लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग रामकली

राग · M1-M5 + भगत + बाबा सुंदर

राग रामकली

सुबह की देर का राग, योग-परम्परा से जुड़ा।

रामकली राग योगियों का है, सुबह की देर वाली घड़ी में बजने वाला। नाथ-योगियों की परम्परा से इसका विशेष नाता रहा है, और गुरु नानक की कई रचनाएँ इन्हीं योगियों से संवाद के रूप में रची गयीं।

ग्रंथ में रामकली की रचनाएँ अंग आठ-सौ-छिहत्तर के क़रीब से शुरू होती हैं। "रामकली की वार" इस राग की एक प्रमुख रचना है, बल्वंड-सत्ता के रबाबियों द्वारा रची गयी।

"अनंदु भइआ मेरी माए सतिगुरू मै पाइआ ॥" रामकली M3, आनंद साहिब
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 1 (76)
  1. कोई पड़ता सहसाकिरता कोई पड़ै पुराना ॥अंग 876
  2. सरब जोति तेरी पसरि रही ॥अंग 876
  3. जितु दरि वसहि कवनु दरु कहीऐ दरा भीतरि दरु कवनु लहै ॥अंग 877
  4. सुरति सबदु साखी मेरी सिंङी बाजै लोकु सुणे ॥अंग 877
  5. सुणि माछिंद्रा नानकु बोलै ॥अंग 877
  6. हम डोलत बेड़ी पाप भरी है पवणु लगै मतु जाई ॥अंग 878
  7. सुरती सुरति रलाईऐ एतु ॥अंग 878
  8. तुधनो निवणु मंनणु तेरा नाउ ॥अंग 878
  9. सागर महि बूंद बूंद महि सागरु कवणु बुझै बिधि जाणै ॥अंग 878
  10. जा हरि प्रभि किरपा धारी ॥अंग 879
  11. छादनु भोजनु मागतु भागै ॥अंग 879
  12. सोई चंदु चड़हि से तारे सोई दिनीअरु तपत रहै ॥अंग 902
  13. जगु परबोधहि मड़ी बधावहि ॥अंग 903
  14. खटु मटु देही मनु बैरागी ॥अंग 903
  15. साहा गणहि न करहि बीचारु ॥अंग 904
  16. हठु निग्रहु करि काइआ छीजै ॥अंग 905
  17. अंतरि उतभुजु अवरु न कोई ॥अंग 905
  18. जिउ आइआ तिउ जावहि बउरे जिउ जनमे तिउ मरणु भइआ ॥अंग 906
  19. जतु सतु संजमु साचु द्रिड़ाइआ साच सबदि रसि लीणा ॥1॥अंग 907
  20. अउहठि हसत मड़ी घरु छाइआ धरणि गगन कल धारी ॥1॥अंग 907
  21. ओअंकारि ब्रहमा उतपति ॥अंग 929
  22. सिध सभा करि आसणि बैठे संत सभा जैकारो ॥अंग 938
  23. घटि घटि बैसि निरंतरि रहीऐ चालहि सतिगुर भाए ॥अंग 938
  24. जैसे जल महि कमलु निरालमु मुरगाई नै साणे ॥अंग 938
  25. हाटी बाटी रहहि निराले रूखि बिरखि उदिआने ॥अंग 938
  26. दरसनु भेख करहु जोगिंद्रा मुंद्रा झोली खिंथा ॥अंग 939
  27. ऊंधउ खपरु पंच भू टोपी ॥अंग 939
  28. घटि घटि गुपता गुरमुखि मुकता ॥अंग 939
  29. दुरमति बाधा सरपनि खाधा ॥अंग 939
  30. किसु कारणि ग्रिहु तजिओ उदासी ॥अंग 939
  31. कितु बिधि पुरखा जनमु वटाइआ ॥अंग 939
  32. आदि कउ कवनु बीचारु कथीअले सुंन कहा घर वासो ॥अंग 940
