अकल कला नह पाईऐ प्रभु अलख अलेखं ॥अंग 1098
- सो निवाहू गडि जो चलाऊ न थीऐ ॥अंग 1099
- हभ समाणी जोति जिउ जल घटाऊ चंद्रमा ॥अंग 1099
- मुख सुहावे नामु चउ आठ पहर गुण गाउ ॥अंग 1099
- बाहर भेखि न पाईऐ प्रभु अंतरजामी ॥अंग 1099
- मुखहु अलाए हभ मरणु पछाणंदो कोइ ॥अंग 1099
- जाणु वसंदो मंझि पछाणू को हेकड़ो ॥अंग 1099
- मतड़ी कांढकु आह पाव धोवंदो पीवसा ॥अंग 1099
- निरभउ नामु विसारिआ नालि माइआ रचा ॥अंग 1099
- परभाते प्रभ नामु जपि गुर के चरण धिआइ ॥अंग 1099
- देह अंधारी अंधु सुंञी नाम विहूणीआ ॥अंग 1099
- लोइण लोई डिठ पिआस न बुझै मू घणी ॥अंग 1099
- जिनि जनि गुरमुखि सेविआ तिनि सभि सुख पाई ॥अंग 1100
- सचु सुहावा काढीऐ कूड़ै कूड़ी सोइ ॥अंग 1100
- सजण मुखु अनूपु अठे पहर निहालसा ॥अंग 1100
- सजण सचु परखि मुखि अलावणु थोथरा ॥अंग 1100
- धरति आकासु पातालु है चंदु सूरु बिनासी ॥अंग 1100
- डिठी हभ ढंढोलि हिकसु बाझु न कोइ ॥अंग 1100
- आसकु आसा बाहरा मू मनि वडी आस ॥अंग 1100
- विछोड़ा सुणे डुखु विणु डिठे मरिओदि ॥अंग 1100
- तट तीरथ देव देवालिआ केदारु मथुरा कासी ॥अंग 1100
- सै नंगे नह नंग भुखे लख न भुखिआ ॥अंग 1100
- सुख समूहा भोग भूमि सबाई को धणी ॥अंग 1101
- हिकस कूं तू आहि पछाणू भी हिकु करि ॥अंग 1101
- निहचलु एकु नराइणो हरि अगम अगाधा ॥अंग 1101
- जो डुबंदो आपि सो तराए किन॑ खे ॥अंग 1101
- जिथै कोइ कथंनि नाउ सुणंदो मा पिरी ॥अंग 1101
- मेरी मेरी किआ करहि पुत्र कलत्र सनेह ॥अंग 1101
- नैनी देखउ गुर दरसनो गुर चरणी मथा ॥अंग 1101
- लगड़ीआ पिरीअंनि पेखंदीआ ना तिपीआ ॥अंग 1101
- कथड़ीआ संताह ते सुखाऊ पंधीआ ॥अंग 1101
- डूंगरि जला थला भूमि बना फल कंदरा ॥अंग 1101
- हरि जी मेरी सार करे हम हरि के बालक ॥अंग 1101
- नानक कचड़िआ सिउ तोड़ि ढूढि सजण संत पकिआ ॥अंग 1102
- नानक बिजुलीआ चमकंनि घुरनि॑ घटा अति कालीआ ॥अंग 1102
- जल थल नीरि भरे सीतल पवण झुलारदे ॥अंग 1102
- कारणु करतै जो कीआ सोई है करणा ॥अंग 1102
- पहिला मरणु कबूलि जीवण की छडि आस ॥अंग 1102
- मुआ जीवंदा पेखु जीवंदे मरि जानि ॥अंग 1102
- जिसु मनि वसै पारब्रहमु निकटि न आवै पीर ॥अंग 1102
- कीमति कहणु न जाईऐ सचु साह अडोलै ॥अंग 1102
महला 9 (3)
- हरि को नामु सदा सुखदाई ॥अंग 1008
- अब मै कहा करउ री माई ॥अंग 1008
- माई मै मन को मानु न तिआगिओ ॥अंग 1008
भगत कबीर जी (12)
- पडीआ कवन कुमति तुम लागे ॥अंग 1102
- बनहि बसे किउ पाईऐ जउ लउ मनहु न तजहि बिकार ॥अंग 1103
- रिधि सिधि जा कउ फुरी तब काहू सिउ किआ काज ॥अंग 1103
- उदक समुंद सलल की साखिआ नदी तरंग समावहिगे ॥अंग 1103
- जउ तुम॑ मो कउ दूरि करत हउ तउ तुम मुकति बतावहु ॥अंग 1104
- जिनि गड़ कोट कीए कंचन के छोडि गइआ सो रावनु ॥1॥अंग 1104
- नैनू नकटू स्रवनू रसपति इंद्री कहिआ न माना ॥1॥अंग 1104
- अनभउ किनै न देखिआ बैरागीअड़े ॥अंग 1104
- राजन कउनु तुमारै आवै ॥अंग 1105
- गगन दमामा बाजिओ परिओ नीसानै घाउ ॥अंग 1105
- दीनु बिसारिओ रे दिवाने दीनु बिसारिओ रे ॥अंग 1105
- कबीरु ॥ मारू ॥अंग 1106