लुल्ला परिवारLulla Family
English
सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग आसा

राग · M1-M5 + भगत

राग आसा

भोर का राग, उम्मीद का सुर।

आसा का अर्थ ही "उम्मीद" है। राग का समय भोर का है, जब रोशनी आती है मगर दिन की हलचल नहीं शुरू हुई। यह एक तरह की उठाव की धुन है, बिस्तर छोड़ कर खड़े होने का सुर।

शान्त नदी पर भोर, किनारे पर एक बगुला: राग आसा

"आसा दी वार" इसी राग में बँधी है, और सिख परम्परा में सुबह की कीर्तन-संगति का केन्द्र-स्तम्भ रही है, चार-पाँच सदियों से। ग्रंथ में यह राग तीन-सौ-सैंतालिस से शुरू होकर चार-सौ-अठ्ठासी तक चलता है।

"बलिहारी गुर आपणे दिउहाड़ी सद वार ॥" आसा M1, आसा-दी-वार
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 1 (130)
  1. सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब सम॑ाले ॥अंग 347
  2. सुणि वडा आखै सभ कोई ॥अंग 348
  3. आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥अंग 349
  4. जे दरि मांगतु कूक करे महली खसमु सुणे ॥अंग 349
  5. ताल मदीरे घट के घाट ॥अंग 349
  6. जेता सबदु सुरति धुनि तेती जेता रूपु काइआ तेरी ॥अंग 350
  7. वाजा मति पखावजु भाउ ॥अंग 350
  8. पउणु उपाइ धरी सभ धरती जल अगनी का बंधु कीआ ॥अंग 350
  9. करम करतूति बेलि बिसथारी राम नामु फलु हूआ ॥अंग 351
  10. मै गुण गला के सिरि भार ॥अंग 351
  11. करि किरपा अपनै घरि आइआ ता मिलि सखीआ काजु रचाइआ ॥अंग 351
  12. ग्रिहु बनु समसरि सहजि सुभाइ ॥अंग 351
  13. एको सरवरु कमल अनूप ॥अंग 352
  14. गुरमति साची हुजति दूरि ॥अंग 352
  15. जो तिनि कीआ सो सचु थीआ ॥अंग 352
  16. इकि आवहि इकि जावहि आई ॥अंग 353
  17. निवि निवि पाइ लगउ गुर अपुने आतम रामु निहारिआ ॥अंग 353
  18. किस कउ कहहि सुणावहि किस कउ किसु समझावहि समझि रहे ॥अंग 353
  19. कोई भीखकु भीखिआ खाइ ॥अंग 354
  20. दुध बिनु धेनु पंख बिनु पंखी जल बिनु उतभुज कामि नाही ॥अंग 354
  21. काइआ ब्रहमा मनु है धोती ॥अंग 355
  22. सेवकु दासु भगतु जनु सोई ॥अंग 355
  23. काची गागरि देह दुहेली उपजै बिनसै दुखु पाई ॥अंग 355
  24. मोहु कुटंबु मोहु सभ कार ॥अंग 356
  25. आपि करे सचु अलख अपारु ॥अंग 356
  26. विदिआ वीचारी तां परउपकारी ॥अंग 356
  27. एक न भरीआ गुण करि धोवा ॥अंग 356
  28. पेवकड़ै धन खरी इआणी ॥अंग 357
  29. न किस का पूतु न किस की माई ॥अंग 357
  30. तितु सरवरड़ै भईले निवासा पाणी पावकु तिनहि कीआ ॥अंग 357
  31. छिअ घर छिअ गुर छिअ उपदेस ॥अंग 357
  32. लख लसकर लख वाजे नेजे लख उठि करहि सलामु ॥अंग 358
  33. दीवा मेरा एकु नामु दुखु विचि पाइआ तेलु ॥अंग 358
  34. देवतिआ दरसन कै ताई दूख भूख तीरथ कीए ॥अंग 358
  35. भीतरि पंच गुपत मनि वासे ॥अंग 359
  36. मनु मोती जे गहणा होवै पउणु होवै सूत धारी ॥अंग 359
  37. कीता होवै करे कराइआ तिसु किआ कहीऐ भाई ॥अंग 359
  38. गुर का सबदु मनै महि मुंद्रा खिंथा खिमा हढावउ ॥अंग 359
  39. गुड़ु करि गिआनु धिआनु करि धावै करि करणी कसु पाईऐ ॥अंग 360
  40. खुरासान खसमाना कीआ हिंदुसतानु डराइआ ॥अंग 360
  41. उतरि अवघटि सरवरि न॑ावै ॥अंग 411
  42. सभि जप सभि तप सभ चतुराई ॥अंग 412
  43. लेख असंख लिखि लिखि मानु ॥अंग 412
  44. एकु मरै पंचे मिलि रोवहि ॥अंग 413
  45. आपु वीचारै सु परखे हीरा ॥अंग 413
  46. गुरमुखि गिआनु धिआनु मनि मानु ॥अंग 414
  47. गावहि गीते चीति अनीते ॥अंग 414
  48. मनु मैगलु साकतु देवाना ॥अंग 415
  49. तनु बिनसै धनु का को कहीऐ ॥अंग 416
  50. गुरु सेवे सो ठाकुर जानै ॥अंग 416
  51. जिन सिरि सोहनि पटीआ मांगी पाइ संधूरु ॥अंग 417
  52. कहा सु खेल तबेला घोड़े कहा भेरी सहनाई ॥अंग 417
  53. जैसे गोइलि गोइली तैसे संसारा ॥अंग 418
  54. चारे कुंडा ढूढीआ को नीम॑ी मैडा ॥अंग 418
  55. मनसा मनहि समाइले भउजलु सचि तरणा ॥अंग 419
  56. चले चलणहार वाट वटाइआ ॥अंग 419
  57. किआ जंगलु ढूढी जाइ मै घरि बनु हरीआवला ॥अंग 420
  58. जिन॑ी नामु विसारिआ दूजै भरमि भुलाई ॥अंग 420
  59. मै ओल॑गीआ ओल॑गी हम छोरू थारे ॥अंग 421
  60. केता आखणु आखीऐ ता के अंत न जाणा ॥अंग 421
  61. मनु रातउ हरि नाइ सचु वखाणिआ ॥अंग 421
  62. आवण जाणा किउ रहै किउ मेला होई ॥अंग 422
  63. ससै सोइ स्रिसटि जिनि साजी सभना साहिबु एकु भइआ ॥अंग 432
  64. मुंध जोबनि बालड़ीए मेरा पिरु रलीआला राम ॥अंग 435
  65. अनहदो अनहदु वाजै रुण झुणकारे राम ॥अंग 436
  66. मेरा मनो मेरा मनु राता राम पिआरे राम ॥अंग 437
  67. दूख बिसारणहारु सुआमी कीता जा का होवै ॥अंग 438
  68. तूं सुणि हरणा कालिआ की वाड़ीऐ राता राम ॥अंग 438
  69. बलिहारी गुर आपणे दिउहाड़ी सद वार ॥अंग 462
  70. नानक गुरू न चेतनी मनि आपणै सुचेत ॥अंग 463
  71. आपीन॑ै आपु साजिओ आपीन॑ै रचिओ नाउ ॥अंग 463
  72. सचे तेरे खंड सचे ब्रहमंड ॥अंग 463
  73. वडी वडिआई जा वडा नाउ ॥अंग 463
  74. विसमादु नाद विसमादु वेद ॥अंग 463
  75. कुदरति दिसै कुदरति सुणीऐ कुदरति भउ सुख सारु ॥अंग 464
  76. आपीन॑ै भोग भोगि कै होइ भसमड़ि भउरु सिधाइआ ॥अंग 464
  77. भै विचि पवणु वहै सदवाउ ॥अंग 464
  78. नानक निरभउ निरंकारु होरि केते राम रवाल ॥अंग 464
  79. नदरि करहि जे आपणी ता नदरी सतिगुरु पाइआ ॥अंग 465
  80. घड़ीआ सभे गोपीआ पहर कंन॑ गोपाल ॥अंग 465
  81. वाइनि चेले नचनि गुर ॥अंग 465
  82. नाउ तेरा निरंकारु है नाइ लइऐ नरकि न जाईऐ ॥अंग 465
  83. मुसलमाना सिफति सरीअति पड़ि पड़ि करहि बीचारु ॥अंग 465
  84. मिटी मुसलमान की पेड़ै पई कुमि॑आर ॥अंग 466
  85. बिनु सतिगुर किनै न पाइओ बिनु सतिगुर किनै न पाइआ ॥अंग 466
  86. हउ विचि आइआ हउ विचि गइआ ॥अंग 466
  87. पुरखां बिरखां तीरथां तटां मेघां खेतांह ॥अंग 467
  88. लख नेकीआ चंगिआईआ लख पुंना परवाणु ॥अंग 467
  89. सचा साहिबु एकु तूं जिनि सचो सचु वरताइआ ॥अंग 467
  90. पड़ि पड़ि गडी लदीअहि पड़ि पड़ि भरीअहि साथ ॥अंग 467
  91. लिखि लिखि पड़िआ ॥अंग 467
  92. भगत तेरै मनि भावदे दरि सोहनि कीरति गावदे ॥अंग 468
  93. कूड़ु राजा कूड़ु परजा कूड़ु सभु संसारु ॥अंग 468
  94. सचु ता परु जाणीऐ जा रिदै सचा होइ ॥अंग 468
  95. दानु महिंडा तली खाकु जे मिलै त मसतकि लाईऐ ॥अंग 468
  96. सचि कालु कूड़ु वरतिआ कलि कालख बेताल ॥अंग 468
  97. लबु पापु दुइ राजा महता कूड़ु होआ सिकदारु ॥अंग 468
  98. वदी सु वजगि नानका सचा वेखै सोइ ॥अंग 469
  99. धुरि करमु जिना कउ तुधु पाइआ ता तिनी खसमु धिआइआ ॥अंग 469
  100. दुखु दारू सुखु रोगु भइआ जा सुखु तामि न होई ॥अंग 469
  101. कुंभे बधा जलु रहै जल बिनु कुंभु न होइ ॥अंग 469
  102. पड़िआ होवै गुनहगारु ता ओमी साधु न मारीऐ ॥अंग 469
