॥ सलोक मः १ ॥ पुरखां बिरखां तीरथां तटां मेघां खेतांह ॥ दीपां लोआं मंडलां खंडां वरभंडांह ॥ अंडज जेरज उतभुजां खाणी सेतजांह ॥ सो मिति जाणै नानका सरां मेरां जंतांह ॥ नानक जंत उपाइ कै सम्हाले सभनांह ॥ जिनि करते करणा कीआ चिंता भि करणी ताहि ॥ सो करता चिंता करे जिनि उपाइआ जगु ॥ तिसु जोहारी सुअसति तिसु तिसु दीबाणु अभगु ॥ नानक सचे नाम बिनु किआ टिका किआ तगु ॥१॥
॥ मः २ ॥ लख चउरासीह मेदनी तिसु ही माहि लीन ॥ करते अपणे ओपज्या नानक है बिसमादु पीन ॥२॥
अब एक सलोक M2, गुरु अंगद देव जी का। नानक के successor। आवाज़ धीमी हो गई, छोटी, मगर बात उतनी ही गहरी।
“लख चउरासीह मेदनी।” 84 लाख “मेदनी” (योनि, life-forms)।
हिन्दू tradition में 84 लाख योनियाँ हैं creature life का catalogue। गुरु अंगद उसी number को use कर रहे हैं।
“तिसु ही माहि लीन।” सब उसी में “लीन” हैं।
“करते अपणे ओपज्या।” “करते” (creator) ने अपने आप से “उत्पन्न” किया। “नानक है बिसमादु पीन।” नानक कहते हैं, यह “बिस्माद” (अचंभा, wonder) है, “पीन” (full, perfect)।
गुरु अंगद का स्वर pure wonder है। 84 लाख जीव-योनियाँ, और हर एक उसी में लीन। यह thought experiment है, just sit with it।
दिल्ली में हम सब बहुत हिसाब-किताब करते हैं, “कौन कौन है क्या?” गुरु अंगद कह रहे हैं, इस “बिस्माद” में बैठो थोड़ी देर। हिसाब छोड़ो।
॥ पउड़ी ॥ वडे कीआ वडिआईआ किछु कहणा कहणु न जाइ ॥ सो करता कादर करीमु दे जीआ रिजकु सम्बाहि ॥ साई कार कमावणी धुरि छोडी तिनै पाइ ॥ नानक एकी बाहरी होर दूजी नाही जाइ ॥ सो करे जि तिसै रजाइ ॥५॥
पौड़ी 5 acceptance पर है। नानक एक रास्ता बता रहे हैं inner peace का।
“वडे कीआ वडिआईआ, किछु कहणा कहणु न जाइ।” “वडे” की “वडिआई” का “कहना” कुछ नहीं कहा जा सकता।
यानी हरि कितना बड़ा है, यह describe नहीं हो सकता। यह वही “सुणि वडा आखै सभु कोइ” (अंग 9) का echo है।
“सो करता कादर करीमु, दे जीआ रिजकु सम्बाहि।” वो “करता,” “क़ादिर” (powerful), “करीम” (generous), “जीवों” को “रिज़क” (sustenance) “सम्भालता” (provides)।
फ़ारसी-अरबी शब्दों का use देखिए। “क़ादिर,” “करीम,” “रिज़क।” नानक मुस्लिम और हिन्दू tradition को एक साथ ला रहे हैं।
“साई कार कमावणी।” “वही काम कमाना है।” “धुरि छोडी तिनै पाइ।” जो “धुर” (origin) पर “छोड़ी” गई है (पहले से set), उसी को पाओ।
यह एक interesting concept है। नानक कह रहे हैं, हर जीव का एक predetermined “कार” (function) है। उसी को निभाओ।
मगर ध्यान दीजिए, यह fatalism नहीं। यह “स्वधर्म” है। गीता का “स्वधर्मे निधनं श्रेय:” वही बात।
“नानक एकी बाहरी होर दूजी नाही जाइ।” नानक कहते हैं, उसके अलावा कोई “और जगह” नहीं है।
यानी अगर कुछ हो रहा है, उसी के through हो रहा है। कोई “alternative reality” नहीं।
“सो करे जि तिसै रजाइ।” वही करना है जो उसकी “रज़ा” है।
दिल्ली के context में: हम सब अपने life में “control” maintain करना चाहते हैं। और जब चीज़ें “हमारे” plan से नहीं होतीं, devastated हो जाते हैं। नानक कह रहे हैं, स्वीकार करो। यह बेबसी नहीं, यह freedom है।
इस सलोक में नानक एक catalogue बना रहे हैं, फिर एक conclusion निकालते हैं।
पहली पंक्तियाँ अद्भुत हैं scale के लिए। “पुरख” (पुरुष, men), “बिरख” (पेड़), “तीरथ” (pilgrimage), “तटां” (बैंक्स), “मेघ” (बादल), “खेत” (fields)। यह छोटे scale है।
फिर बड़ा: “दीप” (द्वीप), “लोआ” (loka, planes), “मंडल” (galaxies), “खंड” (sections), “वरभंड” (universes)। यह cosmic scale है।
फिर classification of life: “अंडज” (अंडों से), “जेरज” (जरायुज, गर्भ से), “उतभुज” (पौधे, mineral-emergent), “खाणी सेतज” (sweat-born, moisture-born)।
नानक सब forms of existence को list कर रहे हैं। “सो मिति जाणै नानका।” यह सब का “मिति” (माप, extent) जाने तो वही जाने।
फिर एक turn: “नानक जंत उपाइ कै सम्हाले सभनांह।” नानक कहते हैं, “जीवों” को पैदा करने के बाद, सम्हालता भी है।
“जिनि करते करणा कीआ, चिंता भि करणी ताहि।” जिस “करते” (creator) ने “करना” (action) किया, उसे “चिंता” (care) करनी भी आती है।
यह बहुत reassuring line है। जिसने बनाया, वही सम्हालेगा। चिंता उसकी है। हम कब “चिंता” करना शुरू करते हैं? जब हमें लगता है कि कोई नहीं है ध्यान रखने वाला।
“तिसु जोहारी सुअसति तिसु, तिसु दीबाणु अभगु।” उसको “जौहार” (बंधन), “सुअस्ति” (आशीर्वाद) उसको। उसका “दीबाण” (दरबार) “अभंग” (अटूट)।
closing: “नानक सचे नाम बिनु, किआ टिका किआ तगु।” नानक कहते हैं, सच्चे नाम बिना, कैसा “टिका” (माथे का तिलक), कैसा “तग” (जनेऊ)।
यह सबसे radical line है। हिन्दू tradition में टिका और जनेऊ status symbols हैं। नानक कह रहे हैं, अगर “सच्चा नाम” अंदर नहीं, यह सब बेकार है।
दिल्ली में आज भी हम बहुत external markers carry करते हैं, dress code, hair style, gadgets, certifications। नानक का question वही है, “अंदर क्या है? वो ही असली है।”