लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग सिरी राग

राग · M1-M5 + भगत

राग श्री

साँझ का एक आँगन, दीवारों पर दिन की आख़िरी धूप: राग श्री
शाम का राग, गम्भीर मगर बिना भारीपन के।

श्री राग आदि ग्रंथ की राग-व्यवस्था का पहला नाम है। शुरुआती बारह अंगों की नित्य-प्रार्थनाओं के तुरंत बाद, अंग चौदह से इसका विस्तार शुरू होता है, और तेरानवें अंग पर समाप्त होता है। शास्त्रीय परम्परा में इस राग की ऊँची-जगह है, संगीतकारों के बीच इसे रागों का "मूल" कहा जाता है।

समय के मामले में यह राग शाम का है, सूर्यास्त के क़रीब के एक-दो घंटे का। दिन की चमक थक चुकी, रात का गहरापन अभी पूरा नहीं उतरा। उसी अधर-अवस्था में बैठा रहता है इसका सुर, चमक के पीछे की उदासी पर। पंजाब में आज भी सिख घरों में रहिरास साहिब के बाद की शाम-कीर्तन-संगति में अक्सर यही राग खुलता है।

"मोती त मंदर ऊसरहि, रतनी त होहि जड़ाउ ।" श्री राग M1
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 1 (60)
  1. मोती त मंदर ऊसरहि रतनी त होहि जड़ाउ ॥अंग 14
  2. कोटि कोटी मेरी आरजा पवणु पीअणु अपिआउ ॥अंग 14
  3. लेखै बोलणु बोलणा लेखै खाणा खाउ ॥अंग 15
  4. लबु कुता कूड़ु चूहड़ा ठगि खाधा मुरदारु ॥अंग 15
  5. अमलु गलोला कूड़ का दिता देवणहारि ॥अंग 15
  6. जालि मोहु घसि मसु करि मति कागदु करि सारु ॥अंग 16
  7. सभि रस मिठे मंनिऐ सुणिऐ सालोणे ॥अंग 16
  8. कुंगू की कांइआ रतना की ललिता अगरि वासु तनि सासु ॥अंग 17
  9. गुणवंती गुण वीथरै अउगुणवंती झूरि ॥अंग 17
  10. आवहु भैणे गलि मिलह अंकि सहेलड़ीआह ॥अंग 17
  11. भली सरी जि उबरी हउमै मुई घराहु ॥अंग 18
  12. धातु मिलै फुनि धातु कउ सिफती सिफति समाइ ॥अंग 18
  13. ध्रिगु जीवणु दोहागणी मुठी दूजै भाइ ॥अंग 18
  14. भाहि बलंदी विझवी धूउ न निकसिओ काइ ॥अंग 19
  15. तनु जलि बलि माटी भइआ मनु माइआ मोहि मनूरु ॥अंग 19
  16. नानक बेड़ी सच की तरीऐ गुर वीचारि ॥अंग 20
  17. सुणि मन मित्र पिआरिआ मिलु वेला है एह ॥अंग 20
  18. मरणै की चिंता नही जीवण की नही आस ॥अंग 20
  19. एहु मनो मूरखु लोभीआ लोभे लगा लोुभानु ॥अंग 21
  20. इकु तिलु पिआरा वीसरै रोगु वडा मन माहि ॥अंग 21
  21. हरि हरि जपहु पिआरिआ गुरमति ले हरि बोलि ॥अंग 22
  22. भरमे भाहि न विझवै जे भवै दिसंतर देसु ॥अंग 22
  23. वणजु करहु वणजारिहो वखरु लेहु समालि ॥अंग 22