  103. नानक मेरु सरीर का इकु रथु इकु रथवाहु ॥अंग 470
  104. साम कहै सेतंबरु सुआमी सच महि आछै साचि रहे ॥ सभु को सचि समावै ॥अंग 470
  105. सतिगुर विटहु वारिआ जितु मिलिऐ खसमु समालिआ ॥अंग 470
  106. सिंमल रुखु सराइरा अति दीरघ अति मुचु ॥अंग 470
  107. पड़ि पुसतक संधिआ बादं ॥अंग 470
  108. कपड़ु रूपु सुहावणा छडि दुनीआ अंदरि जावणा ॥अंग 470
  109. दइआ कपाह संतोखु सूतु जतु गंढी सतु वटु ॥अंग 471
  110. लख चोरीआ लख जारीआ लख कूड़ीआ लख गालि ॥अंग 471
  111. नाइ मंनिऐ पति ऊपजै सालाही सचु सूतु ॥अंग 471
  112. तगु न इंद्री तगु न नारी ॥अंग 471
  113. साहिबु होइ दइआलु किरपा करे ता साई कार कराइसी ॥अंग 471
  114. गऊ बिराहमण कउ करु लावहु गोबरि तरणु न जाई ॥अंग 471
  115. माणस खाणे करहि निवाज ॥अंग 471
  116. चितै अंदरि सभु को वेखि नदरी हेठि चलाइदा ॥अंग 472
  117. जे मोहाका घरु मुहै घरु मुहि पितरी देइ ॥अंग 472
  118. जिउ जोरू सिरनावणी आवै वारो वार ॥अंग 472
  119. तुरे पलाणे पउण वेग हर रंगी हरम सवारिआ ॥अंग 472
  120. जे करि सूतकु मंनीऐ सभ तै सूतकु होइ ॥अंग 472
  121. मन का सूतकु लोभु है जिहवा सूतकु कूड़ु ॥अंग 472
  122. सभो सूतकु भरमु है दूजै लगै जाइ ॥अंग 472
  123. सतिगुरु वडा करि सालाहीऐ जिसु विचि वडीआ वडिआईआ ॥अंग 473
  124. पहिला सुचा आपि होइ सुचै बैठा आइ ॥अंग 473
  125. भंडि जंमीऐ भंडि निंमीऐ भंडि मंगणु वीआहु ॥अंग 473
  126. सभु को आखै आपणा जिसु नाही सो चुणि कढीऐ ॥अंग 473
  127. नानक फिकै बोलिऐ तनु मनु फिका होइ ॥अंग 473
  128. अंदरहु झूठे पैज बाहरि दुनीआ अंदरि फैलु ॥अंग 473
  129. आपे ही करणा कीओ कल आपे ही तै धारीऐ ॥अंग 474
  130. आपे भांडे साजिअनु आपे पूरणु देइ ॥अंग 475
महला 2 (21)
  1. जे सउ चंदा उगवहि सूरज चड़हि हजार ॥अंग 463
  2. इहु जगु सचै की है कोठड़ी सचे का विचि वासु ॥अंग 463
  3. नानक जीअ उपाइ कै लिखि नावै धरमु बहालिआ ॥अंग 463
  4. हउमै एहा जाति है हउमै करम कमाहि ॥अंग 466
  5. सेव कीती संतोखीइंी जिन॑ी सचो सचु धिआइआ ॥अंग 466
  6. जोग सबदं गिआन सबदं बेद सबदं ब्राहमणह ॥अंग 469
  7. एक क्रिसनं सरब देवा देव देवा त आतमा ॥अंग 469
  8. एह किनेही आसकी दूजै लगै जाइ ॥अंग 474
  9. सलामु जबाबु दोवै करे मुंढहु घुथा जाइ ॥अंग 474
  10. जितु सेविऐ सुखु पाईऐ सो साहिबु सदा सम॑ालीऐ ॥अंग 474
  11. चाकरु लगै चाकरी नाले गारबु वादु ॥अंग 474
  12. जो जीइ होइ सु उगवै मुह का कहिआ वाउ ॥अंग 474
  13. नालि इआणे दोसती कदे न आवै रासि ॥अंग 474
  14. नालि इआणे दोसती वडारू सिउ नेहु ॥अंग 474
  15. होइ इआणा करे कंमु आणि न सकै रासि ॥अंग 474
  16. चाकरु लगै चाकरी जे चलै खसमै भाइ ॥अंग 474
  17. एह किनेही दाति आपस ते जो पाईऐ ॥अंग 474
  18. एह किनेही चाकरी जितु भउ खसम न जाइ ॥अंग 475
  19. नानक अंत न जापन॑ी हरि ता के पारावार ॥अंग 475
  20. आपे साजे करे आपि जाई भि रखै आपि ॥अंग 475
  21. वडे कीआ वडिआईआ किछु कहणा कहणु न जाइ ॥अंग 475
महला 3 (31)
  1. हरि दरसनु पावै वडभागि ॥अंग 360
  2. सबदि मुआ विचहु आपु गवाइ ॥अंग 361
  3. सतिगुर विचि वडी वडिआई ॥अंग 361
  4. मेरा प्रभु साचा गहिर गंभीर ॥अंग 361
  5. दूजै भाइ लगे दुखु पाइआ ॥अंग 362
  6. मनमुख मरहि मरि मरणु विगाड़हि ॥अंग 362
  7. लालै आपणी जाति गवाई ॥अंग 362
