अंग 657
राग सोरठि
यह अंग अभी तैयार हो रहा है।
आदि ग्रंथ का यह अंग जल्द ही यहाँ पूरी हिन्दी टीका के साथ उपलब्ध होगा। हम 1430 अंगों को धीरे-धीरे, एक-एक करके, उसी आवाज़ में अनुवाद कर रहे हैं जो आपने सोहिला, कबीर सलोक, और फ़रीद सलोक के अंगों में सुनी है।
Phase 1 (पहला चरण) में अंग 12-13 (सोहिला), अंग 1364-1377 (कबीर सलोक), और अंग 1378-1384 (फ़रीद सलोक) का पूरा अनुवाद और टीका तैयार है। बाक़ी अंग आने वाले महीनों में जुड़ते जाएँगे।
अभी इस अंग के साथ क्या किया जा सकता है? आदि ग्रंथ का index देखें, या किसी पास के अंग पर जाएँ: