लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग मारू

राग · M1-M5 + भगत

राग मारू

मध्याह्न का राग, मरुस्थल-स्वर।

मारू मध्याह्न का राग है, थोड़ा ज़ोरदार। मारवाड़-क्षेत्र (पश्चिमी राजस्थान) से नाम का सम्बन्ध है, मरुस्थल की कठोरता का स्वर।

ग्रंथ में मारू की रचनाएँ अंग नौ-सौ-नवासी के क़रीब से शुरू होती हैं, और गुरु नानक की एक प्रसिद्ध "मारू सोलहे" की रचना यहीं है।

"पांच बरख को अनाथु ध्रू बारिकु हरि सिमरत अमर अटारे ॥" मारू M5
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 1 (64)
  1. साजन तेरे चरन की होइ रहा सद धूरि ॥अंग 989
  2. पिछहु राती सदड़ा नामु खसम का लेहि ॥अंग 989
  3. मिलि मात पिता पिंडु कमाइआ ॥अंग 989
  4. करणी कागदु मनु मसवाणी बुरा भला दुइ लेख पए ॥अंग 990
  5. बिमल मझारि बससि निरमल जल पदमनि जावल रे ॥अंग 990
  6. पतित पुनीत असंख होहि हरि चरनी मनु लाग ॥अंग 990
  7. सखी सहेली गरबि गहेली ॥अंग 990
  8. मुल खरीदी लाला गोला मेरा नाउ सभागा ॥अंग 991
  9. कोई आखै भूतना को कहै बेताला ॥अंग 991
  10. इहु धनु सरब रहिआ भरपूरि ॥अंग 991
  11. सूर सरु सोसि लै सोम सरु पोखि लै जुगति करि मरतु सु सनबंधु कीजै ॥अंग 991
  12. माइआ मुई न मनु मुआ सरु लहरी मै मतु ॥अंग 992
  13. जोगी जुगति नामु निरमाइलु ता कै मैलु न राती ॥अंग 992
  14. अहिनिसि जागै नीद न सोवै ॥अंग 993
  15. बेद पुराण कथे सुणे हारे मुनी अनेका ॥अंग 1008
  16. बिखु बोहिथा लादिआ दीआ समुंद मंझारि ॥अंग 1009
  17. सबदि मरै ता मारि मरु भागो किसु पहि जाउ ॥अंग 1010
  18. साची कार कमावणी होरि लालच बादि ॥अंग 1010
  19. लालै गारबु छोडिआ गुर कै भै सहजि सुभाई ॥अंग 1011
  20. हुकमु भइआ रहणा नही धुरि फाटे चीरै ॥अंग 1012
  21. मनमुखु लहरि घरु तजि विगूचै अवरा के घर हेरै ॥अंग 1012
  22. मात पिता संजोगि उपाए रकतु बिंदु मिलि पिंडु करे ॥अंग 1013
  23. आवउ वंञउ डुंमणी किती मित्र करेउ ॥अंग 1014
  24. ना भैणा भरजाईआ ना से ससुड़ीआह ॥अंग 1015
  25. ना जाणा मूरखु है कोई ना जाणा सिआणा ॥अंग 1015
  26. साचा सचु सोई अवरु न कोई ॥अंग 1020
  27. आपे धरती धउलु अकासं ॥अंग 1021
  28. दूजी दुरमति अंनी बोली ॥अंग 1022
  29. आदि जुगादी अपर अपारे ॥अंग 1023
  30. साचै मेले सबदि मिलाए ॥अंग 1024
  31. आपे करता पुरखु बिधाता ॥अंग 1025
  32. केते जुग वरते गुबारै ॥अंग 1026
  33. हरि सा मीतु नाही मै कोई ॥अंग 1027
