राग सोरठ
शाम की धुन, भक्ति और चिन्तन के बीच।
सोरठ राग का सुर शाम के झुकाव का है, भक्ति और चिन्तन के बीच का। दिन का काम पीछे छूटने लगा है, और मन एक तरह की मीठी गम्भीरता में बैठ रहा है।
नाम का सम्बन्ध सौराष्ट्र-क्षेत्र (आज का गुजरात) से बताया जाता है, जहाँ से इस राग की कुछ रचनाएँ शायद उठीं। ग्रंथ में सोरठ की रचनाएँ काफ़ी संख्या में हैं, गुरु अर्जन की अधिक।
“सरब सुख दाता रब रामु ।” सोरठ M5