  8. मनमुखि झूठो झूठु कमावै ॥अंग 363
  9. भगति रता जनु सहजि सुभाइ ॥अंग 363
  10. गुरु साइरु सतिगुरु सचु सोइ ॥अंग 363
  11. सबदि मरै तिसु सदा अनंद ॥अंग 364
  12. निरति करे बहु वाजे वजाए ॥अंग 364
  13. हरि कै भाणै सतिगुरु मिलै सचु सोझी होई ॥अंग 365
  14. सासतु बेदु सिंम्रिति सरु तेरा सुरसरी चरण समाणी ॥अंग 422
  15. सतिगुर हमरा भरमु गवाइआ ॥अंग 423
  16. आसा आस करे सभु कोई ॥अंग 423
  17. गुर ते सांति ऊपजै जिनि त्रिसना अगनि बुझाई ॥अंग 424
  18. सुणि मन मंनि वसाइ तूं आपे आइ मिलै मेरे भाई ॥अंग 425
  19. घरै अंदरि सभु वथु है बाहरि किछु नाही ॥अंग 425
  20. आपै आपु पछाणिआ सादु मीठा भाई ॥अंग 426
  21. दोहागणी महलु न पाइन॑ी न जाणनि पिर का सुआउ ॥अंग 426
  22. सचे रते से निरमले सदा सची सोइ ॥अंग 426
  23. सभ नावै नो लोचदी जिसु क्रिपा करे सो पाए ॥अंग 427
  24. सचि रतीआ सोहागणी जिना गुर कै सबदि सीगारि ॥अंग 427
  25. अंम्रितु जिन॑ा चखाइओनु रसु आइआ सहजि सुभाइ ॥अंग 428
  26. सतिगुर ते गुण ऊपजै जा प्रभु मेलै सोइ ॥अंग 428
  27. विचहु आपु गइआ नाउ मंनिआ सचि मिलावा होइ ॥1॥अंग 429
  28. अन रस महि भोलाइआ बिनु नामै दुख पाइ ॥अंग 430
  29. अयो अंङै सभु जगु आइआ काखै घंङै कालु भइआ ॥अंग 434
  30. हम घरे साचा सोहिला साचै सबदि सुहाइआ राम ॥अंग 439
  31. साजन मेरे प्रीतमहु तुम सह की भगति करेहो ॥अंग 440
महला 4 (30)
  1. सो पुरखु निरंजनु हरि पुरखु निरंजनु हरि अगमा अगम अपारा ॥अंग 348
  2. तूं करता सचिआरु मैडा सांई ॥अंग 365
  3. किस ही धड़ा कीआ मित्र सुत नालि भाई ॥अंग 366
  4. हिरदै सुणि सुणि मनि अंम्रितु भाइआ ॥अंग 366
  5. मेरै मनि तनि प्रेमु नामु आधारु ॥अंग 366
  6. गुरमुखि हरि गुण आखि वखाणी ॥1॥अंग 367
  7. नामु सुणी नामो मनि भावै ॥अंग 367
  8. गुरमुखि हरि हरि वेलि वधाई ॥अंग 367
  9. हरि हरि नाम की मनि भूख लगाई ॥अंग 367
  10. हथि करि तंतु वजावै जोगी थोथर वाजै बेन ॥अंग 368
  11. कब को भालै घुंघरू ताला कब को बजावै रबाबु ॥अंग 368
  12. सतसंगति मिलीऐ हरि साधू मिलि संगति हरि गुण गाइ ॥अंग 368
  13. आइआ मरणु धुराहु हउमै रोईऐ ॥अंग 369
  14. जनमु पदारथु पाइ नामु धिआइआ ॥अंग 369
  15. हउ अनदिनु हरि नामु कीरतनु करउ ॥अंग 369
  16. माई मोरो प्रीतमु रामु बतावहु री माई ॥अंग 369
  17. जीवनो मै जीवनु पाइआ गुरमुखि भाए राम ॥अंग 442
  18. झिमि झिमे झिमि झिमि वरसै अंम्रित धारा राम ॥अंग 442
  19. हरि ऊतमु कामु जपीऐ हरि नामु हरि जपीऐ असथिरु होवै ॥अंग 444
  20. गुण गिआनु पदारथु हरि हरि किरतारथु सोभा गुरमुखि होई ॥अंग 445
  21. धुरि मसतकि भागु हरि नामि सुहागु हरि नामै हरि गुण गाइआ ॥अंग 446
  22. मनि हरि हरि भाउ गुरु करे पसाउ जीवन मुकतु सुखु होई ॥अंग 447
  23. गोविंदु अलख अपारु अपरंपरु आपु आपणा जाणै ॥अंग 448
  24. हरि अंम्रित भिंने लोइणा मनु प्रेमि रतंना राम राजे ॥अंग 448
  25. गुरमुखि ढूंढि ढूढेदिआ हरि सजणु लधा राम राजे ॥अंग 449
  26. हरि अंम्रित भगति भंडार है गुर सतिगुर पासे राम राजे ॥अंग 449
  27. जिन मसतकि धुरि हरि लिखिआ तिना सतिगुरु मिलिआ राम राजे ॥अंग 450
  28. जिन अंतरि हरि हरि प्रीति है ते जन सुघड़ सिआणे राम राजे ॥अंग 450
  29. जिन॑ा भेटिआ मेरा पूरा सतिगुरू तिन हरि नामु द्रिड़ावै राम राजे ॥अंग 451
  30. मेरे मन परदेसी वे पिआरे आउ घरे ॥अंग 451
