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राग बिलावल

राग · M1-M5 + भगत

राग बिलावल

सुबह के मध्य का उज्ज्वल राग।

बिलावल राग सुबह के मध्य का है, उज्ज्वल, थोड़ा-सा celebratory। हिंदुस्तानी शास्त्रीय परम्परा में यह सबसे “शुद्ध-स्वर” वाला राग माना जाता है, यानी जिसमें कोई कोमल-तीव्र स्वर नहीं लगता।

ग्रंथ में बिलावल की रचनाएँ अंग आठ-सौ-तीस के आसपास से शुरू होती हैं। नाम संस्कृत “विलावल” से, जिसका अर्थ “उज्ज्वलता” या “चमक” है।

“सहज मिलण कउ देवै घटि घटि ब्रहम ।” बिलावल M5

इस राग के सब अंग

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