  34. असुर सघारण रामु हमारा ॥अंग 1028
  35. घरि रहु रे मन मुगध इआने ॥अंग 1030
  36. सरणि परे गुरदेव तुमारी ॥अंग 1031
  37. साचे साहिब सिरजणहारे ॥अंग 1032
  38. काइआ नगरु नगर गड़ अंदरि ॥अंग 1033
  39. दरसनु पावा जे तुधु भावा ॥अंग 1034
  40. अरबद नरबद धुंधूकारा ॥अंग 1035
  41. आपे आपु उपाइ निराला ॥अंग 1036
  42. सुंन कला अपरंपरि धारी ॥अंग 1037
  43. जह देखा तह दीन दइआला ॥अंग 1038
  44. हरि धनु संचहु रे जन भाई ॥अंग 1039
  45. सचु कहहु सचै घरि रहणा ॥अंग 1040
  46. कामु क्रोधु परहरु पर निंदा ॥अंग 1041
  47. कुदरति करनैहार अपारा ॥अंग 1042
  48. विणु गाहक गुणु वेचीऐ तउ गुणु सहघो जाइ ॥अंग 1086
  49. भूली भूली मै फिरी पाधरु कहै न कोइ ॥अंग 1087
  50. महल कुचजी मड़वड़ी काली मनहु कसुध ॥अंग 1088
  51. साचु सील सचु संजमी सा पूरी परवारि ॥अंग 1088
  52. ससुरै पेईऐ कंत की कंतु अगंमु अथाहु ॥अंग 1088
  53. ना मैला ना धुंधला ना भगवा ना कचु ॥अंग 1089
  54. हुकमि रजाई साखती दरगह सचु कबूलु ॥अंग 1090
  55. अलगउ जोइ मधूकड़उ सारंगपाणि सबाइ ॥अंग 1090
  56. सरबे जोइ अगछमी दूखु घनेरो आथि ॥अंग 1090
  57. पूंजी साचउ नामु तू अखुटउ दरबु अपारु ॥अंग 1090
  58. पूरब प्रीति पिराणि लै मोटउ ठाकुरु माणि ॥अंग 1090
  59. मांदलु बेदि सि बाजणो घणो धड़ीऐ जोइ ॥अंग 1091
  60. सागरु गुणी अथाहु किनि हाथाला देखीऐ ॥अंग 1091
  61. सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि ॥अंग 1091
  62. हउ मुआ मै मारिआ पउणु वहै दरीआउ ॥अंग 1091
  63. हउ मै करी तां तू नाही तू होवहि हउ नाहि ॥अंग 1092
  64. जिनि कीआ तिनि देखिआ आपे जाणै सोइ ॥अंग 1093
महला 2 (1)
  1. आपे जाणै करे आपि आपे आणै रासि ॥अंग 1093
महला 3 (75)
  1. जह बैसालहि तह बैसा सुआमी जह भेजहि तह जावा ॥अंग 993
  2. आवण जाणा ना थीऐ निज घरि वासा होइ ॥अंग 993
  3. हरि की चरणी लागि रहा विचहु आपु गवाइ ॥1॥अंग 994
  4. सचि रते से टोलि लहु से विरले संसारि ॥अंग 994
  5. मारू ते सीतलु करे मनूरहु कंचनु होइ ॥अंग 994
  6. जिस नो प्रेमु मंनि वसाए ॥अंग 1016
  7. हुकमी सहजे स्रिसटि उपाई ॥अंग 1043
  8. एको एकु वरतै सभु सोई ॥अंग 1044
  9. जगजीवनु साचा एको दाता ॥अंग 1045
  10. जो आइआ सो सभु को जासी ॥अंग 1047
  11. सचु सालाही गहिर गंभीरै ॥अंग 1048
  12. एको सेवी सदा थिरु साचा ॥अंग 1049
  13. सचै सचा तखतु रचाइआ ॥अंग 1050