  24. धनु जोबनु अरु फुलड़ा नाठीअड़े दिन चारि ॥अंग 23
  25. आपे रसीआ आपि रसु आपे रावणहारु ॥अंग 23
  26. इहु तनु धरती बीजु करमा करो सलिल आपाउ सारिंगपाणी ॥अंग 23
  27. अमलु करि धरती बीजु सबदो करि सच की आब नित देहि पाणी ॥अंग 24
  28. सोई मउला जिनि जगु मउलिआ हरिआ कीआ संसारो ॥अंग 24
  29. एकु सुआनु दुइ सुआनी नालि ॥अंग 24
  30. एका सुरति जेते है जीअ ॥अंग 24
  31. तू दरीआउ दाना बीना मै मछुली कैसे अंतु लहा ॥अंग 25
  32. कीता कहा करे मनि मानु ॥अंग 25
  33. अछल छलाई नह छलै नह घाउ कटारा करि सकै ॥अंग 25
  34. आखि आखि मनु वावणा जिउ जिउ जापै वाइ ॥अंग 53
  35. सभे कंत महेलीआ सगलीआ करहि सीगारु ॥अंग 53
  36. आपे गुण आपे कथै आपे सुणि वीचारु ॥अंग 54
  37. मछुली जालु न जाणिआ सरु खारा असगाहु ॥अंग 55
  38. मनि जूठै तनि जूठि है जिहवा जूठी होइ ॥अंग 55
  39. जपु तपु संजमु साधीऐ तीरथि कीचै वासु ॥अंग 56
  40. गुर ते निरमलु जाणीऐ निरमल देह सरीरु ॥अंग 57
  41. सुणि मन भूले बावरे गुर की चरणी लागु ॥अंग 57
  42. बिनु पिर धन सीगारीऐ जोबनु बादि खुआरु ॥अंग 58
  43. सतिगुरु पूरा जे मिलै पाईऐ रतनु बीचारु ॥अंग 59
  44. रे मन ऐसी हरि सिउ प्रीति करि जैसी जल कमलेहि ॥अंग 59
  45. मनमुखि भुलै भुलाईऐ भूली ठउर न काइ ॥अंग 60
  46. त्रिसना माइआ मोहणी सुत बंधप घर नारि ॥अंग 61
  47. राम नामि मनु बेधिआ अवरु कि करी वीचारु ॥अंग 62
  48. चिते दिसहि धउलहर बगे बंक दुआर ॥अंग 62
  49. डूंगरु देखि डरावणो पेईअड़ै डरीआसु ॥अंग 63
  50. मुकामु करि घरि बैसणा नित चलणै की धोख ॥अंग 64
  51. जोगी अंदरि जोगीआ ॥अंग 71
  52. पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा हुकमि पइआ गरभासि ॥अंग 74
  53. पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा बालक बुधि अचेतु ॥अंग 75
  54. दाती साहिब संदीआ किआ चलै तिसु नालि ॥अंग 83
  55. सिदकु सबूरी सादिका सबरु तोसा मलाइकां ॥अंग 83
  56. फकड़ जाती फकड़ु नाउ ॥अंग 83
  57. कुदरति करि कै वसिआ सोइ ॥अंग 83
  58. गलंी असी चंगीआ आचारी बुरीआह ॥अंग 85
  59. कुबुधि डूमणी कुदइआ कसाइणि पर निंदा घट चूहड़ी मुठी क्रोधि चंडालि ॥अंग 91
  60. किआ हंसु किआ बगुला जा कउ नदरि करेइ ॥अंग 91
महला 2 (2)
  1. जिसु पिआरे सिउ नेहु तिसु आगै मरि चलीऐ ॥अंग 83
  2. जो सिरु सांई ना निवै सो सिरु दीजै डारि ॥अंग 89
महला 3 (71)
  1. हउ सतिगुरु सेवी आपणा इक मनि इक चिति भाइ ॥अंग 26