  33. आदि कउ बिसमादु बीचारु कथीअले सुंन निरंतरि वासु लीआ ॥अंग 940
  34. साचौ उपजै साचि समावै साचे सूचे एक मइआ ॥अंग 940
  35. गुरमुखि साचे का भउ पावै ॥अंग 941
  36. गुरमुखि अकथु कथै बीचारि ॥अंग 941
  37. गुरमुखि असट सिधी सभि बुधी ॥अंग 941
  38. नामि रते सिध गोसटि होइ ॥अंग 941
  39. गुरमुखि रतनु लहै लिव लाइ ॥अंग 942
  40. गुरमुखि सासत्र सिम्रिति बेद ॥अंग 942
  41. जिसु गुरु मिलै तिसु पारि उतारै ॥अंग 942
  42. गुरमुखि चूकै आवण जाणु ॥अंग 942
  43. कवण मूलु कवण मति वेला ॥अंग 942
  44. मैण के दंत किउ खाईऐ सारु ॥अंग 943
  45. सच भै राता गरबु निवारै ॥अंग 943
  46. सबदु भाखत ससि जोति अपारा ॥अंग 943
  47. अंतरि सुंनं बाहरि सुंनं त्रिभवण सुंन मसुंनं ॥अंग 943
  48. नउ सर सुभर दसवै पूरे ॥अंग 943
  49. कुबुधि चवावै सो कितु ठाइ ॥अंग 944
  50. साचु वखरु धनु पलै होइ ॥अंग 944
  51. सु सबद कउ निरंतरि वासु अलखं जह देखा तह सोई ॥अंग 944
  52. गिआन की मुद्रा कवन अउधू सिध की कवन कमाई ॥अंग 944
  53. गुर परसादी रंगे राता ॥अंग 945
  54. इहु मनु निहचलु हिरदै वसीअले गुरमुखि मूलु पछाणि रहै ॥अंग 945
  55. कितु कितु बिधि जगु उपजै पुरखा कितु कितु दुखि बिनसि जाई ॥अंग 946
  56. बिनु सतिगुर सेवे जोगु न होई ॥अंग 946
  57. सबदै का निबेड़ा सुणि तू अउधू बिनु नावै जोगु न होई ॥अंग 946
  58. सती पापु करि सतु कमाहि ॥अंग 951
  59. हिंदू कै घरि हिंदू आवै ॥अंग 951
  60. ना सति दुखीआ ना सति सुखीआ ना सति पाणी जंत फिरहि ॥अंग 952
  61. सो गिरही जो निग्रहु करै ॥अंग 952
  62. सो अउधूती जो धूपै आपु ॥अंग 952
  63. सो उदासी जि पाले उदासु ॥अंग 952
  64. सो पाखंडी जि काइआ पखाले ॥अंग 952
  65. सो बैरागी जि उलटे ब्रहमु ॥अंग 953
  66. किउ मरै मंदा किउ जीवै जुगति ॥अंग 953
  67. नानकु आखै रे मना सुणीऐ सिख सही ॥अंग 953
  68. सहंसर दान दे इंद्रु रोआइआ ॥अंग 953
  69. सावणु राति अहाड़ु दिहु कामु क्रोधु दुइ खेत ॥अंग 955
  70. भउ भुइ पवितु पाणी सतु संतोखु बलेद ॥अंग 955
  71. मनूआ अंधु न चेतई पड़ै अचिंता जालु ॥अंग 955
  72. वेलि पिंञाइआ कति वुणाइआ ॥अंग 955
  73. सच की काती सचु सभु सारु ॥अंग 956
  74. कमरि कटारा बंकुड़ा बंके का असवारु ॥अंग 956
  75. सरवर हंस धुरे ही मेला खसमै एवै भाणा ॥अंग 956
  76. साहिबु मेरा उजला जे को चिति करेइ ॥अंग 956
महला 2 (7)
  1. जपु तपु सभु किछु मंनिऐ अवरि कारा सभि बादि ॥अंग 954
  2. नानक अंधा होइ कै रतना परखण जाइ ॥अंग 954