  14. आपे आपु उपाइ उपंना ॥अंग 1051
  15. मारू सोलहे 3 ॥अंग 1052
  16. सो सचु सेविहु सिरजणहारा ॥अंग 1053
  17. सतिगुरु सेवनि से वडभागी ॥अंग 1054
  18. तिस दा अंतु न पाईऐ पारावारा ॥अंग 1055
  19. मेरै प्रभि साचै इकु खेलु रचाइआ ॥अंग 1056
  20. निहचलु एकु सदा सचु सोई ॥अंग 1057
  21. गुरमुखि नाद बेद बीचारु ॥अंग 1058
  22. आपे निआउ करे सभु साचा साचे साचि मिलाइदा ॥1॥अंग 1059
  23. आदि जुगादि दइआपति दाता ॥अंग 1060
  24. जुग छतीह कीओ गुबारा ॥अंग 1061
  25. ओसु तिलु न तमाइ वेपरवाहा ॥अंग 1062
  26. जो तुधु करणा सो करि पाइआ ॥अंग 1063
  27. काइआ कंचनु सबदु वीचारा ॥अंग 1064
  28. निरंकारि आकारु उपाइआ ॥अंग 1066
  29. अगम अगोचर वेपरवाहे ॥अंग 1067
  30. नदरी भगता लैहु मिलाए ॥अंग 1068
  31. गुर ते गिआनु पाइआ अति खड़गु करारा ॥अंग 1087
  32. केदारा रागा विचि जाणीऐ भाई सबदे करे पिआरु ॥अंग 1087
  33. निहकंटक राजु भुंचि तू गुरमुखि सचु कमाई ॥अंग 1087
  34. आपे करणी कार आपि आपे करे रजाइ ॥अंग 1087
  35. माइआ वेखि न भुलु तू मनमुख मूरखा ॥अंग 1087
  36. जिना गुरु नही भेटिआ भै की नाही बिंद ॥अंग 1088
  37. त्रिभवण ढूढी सजणा हउमै बुरी जगति ॥अंग 1088
  38. गुरमुखि आपे बखसिओनु हरि नामि समाणे ॥अंग 1088
  39. आपणा आपु पछाणिआ नामु निधानु पाइआ ॥अंग 1088
  40. पिर खुसीए धन रावीए धन उरि नामु सीगारु ॥अंग 1088
  41. तखति राजा सो बहै जि तखतै लाइक होई ॥अंग 1088
  42. सभना का पिरु एकु है पिर बिनु खाली नाहि ॥अंग 1088
  43. मन के अधिक तरंग किउ दरि साहिब छुटीऐ ॥अंग 1088
  44. हरि का नामु अमोलु है किउ कीमति कीजै ॥अंग 1088
  45. सहजि वणसपति फुलु फलु भवरु वसै भै खंडि ॥अंग 1089
  46. जो जन लूझहि मनै सिउ से सूरे परधाना ॥अंग 1089
  47. जोगी होवा जगि भवा घरि घरि भीखिआ लेउ ॥अंग 1089
  48. जितु दरि लेखा मंगीऐ सो दरु सेविहु न कोइ ॥अंग 1089
  49. सूरे एहि न आखीअहि अहंकारि मरहि दुखु पावहि ॥अंग 1089
  50. कागउ होइ न ऊजला लोहे नाव न पारु ॥अंग 1089
  51. मारू मारण जो गए मारि न सकहि गवार ॥अंग 1089
  52. दोवै तरफा उपाईओनु विचि सकति सिव वासा ॥अंग 1090
  53. होवा पंडितु जोतकी वेद पड़ा मुखि चारि ॥अंग 1090
  54. आपि उपाए करे आपि आपे नदरि करेइ ॥अंग 1090
  55. कंटकु कालु एकु है होरु कंटकु न सूझै ॥अंग 1090
  56. मनमुख कालु विआपदा मोहि माइआ लागे ॥अंग 1090
  57. आपे पिंडु सवारिओनु विचि नव निधि नामु ॥अंग 1090
