लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग वडहंस

राग · M1-M5

राग वडहंस

अपराह्न का राग, शुभ-अवसरों का।

वडहंस राग अपराह्न का है, समारोह-योग्य। पंजाबी विवाह-संस्कारों में इसकी ध्वनि सुनाई देती रही है, सदियों से।

नाम का अर्थ "बड़ा हंस" है, जो इसकी राजसी प्रकृति का संकेत है। ग्रंथ में इस राग की रचनाएँ कुल-मिला कर बहुत हैं, मगर जो हैं वो विशेष-अवसर-स्मरण की भावना से भरी हैं।

"बाबा आइआ है उठि चलणा अध पंधै है संसारोवा ॥" वडहंस M1, अलाहणी
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 1 (13)
  1. अमली अमलु न अंबड़ै मछी नीरु न होइ ॥अंग 557
  2. गुणवंती सहु राविआ निरगुणि कूके काइ ॥अंग 557
  3. मोरी रुण झुण लाइआ भैणे सावणु आइआ ॥अंग 557
  4. काइआ कूड़ि विगाड़ि काहे नाईऐ ॥अंग 565
  5. करहु दइआ तेरा नामु वखाणा ॥अंग 566
  6. धंनु सिरंदा सचा पातिसाहु जिनि जगु धंधै लाइआ ॥अंग 578
  7. आवहु मिलहु सहेलीहो सचड़ा नामु लएहां ॥अंग 579
  8. सचु सिरंदा सचा जाणीऐ सचड़ा परवदगारो ॥अंग 580
  9. जिनि जगु सिरजि समाइआ सो साहिबु कुदरति जाणोवा ॥अंग 581
  10. बाबा आइआ है उठि चलणा इहु जगु झूठु पसारोवा ॥अंग 581
  11. जालउ ऐसी रीति जितु मै पिआरा वीसरै ॥अंग 590
  12. घर ही मुंधि विदेसि पिरु नित झूरे संम्हाले ॥अंग 594
  13. नानक गाली कूड़ीआ बाझु परीति करेइ ॥अंग 594
महला 3 (60)
  1. मनि मैलै सभु किछु मैला तनि धोतै मनु हछा न होइ ॥अंग 558
  2. नदरी सतगुरु सेवीऐ नदरी सेवा होइ ॥अंग 558
  3. माइआ मोहु गुबारु है गुर बिनु गिआनु न होई ॥अंग 559
  4. सोहागणी सदा मुखु उजला गुर कै सहजि सुभाइ ॥अंग 559
  5. अंम्रित नामु सद मीठा लागा गुर सबदी सादु आइआ ॥अंग 559
  6. गुरमुखि सचु संजमु ततु गिआनु ॥अंग 559
  7. रसना हरि सादि लगी सहजि सुभाइ ॥अंग 560
  8. पूरे गुर ते नामु पाइआ जाइ ॥अंग 560
  9. हउमै नावै नालि विरोधु है दुइ न वसहि इक ठाइ ॥अंग 560
  10. अनदिनु सचु सलाहणा धनु धनु वडभाग हमारा ॥1॥अंग 564
  11. मनूआ दह दिस धावदा ओहु कैसे हरि गुण गावै ॥अंग 565
  12. आपणे पिर कै रंगि रती मुईए सोभावंती नारे ॥अंग 567
  13. गुरमुखि सभु वापारु भला जे सहजे कीजै राम ॥अंग 568
  14. कालु जालु जमु जोहि न साकै साचै सबदि लिव लाए ॥अंग 569
  15. रतन पदारथ वणजीअहि सतिगुरि दीआ बुझाई राम ॥अंग 569
  16. सचा सउदा हरि नामु है सचा वापारा राम ॥अंग 570
  17. ए मन मेरिआ आवा गउणु संसारु है अंति सचि निबेड़ा राम ॥अंग 571
  18. प्रभु सचड़ा हरि सालाहीऐ कारजु सभु किछु करणै जोगु ॥अंग 582
  19. सुणिअहु कंत महेलीहो पिरु सेविहु सबदि वीचारि ॥अंग 583
  20. रोवहि पिरहि विछुंनीआ मै पिरु सचड़ा है सदा नाले ॥अंग 584
  21. इहु सरीरु जजरी है इस नो जरु पहुचै आए ॥अंग 584
  22. सबदि रते वड हंस है सचु नामु उरि धारि ॥अंग 585
  23. मै जानिआ वड हंसु है ता मै कीआ संगु ॥अंग 585