  3. रतना केरी गुथली रतनी खोली आइ ॥अंग 954
  4. अंधे कै राहि दसिऐ अंधा होइ सु जाइ ॥अंग 954
  5. साहिबि अंधा जो कीआ करे सुजाखा होइ ॥अंग 954
  6. सो किउ अंधा आखीऐ जि हुकमहु अंधा होइ ॥अंग 954
  7. नानक चिंता मति करहु चिंता तिस ही हेइ ॥अंग 955
महला 3 (54)
  1. सतजुगि सचु कहै सभु कोई ॥अंग 880
  2. सरमै दीआ मुंद्रा कंनी पाइ जोगी खिंथा करि तू दइआ ॥अंग 908
  3. भगति खजाना गुरमुखि जाता सतिगुरि बूझि बुझाई ॥1॥अंग 909
  4. हरि की पूजा दुलंभ है संतहु कहणा कछू न जाई ॥1॥अंग 910
  5. हम कुचल कुचील अति अभिमानी मिलि सबदे मैलु उतारी ॥1॥अंग 910
  6. नामु खजाना गुर ते पाइआ त्रिपति रहे आघाई ॥1॥अंग 911
  7. अनंदु भइआ मेरी माए सतिगुरू मै पाइआ ॥अंग 917
  8. साची लिवै बिनु देह निमाणी ॥अंग 917
  9. अनदु सुणहु वडभागीहो सगल मनोरथ पूरे ॥अंग 922
  10. सतिगुरु सहजै दा खेतु है जिस नो लाए भाउ ॥अंग 947
  11. मनमुखु दुख का खेतु है दुखु बीजे दुखु खाइ ॥अंग 947
  12. सतिगुरि मिलिऐ सदा सुखु जिस नो आपे मेले सोइ ॥अंग 947
  13. सचै तखतु रचाइआ बैसण कउ जांई ॥अंग 947
  14. नानक महिदी करि कै रखिआ सो सहु नदरि करेइ ॥अंग 947
  15. वेकी स्रिसटि उपाईअनु सभ हुकमि आवै जाइ समाही ॥अंग 947
  16. भरमि भुलाई सभु जगु फिरी फावी होई भालि ॥अंग 947
  17. धंधा धावत दिनु गइआ रैणि गवाई सोइ ॥अंग 948
  18. इकि आपणी सिफती लाइअनु दे सतिगुर मती ॥अंग 948
  19. किउ करि इहु मनु मारीऐ किउ करि मिरतकु होइ ॥अंग 948
  20. जीवत मरणा सभु को कहै जीवन मुकति किउ होइ ॥अंग 948
  21. दूजा भाउ रचाइओनु त्रै गुण वरतारा ॥अंग 948
  22. मन का झूठा झूठु कमावै ॥अंग 948
  23. सो तपा जि इहु तपु घाले ॥अंग 948
  24. राति दिनसु उपाइअनु संसार की वरतणि ॥अंग 948
  25. अभिआगत एहि न आखीअनि जिन के चित महि भरमु ॥अंग 949
  26. अभिआगत एहि न आखीअनि जि पर घरि भोजनु करेनि ॥अंग 949
  27. अंबरु धरति विछोड़िअनु विचि सचा असराउ ॥अंग 949
  28. रैणाइर माहि अनंतु है कूड़ी आवै जाइ ॥अंग 949
  29. सहजे सतिगुरु न सेविओ विचि हउमै जनमि बिनासु ॥अंग 949
  30. छतीह जुग गुबारु सा आपे गणत कीनी ॥अंग 949
  31. इहु तनु सभो रतु है रतु बिनु तंनु न होइ ॥अंग 949
  32. रामकली रामु मनि वसिआ ता बनिआ सीगारु ॥अंग 950
  33. बिनु सतिगुर सेवे सांति न आवई दूजी नाही जाइ ॥अंग 950
  34. आपि अलिपतु सदा रहै होरि धंधै सभि धावहि ॥अंग 950
  35. सचा नामु धिआइ तू सभो वरतै सचु ॥अंग 950
  36. मनमुख बोलि न जाणनी ओना अंदरि कामु क्रोधु अहंकारु ॥अंग 950
