नामदेव की वाणी में मराठी और पंजाबी दोनों के असर हैं। आदि ग्रंथ में उनकी छियासठ रचनाएँ हैं, अधिकांश भक्ति-प्रधान।
हिन्दी अर्थ: हे भाई ! मुझे प्रभू-देव ने सतिगुरू मिला दिया है।(उसकी बरकति से।मेरा मन) उसके शबद में लीन हो गया है। 1।रहाउ। (हे भाई !) जिस मन में पहले चंचलता दिखाई दे रही थी वहाँ अब सहज (एक रस) गुरू-शबद का प्रभाव पड़ रहा है। अब मेरी आत्मा परमात्मा में मिल गई है। सतिगुरू की कृपा से मैंने उस ज्योति को पहचान लिया है। 2। मेरे हृदय-कमल की कोठड़ी में रत्न थे (पर छुपे हुए थे); अब वहाँ (गुरू की मेहर सदका।जैसे) बिजली की चमक (जैसा प्रकाश) है (और वे रत्न दिखने लगे हैं); अब प्रभू कहीं दूर प्रतीत नहीं होता।नजदीक ही दिखता है। मुझे अपने अंदर ही भरपूर दिखता है। 3। जिस मन में अब एक-रस सूर्य के निरंतर प्रकाश जैसी रौशनी है। यहाँ पहले (जैसे) मद्यम सा दीया जल रहा था; अब गुरू की कृपा से मेरी उस प्रभू के साथ जान-पहचान हो गई है और मैं दास नामदेव अडोल अवस्था में टिक गया हूँ। 4। 1।
घरु 4 सोरठि ॥ पाड़ पड़ोसणि पूछि ले नामा का पहि छानि छवाई हो ॥ तो पहि दुगणी मजूरी दैहउ मो कउ बेढी देहु बताई हो ॥1॥ री बाई बेढी देनु न जाई ॥ देखु बेढी रहिओ समाई ॥ हमारै बेढी प्रान अधारा ॥1॥ रहाउ ॥ बेढी प्रीति मजूरी मांगै जउ कोऊ छानि छवावै हो ॥ लोग कुटंब सभहु ते तोरै तउ आपन बेढी आवै हैं ॥2॥ ऐसो बेढी बरनि न साकउ सभ अंतर सभ ठांई हो ॥ गूंगै महा अंम्रित रसु चाखिआ पूछे कहनु न जाई हो ॥3॥ बेढी के गुण सुनि री बाई जलधि बांधि ध्रू थापिओ हो ॥ नामे के सुआमी सीअ बहोरी लंक भभीखण आपिओ हैं ॥4॥2॥
भगत नामदेव महाराष्ट्र के संत थे, तेरहवीं-चौदहवीं सदी के। पंढरपुर के विट्ठल-मन्दिर से जुड़े, मगर बाद में पंजाब आ कर बसे, और गुरुदासपुर के पास उनकी समाधि है।
हिन्दी अर्थ: घरु 4 सोरठि ॥ साथ की पड़ोसन ने पूछा – हे नामे ! तूने अपनी छपरी किस से डलवाई है। मुझे बढ़ई के बारे में बता।मैं आपके से दोगुनी मजदूरी दे दूँगी। 1। हे बहन ! उस बढ़ई के बारे में (इस तरह) नहीं बताया जा सकता; देख।वह बढ़ई हर जगह मौजूद है और वह मेरे प्राणों का आसरा है। 1।रहाउ। (हे बहन !) अगर कोई मनुष्य (उस तरखान से) कुल्ली बनवाए तो वह बढ़ई प्रीति की मजदूरी मांगता है; (प्रीति भी ऐसी हो कि लोगों से।परिवार से।सबसे।मोह तोड़ ले;तो वह बढ़ई अपने आप आ जाता है)। 2। वैसे ही मैं (उस) ऐसे तरखाण का स्वरूप बयान नहीं कर सकता।(वैसे) वह सबमें है।वह सब जगह है। (जैसे) अगर कोई गूँगा बड़े स्वादिष्ट पदार्थ खाए तो पूछने पर (उससे उसका स्वाद) बताया नहीं जा सकता;3। हे बहन ! उस तरखाण के (कुछ थोड़े से) गुण सुन ले- उसने ध्रुव को अटल पदवी दी।उसने समंद्र (पर पुल) बाँधा। नामदेव के (उस तरखाण) ने (लंका से) सीता वापस ला दी और विभीषण को लंका का मालिक बना दिया। 4। 2।
नामदेव की वाणी में मराठी और पंजाबी दोनों के असर हैं। आदि ग्रंथ में उनकी छियासठ रचनाएँ हैं, अधिकांश भक्ति-प्रधान।
हिन्दी अर्थ: सोरठि घरु 3 ॥ जो भी कोई मनुष्य इस सच्चाई को विचारता है (अर्थात। जिसके भी अंदर ये मेल-अवस्था घटित होती है।उसके अंदर) ढोल बजने लग जाते हैं। (पर वह ढोल खाल से) मढ़े हुए नहीं होते।(उसके मन में) बादल गरजने लग जाते हैं। पर वह बादल सावन महीने का इन्तजार नहीं करते (भाव।हर वक्त गरजते हैं)।उसके अंदर बगैर बादलों के ही बरसात होने लग जाती है (बादल तो कभी आए और कभी चले गए।वहाँ हर वक्त ही नाम की बरखा होती रहती है।)। 1। सावन के बिना ही बादल गर्जता है। बादल के बिना ही वर्षा होती है, यदि कोई परम-तत्व का विचार करता है तो ही ऐसा प्रतीत होता है॥1 ॥ मुझे प्यारा राम मिल गया है। जिससे मिलने की बरकति से मेरा शरीर भी चमक पड़ा है। 1।