  2. बहु भेख करि भरमाईऐ मनि हिरदै कपटु कमाइ ॥अंग 26
  3. जिस ही की सिरकार है तिस ही का सभु कोइ ॥अंग 27
  4. जिनी सुणि कै मंनिआ तिना निज घरि वासु ॥अंग 27
  5. जिनी इक मनि नामु धिआइआ गुरमती वीचारि ॥अंग 28
  6. हरि भगता हरि धनु रासि है गुर पूछि करहि वापारु ॥अंग 28
  7. सुख सागरु हरि नामु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥अंग 29
  8. सबदु न चीनै सदा दुखु हरि दरगहि पति खोइ ॥अंग 29
  9. घर ही सउदा पाईऐ अंतरि सभ वथु होइ ॥अंग 29
  10. सचा साहिबु सेवीऐ सचु वडिआई देइ ॥अंग 30
  11. त्रै गुण माइआ मोहु है गुरमुखि चउथा पदु पाइ ॥अंग 30
  12. अंम्रितु छोडि बिखिआ लोभाणे सेवा करहि विडाणी ॥अंग 31
  13. मनमुख करम कमावणे जिउ दोहागणि तनि सीगारु ॥अंग 31
  14. जा पिरु जाणै आपणा तनु मनु अगै धरेइ ॥अंग 31
  15. गुरमुखि क्रिपा करे भगति कीजै बिनु गुर भगति न होई ॥अंग 32
  16. धनु जननी जिनि जाइआ धंनु पिता परधानु ॥ सतगुरु सेवि सुखु पाइआ विचहु गइआ गुमानु ॥अंग 32
  17. गोविदु गुणी निधानु है अंतु न पाइआ जाइ ॥अंग 32
  18. कांइआ साधै उरध तपु करै विचहु हउमै न जाइ ॥अंग 33
  19. किरपा करे गुरु पाईऐ हरि नामो देइ द्रिड़ाइ ॥अंग 33
  20. जिनी पुरखी सतगुरु न सेविओ से दुखीए जुग चारि ॥अंग 34
  21. किसु हउ सेवी किआ जपु करी सतगुर पूछउ जाइ ॥अंग 34
  22. जे वेला वखतु वीचारीऐ ता कितु वेला भगति होइ ॥अंग 35
  23. आपणा भउ तिन पाइओनु जिन गुर का सबदु बीचारि ॥अंग 35
  24. बिनु गुर रोगु न तुटई हउमै पीड़ न जाइ ॥अंग 36
  25. तिना अनंदु सदा सुखु है जिना सचु नामु आधारु ॥अंग 36
  26. गुणवंती सचु पाइआ त्रिसना तजि विकार ॥अंग 36
  27. आपे कारणु करता करे स्रिसटि देखै आपि उपाइ ॥अंग 37
  28. सुणि सुणि काम गहेलीए किआ चलहि बाह लुडाइ ॥अंग 37
  29. इकि पिरु रावहि आपणा हउ कै दरि पूछउ जाइ ॥अंग 38
  30. हरि जी सचा सचु तू सभु किछु तेरै चीरै ॥अंग 38
  31. जगि हउमै मैलु दुखु पाइआ मलु लागी दूजै भाइ ॥अंग 39
  32. गुरमुखि क्रिपा करे भगति कीजै बिनु गुर भगति न होइ ॥अंग 64
  33. हउमै करम कमावदे जमडंडु लगै तिन आइ ॥अंग 65
  34. पंखी बिरखि सुहावड़ा सचु चुगै गुर भाइ ॥अंग 66
  35. गुरमुखि नामु धिआईऐ मनमुखि बूझ न पाइ ॥अंग 66
  36. माइआ मोहु मेरै प्रभि कीना आपे भरमि भुलाए ॥अंग 67
  37. सहजै नो सभ लोचदी बिनु गुर पाइआ न जाइ ॥अंग 68
  38. सतिगुरि मिलिऐ फेरु न पवै जनम मरण दुखु जाइ ॥अंग 69