महला 5 (183)
  1. जिनि लाई प्रीति सोई फिरि खाइआ ॥अंग 370
  2. ससू ते पिरि कीनी वाखि ॥अंग 370
  3. निज भगती सीलवंती नारि ॥अंग 370
  4. मता करउ सो पकनि न देई ॥अंग 371
  5. प्रथमे मता जि पत्री चलावउ ॥अंग 371
  6. परदेसु झागि सउदे कउ आइआ ॥अंग 372
  7. गुनु अवगनु मेरो कछु न बीचारो ॥अंग 372
  8. दानु देइ करि पूजा करना ॥अंग 372
  9. अरड़ावै बिललावै निंदकु ॥अंग 373
  10. जउ मै कीओ सगल सीगारा ॥अंग 373
  11. जीवत दीसै तिसु सरपर मरणा ॥अंग 374
  12. पुतरी तेरी बिधि करि थाटी ॥अंग 374
  13. इक घड़ी दिनसु मो कउ बहुतु दिहारे ॥अंग 374
  14. हरि सेवा महि परम निधानु ॥अंग 375
  15. प्रभु होइ क्रिपालु त इहु मनु लाई ॥अंग 375
  16. करि किरपा हरि परगटी आइआ ॥अंग 375
  17. जैसे किरसाणु बोवै किरसानी ॥अंग 375
  18. नउ निधि तेरै सगल निधान ॥अंग 376
  19. निकटि जीअ कै सद ही संगा ॥अंग 376
  20. हरि रसु छोडि होछै रसि माता ॥अंग 376
  21. जीअ प्रान धनु हरि को नामु ॥अंग 376
  22. अनद बिनोद भरेपुरि धारिआ ॥अंग 376
  23. गुर कै सबदि बनावहु इहु मनु ॥अंग 377
  24. बुधि प्रगास भई मति पूरी ॥अंग 377
  25. हरि रसु पीवत सद ही राता ॥अंग 377
  26. कामु क्रोधु लोभु मोहु मिटावै छुटकै दुरमति अपुनी धारी ॥अंग 377
  27. भई परापति मानुख देहुरीआ ॥अंग 378
  28. तुझ बिनु अवरु नाही मै दूजा तूं मेरे मन माही ॥अंग 378
  29. हरि जन लीने प्रभू छडाइ ॥अंग 378
  30. अउखधु खाइओ हरि को नाउ ॥अंग 378
  31. बांछत नाही सु बेला आई ॥अंग 378
  32. सदा सदा आतम परगासु ॥अंग 378
  33. जा का हरि सुआमी प्रभु बेली ॥अंग 378
  34. काम क्रोध माइआ मद मतसर ए खेलत सभि जूऐ हारे ॥अंग 379
  35. तू बिअंतु अविगतु अगोचरु इहु सभु तेरा आकारु ॥अंग 379
  36. राज मिलक जोबन ग्रिह सोभा रूपवंतु जोुआनी ॥अंग 379
  37. भ्रम महि सोई सगल जगत धंध अंध ॥अंग 380
  38. जो तुधु भावै सो परवाना सूखु सहजु मनि सोई ॥अंग 380
  39. जनम जनम की मलु धोवै पराई आपणा कीता पावै ॥अंग 380
  40. बाहरु धोइ अंतरु मनु मैला दुइ ठउर अपुने खोए ॥अंग 381
  41. उदमु करत होवै मनु निरमलु नाचै आपु निवारे ॥अंग 381
  42. अधम चंडाली भई ब्रहमणी सूदी ते स्रेसटाई रे ॥अंग 381
  43. बंधन काटि बिसारे अउगन अपना बिरदु सम॑ारिआ ॥अंग 382
  44. जा तूं साहिबु ता भउ केहा हउ तुधु बिनु किसु सालाही ॥अंग 382
  45. अंम्रितु नामु तुम॑ारा ठाकुर एहु महा रसु जनहि पीओ ॥अंग 382
  46. आगै ही ते सभु किछु हूआ अवरु कि जाणै गिआना ॥अंग 383
  47. तूं विसरहि तां सभु को लागू चीति आवहि तां सेवा ॥अंग 383
  48. करि किरपा प्रभ अंतरजामी साधसंगि हरि पाईऐ ॥अंग 383
  49. मोह मलन नीद ते छुटकी कउनु अनुग्रहु भइओ री ॥अंग 383
  50. लालु चोलना तै तनि सोहिआ ॥अंग 384
  51. दूखु घनो जब होते दूरि ॥अंग 384
  52. साचि नामि मेरा मनु लागा ॥अंग 384
  53. पावतु रलीआ जोबनि बलीआ ॥अंग 385
  54. एकु बगीचा पेड घन करिआ ॥अंग 385
  55. राज लीला तेरै नामि बनाई ॥अंग 385
  56. तीरथि जाउ त हउ हउ करते ॥अंग 385
  57. घर महि सूख बाहरि फुनि सूखा ॥अंग 385
  58. जहा पठावहु तह तह जाइंी ॥अंग 386
  59. ऊठत बैठत सोवत धिआईऐ ॥अंग 386
  60. जा कै सिमरनि सूख निवासु ॥अंग 386
  61. जिसु नीच कउ कोई न जानै ॥अंग 386
  62. एको एकी नैन निहारउ ॥अंग 386