  58. जिनी अंदरु भालिआ गुर सबदि सुहावै ॥अंग 1091
  59. इसु जुग महि नामु निधानु है नामो नालि चलै ॥अंग 1091
  60. मनमुख वापारै सार न जाणनी बिखु विहाझहि बिखु संग्रहहि बिख सिउ धरहि पिआरु ॥अंग 1091
  61. दुखु लगा बिनु सेविऐ हुकमु मंने दुखु जाइ ॥अंग 1091
  62. हरि नाम बिना जगतु है निरधनु बिनु नावै त्रिपति नाही ॥अंग 1091
  63. इसु जग महि संती धनु खटिआ जिना सतिगुरु मिलिआ प्रभु आइ ॥अंग 1092
  64. जिनि उपाई मेदनी सोई सार करेइ ॥अंग 1092
  65. अंतरि जपु तपु संजमो गुर सबदी जापै ॥अंग 1092
  66. लोकु अवगणा की बंन॑ै गंठड़ी गुण न विहाझै कोइ ॥अंग 1092
  67. गुण अवगुण समानि हहि जि आपि कीते करतारि ॥अंग 1092
  68. अंदरि राजा तखतु है आपे करे निआउ ॥अंग 1092
  69. मनु माणकु जिनि परखिआ गुर सबदी वीचारि ॥अंग 1093
  70. मनमुख अंदरु न भालनी मुठे अहंमते ॥अंग 1093
  71. सभे थोक विसारि इको मितु करि ॥अंग 1093
  72. भाणै हुकमु मनाइओनु भाणै सुखु पाइआ ॥अंग 1093
  73. जिन कउ अंदरि गिआनु नही भै की नाही बिंद ॥अंग 1093
  74. मन की पत्री वाचणी सुखी हू सुखु सारु ॥अंग 1093
  75. आपे करि करि वेखदा आपे सभु सचा ॥अंग 1094
महला 4 (13)
  1. जपिओ नामु सुक जनक गुर बचनी हरि हरि सरणि परे ॥अंग 995
  2. सिध समाधि जपिओ लिव लाई साधिक मुनि जपिआ ॥अंग 995
  3. हरि हरि नामु निधानु लै गुरमति हरि पति पाइ ॥अंग 996
  4. हउ पूंजी नामु दसाइदा को दसे हरि धनु रासि ॥अंग 996
  5. हरि हरि कथा सुणाइ प्रभ गुरमति हरि रिदै समाणी ॥अंग 996
  6. हरि भाउ लगा बैरागीआ वडभागी हरि मनि राखु ॥अंग 997
  7. हरि हरि भगति भरे भंडारा ॥अंग 997
  8. हरि हरि नामु जपहु मन मेरे ॥अंग 998
  9. सचा आपि सवारणहारा ॥अंग 1069
  10. हरि अगम अगोचरु सदा अबिनासी ॥अंग 1070
  11. नाम विहूणे भरमसहि आवहि जावहि नीत ॥अंग 1087
  12. सागरु देखउ डरि मरउ भै तेरै डरु नाहि ॥अंग 1087
  13. चड़ि बोहिथै चालसउ सागरु लहरी देइ ॥अंग 1087
महला 5 (147)
  1. डरपै धरति अकासु नख्यत्रा सिर ऊपरि अमरु करारा ॥अंग 998
  2. पांच बरख को अनाथु ध्रू बारिकु हरि सिमरत अमर अटारे ॥अंग 999
  3. वित नवित भ्रमिओ बहु भाती अनिक जतन करि धाए ॥अंग 999
  4. कवन थान धीरिओ है नामा कवन बसतु अहंकारा ॥अंग 999
  5. मान मोह अरु लोभ विकारा बीओ चीति न घालिओ ॥अंग 1000
  6. खुलिआ करमु क्रिपा भई ठाकुर कीरतनु हरि हरि गाई ॥अंग 1000