रहाउ।) जैसे पारस को छू के (लोहा) सोना बन जाता है। अब मेरे बचनों में और ख़्यालों में नाम-रत्न ही परोया गया है। (प्रभू से अब) मेरा अपनों जैसा प्यार बन गया है।(ये) भरम रह ही नहीं गया (कि कहीं कोई बेगाना भी है) सतिगुरू की शिक्षा ले कर मेरा मन इस तरह पतीज गया है (और स्वच्छ हो गया है) । 2। (जैसे समुंद्र के) पानी में घड़े का पानी मिल जाता है (और अपनी अलग हस्ती को मिटा देता है)। मुझे भी अब हर जगह राम ही राम दिखता है (मेरा अपना वजूद रहा ही नहीं); अपने सतिगुरू के साथ मेरा मन एक-मेक हो गया है और मैंने दास नामे ने (जगत की) असलियत परमात्मा से (पक्की) सांझ डाल ली है। 3। 3।
रागु सोरठि बाणी भगत रविदास जी की ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ जब हम होते तब तू नाही अब तूही मै नाही ॥ अनल अगम जैसे लहरि मइ ओदधि जल केवल जल मांही ॥1॥ माधवे किआ कहीऐ भ्रमु ऐसा ॥ जैसा मानीऐ होइ न तैसा ॥1॥ रहाउ ॥ नरपति एकु सिंघासनि सोइआ सुपने भइआ भिखारी ॥ अछत राज बिछुरत दुखु पाइआ सो गति भई हमारी ॥2॥
भगत नामदेव महाराष्ट्र के संत थे, तेरहवीं-चौदहवीं सदी के। पंढरपुर के विट्ठल-मन्दिर से जुड़े, मगर बाद में पंजाब आ कर बसे, और गुरुदासपुर के पास उनकी समाधि है।
हिन्दी अर्थ: रागु सोरठि बाणी भगत रविदास जी की ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है। (हे माधो !) जब तक हम जीवों में अहंकार रहता है।तब तक आप (हमारे अंदर) प्रकट नहीं होता।पर जब आप प्रत्यक्ष होता है तब हमारी ‘मैं’ दूर हो जाती है; (इस ‘मैं’ के हटने से ही हमें ये समझ आ जाती है कि) जैसे बड़ा तूफ़ान आने से समुंद्र लहरों से नाको-नाक भर जाता है।पर असल में वह (लहरें समुंद्र के) पानी में पानी ही हैं (वैसे ही ये सारे जीव-जंतु आपका अपना ही विकास हैं)। 1। हे माधो ! हम जीवों को कुछ ऐसा भुलेखा पड़ा हुआ है कि ये बयान नहीं किया जा सकता। हम जो मानें बैठे हैं (कि जगत आपके से कोई अलग हस्ती है)।वह ठीक नहीं। 1।रहाउ। (जैसे) कोई राजा अपने तख़्त पर बैठा सो जाए।और सपने में भिखारी बन जाए। राज होते हुए भी वह (सपने में राज से) विछुड़ के दुखी होता है।वैसे ही (हे माधो ! आपसे विछुड़ के) हम जीवों का हाल हैं रहा है। 2।
इस राग की धुन का अपना मिज़ाज है, और शास्त्रीय परम्परा में इसकी अपनी विशिष्टता है। ग्रंथ के संकलन के समय यह राग चुना गया क्योंकि इसकी रचनाएँ इसी सुर में बँधी थीं। ग्रंथ के मध्य के राग, गुजरी से लेकर सोरठ तक। सोलहवीं सदी के अंत और सत्रहवीं के प्रारम्भ की रचनाएँ।
भगत नामदेव महाराष्ट्र के संत थे, तेरहवीं-चौदहवीं सदी के। पंढरपुर के विट्ठल-मन्दिर से जुड़े, मगर बाद में पंजाब आ कर बसे। उनकी वाणी में मराठी और पंजाबी दोनों के असर हैं।
इस अंग पर 4 शबद हैं, क्रम-से बँधे। पहले की प्रारम्भिक पंक्ति यह है: “हे भाई ! मुझे प्रभू-देव ने सतिगुरू मिला दिया है।”
एक पंक्ति, दो-तीन बार। यह पढ़ने का ढंग है जो इस तरह की वाणी से सबसे ज़्यादा खुलता है। अर्थ की कई परतें हैं, और हर पाठ में एक अलग परत सामने आती है। पाठ की धैर्य-शीलता ही असली शिक्षा है, गति नहीं।
स्रोत-नोट: यहाँ का देवनागरी पाठ बानीडीबी डेटाबेस (Khalis Foundation का खुला-स्रोत संग्रह) से लिया गया है। हिन्दी अनुवाद का आधार प्रोफ़ेसर साहिब सिंह जी की प्रसिद्ध टीका है, जो 1962 में पंजाबी विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित हुई थी और आज भी विद्वानों के बीच मानक मानी जाती है। गहन व्याख्या के लिए परम्परागत ‘स्टीक’ और ‘टीका’ संसाधन उपलब्ध हैं।
स्रोत: हिन्दी अर्थ banidb.com (Khalis Foundation) के डेटा से। टीका प्रोफ़ेसर साहिब सिंह की टीका पर आधारित। देवनागरी transliteration lulla.net पर automated।