  39. सतिगुरि सेविऐ मनु निरमला भए पवितु सरीर ॥अंग 69
  40. सदा हरि सचु मनि वसै निहचल मति अपारु ॥अंग 83
  41. होरु बिरहा सभ धातु है जब लगु साहिब प्रीति न होइ ॥अंग 83
  42. गुर सभा एव न पाईऐ ना नेड़ै ना दूरि ॥अंग 84
  43. कलउ मसाजनी किआ सदाईऐ हिरदै ही लिखि लेहु ॥अंग 84
  44. नदरी आवदा नालि न चलई वेखहु को विउपाइ ॥अंग 84
  45. कलम जलउ सणु मसवाणीऐ कागदु भी जलि जाउ ॥अंग 84
  46. होरु कूड़ु पड़णा कूड़ु बोलणा माइआ नालि पिआरु ॥अंग 84
  47. हउ हउ करती सभ मुई संपउ किसै न नालि ॥अंग 84
  48. हुकमु न जाणै बहुता रोवै ॥अंग 85
  49. मनमुख नाम विहूणिआ रंगु कसुंभा देखि न भुलु ॥अंग 85
  50. पड़ि पड़ि पंडित बेद वखाणहि माइआ मोह सुआइ ॥अंग 85
  51. सतिगुरु सेवि सुखु पाइआ सचु नामु गुणतासु ॥अंग 85
  52. पंडितु पड़ि पड़ि उचा कूकदा माइआ मोहि पिआरु ॥अंग 86
  53. जिनी सतिगुरु सेविआ तिनी नाउ पाइआ बूझहु करि बीचारु ॥अंग 86
  54. नानक सो सूरा वरीआमु जिनि विचहु दुसटु अहंकरणु मारिआ ॥अंग 86
  55. गुरि पूरै हरि नामु दिड़ाइआ तिनि विचहु भरमु चुकाइआ ॥अंग 86
  56. आतमा देउ पूजीऐ गुर कै सहजि सुभाइ ॥अंग 87
  57. मनमुखु लोकु समझाईऐ कदहु समझाइआ जाइ ॥अंग 87
  58. मनु वेकारी वेड़िआ वेकारा करम कमाइ ॥अंग 88
  59. सतिगुरु जिनी न सेविओ सबदि न कीतो वीचारु ॥अंग 88
  60. सो भगउती जोु भगवंतै जाणै ॥अंग 88
  61. अंतरि कपटु भगउती कहाए ॥अंग 88
  62. वेस करे कुरूपि कुलखणी मनि खोटै कूड़िआरि ॥अंग 89
  63. माइआ मोहु गुबारु है तिस दा न दिसै उरवारु न पारु ॥अंग 89
  64. मनमुख मैली कामणी कुलखणी कुनारि ॥अंग 89
  65. सबदि रती सोहागणी सतिगुर कै भाइ पिआरि ॥अंग 90
  66. सतिगुर कै भाणै जो चलै तिसु वडिआई वडी होइ ॥अंग 90
  67. नानक हरि नामु जिनी आराधिआ अनदिनु हरि लिव तार ॥अंग 90
  68. आपणे प्रीतम मिलि रहा अंतरि रखा उरि धारि ॥अंग 90
  69. गुर सेवा ते हरि पाईऐ जा कउ नदरि करेइ ॥अंग 90
  70. नानक गुरमुखि सेवीऐ सदा सदा दातारु ॥अंग 91
  71. सतिगुर मिलिऐ उलटी भई नव निधि खरचिउ खाउ ॥अंग 91
महला 4 (30)
  1. मै मनि तनि बिरहु अति अगला किउ प्रीतमु मिलै घरि आइ ॥अंग 39
  2. नामु मिलै मनु त्रिपतीऐ बिनु नामै ध्रिगु जीवासु ॥अंग 40
  3. गुण गावा गुण विथरा गुण बोली मेरी माइ ॥अंग 40
  4. हउ पंथु दसाई नित खड़ी कोई प्रभु दसे तिनि जाउ ॥अंग 41
  5. रसु अंम्रितु नामु रसु अति भला कितु बिधि मिलै रसु खाइ ॥अंग 41
