Lulla Family

राग रामकली

राग · M1-M5 + भगत + बाबा सुंदर

राग रामकली

सुबह की देर का राग, योग-परम्परा से जुड़ा।

रामकली राग योगियों का है, सुबह की देर वाली घड़ी में बजने वाला। नाथ-योगियों की परम्परा से इसका विशेष नाता रहा है, और गुरु नानक की कई रचनाएँ इन्हीं योगियों से संवाद के रूप में रची गयीं।

ग्रंथ में रामकली की रचनाएँ अंग आठ-सौ-छिहत्तर के क़रीब से शुरू होती हैं। “रामकली की वार” इस राग की एक प्रमुख रचना है, बल्वंड-सत्ता के रबाबियों द्वारा रची गयी।

“आनंदु भइआ मेरी माए सतिगुरु मै पाइआ ।” रामकली M3, आनंद साहिब

इस राग के सब अंग