  7. जो समरथु सरब गुण नाइकु तिस कउ कबहु न गावसि रे ॥अंग 1000
  8. अंतरजामी सभ बिधि जानै तिस ते कहा दुलारिओ ॥अंग 1000
  9. चरन कमल प्रभ राखे चीति ॥अंग 1001
  10. प्रान सुखदाता जीअ सुखदाता तुम काहे बिसारिओ अगिआनथ ॥अंग 1001
  11. गुपतु करता संगि सो प्रभु डहकावए मनुखाइ ॥अंग 1001
  12. बाहरि ढूढन ते छूटि परे गुरि घर ही माहि दिखाइआ था ॥अंग 1002
  13. जिसहि साजि निवाजिआ तिसहि सिउ रुच नाहि ॥अंग 1002
  14. फूटो आंडा भरम का मनहि भइओ परगासु ॥अंग 1002
  15. कोटि लाख सरब को राजा जिसु हिरदै नामु तुमारा ॥अंग 1003
  16. ओअंकारि उतपाती ॥अंग 1003
  17. मोहनी मोहि लीए त्रै गुनीआ ॥अंग 1004
  18. सिमरहु एकु निरंजन सोऊ ॥अंग 1004
  19. कत कउ डहकावहु लोगा मोहन दीन किरपाई ॥1॥अंग 1005
  20. मेरा ठाकुरु अति भारा ॥अंग 1005
  21. पतित उधारन तारन बलि बलि बले बलि जाईऐ ॥अंग 1005
  22. त्रिपति आघाए संता ॥अंग 1006
  23. छोडि सगल सिआणपा मिलि साध तिआगि गुमानु ॥अंग 1006
  24. जिनी नामु विसारिआ से होत देखे खेह ॥अंग 1006
  25. पुरखु पूरन सुखह दाता संगि बसतो नीत ॥अंग 1006
  26. चलत बैसत सोवत जागत गुर मंत्रु रिदै चितारि ॥अंग 1006
  27. तजि आपु बिनसी तापु रेण साधू थीउ ॥अंग 1007
  28. प्रतिपालि माता उदरि राखै लगनि देत न सेक ॥अंग 1007
  29. पतित पावन नामु जा को अनाथ को है नाथु ॥अंग 1007
  30. संजोगु विजोगु धुरहु ही हूआ ॥अंग 1007
  31. वैदो न वाई भैणो न भाई एको सहाई रामु हे ॥1॥अंग 1008
  32. लख चउरासीह भ्रमते भ्रमते दुलभ जनमु अब पाइओ ॥1॥अंग 1017
  33. करि अनुग्रहु राखि लीनो भइओ साधू संगु ॥अंग 1017
  34. ससत्रि तीखणि काटि डारिओ मनि न कीनो रोसु ॥अंग 1017
  35. आराधना अराधनु नीका हरि हरि नामु अराधना ॥2॥अंग 1018
  36. आउ जी तू आउ हमारै हरि जसु स्रवन सुनावना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1018
  37. जीवना सफल जीवन सुनि हरि जपि जपि सद जीवना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1019
  38. जिसु ग्रिहि बहुतु तिसै ग्रिहि चिंता ॥अंग 1019
  39. बिरखै हेठि सभि जंत इकठे ॥अंग 1019
  40. कला उपाइ धरी जिनि धरणा ॥अंग 1071
  41. संगी जोगी नारि लपटाणी ॥अंग 1072
  42. करै अनंदु अनंदी मेरा ॥अंग 1073
  43. गुरु गोपालु गुरु गोविंदा ॥अंग 1074
  44. आदि निरंजनु प्रभु निरंकारा ॥अंग 1075
  45. जो दीसै सो एको तूहै ॥अंग 1076
  46. सूरति देखि न भूलु गवारा ॥अंग 1077