  6. दिनसु चड़ै फिरि आथवै रैणि सबाई जाइ ॥अंग 41
  7. पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा हरि पाइआ उदर मंझारि ॥अंग 76
  8. मुंध इआणी पेईअड़ै किउ करि हरि दरसनु पिखै ॥अंग 78
  9. हरि जीअ सभे प्रतिपालदा घटि घटि रमईआ सोइ ॥अंग 81
  10. हरि इको करता इकु इको दीबाणु हरि ॥अंग 83
  11. सभ आपे तुधु उपाइ कै आपि कारै लाई ॥अंग 83
  12. तुधु आपे धरती साजीऐ चंदु सूरजु दुइ दीवे ॥अंग 83
  13. सपत दीप सपत सागरा नव खंड चारि वेद दस असट पुराणा ॥अंग 84
  14. हरि अंदरि बाहरि इकु तूं तूं जाणहि भेतु ॥अंग 84
  15. हरि की वडिआई वडी है हरि कीरतनु हरि का ॥अंग 84
  16. तूं आपे जलु मीना है आपे आपे ही आपि जालु ॥अंग 85
  17. सिसटि उपाई सभ तुधु आपे रिजकु संबाहिआ ॥अंग 85
  18. सभु को तेरा तूं सभसु दा तूं सभना रासि ॥अंग 86
  19. हरि की सेवा सफल है गुरमुखि पावै थाइ ॥अंग 86
  20. जिथै ओहु जाइ तिथै ओहु सुरखरू उस कै मुहि डिठै सभ पापी तरिआ ॥अंग 87
  21. हरि के संत सुणहु जन भाई हरि सतिगुर की इक साखी ॥अंग 87
  22. हरि हरि नामु जपहु मन मेरे जितु सदा सुखु होवै दिनु राती ॥अंग 88
  23. सतिगुरु जिनी धिआइआ से कड़ि न सवाही ॥अंग 88
  24. सो ऐसा हरि नामु धिआईऐ मन मेरे जो सभना उपरि हुकमु चलाए ॥अंग 89
  25. हरि जलि थलि महीअलि भरपूरि दूजा नाहि कोइ ॥अंग 89
  26. हरि तेरी सभ करहि उसतति जिनि फाथे काढिआ ॥अंग 90
  27. हरि की भगता परतीति हरि सभ किछु जाणदा ॥अंग 90
  28. हरि आपणी भगति कराइ वडिआई वेखालीअनु ॥अंग 90
  29. कीता लोड़ीऐ कंमु सु हरि पहि आखीऐ ॥अंग 91
  30. हउ ढाढी हरि प्रभ खसम का हरि कै दरि आइआ ॥अंग 91
महला 5 (45)
  1. किआ तू रता देखि कै पुत्र कलत्र सीगार ॥अंग 42
  2. मनि बिलासु बहु रंगु घणा द्रिसटि भूलि खुसीआ ॥अंग 42
  3. भलके उठि पपोलीऐ विणु बुझे मुगध अजाणि ॥अंग 43
  4. घड़ी मुहत का पाहुणा काज सवारणहारु ॥अंग 43
  5. सभे गला विसरनु इको विसरि न जाउ ॥अंग 43
  6. सभे थोक परापते जे आवै इकु हथि ॥अंग 44
  7. सोई धिआईऐ जीअड़े सिरि साहां पातिसाहु ॥अंग 44
  8. नामु धिआए सो सुखी तिसु मुखु ऊजलु होइ ॥अंग 44
  9. इकु पछाणू जीअ का इको रखणहारु ॥अंग 45
  10. जिना सतिगुर सिउ चितु लाइआ से पूरे परधान ॥अंग 45
  11. मिलि सतिगुर सभु दुखु गइआ हरि सुखु वसिआ मनि आइ ॥अंग 46
  12. पूरा सतिगुरु जे मिलै पाईऐ सबदु निधानु ॥अंग 46
  13. प्रीति लगी तिसु सच सिउ मरै न आवै जाइ ॥अंग 46