  63. कोटि जनम के रहे भवारे ॥अंग 387
  64. मिटी तिआस अगिआन अंधेरे ॥अंग 387
  65. सतिगुरु अपना सद सदा सम॑ारे ॥अंग 387
  66. आपे पेडु बिसथारी साख ॥अंग 387
  67. उकति सिआनप किछू न जाना ॥अंग 387
  68. हरि हरि अखर दुइ इह माला ॥अंग 388
  69. जिस का सभु किछु तिस का होइ ॥अंग 388
  70. जउ सुप्रसंन होइओ प्रभु मेरा ॥अंग 388
  71. कामि क्रोधि अहंकारि विगूते ॥अंग 388
  72. तू मेरा तरंगु हम मीन तुमारे ॥अंग 389
  73. रोवनहारै झूठु कमाना ॥अंग 389
  74. सोइ रही प्रभ खबरि न जानी ॥अंग 389
  75. चरन कमल की आस पिआरे ॥अंग 389
  76. मनु त्रिपतानो मिटे जंजाल ॥अंग 389
  77. ठाकुर सिउ जा की बनि आई ॥अंग 390
  78. जउ मै अपुना सतिगुरु धिआइआ ॥अंग 390
  79. अनदिनु मूसा लाजु टुकाई ॥अंग 390
  80. उन कै संगि तू करती केल ॥अंग 390
  81. अनिक भांति करि सेवा करीऐ ॥अंग 391
  82. प्रभ की प्रीति सदा सुखु होइ ॥अंग 391
  83. भूपति होइ कै राजु कमाइआ ॥अंग 391
  84. इन॑ सिउ प्रीति करी घनेरी ॥अंग 392
  85. आठ पहर निकटि करि जानै ॥अंग 392
  86. सगल सूख जपि एकै नाम ॥अंग 392
  87. आठ पहर उदक इसनानी ॥अंग 393
  88. जिह पैडै लूटी पनिहारी ॥अंग 393
  89. साधू संगि सिखाइओ नामु ॥अंग 393
  90. हरि का नामु रिदै नित धिआई ॥अंग 394
  91. साधू संगति तरिआ संसारु ॥अंग 394
  92. मीठी आगिआ पिर की लागी ॥अंग 394
  93. माथै त्रिकुटी द्रिसटि करूरि ॥अंग 394
  94. सरब दूख जब बिसरहि सुआमी ॥अंग 394
  95. नामु जपत मनु तनु सभु हरिआ ॥अंग 395
  96. गावि लेहि तू गावनहारे ॥अंग 395
  97. प्रथमे मिटिआ तन का दूख ॥अंग 395
  98. सतिगुर साचै दीआ भेजि ॥अंग 396
  99. गुर पूरे राखिआ दे हाथ ॥अंग 396
  100. मै बंदा बै खरीदु सचु साहिबु मेरा ॥अंग 396
  101. सरब सुखा मै भालिआ हरि जेवडु न कोई ॥अंग 396
  102. साई अलखु अपारु भोरी मनि वसै ॥अंग 397
  103. लाख भगत आराधहि जपते पीउ पीउ ॥अंग 397
  104. हभे थोक विसारि हिको खिआलु करि ॥अंग 397
  105. जिन॑ा न विसरै नामु से किनेहिआ ॥अंग 397
  106. पूरि रहिआ स्रब ठाइ हमारा खसमु सोइ ॥अंग 398
  107. किआ सोवहि नामु विसारि गाफल गहिलिआ ॥अंग 398
  108. कोइ न किस ही संगि काहे गरबीऐ ॥अंग 398
  109. जिसु सिमरत दुखु जाइ सहज सुखु पाईऐ ॥अंग 398
  110. गोबिंदु गुणी निधानु गुरमुखि जाणीऐ ॥अंग 399
  111. आवहु मीत इकत्र होइ रस कस सभि भुंचह ॥अंग 399
  112. उदमु कीआ कराइआ आरंभु रचाइआ ॥अंग 399
  113. जा का ठाकुरु तुही प्रभ ता के वडभागा ॥अंग 399
  114. जा प्रभ की हउ चेरुली सो सभ ते ऊचा ॥अंग 400
  115. संता की होइ दासरी एहु अचारा सिखु री ॥अंग 400
  116. डीगन डोला तऊ लउ जउ मन के भरमा ॥अंग 400
  117. सूख सहज आनदु घणा हरि कीरतनु गाउ ॥अंग 400
  118. चितवउ चितवि सरब सुख पावउ आगै भावउ कि न भावउ ॥अंग 401
  119. अंतरि गावउ बाहरि गावउ गावउ जागि सवारी ॥अंग 401
  120. जिस नो तूं असथिरु करि मानहि ते पाहुन दो दाहा ॥अंग 401
  121. अपुसट बात ते भई सीधरी दूत दुसट सजनई ॥अंग 402
  122. रे मूड़े लाहे कउ तूं ढीला ढीला तोटे कउ बेगि धाइआ ॥अंग 402
  123. मिथिआ संगि संगि लपटाए मोह माइआ करि बाधे ॥अंग 402
  124. निमख काम सुआद कारणि कोटि दिनस दुखु पावहि ॥अंग 403
  125. लूकि कमानो सोई तुम॑ पेखिओ मूड़ मुगध मुकरानी ॥अंग 403
  126. अपुने सेवक की आपे राखै आपे नामु जपावै ॥अंग 403
