लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग सारंग

राग · M1-M5 + भगत

राग सारंग

दोपहर का राग, गर्मी और लम्बाई का।

सारंग दोपहर का राग है, गर्मी और दिन की लम्बाई का स्वर। मध्यान्ह-सारंग, वृन्दावनी-सारंग, और कई दूसरे उप-राग इसी कुल के हैं।

ग्रंथ में सारंग की रचनाएँ अंग ग्यारह-सौ-अड़सठ के क़रीब से शुरू होती हैं। दोपहर की कीर्तन-संगति में अक्सर इसकी रचनाएँ गायी जाती हैं।

"हरि बिनु तेरो को न सहाई ॥" सारंग M9
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 1 (38)
  1. अपुने ठाकुर की हउ चेरी ॥अंग 1197
  2. हरि बिनु किउ रहीऐ दुखु बिआपै ॥अंग 1197
  3. दूरि नाही मेरो प्रभु पिआरा ॥अंग 1197
  4. हरि बिनु किउ जीवा मेरी माई ॥अंग 1232
  5. हरि बिनु किउ धीरै मनु मेरा ॥अंग 1232
  6. न भीजै रागी नादी बेदि ॥अंग 1237
  7. नव छिअ खट का करे बीचारु ॥अंग 1237
  8. जिनसि थापि जीआं कउ भेजै जिनसि थापि लै जावै ॥अंग 1238
  9. जुड़ि जुड़ि विछुड़े विछुड़ि जुड़े ॥अंग 1238
  10. इकसु न पुजहि बोल जे पूरे पूरा करि मिलै ॥अंग 1239
  11. आखणि अउखा सुनणि अउखा आखि न जापी आखि ॥अंग 1239
  12. जूठि न रागंी जूठि न वेदंी ॥अंग 1240
  13. नानक चुलीआ सुचीआ जे भरि जाणै कोइ ॥अंग 1240
  14. दुख विचि जंमणु दुखि मरणु दुखि वरतणु संसारि ॥अंग 1240
  15. नानक दुनीआ भसु रंगु भसू हू भसु खेह ॥अंग 1240
  16. घरि नाराइणु सभा नालि ॥अंग 1240
  17. सभे सुरती जोग सभि सभे बेद पुराण ॥अंग 1241
  18. पुरीआ खंडा सिरि करे इक पैरि धिआए ॥अंग 1241
  19. है है आखां कोटि कोटि कोटी हू कोटि कोटि ॥अंग 1241
  20. सभे राती सभि दिह सभि थिती सभि वार ॥अंग 1241
  21. अखंी परणै जे फिरां देखां सभु आकारु ॥अंग 1241
  22. होरु सरीकु होवै कोई तेरा तिसु अगै तुधु आखां ॥अंग 1242
  23. जां न सिआ किआ चाकरी जां जंमे किआ कार ॥अंग 1242
  24. सासत्र बेद पुराण पड़॑ंता ॥अंग 1242
  25. जां हउ तेरा तां सभु किछु मेरा हउ नाही तू होवहि ॥अंग 1242
  26. कलि होई कुते मुही खाजु होआ मुरदारु ॥अंग 1242
  27. रंना होईआ बोधीआ पुरस होए सईआद ॥अंग 1243
  28. लख सिउ प्रीति होवै लख जीवणु किआ खुसीआ किआ चाउ ॥अंग 1243
  29. कापड़ु काठु रंगाइआ रांगि ॥अंग 1243
  30. बेदु पुकारे पुंनु पापु सुरग नरक का बीउ ॥अंग 1243
  31. मरणि न मूरतु पुछिआ पुछी थिति न वारु ॥अंग 1244
  32. नानक ढेरी ढहि पई मिटी संदा कोटु ॥अंग 1244
  33. धनवंता इव ही कहै अवरी धन कउ जाउ ॥अंग 1244
  34. सूरजु चड़ै विजोगि सभसै घटै आरजा ॥अंग 1244
  35. ध्रिगु तिना का जीविआ जि लिखि लिखि वेचहि नाउ ॥अंग 1245
  36. सचु वरतु संतोखु तीरथु गिआनु धिआनु इसनानु ॥अंग 1245
  37. गिआन विहूणा गावै गीत ॥अंग 1245
  38. मनहु जि अंधे कूप कहिआ बिरदु न जाणन॑ी ॥अंग 1246
महला 2 (9)
  1. गुरु कुंजी पाहू निवलु मनु कोठा तनु छति ॥अंग 1237
  2. आपि उपाए नानका आपे रखै वेक ॥अंग 1238
  3. साह चले वणजारिआ लिखिआ देवै नालि ॥अंग 1238