  37. तुधु जेवडु दाता नाहि किसु आखि सुणाईऐ ॥अंग 951
  38. जि सतिगुर भावै सु मंनि लैनि सेई करम करेनि ॥अंग 951
  39. गुरू जिना का अंधुला सिख भी अंधे करम करेनि ॥अंग 951
  40. सभ नदरी अंदरि रखदा जेती सिसटि सभ कीती ॥अंग 951
  41. हरि का मंदरु आखीऐ काइआ कोटु गड़ु ॥अंग 952
  42. हरि मंदरु सोई आखीऐ जिथहु हरि जाता ॥अंग 953
  43. मूरखु होवै सो सुणै मूरख का कहणा ॥अंग 953
  44. हरि का सभु सरीरु है हरि रवि रहिआ सभु आपै ॥अंग 953
  45. काइआ हंस धुरि मेलु करतै लिखि पाइआ ॥अंग 954
  46. नउ दरवाजे काइआ कोटु है दसवै गुपतु रखीजै ॥अंग 954
  47. काइआ अंदरि गड़ु कोटु है सभि दिसंतर देसा ॥अंग 955
  48. मनमुखि मोहु गुबारु है दूजै भाइ बोलै ॥अंग 955
  49. से जन साचे सदा सदा जिनी हरि रसु पीता ॥अंग 955
  50. सो सतसंगति सबदि मिलै जो गुरमुखि चलै ॥अंग 956
  51. आसा अंदरि सभु को कोइ निरासा होइ ॥अंग 956
  52. ना किछु आसा हथि है केउ निरासा होइ ॥अंग 956
  53. ध्रिगु जीवणु संसार सचे नाम बिनु ॥अंग 956
  54. आपे आपि वरतदा आपि ताड़ी लाईअनु ॥अंग 956
महला 4 (6)
  1. जे वड भाग होवहि वडभागी ता हरि हरि नामु धिआवै ॥अंग 880
  2. राम जना मिलि भइआ अनंदा हरि नीकी कथा सुनाइ ॥अंग 880
  3. हरि के सखा साध जन नीके तिन ऊपरि हाथु वतावै ॥अंग 881
  4. जे वड भाग होवहि वड मेरे जन मिलदिआ ढिल न लाईऐ ॥अंग 881
  5. सतगुर दइआ करहु हरि मेलहु मेरे प्रीतम प्राण हरि राइआ ॥अंग 882
  6. सतगुरु दाता वडा वड पुरखु है जितु मिलिऐ हरि उर धारे ॥अंग 882
महला 5 (159)
  1. किरपा करहु दीन के दाते मेरा गुणु अवगणु न बीचारहु कोई ॥अंग 882
  2. पवहु चरणा तलि ऊपरि आवहु ऐसी सेव कमावहु ॥अंग 883
  3. आवत हरख न जावत दूखा नह बिआपै मन रोगनी ॥अंग 883
  4. त्रै गुण रहत रहै निरारी साधिक सिध न जानै ॥अंग 883
  5. अंगीकारु कीआ प्रभि अपनै बैरी सगले साधे ॥अंग 884
  6. तू दाना तू अबिचलु तूही तू जाति मेरी पाती ॥अंग 884
  7. कर करि ताल पखावजु नैनहु माथै वजहि रबाबा ॥अंग 884
  8. एका देसी एकु दिखावै एको रहिआ बिआपै ॥अंग 885
  9. कोई बोलै राम राम कोई खुदाइ ॥अंग 885
  10. पवनै महि पवनु समाइआ ॥अंग 885
  11. जपि गोबिंदु गोपाल लालु ॥अंग 885
  12. चारि पुकारहि ना तू मानहि ॥अंग 886
  13. तागा करि कै लाई थिगली ॥अंग 886
  14. करन करावन सोई ॥अंग 886
  15. सेवकु लाइओ अपुनी सेव ॥अंग 887
  16. तन ते छुटकी अपनी धारी ॥अंग 887
  17. मुख ते पड़ता टीका सहित ॥अंग 887