  24. हंसा वेखि तरंदिआ बगां भि आया चाउ ॥अंग 585
  25. सतिगुरि सेविऐ हरि मनि वसै तिथै भउ कदे न होइ ॥अंग 586
  26. इकि सजण चले इकि चलि गए रहदे भी फुनि जाहि ॥अंग 586
  27. सतिगुर की सेवा चाकरी सुखी हूं सुख सारु ॥अंग 586
  28. होर विडाणी चाकरी ध्रिगु जीवणु ध्रिगु वासु ॥अंग 586
  29. सतिगुरि मिलिऐ भुख गई भेखी भुख न जाइ ॥अंग 586
  30. सतिगुरि सेविऐ सदा सुखु जनम मरण दुखु जाइ ॥अंग 587
  31. सजण मिले सजणा जिन सतगुर नालि पिआरु ॥अंग 587
  32. इकि सदा इकतै रंगि रहहि तिन कै हउ सद बलिहारै जाउ ॥अंग 587
  33. त्रिसना दाधी जलि मुई जलि जलि करे पुकार ॥अंग 588
  34. भेखी अगनि न बुझई चिंता है मन माहि ॥अंग 588
  35. कलि महि जमु जंदारु है हुकमे कार कमाइ ॥अंग 588
  36. एहा काइआ रोगि भरी बिनु सबदै दुखु हउमै रोगु न जाइ ॥अंग 588
  37. भगति करहि मरजीवड़े गुरमुखि भगति सदा होइ ॥अंग 589
  38. सतिगुर की सेव न कीनीआ किआ ओहु करे वीचारु ॥अंग 589
  39. रतना पारखु जो होवै सु रतना करे वीचारु ॥अंग 589
  40. सतिगुर की सेव न कीनीआ हरि नामि न लगो पिआरु ॥अंग 589
  41. बिनु सतिगुर सेवे जीअ के बंधना विचि हउमै करम कमाहि ॥अंग 589
  42. भगत जना कंउ आपि तुठा मेरा पिआरा आपे लइअनु जन लाइ ॥अंग 590
  43. सुणि सिखिऐ सादु न आइओ जिचरु गुरमुखि सबदि न लागै ॥अंग 590
  44. नानक नामु निधानु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥अंग 590
  45. कंचन काइआ निरमली जो सचि नामि सचि लागी ॥अंग 590
  46. मनमुखु काइरु करूपु है बिनु नावै नकु नाहि ॥अंग 591
  47. गुरमुखि सदा दरि सोहणे गुर का सबदु कमाहि ॥अंग 591
  48. सतिगुर की परतीति न आईआ सबदि न लागो भाउ ॥अंग 591
  49. ए मन ऐसा सतिगुरु खोजि लहु जितु सेविऐ जनम मरण दुखु जाइ ॥अंग 591
  50. बिनु सतिगुर सेवे जगतु मुआ बिरथा जनमु गवाइ ॥अंग 591
  51. इसु जग महि पुरखु एकु है होर सगली नारि सबाई ॥अंग 591
  52. जिन कंउ सतिगुरु भेटिआ से हरि कीरति सदा कमाहि ॥अंग 592
  53. हंउमै अंदरि खड़कु है खड़के खड़कि विहाइ ॥अंग 592
  54. गुरमुखि सेव न कीनीआ हरि नामि न लगो पिआरु ॥अंग 592
  55. इको सतिगुरु जागता होरु जगु सूता मोहि पिआसि ॥अंग 592
  56. जगतु अगिआनी अंधु है दूजै भाइ करम कमाइ ॥अंग 593
  57. हम घरि नामु खजाना सदा है भगति भरे भंडारा ॥अंग 593
  58. मनहठि किनै न पाइओ सभ थके करम कमाइ ॥अंग 593
  59. सतिगुर नो सभु को वेखदा जेता जगतु संसारु ॥अंग 594
  60. सतिगुरू न सेविओ मूरख अंध गवारि ॥अंग 594
महला 4 (30)
  1. सेज एक एको प्रभु ठाकुरु ॥अंग 560
  2. मेरा हरि प्रभु सुंदरु मै सार न जाणी ॥अंग 561
  3. मै मनि वडी आस हरे किउ करि हरि दरसनु पावा ॥अंग 561
  4. मेरै मनि मेरै मनि सतिगुरि प्रीति लगाई राम ॥अंग 572
  5. हंउ गुर बिनु हंउ गुर बिनु खरी निमाणी राम ॥अंग 572