  4. जिन वडिआई तेरे नाम की ते रते मन माहि ॥अंग 1238
  5. कीता किआ सालाहीऐ करे सोइ सालाहि ॥अंग 1239
  6. तिसु सिउ कैसा बोलणा जि आपे जाणै जाणु ॥अंग 1239
  7. सिफति जिना कउ बखसीऐ सेई पोतेदार ॥अंग 1239
  8. कथा कहाणी बेदंी आणी पापु पुंनु बीचारु ॥अंग 1243
  9. जैसा करै कहावै तैसा ऐसी बनी जरूरति ॥अंग 1245
महला 3 (26)
  1. मन मेरे हरि कै नामि वडाई ॥अंग 1233
  2. मन मेरे हरि का नामु अति मीठा ॥अंग 1233
  3. मन मेरे हरि की अकथ कहाणी ॥अंग 1234
  4. नउमी नेमु सचु जे करै ॥अंग 1245
  5. पड़ि॑ पड़ि॑ पंडित मोुनी थके देसंतर भवि थके भेखधारी ॥अंग 1246
  6. नांगे आवणा नांगे जाणा हरि हुकमु पाइआ किआ कीजै ॥अंग 1246
  7. सहजे सुखि सुती सबदि समाइ ॥अंग 1247
  8. जिन॑ी नामु विसारिआ किआ जपु जापहि होरि ॥अंग 1247
  9. जिनी नामु विसारिआ बहु करम कमावहि होरि ॥अंग 1247
  10. जिचरु इहु मनु लहरी विचि है हउमै बहुतु अहंकारु ॥अंग 1247
  11. सो जपु तपु सेवा चाकरी जो खसमै भावै ॥अंग 1247
  12. विणु सतिगुर सेवे सुखु नही मरि जंमहि वारो वार ॥अंग 1248
  13. माइआ मोहि विसारिआ सचु मरणा हरि नामु ॥अंग 1248
  14. गुर का कहिआ जे करे सुखी हू सुखु सारु ॥अंग 1248
  15. सचु पुराणा ना थीऐ नामु न मैला होइ ॥अंग 1248
  16. मनमुख बोलि न जाणन॑ी ओना अंदरि कामु क्रोधु अहंकारु ॥अंग 1248
  17. हरि गुरमुखि तिन॑ी अराधिआ जिन॑ करमि परापति होइ ॥अंग 1248
  18. पड़ि पड़ि पंडित वादु वखाणदे माइआ मोह सुआइ ॥अंग 1249
  19. सचु वणजहि सचु सेवदे जि गुरमुखि पैरी पाहि ॥अंग 1249
  20. पराई अमाण किउ रखीऐ दिती ही सुखु होइ ॥अंग 1249
  21. मनि अनदु भइआ मिलिआ हरि प्रीतमु सरसे सजण संत पिआरे ॥अंग 1249
  22. गुरमुखि अंम्रितु नामु है जितु खाधै सभ भुख जाइ ॥अंग 1250
  23. बिनु सबदै जगि आन॑ेरु है सबदे परगटु होइ ॥अंग 1250
  24. माइआ मोहि विसारिआ गुर का भउ हेतु अपारु ॥अंग 1250
  25. अमरु वेपरवाहु है तिसु नालि सिआणप न चलई न हुजति करणी जाइ ॥अंग 1251
  26. दाति जोति सभ सूरति तेरी ॥अंग 1251
महला 4 (54)
  1. हरि के संत जना की हम धूरि ॥अंग 1198
  2. गोबिंद चरनन कउ बलिहारी ॥अंग 1198
  3. हरि हरि अंम्रित नामु देहु पिआरे ॥अंग 1199
  4. गोबिद की ऐसी कार कमाइ ॥अंग 1199
  5. मेरा मनु राम नामि मनु मानी ॥अंग 1199
  6. जपि मन राम नामु पड़्हु सारु ॥अंग 1200
  7. काहे पूत झगरत हउ संगि बाप ॥अंग 1200
  8. जपि मन जगंनाथ जगदीसरो जगजीवनो मनमोहन सिउ प्रीति लागी मै हरि हरि हरि टेक सभ दिनसु सभ राति ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1200
  9. जपि मन नरहरे नरहर सुआमी हरि सगल देव देवा स्री राम राम नामा हरि प्रीतमु मोरा ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1201
  10. जपि मन माधो मधुसूदनो हरि स्रीरंगो परमेसरो सति परमेसरो प्रभु अंतरजामी ॥अंग 1201
  11. जपि मन निरभउ ॥अंग 1201
  12. जपि मन गोविंदु हरि गोविंदु गुणी निधानु सभ स्रिसटि का प्रभो मेरे मन हरि बोलि हरि पुरखु अबिनासी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1202