  18. कोटि बिघन नही आवहि नेरि ॥अंग 888
  19. दोसु न दीजै काहू लोग ॥अंग 888
  20. पंच सबद तह पूरन नाद ॥अंग 888
  21. भेटत संगि पारब्रहमु चिति आइआ ॥अंग 889
  22. तेरै काजि न ग्रिहु राजु मालु ॥अंग 889
  23. सिंचहि दरबु देहि दुखु लोग ॥अंग 889
  24. करि संजोगु बनाई काछि ॥अंग 890
  25. जो किछु करै सोई सुखु जाना ॥अंग 890
  26. कोटि जाप ताप बिस्राम ॥अंग 890
  27. बीज मंत्रु हरि कीरतनु गाउ ॥अंग 891
  28. संत कै संगि राम रंग केल ॥अंग 891
  29. गहु करि पकरी न आई हाथि ॥अंग 891
  30. आतम रामु सरब महि पेखु ॥अंग 892
  31. दीनो नामु कीओ पवितु ॥अंग 892
  32. कउडी बदलै तिआगै रतनु ॥अंग 892
  33. रैणि दिनसु जपउ हरि नाउ ॥अंग 893
  34. तेरी सरणि पूरे गुरदेव ॥अंग 893
  35. रतन जवेहर नाम ॥अंग 893
  36. महिमा न जानहि बेद ॥अंग 894
  37. किछहू काजु न कीओ जानि ॥अंग 894
  38. राखनहार दइआल ॥अंग 894
  39. सगल सिआनप छाडि ॥अंग 895
  40. होवै सोई भल मानु ॥अंग 895
  41. दुलभ देह सवारि ॥अंग 895
  42. जिस की तिस की करि मानु ॥अंग 896
  43. मन माहि जापि भगवंतु ॥अंग 896
  44. बिरथा भरवासा लोक ॥अंग 896
  45. कारन करन करीम ॥अंग 896
  46. कोटि जनम के बिनसे पाप ॥अंग 897
  47. दरसन कउ जाईऐ कुरबानु ॥अंग 897
  48. किसु भरवासै बिचरहि भवन ॥अंग 898
  49. इह लोके सुखु पाइआ ॥अंग 898
  50. गऊ कउ चारे सारदूलु ॥अंग 898
  51. ना तनु तेरा ना मनु तोहि ॥अंग 899
  52. राजा राम की सरणाइ ॥अंग 899
  53. इंीधन ते बैसंतरु भागै ॥अंग 900
  54. जो तिसु भावै सो थीआ ॥अंग 900
  55. ऐसा पूरा गुरदेउ सहाई ॥अंग 900
  56. गावहु राम के गुण गीत ॥अंग 901
  57. गुरु पूरा मेरा गुरु पूरा ॥अंग 901
  58. नरनरह नमसकारं ॥अंग 901
  59. रूप रंग सुगंध भोग तिआगि चले माइआ छले कनिक कामिनी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 901
  60. किनही कीआ परविरति पसारा ॥अंग 912
  61. इसु पानी ते जिनि तू घरिआ ॥अंग 913
  62. काहू बिहावै रंग रस रूप ॥अंग 913
  63. दावा अगनि रहे हरि बूट ॥अंग 914
  64. जीअ जंत सभि पेखीअहि प्रभ सगल तुमारी धारना ॥1॥अंग 915
  65. दरसनु भेटत पाप सभि नासहि हरि सिउ देइ मिलाई ॥1॥अंग 915
  66. सिखहु सबदु पिआरिहो जनम मरन की टेक ॥अंग 916
  67. मन बच क्रमि राम नामु चितारी ॥अंग 916
  68. साजनड़ा मेरा साजनड़ा निकटि खलोइअड़ा मेरा साजनड़ा ॥अंग 924
  69. हरि हरि धिआइ मना खिनु न विसारीऐ ॥अंग 925
  70. रुण झुणो सबदु अनाहदु नित उठि गाईऐ संतन कै ॥अंग 925
  71. चरन कमल सरणागती अनद मंगल गुण गाम ॥अंग 926