  6. हरि सतिगुर हरि सतिगुर मेलि हरि सतिगुर चरण हम भाइआ राम ॥अंग 573
  7. हरि किरपा हरि किरपा करि सतिगुरु मेलि सुखदाता राम ॥अंग 574
  8. देह तेजणि जी रामि उपाईआ राम ॥अंग 575
  9. देह तेजनड़ी हरि नव रंगीआ राम ॥अंग 575
  10. तू आपे ही आपि आपि है आपि कारणु कीआ ॥अंग 585
  11. तिसु मिलीऐ सतिगुर सजणै जिसु अंतरि हरि गुणकारी ॥अंग 586
  12. सो सतिगुरु सेविहु साध जनु जिनि हरि हरि नामु द्रिड़ाइआ ॥अंग 586
  13. तितु जाइ बहहु सतसंगती जिथै हरि का हरि नामु बिलोईऐ ॥अंग 587
  14. तिसु गुर कउ हउ वारिआ जिनि हरि की हरि कथा सुणाई ॥अंग 587
  15. जिनी हरि हरि नामु धिआइआ तिनी पाइअड़े सरब सुखा ॥अंग 588
  16. जिनि जगजीवनु उपदेसिआ तिसु गुर कउ हउ सदा घुमाइआ ॥अंग 588
  17. तू करता सभु किछु जाणदा सभि जीअ तुमारे ॥अंग 589
  18. जिसु अंतरु हिरदा सुधु है तिसु जन कउ सभि नमसकारी ॥अंग 589
  19. हरि इको दाता सेवीऐ हरि इकु धिआईऐ ॥अंग 590
  20. गुरसिखां मनि हरि प्रीति है गुरु पूजण आवहि ॥अंग 590
  21. से गुरसिख धनु धंनु है जिनी गुर उपदेसु सुणिआ हरि कंनी ॥अंग 590
  22. गुरमुखि प्रहिलादि जपि हरि गति पाई ॥अंग 591
  23. जिस कै घरि दीबानु हरि होवै तिस की मुठी विचि जगतु सभु आइआ ॥अंग 591
  24. जिन कै हरि नामु वसिआ सद हिरदै हरि नामो तिन कंउ रखणहारा ॥अंग 592
  25. हरि नामु हमारा प्रभु अबिगतु अगोचरु अबिनासी पुरखु बिधाता ॥अंग 592
  26. हरि नामु हमारा भोजनु छतीह परकार जितु खाइऐ हम कउ त्रिपति भई ॥अंग 593
  27. धंनु धंनु सो गुरसिखु कहीऐ जो सतिगुर चरणी जाइ पइआ ॥अंग 593
  28. धनु धनु सत पुरखु सतिगुरू हमारा जितु मिलिऐ हम कउ सांति आई ॥अंग 594
  29. जिनि उपाए जीअ तिनि हरि राखिआ ॥अंग 594
  30. तू आपे आपि आपि सभु करता कोई दूजा होइ सु अवरो कहीऐ ॥अंग 594
महला 5 (19)
  1. अति ऊचा ता का दरबारा ॥अंग 562
  2. धनु सु वेला जितु दरसनु करणा ॥अंग 562
  3. तू बेअंतु को विरला जाणै ॥अंग 562
  4. अंतरजामी सो प्रभु पूरा ॥अंग 563
  5. तू वड दाता अंतरजामी ॥अंग 563
  6. साधसंगि हरि अंम्रितु पीजै ॥अंग 563
  7. विसरु नाही प्रभ दीन दइआला ॥अंग 563
  8. तू जाणाइहि ता कोई जाणै ॥अंग 563
  9. मेरै अंतरि लोचा मिलण की पिआरे हउ किउ पाई गुर पूरे ॥अंग 564
  10. गुर मिलि लधा जी रामु पिआरा राम ॥अंग 576
  11. किआ सुणेदो कूड़ु वंञनि पवण झुलारिआ ॥अंग 577
  12. तिन घोलि घुमाई जिन प्रभु स्रवणी सुणिआ राम ॥अंग 577
  13. लोइण लोई डिठ पिआस न बुझै मू घणी ॥अंग 577
  14. जिनी हरि प्रभु डिठा तिन कुरबाणे राम ॥अंग 577
  15. देह अंधारी अंध सुंञी नाम विहूणीआ ॥अंग 577
  16. तिन खंनीऐ वंञां जिन मेरा हरि प्रभु डीठा राम ॥अंग 577
  17. जो लोड़ीदे राम सेवक सेई कांढिआ ॥अंग 578
  18. मिलि जलु जलहि खटाना राम ॥अंग 578
  19. प्रभ करण कारण समरथा राम ॥अंग 578

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