  47. सिमरै धरती अरु आकासा ॥अंग 1078
  48. प्रभ समरथ सरब सुख दाना ॥अंग 1080
  49. तू साहिबु हउ सेवकु कीता ॥अंग 1081
  50. अचुत पारब्रहम परमेसुर अंतरजामी ॥अंग 1082
  51. अलह अगम खुदाई बंदे ॥अंग 1083
  52. पारब्रहम सभ ऊच बिराजे ॥अंग 1084
  53. चरन कमल हिरदै नित धारी ॥अंग 1085
  54. माइआ मनहु न वीसरै मांगै दंमा दंम ॥अंग 1093
  55. माइआ साथि न चलई किआ लपटावहि अंध ॥अंग 1093
  56. तू चउ सजण मैडिआ डेई सिसु उतारि ॥अंग 1094
  57. नीहु महिंजा तऊ नालि बिआ नेह कूड़ावे डेखु ॥अंग 1094
  58. उठी झालू कंतड़े हउ पसी तउ दीदारु ॥अंग 1094
  59. तू सचा साहिबु सचु सचु सभु धारिआ ॥अंग 1094
  60. जे तू मित्रु असाडड़ा हिक भोरी ना वेछोड़ि ॥अंग 1094
  61. दुरजन तू जलु भाहड़ी विछोड़े मरि जाहि ॥अंग 1094
  62. दुरजनु दूजा भाउ है वेछोड़ा हउमै रोगु ॥अंग 1094
  63. तू अगम दइआलु बेअंतु तेरी कीमति कहै कउणु ॥अंग 1094
  64. जे तू वतहि अंङणे हभ धरति सुहावी होइ ॥अंग 1095
  65. हभे टोल सुहावणे सहु बैठा अंङणु मलि ॥अंग 1095
  66. सेज विछाई कंत कू कीआ हभु सीगारु ॥अंग 1095
  67. तू पारब्रहमु परमेसरु जोनि न आवही ॥अंग 1095
  68. जा मू पसी हठ मै पिरी महिजै नालि ॥अंग 1095
  69. नानक बैठा भखे वाउ लंमे सेवहि दरु खड़ा ॥अंग 1095
  70. किआ गालाइओ भूछ पर वेलि न जोहे कंत तू ॥अंग 1095
  71. सुघड़ु सुजाणु सरूपु तू सभ महि वरतंता ॥अंग 1095
  72. कुरीए कुरीए वैदिआ तलि गाड़ा महरेरु ॥अंग 1095
  73. सचु जाणै कचु वैदिओ तू आघू आघे सलवे ॥अंग 1095
  74. भोरे भोरे रूहड़े सेवेदे आलकु ॥अंग 1095
  75. तुधु रूपु न रेखिआ जाति तू वरना बाहरा ॥अंग 1096
  76. गहडड़ड़ा त्रिणि छाइआ गाफल जलिओहु भाहि ॥अंग 1096
  77. नानक पीठा पका साजिआ धरिआ आणि मउजूदु ॥अंग 1096
  78. नानक भुसरीआ पकाईआ पाईआ थालै माहि ॥अंग 1096
  79. तुधु जग महि खेलु रचाइआ विचि हउमै पाईआ ॥अंग 1096
  80. आगाहा कू त्राघि पिछा फेरि न मुहडड़ा ॥अंग 1096
  81. सजणु मैडा चाईआ हभ कही दा मितु ॥अंग 1096
  82. गुझड़ा लधमु लालु मथै ही परगटु थिआ ॥अंग 1096
  83. जा तू मेरै वलि है ता किआ मुहछंदा ॥अंग 1096
  84. डेखण कू मुसताकु मुखु किजेहा तउ धणी ॥अंग 1096
  85. दुखीआ दरद घणे वेदन जाणे तू धणी ॥अंग 1097
  86. ढहदी जाइ करारि वहणि वहंदे मै डिठिआ ॥अंग 1097
  87. जिसु जन तेरी भुख है तिसु दुखु न विआपै ॥अंग 1097
  88. जिना पिछै हउ गई से मै पिछै भी रविआसु ॥अंग 1097