  72. जलि थलि महीअलि पूरि रहिआ इक निमख मनहु न वीसरै ॥अंग 926
  73. हरि सिमरत मनु तनु सुखी बिनसी दुतीआ सोच ॥अंग 926
  74. प्रतिपाल अचुत पुरखु एको तिसहि सिउ रंगु लागा ॥अंग 926
  75. रसना उचरै हरि हरे गुण गोविंद वखिआन ॥अंग 926
  76. धरम अरथ अरु काम मोख मुकति पदारथ नाथ ॥अंग 927
  77. ग्रिहि लाल आए पुरबि कमाए ता की उपमा किआ गणा ॥अंग 927
  78. रण झुंझनड़ा गाउ सखी हरि एकु धिआवहु ॥अंग 927
  79. करि बंदन प्रभ पारब्रहम बाछउ साधह धूरि ॥अंग 927
  80. गुण रंगि राते धंनि ते जन जिनी इक मनि धिआइआ ॥अंग 927
  81. उदमु अगमु अगोचरो चरन कमल नमसकार ॥अंग 927
  82. घरि नाहु निहचलु अनदु सखीए चरन कमल प्रफुलिआ ॥अंग 927
  83. साधसंगति बिनु भ्रमि मुई करती करम अनेक ॥अंग 928
  84. नह द्रिसटि आवै मरत हावै महा गारबि मुठीआ ॥अंग 928
  85. सरधा लागी संगि प्रीतमै इकु तिलु रहणु न जाइ ॥अंग 928
  86. प्रभु पूरि रहिआ सरब ठाई हरि नाम नव निधि ग्रिह भरे ॥अंग 928
  87. आस पिआसी मै फिरउ कब पेखउ गोपाल ॥अंग 928
  88. बिनु कंत पिआरे नह सूख सारे हार कंङण ध्रिगु बना ॥अंग 928
  89. जलणि बुझी सीतल भए मनि तनि उपजी सांति ॥अंग 928
  90. सभि काम पूरे मिलि हजूरे हरि चरण सेवकि सेविआ ॥अंग 929
  91. हरि धनु पाइआ सोहागणी डोलत नाही चीत ॥अंग 929
  92. ग्रिहि लाल आए मनि धिआए सेज सुंदरि सोहीआ ॥अंग 929
  93. संत सहाई जीअ के भवजल तारणहार ॥अंग 929
  94. हरि रंगि राते सहजि माते तिलु न मन ते बीसरै ॥अंग 929
  95. जैसा सतिगुरु सुणीदा तैसो ही मै डीठु ॥अंग 957
  96. इकु सजणु सभि सजणा इकु वैरी सभि वादि ॥अंग 957
  97. थटणहारै थाटु आपे ही थटिआ ॥अंग 957
  98. सुणि सजण प्रीतम मेरिआ मै सतिगुरु देहु दिखालि ॥अंग 957
  99. मेरै अंतरि लोचा मिलण की किउ पावा प्रभ तोहि ॥अंग 957
  100. देवणहारु दातारु कितु मुखि सालाहीऐ ॥अंग 957
  101. भीड़हु मोकलाई कीतीअनु सभ रखे कुटंबै नालि ॥अंग 957
  102. विणु तुधु होरु जि मंगणा सिरि दुखा कै दुख ॥अंग 958
  103. सो ऐसा दातारु मनहु न वीसरै ॥अंग 958
  104. धंनु सु राग सुरंगड़े आलापत सभ तिख जाइ ॥अंग 958
  105. धंनु सु वेला घड़ी धंनु धनु मूरतु पलु सारु ॥अंग 958
  106. सिफति सलाहणु भगति विरले दितीअनु ॥अंग 958
  107. हरि इकसै नालि मै दोसती हरि इकसै नालि मै रंगु ॥अंग 958
  108. मनमुखा केरी दोसती माइआ का सनबंधु ॥अंग 959
  109. जो रते दीदार सेई सचु हाकु ॥अंग 959
  110. हरणाखी कू सचु वैणु सुणाई जो तउ करे उधारणु ॥अंग 959
