भागवतम् की राम-कथा

कथा 12 · भागवतम् की कथाएँ

भागवतम् की राम-कथा

Ramayana in One Chapter
स्कन्ध 9, अध्याय 10-11

रामायण लंबी है, मगर भागवतम् ने उसे एक ही अध्याय में समेटा।

क्यों? क्योंकि भागवतम् का focus कृष्ण-कथा है। पर राम भी विष्णु के अवतार हैं। एक mention तो ज़रूरी था। और इस mention में, भागवतम् ने एक अलग tone पकड़ा।

बात इक्ष्वाकु वंश की है। अयोध्या के राजा दशरथ। तीन रानियाँ। कौसल्या, कैकेयी, सुमित्रा।

दशरथ को कोई पुत्र नहीं था। उन्होंने एक बड़ा यज्ञ कराया, पुत्रेष्टि। यज्ञ से एक दिव्य पुरुष निकला, एक पात्र लेकर। उस पात्र में खीर थी, यज्ञ-प्रसाद।

तीनों रानियों ने वो खीर खाई। तीनों गर्भवती हुईं।

कौसल्या से राम हुए। कैकेयी से भरत। सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न, जुड़वाँ।

बच्चे बड़े हुए। राम सबसे बड़े, सबसे शान्त, सबसे न्यायप्रिय।

विश्वामित्र मुनि उन्हें ले गए, राक्षसों से अपने यज्ञ की रक्षा के लिए। राम ने ताड़का को मारा। फिर मिथिला में सीता-स्वयंवर। शिव-धनुष टूटा। सीता मिलीं।

वापस अयोध्या। राज-तिलक की तैयारी। पर रात-भर में सब बदला।

कैकेयी ने अपने दो वर माँगे। एक, भरत राजा बने। दूसरा, राम चौदह साल वन में।

दशरथ टूट गए। उन्होंने राम से कहा, और राम ने सिर्फ़ इतना कहा, ”पिताजी, आप का वचन है। मैं आज ही जाऊँगा।”

उन्होंने वल्कल पहना। सीता और लक्ष्मण साथ चले।

विभो साधो शूरो ज्ञानिनिष्ठो भक्तो धर्मरतो वशी ।
सत्यसन्धो दयालुश्च मानवः सर्वसंमतः ॥

वो विभो (व्यापक) था, साधु था, शूर था, ज्ञानी था, भक्त था, धर्म में रत था, संयमी था, सत्य का साथी था, दयालु था, मनुष्य जैसा, और सब को प्रिय।

वनवास के दौरान कई कथाएँ। चित्रकूट। पंचवटी। सीता-हरण। हनुमान का मिलना। सुग्रीव की मित्रता। समुद्र पर सेतु। लंका का युद्ध। रावण-वध।

भागवतम् यह सब बहुत quickly कहता है। क्यों? क्योंकि वाल्मीकि ने पूरी रामायण पहले से लिखी है। भागवतम् इसे दोहराने नहीं आया।

पर भागवतम् एक चीज़ करता है। यह राम की कथा के अंत पर ज़ोर देता है।

रावण मरने के बाद, राम अयोध्या लौटे। राज्य मिला। सब अच्छा। पर एक problem।

लोग कहने लगे, ”सीता ने रावण के घर में दस महीने बिताए। शायद वो शुद्ध नहीं।”

राम का दिल टूटा। पर वो राजा थे। और राजा को अपनी प्रजा की राय सुननी पड़ती है, चाहे वो ग़लत हो।

उन्होंने सीता को वन भेज दिया। गर्भवती सीता को। जंगल में।

वाल्मीकि के आश्रम में सीता ने लव और कुश को जन्म दिया।

बहुत साल बाद, राम और सीता फिर मिले। पर तब तक बहुत हो चुका था।

सीता ने धरती-माँ से कहा, ”अब मुझे ले लो।”

धरती फटी। सीता उसमें समा गईं।

राम वहीं खड़े देखते रहे।

एक राजा, एक पति, एक भगवान। तीनों में एक ही व्यक्ति। और तीनों के बीच खींचा हुआ।

भागवतम् यहाँ रुकता है। और एक comment करता है, ”भगवान भी मनुष्य-रूप में हों, तो मनुष्य की tragedies से बच नहीं सकते।”

राम ने अपने तीनों भाइयों को राज्य बाँटे। और एक दिन वो ख़ुद सरयू नदी में उतरे। नदी ने उन्हें वैकुण्ठ पहुँचाया।

रामायण ख़त्म। भागवतम् आगे बढ़ता है।

मन्थन

भागवतम् की राम-कथा एक quiet retelling है। पर इसकी एक खासियत है।

वाल्मीकि की रामायण adventure-focused है। ताड़का से रावण तक। हीरो जर्नी।

भागवतम् की रामायण कुछ और focus करती है, राम का सहन। उनके सब त्याग। उनकी quiet acceptance।

पिता का वचन रखने के लिए राज्य छोड़ना। पत्नी को वन भेजना, प्रजा की राय की वजह से। आख़िर में अकेले रहना।

भागवतम् कह रहा है कि राम का असली अवतार-काम धर्म की रक्षा नहीं था। उनका असली काम था यह दिखाना कि सहन कैसे करते हैं। बिना complaint के, बिना bitterness के।

रावण-वध तो कोई भी कर देता। मगर सीता को वन भेजकर भी प्रेम रखना, यह कुछ और level था।