  127. नटूआ भेख दिखावै बहु बिधि जैसा है ओहु तैसा रे ॥अंग 403
  128. गुर परसादि मेरै मनि वसिआ जो मागउ सो पावउ रे ॥अंग 404
  129. चारि बरन चउहा के मरदन खटु दरसन कर तली रे ॥अंग 404
  130. नीकी जीअ की हरि कथा ऊतम आन सगल रस फीकी रे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 404
  131. हमारी पिआरी अंम्रित धारी गुरि निमख न मन ते टारी रे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 404
  132. नीकी साध संगानी ॥ रहाउ ॥अंग 404
  133. तिआगि सगल सिआनपा भजु पारब्रहम निरंकारु ॥अंग 405
  134. दीन बंधप जीअ दाता सरणि राखण जोगु ॥1॥अंग 405
  135. डोलि डोलि महा दुखु पाइआ बिना साधू संग ॥अंग 405
  136. उदमु करउ करावहु ठाकुर पेखत साधू संगि ॥अंग 405
  137. अगम अगोचरु दरसु तेरा सो पाए जिसु मसतकि भागु ॥अंग 406
  138. सतिगुर बचन तुम॑ारे ॥अंग 406
  139. बावर सोइ रहे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 406
  140. ओहा प्रेम पिरी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 406
  141. गुरहि दिखाइओ लोइना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 407
  142. हरि हरि नामु अमोला ॥अंग 407
  143. आपुनी भगति निबाहि ॥अंग 407
  144. ठाकुर चरण सुहावे ॥अंग 407
  145. एकु सिमरि मन माही ॥1॥ रहाउ ॥अंग 407
  146. हरि बिसरत सो मूआ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 407
  147. ओहु नेहु नवेला ॥अंग 407
  148. मिलु राम पिआरे तुम बिनु धीरजु को न करै ॥1॥ रहाउ ॥अंग 408
  149. बिकार माइआ मादि सोइओ सूझ बूझ न आवै ॥अंग 408
  150. बापारि गोविंद नाए ॥अंग 408
  151. कोऊ बिखम गार तोरै ॥अंग 408
  152. कामु क्रोधु लोभु तिआगु ॥अंग 408
  153. हरख सोग बैराग अनंदी खेलु री दिखाइओ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 409
  154. गोबिंद गोबिंद करि हां ॥अंग 409
  155. मनसा एक मानि हां ॥अंग 409
  156. हरि हरि हरि गुनी हां ॥अंग 409
  157. एका ओट गहु हां ॥अंग 410
  158. मिलि हरि जसु गाईऐ हां ॥अंग 410
  159. कारन करन तूं हां ॥अंग 410
  160. ओइ परदेसीआ हां ॥अंग 410
  161. पंच मनाए पंच रुसाए ॥ पंच वसाए पंच गवाए ॥1॥अंग 430
  162. मेरे मन हरि सिउ लागी प्रीति ॥अंग 431
  163. पारब्रहमु प्रभु सिमरीऐ पिआरे दरसन कउ बलि जाउ ॥1॥अंग 431
  164. अनदो अनदु घणा मै सो प्रभु डीठा राम ॥अंग 452
  165. अकथा हरि अकथ कथा किछु जाइ न जाणी राम ॥अंग 453
  166. हरि चरन कमल मनु बेधिआ किछु आन न मीठा राम राजे ॥अंग 453
  167. जा कउ भए क्रिपाल प्रभ हरि हरि सेई जपात ॥अंग 454
  168. जल दुध निआई रीति अब दुध आच नही मन ऐसी प्रीति हरे ॥अंग 454
  169. बनु बनु फिरती खोजती हारी बहु अवगाहि ॥अंग 455
  170. जा कउ खोजहि असंख मुनी अनेक तपे ॥अंग 455
  171. उदमु करहु वडभागीहो सिमरहु हरि हरि राइ ॥अंग 456
  172. नामु जपत गोबिंद नह अलसाईऐ ॥अंग 456
  173. थिरु संतन सोहागु मरै न जावए ॥अंग 457
  174. हरि हरि नामु जपंतिआ कछु न कहै जमकालु ॥अंग 457
  175. मिलउ संतन कै संगि मोहि उधारि लेहु ॥अंग 457
  176. पुरख पते भगवान ता की सरणि गही ॥अंग 458
  177. सुभ चिंतन गोबिंद रमण निरमल साधू संग ॥अंग 459
  178. भिंनी रैनड़ीऐ चामकनि तारे ॥अंग 459
  179. उठि वंञु वटाऊड़िआ तै किआ चिरु लाइआ ॥अंग 459