  111. काहे मन तू डोलता हरि मनसा पूरणहारु ॥अंग 959
  112. जिसु तू आवहि चिति तिस नो सदा सुख ॥अंग 960
  113. अंदरहु अंना बाहरहु अंना कूड़ी कूड़ी गावै ॥अंग 960
  114. पंडितु आखाए बहुती राही कोरड़ मोठ जिनेहा ॥अंग 960
  115. जो तुधु भाणा जंतु सो तुधु बुझई ॥अंग 961
  116. करि किरपा किरपाल आपे बखसि लै ॥अंग 961
  117. एको जपीऐ मनै माहि इकस की सरणाइ ॥अंग 961
  118. जिस नो तू रखवाला मारे तिसु कउणु ॥अंग 961
  119. होहु क्रिपाल सुआमी मेरे संतां संगि विहावे ॥अंग 961
  120. सतिगुरु सिमरहु आपणा घटि अवघटि घट घाट ॥अंग 961
  121. दूजा तिसु न बुझाइहु पारब्रहम नामु देहु आधारु ॥अंग 962
  122. अनद सूख बिस्राम नित हरि का कीरतनु गाइ ॥अंग 962
  123. ना तू आवहि वसि बहुतु घिणावणे ॥अंग 962
  124. आपे वैदु आपि नाराइणु ॥अंग 962
  125. हुकमि उछलै हुकमे रहै ॥अंग 962
  126. हउ तिसु ढाढी कुरबाणु जि तेरा सेवदारु ॥अंग 962
  127. मनि तनि हिरदै सिमरि हरि आठ पहर गुण गाउ ॥अंग 963
  128. नानक नामु धिआईऐ गुरु पूरा मति देइ ॥अंग 963
  129. वडिआई सचे नाम की हउ जीवा सुणि सुणे ॥अंग 963
  130. मित्रु पिआरा नानक जी मै छडि गवाइआ रंगि कसुंभै भुली ॥अंग 963
  131. हभे भसु पुणेदे वतनु जा मै सजणु तूहै ॥2॥अंग 963
  132. जिसु तू वुठा चिति तिसु दरदु निवारणो ॥अंग 963
  133. उसतति निंदा नानक जी मै हभ वञाई छोड़िआ हभु किझु तिआगी ॥अंग 963
  134. ता हउ सुखि सुखाली सुती जा गुर मिलि सजणु मै लधा ॥2॥अंग 963
  135. सभे दुख संताप जां तुधहु भुलीऐ ॥अंग 964
  136. तैडी बंदसि मै कोइ न डिठा तू नानक मनि भाणा ॥अंग 964
  137. पाव सुहावे जां तउ धिरि जुलदे सीसु सुहावा चरणी ॥अंग 964
  138. मिलि नारी सतसंगि मंगलु गावीआ ॥अंग 964
  139. तउ जेवडु दातारु न कोई जाचकु सदा जाचोवै ॥1॥अंग 964
  140. हभे सुख सुहेलड़ा सुता जिता जगु सबाइआ ॥2॥अंग 964
  141. वडा तेरा दरबारु सचा तुधु तखतु ॥अंग 964
  142. सोइ सुणंदड़ी मेरा तनु मनु मउला नामु जपंदड़ी लाली ॥अंग 964
  143. हठ मंझाहू मै माणकु लधा ॥अंग 964
  144. जिस कै मसतकि करमु होइ सो सेवा लागा ॥अंग 964
  145. जां पिरु अंदरि तां धन बाहरि ॥अंग 965
  146. आहर सभि करदा फिरै आहरु इकु न होइ ॥अंग 965
  147. वडी हू वडा अपारु तेरा मरतबा ॥अंग 965
  148. छतड़े बाजार सोहनि विचि वपारीए ॥अंग 965
  149. कबीरा हमरा को नही हम किस हू के नाहि ॥अंग 965
  150. सफलिउ बिरखु सुहावड़ा हरि सफल अंम्रिता ॥अंग 965
  151. कबीर धरती साध की तसकर बैसहि गाहि ॥अंग 965