  89. गिली गिली रोडड़ी भउदी भवि भवि आइ ॥अंग 1097
  90. डिठा हभ मझाहि खाली कोइ न जाणीऐ ॥अंग 1097
  91. हउ ढाढी दरि गुण गावदा जे हरि प्रभ भावै ॥अंग 1097
  92. जा छुटे ता खाकु तू सुंञी कंतु न जाणही ॥अंग 1097
  93. नानक जिसु बिनु घड़ी न जीवणा विसरे सरै न बिंद ॥अंग 1097
  94. रते रंगि पारब्रहम कै मनु तनु अति गुलालु ॥अंग 1097
  95. जिनी ठगी जगु ठगिआ से तुधु मारि निवाड़ा ॥अंग 1097
  96. जा मूं आवहि चिति तू ता हभे सुख लहाउ ॥अंग 1098
  97. कपड़ भोग विकार ए हभे ही छार ॥अंग 1098
  98. किआ तकहि बिआ पास करि हीअड़े हिकु अधारु ॥अंग 1098
  99. धरमु धीरा कलि अंदरे इहु पापी मूलि न तगै ॥अंग 1098
  100. लोड़ीदो हभ जाइ सो मीरा मीरंन सिरि ॥अंग 1098
  101. माणिकू मोहि माउ डिंना धणी अपाहि ॥अंग 1098
  102. मू थीआऊ सेज नैणा पिरी विछावणा ॥अंग 1098
  103. मनु लोचै हरि मिलण कउ किउ दरसनु पाईआ ॥अंग 1098
  104. मू थीआऊ तखतु पिरी महिंजे पातिसाह ॥अंग 1098
  105. पिरीआ संदड़ी भुख मू लावण थी विथरा ॥अंग 1098
  106. ठगा नीहु मत्रोड़ि जाणु गंध्रबा नगरी ॥अंग 1098
  107. अकल कला नह पाईऐ प्रभु अलख अलेखं ॥अंग 1098
  108. सो निवाहू गडि जो चलाऊ न थीऐ ॥अंग 1099
  109. हभ समाणी जोति जिउ जल घटाऊ चंद्रमा ॥अंग 1099
  110. मुख सुहावे नामु चउ आठ पहर गुण गाउ ॥अंग 1099
  111. बाहर भेखि न पाईऐ प्रभु अंतरजामी ॥अंग 1099
  112. मुखहु अलाए हभ मरणु पछाणंदो कोइ ॥अंग 1099
  113. जाणु वसंदो मंझि पछाणू को हेकड़ो ॥अंग 1099
  114. मतड़ी कांढकु आह पाव धोवंदो पीवसा ॥अंग 1099
  115. निरभउ नामु विसारिआ नालि माइआ रचा ॥अंग 1099
  116. परभाते प्रभ नामु जपि गुर के चरण धिआइ ॥अंग 1099
  117. देह अंधारी अंधु सुंञी नाम विहूणीआ ॥अंग 1099
  118. लोइण लोई डिठ पिआस न बुझै मू घणी ॥अंग 1099
  119. जिनि जनि गुरमुखि सेविआ तिनि सभि सुख पाई ॥अंग 1100
  120. सचु सुहावा काढीऐ कूड़ै कूड़ी सोइ ॥अंग 1100
  121. सजण मुखु अनूपु अठे पहर निहालसा ॥अंग 1100
  122. सजण सचु परखि मुखि अलावणु थोथरा ॥अंग 1100
  123. धरति आकासु पातालु है चंदु सूरु बिनासी ॥अंग 1100
  124. डिठी हभ ढंढोलि हिकसु बाझु न कोइ ॥अंग 1100
  125. आसकु आसा बाहरा मू मनि वडी आस ॥अंग 1100
  126. विछोड़ा सुणे डुखु विणु डिठे मरिओदि ॥अंग 1100
  127. तट तीरथ देव देवालिआ केदारु मथुरा कासी ॥अंग 1100
  128. सै नंगे नह नंग भुखे लख न भुखिआ ॥अंग 1100