  180. वंञु मेरे आलसा हरि पासि बेनंती ॥अंग 460
  181. दिनु राति कमाइअड़ो सो आइओ माथै ॥अंग 461
  182. कमला भ्रम भीति कमला भ्रम भीति हे तीखण मद बिपरीति हे अवध अकारथ जात ॥अंग 461
  183. गोबिंद गोबिंद गोबिंद संगि नामदेउ मनु लीणा ॥अंग 487
महला 9 (1)
  1. बिरथा कहउ कउन सिउ मन की ॥अंग 411
भगत कबीर जी (36)
  1. कवन काजि जगु उपजै बिनसै कहहु मोहि समझाइआ ॥1॥अंग 475
  2. गज साढे तै तै धोतीआ तिहरे पाइनि तग ॥अंग 476
  3. बापि दिलासा मेरो कीन॑ा ॥ सेज सुखाली मुखि अंम्रितु दीन॑ा ॥अंग 476
  4. इकतु पतरि भरि उरकट कुरकट इकतु पतरि भरि पानी ॥अंग 476
  5. जोगी जती तपी संनिआसी बहु तीरथ भ्रमना ॥अंग 476
  6. फीलु रबाबी बलदु पखावज कऊआ ताल बजावै ॥अंग 477
  7. बटूआ एकु बहतरि आधारी एको जिसहि दुआरा ॥अंग 477
  8. हिंदू तुरक कहा ते आए किनि एह राह चलाई ॥अंग 477
  9. जब लगु तेलु दीवे मुखि बाती तब सूझै सभु कोई ॥अंग 477
  10. सनक सनंद अंतु नही पाइआ ॥अंग 478
  11. बाती सूकी तेलु निखूटा ॥अंग 478
  12. सुतु अपराध करत है जेते ॥अंग 478
  13. हज हमारी गोमती तीर ॥अंग 478
  14. भूली मालनी है एउ ॥अंग 479
  15. बारह बरस बालपन बीते बीस बरस कछु तपु न कीओ ॥अंग 479
  16. काहू दीन॑े पाट पटंबर काहू पलघ निवारा ॥अंग 479
  17. हम मसकीन खुदाई बंदे तुम राजसु मनि भावै ॥अंग 480
  18. गगन नगरि इक बूंद न बरखै नादु कहा जु समाना ॥अंग 480
  19. सरपनी ते ऊपरि नही बलीआ ॥अंग 480
  20. कहा सुआन कउ सिम्रिति सुनाए ॥अंग 481
  21. लंका सा कोटु समुंद सी खाई ॥अंग 481
  22. पहिला पूतु पिछैरी माई ॥अंग 481
  23. बिंदु ते जिनि पिंडु कीआ अगनि कुंड रहाइआ ॥अंग 481
  24. तनु रैनी मनु पुन रपि करि हउ पाचउ तत बराती ॥अंग 482
  25. सासु की दुखी ससुर की पिआरी जेठ के नामि डरउ रे ॥अंग 482
  26. हम घरि सूतु तनहि नित ताना कंठि जनेऊ तुमारे ॥अंग 482
  27. जगि जीवनु ऐसा सुपने जैसा जीवनु सुपन समानं ॥अंग 482
  28. रोजा धरै मनावै अलहु सुआदति जीअ संघारै ॥अंग 483
  29. कीओ सिंगारु मिलन के ताई ॥अंग 483
  30. हीरै हीरा बेधि पवन मनु सहजे रहिआ समाई ॥अंग 483
  31. पहिली करूपि कुजाति कुलखनी साहुरै पेईऐ बुरी ॥अंग 483
  32. मेरी बहुरीआ को धनीआ नाउ ॥अंग 484
  33. रहु रहु री बहुरीआ घूंघटु जिनि काढै ॥अंग 484
  34. करवतु भला न करवट तेरी ॥अंग 484
  35. कोरी को काहू मरमु न जानां ॥अंग 484
  36. अंतरि मैलु जे तीरथ नावै तिसु बैकुंठ न जानां ॥अंग 484
भगत नामदेव जी (5)
  1. एक अनेक बिआपक पूरक जत देखउ तत सोई ॥अंग 485
  2. आनीले कुंभ भराईले ऊदक ठाकुर कउ इसनानु करउ ॥अंग 485
  3. मनु मेरो गजु जिहबा मेरी काती ॥अंग 485
  4. सापु कुंच छोडै बिखु नही छाडै ॥अंग 485
  5. पारब्रहमु जि चीन॑सी आसा ते न भावसी ॥अंग 486
भगत रविदास जी (5)
  1. म्रिग मीन भ्रिंग पतंग कुंचर एक दोख बिनास ॥अंग 486
  2. संत तुझी तनु संगति प्रान ॥अंग 486
  3. तुम चंदन हम इरंड बापुरे संगि तुमारे बासा ॥अंग 486
  4. कहा भइओ जउ तनु भइओ छिनु छिनु ॥अंग 486
  5. हरि हरि हरि हरि हरि हरि हरे ॥अंग 487
शेख़ फ़रीद जी (2)
  1. दिलहु मुहबति जिंन॑ सेई सचिआ ॥अंग 488
  2. बोलै सेख फरीदु पिआरे अलह लगे ॥अंग 488
अन्य भगत (2)
  1. भ्रमत फिरत बहु जनम बिलाने तनु मनु धनु नही धीरे ॥अंग 487
  2. रे चित चेतसि की न दयाल दमोदर बिबहि न जानसि कोई ॥अंग 488