  14. मनु तनु धनु जिनि प्रभि दीआ रखिआ सहजि सवारि ॥अंग 47
  15. मेरा तनु अरु धनु मेरा राज रूप मै देसु ॥अंग 47
  16. सरणि पए प्रभ आपणे गुरु होआ किरपालु ॥अंग 48
  17. उदमु करि हरि जापणा वडभागी धनु खाटि ॥अंग 48
  18. सोई सासतु सउणु सोइ जितु जपीऐ हरि नाउ ॥अंग 48
  19. रसना सचा सिमरीऐ मनु तनु निरमलु होइ ॥अंग 49
  20. संत जनहु मिलि भाईहो सचा नामु समालि ॥अंग 49
  21. मिठा करि कै खाइआ कउड़ा उपजिआ सादु ॥अंग 50
  22. गोइलि आइआ गोइली किआ तिसु डंफु पसारु ॥अंग 50
  23. तिचरु वसहि सुहेलड़ी जिचरु साथी नालि ॥अंग 50
  24. करण कारण एकु ओही जिनि कीआ आकारु ॥अंग 51
  25. संचि हरि धनु पूजि सतिगुरु छोडि सगल विकार ॥अंग 51
  26. दुक्रित सुक्रित मंधे संसारु सगलाणा ॥अंग 51
  27. तेरै भरोसै पिआरे मै लाड लडाइआ ॥अंग 51
  28. संत जना मिलि भाईआ कटिअड़ा जमकालु ॥अंग 52
  29. गुरु परमेसुरु पूजीऐ मनि तनि लाइ पिआरु ॥अंग 52
  30. संत जनहु सुणि भाईहो छूटनु साचै नाइ ॥अंग 52
  31. जा कउ मुसकलु अति बणै ढोई कोइ न देइ ॥अंग 70
  32. जानउ नही भावै कवन बाता ॥अंग 71
  33. गोसाई मिहंडा इठड़ा ॥अंग 73
  34. पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा धरि पाइता उदरै माहि ॥अंग 77
  35. मन पिआरिआ जी मित्रा हरि निबहै तेरै नाले ॥अंग 79
  36. हठ मझाहू मा पिरी पसे किउ दीदार ॥अंग 80
  37. दासा नह भावए बिनु दरसावए इक खिनु धीरजु किउ करै ॥अंग 80
  38. सोहंदड़ो हभ ठाइ कोइ न दिसै डूजड़ो ॥अंग 80
  39. किउ मनहु बेसारीऐ निमख नही टारीऐ गुणवंत प्रान हमारे ॥अंग 80
  40. धूड़ी मजनु साध खे साई थीए क्रिपाल ॥अंग 80
  41. जो तउ कीने आपणे तिना कूं मिलिओहि ॥अंग 81
  42. हरि कंठि लगि सोहिआ दोख सभि जोहिआ भगति लख्यण करि वसि भए ॥अंग 81
  43. साई नामु अमोलु कीम न कोई जाणदो ॥अंग 81
  44. ब्रहमु बीचारिआ जनमु सवारिआ पूरन किरपा प्रभि करी ॥अंग 81
  45. मुंढहु भुली नानका फिरि फिरि जनमि मुईआसु ॥अंग 89
भगत कबीर जी (2)
  1. जननी जानत सुतु बडा होतु है इतना कु न जानै जि दिन दिन अवध घटतु है ॥अंग 91
  2. अचरज एकु सुनहु रे पंडीआ अब किछु कहनु न जाई ॥अंग 92
भगत रविदास जी (1)
  1. तोही मोही मोही तोही अंतरु कैसा ॥अंग 93
अन्य भगत (2)
  1. माइआ मोहु मनि आगलड़ा प्राणी जरा मरणु भउ विसरि गइआ ॥अंग 92
  2. पहरिआ कै घरि गावणा ॥अंग 93

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