राग बिलावल
सुबह के मध्य का उज्ज्वल राग।
बिलावल राग सुबह के मध्य का है, उज्ज्वल, थोड़ा-सा celebratory। हिंदुस्तानी शास्त्रीय परम्परा में यह सबसे “शुद्ध-स्वर” वाला राग माना जाता है, यानी जिसमें कोई कोमल-तीव्र स्वर नहीं लगता।
ग्रंथ में बिलावल की रचनाएँ अंग आठ-सौ-तीस के आसपास से शुरू होती हैं। नाम संस्कृत “विलावल” से, जिसका अर्थ “उज्ज्वलता” या “चमक” है।
“सहज मिलण कउ देवै घटि घटि ब्रहम ।” बिलावल M5