  129. सुख समूहा भोग भूमि सबाई को धणी ॥अंग 1101
  130. हिकस कूं तू आहि पछाणू भी हिकु करि ॥अंग 1101
  131. निहचलु एकु नराइणो हरि अगम अगाधा ॥अंग 1101
  132. जो डुबंदो आपि सो तराए किन॑ खे ॥अंग 1101
  133. जिथै कोइ कथंनि नाउ सुणंदो मा पिरी ॥अंग 1101
  134. मेरी मेरी किआ करहि पुत्र कलत्र सनेह ॥अंग 1101
  135. नैनी देखउ गुर दरसनो गुर चरणी मथा ॥अंग 1101
  136. लगड़ीआ पिरीअंनि पेखंदीआ ना तिपीआ ॥अंग 1101
  137. कथड़ीआ संताह ते सुखाऊ पंधीआ ॥अंग 1101
  138. डूंगरि जला थला भूमि बना फल कंदरा ॥अंग 1101
  139. हरि जी मेरी सार करे हम हरि के बालक ॥अंग 1101
  140. नानक कचड़िआ सिउ तोड़ि ढूढि सजण संत पकिआ ॥अंग 1102
  141. नानक बिजुलीआ चमकंनि घुरनि॑ घटा अति कालीआ ॥अंग 1102
  142. जल थल नीरि भरे सीतल पवण झुलारदे ॥अंग 1102
  143. कारणु करतै जो कीआ सोई है करणा ॥अंग 1102
  144. पहिला मरणु कबूलि जीवण की छडि आस ॥अंग 1102
  145. मुआ जीवंदा पेखु जीवंदे मरि जानि ॥अंग 1102
  146. जिसु मनि वसै पारब्रहमु निकटि न आवै पीर ॥अंग 1102
  147. कीमति कहणु न जाईऐ सचु साह अडोलै ॥अंग 1102
महला 9 (3)
  1. हरि को नामु सदा सुखदाई ॥अंग 1008
  2. अब मै कहा करउ री माई ॥अंग 1008
  3. माई मै मन को मानु न तिआगिओ ॥अंग 1008
भगत कबीर जी (12)
  1. पडीआ कवन कुमति तुम लागे ॥अंग 1102
  2. बनहि बसे किउ पाईऐ जउ लउ मनहु न तजहि बिकार ॥अंग 1103
  3. रिधि सिधि जा कउ फुरी तब काहू सिउ किआ काज ॥अंग 1103
  4. उदक समुंद सलल की साखिआ नदी तरंग समावहिगे ॥अंग 1103
  5. जउ तुम॑ मो कउ दूरि करत हउ तउ तुम मुकति बतावहु ॥अंग 1104
  6. जिनि गड़ कोट कीए कंचन के छोडि गइआ सो रावनु ॥1॥अंग 1104
  7. नैनू नकटू स्रवनू रसपति इंद्री कहिआ न माना ॥1॥अंग 1104
  8. अनभउ किनै न देखिआ बैरागीअड़े ॥अंग 1104
  9. राजन कउनु तुमारै आवै ॥अंग 1105
  10. गगन दमामा बाजिओ परिओ नीसानै घाउ ॥अंग 1105
  11. दीनु बिसारिओ रे दिवाने दीनु बिसारिओ रे ॥अंग 1105
  12. कबीरु ॥ मारू ॥अंग 1106
भगत नामदेव जी (1)
  1. चारि मुकति चारै सिधि मिलि कै दूलह प्रभ की सरनि परिओ ॥अंग 1105
भगत रविदास जी (2)
  1. ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै ॥अंग 1106
  2. सुख सागर सुरितरु चिंतामनि कामधेन बसि जा के रे ॥अंग 1106
अन्य भगत (1)
  1. चंद सत भेदिआ नाद सत पूरिआ सूर सत खोड़सा दतु कीआ ॥अंग 1106

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