  152. कबीर चावल कारणे तुख कउ मुहली लाइ ॥अंग 965
  153. आपे ही वड परवारु आपि इकातीआ ॥अंग 965
  154. फरीदा भूमि रंगावली मंझि विसूला बागु ॥अंग 966
  155. फरीदा उमर सुहावड़ी संगि सुवंनड़ी देह ॥अंग 966
  156. जपु तपु संजमु दइआ धरमु जिसु देहि सु पाए ॥अंग 966
  157. मुहबति जिसु खुदाइ दी रता रंगि चलूलि ॥अंग 966
  158. अंदरु विधा सचि नाइ बाहरि भी सचु डिठोमि ॥अंग 966
  159. आपे कीतो रचनु आपे ही रतिआ ॥अंग 966
महला 9 (3)
  1. रे मन ओट लेहु हरि नामा ॥अंग 901
  2. साधो कउन जुगति अब कीजै ॥अंग 902
  3. प्रानी नाराइन सुधि लेहि ॥अंग 902
भगत कबीर जी (14)
  1. कबीर महिदी करि कै घालिआ आपु पीसाइ पीसाइ ॥अंग 947
  2. कबीर कसउटी राम की झूठा टिकै न कोइ ॥अंग 948
  3. काइआ कलालनि लाहनि मेलउ गुर का सबदु गुड़ु कीनु रे ॥अंग 968
  4. गुड़ु करि गिआनु धिआनु करि महूआ भउ भाठी मन धारा ॥अंग 969
  5. तूं मेरो मेरु परबतु सुआमी ओट गही मै तेरी ॥अंग 969
  6. संता मानउ दूता डानउ इह कुटवारी मेरी ॥अंग 969
  7. जिह मुख बेदु गाइत्री निकसै सो किउ ब्रहमनु बिसरु करै ॥अंग 970
  8. तरवरु एकु अनंत डार साखा पुहप पत्र रस भरीआ ॥अंग 970
  9. मुंद्रा मोनि दइआ करि झोली पत्र का करहु बीचारु रे ॥अंग 970
  10. कवन काज सिरजे जग भीतरि जनमि कवन फलु पाइआ ॥अंग 970
  11. जिह सिमरनि होइ मुकति दुआरु ॥अंग 971
  12. बंधचि बंधनु पाइआ ॥अंग 971
  13. चंदु सूरजु दुइ जोति सरूपु ॥अंग 972
  14. दुनीआ हुसीआर बेदार जागत मुसीअत हउ रे भाई ॥अंग 972
भगत नामदेव जी (4)
  1. आनीले कागदु काटीले गूडी आकास मधे भरमीअले ॥अंग 972
  2. बेद पुरान सासत्र आनंता गीत कबित न गावउगो ॥अंग 972
  3. माइ न होती बापु न होता करमु न होती काइआ ॥अंग 973
  4. बानारसी तपु करै उलटि तीरथ मरै अगनि दहै काइआ कलपु कीजै ॥अंग 973
भगत रविदास जी (1)
  1. पड़ीऐ गुनीऐ नामु सभु सुनीऐ अनभउ भाउ न दरसै ॥अंग 973
अन्य भगत (10)
  1. अवरो न जाणहि सबदि गुर कै एकु नामु धिआवहे ॥अंग 923
  2. रामकली की वार राइ बलवंडि तथा सतै डूमि आखीअंग 966
  3. लहणे दी फेराईऐ नानका दोही खटीऐ ॥अंग 966
  4. जिनि कीती सो मंनणा को सालु जिवाहे साली ॥अंग 967
  5. होरिंओ गंग वहाईऐ दुनिआई आखै कि किओनु ॥अंग 967
  6. फेरि वसाइआ फेरुआणि सतिगुरि खाडूरु ॥अंग 967
  7. सो टिका सो बैहणा सोई दीबाणु ॥अंग 968
  8. धंनु धंनु रामदास गुरु जिनि सिरिआ तिनै सवारिआ ॥अंग 968
  9. चारे जागे चहु जुगी पंचाइणु आपे होआ ॥अंग 968
  10. इड़ा पिंगुला अउर सुखमना तीनि बसहि इक ठाई ॥अंग 974