  13. जपि मन सिरी रामु ॥अंग 1202
  14. आपे आपि निरंजना जिनि आपु उपाइआ ॥अंग 1237
  15. गुरमुखि चलतु रचाइओनु गुण परगटी आइआ ॥अंग 1238
  16. मनमुखि दूजा भरमु है दूजै लोभाइआ ॥अंग 1238
  17. हरि का नामु निधानु है सेविऐ सुखु पाई ॥अंग 1239
  18. नामु निरंजनु निरमला सुणिऐ सुखु होई ॥अंग 1239
  19. नाइ सुणिऐ मनु रहसीऐ नामे सांति आई ॥अंग 1240
  20. नाइ सुणिऐ सभ सिधि है रिधि पिछै आवै ॥अंग 1240
  21. नाइ सुणिऐ सुचि संजमो जमु नेड़ि न आवै ॥अंग 1240
  22. नाइ मंनिऐ सुखु ऊपजै नामे गति होई ॥अंग 1241
  23. नाइ मंनिऐ कुलु उधरै सभु कुटंबु सबाइआ ॥अंग 1241
  24. नाइ मंनिऐ दुरमति गई मति परगटी आइआ ॥अंग 1242
  25. नाइ मंनिऐ सुरति ऊपजै नामे मति होई ॥अंग 1242
  26. नामु निरंजन अलखु है किउ लखिआ जाई ॥अंग 1242
  27. बाहरि भसम लेपन करे अंतरि गुबारी ॥अंग 1243
  28. जिन कै हिरदै मैलु कपटु है बाहरु धोवाइआ ॥अंग 1243
  29. निंमु बिरखु बहु संचीऐ अंम्रित रसु पाइआ ॥अंग 1244
  30. जिन अंदरि निंदा दुसटु है नक वढे नक वढाइआ ॥अंग 1244
  31. सभु कोई है खसम का खसमहु सभु को होइ ॥अंग 1244
  32. सभना दाता आपि है आपे मेलणहारु ॥अंग 1244
  33. गुरमुखि हिरदै सांति है नाउ उगवि आइआ ॥अंग 1244
  34. सतसंगति नामु निधानु है जिथहु हरि पाइआ ॥अंग 1244
  35. सतिगुरु अंम्रित बिरखु है अंम्रित रसि फलिआ ॥अंग 1245
  36. भूपति राजे रंग राइ संचहि बिखु माइआ ॥अंग 1245
  37. गुरमुखि सभ पवितु है धनु संपै माइआ ॥अंग 1246
  38. सतिगुरु सेवनि से वडभागी ॥अंग 1246
  39. गणतै सेव न होवई कीता थाइ न पाइ ॥अंग 1246
  40. खान मलूक कहाइदे को रहणु न पाई ॥अंग 1246
  41. गड़ि॑ काइआ सीगार बहु भांति बणाई ॥अंग 1247
  42. नामु सलाहनि नामु मंनि असथिरु जगि सोई ॥अंग 1247
  43. नामु सलाहनि भाउ करि निज महली वासा ॥अंग 1247
  44. सभु को लेखे विचि है मनमुखु अहंकारी ॥अंग 1247
  45. लेखा पड़ीऐ हरि नामु फिरि लेखु न होई ॥अंग 1248
  46. मंगत जनु जाचै दानु हरि देहु सुभाइ ॥अंग 1248
  47. आस करे सभु लोकु बहु जीवणु जाणिआ ॥अंग 1248
  48. आसा विचि अति दुखु घणा मनमुखि चितु लाइआ ॥अंग 1249
  49. इसतरी पुरखै बहु प्रीति मिलि मोहु वधाइआ ॥अंग 1249
  50. इसत्री पुरखै अति नेहु बहि मंदु पकाइआ ॥अंग 1250
  51. नानक जिसु बिनु घड़ी न जीवणा विसरे सरै न बिंद ॥अंग 1250
  52. सावणु आइआ झिमझिमा हरि गुरमुखि नामु धिआइ ॥अंग 1250
  53. गुर पूरे की दाति नित देवै चड़ै सवाईआ ॥अंग 1250
  54. वडा आपि अगंमु है वडी वडिआई ॥अंग 1251
महला 5 (147)
  1. सतिगुर मूरति कउ बलि जाउ ॥अंग 1202
  2. करत बुराई मानुख ते छपाई साखी भूत पवान ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1202
  3. अब मोरो नाचनो रहो ॥अंग 1203
  4. अब पूछे किआ कहा ॥अंग 1203
  5. माई धीरि रही प्रिअ बहुतु बिरागिओ ॥अंग 1203
  6. माई सति सति सति हरि सति सति सति साधा ॥अंग 1204
  7. मेरै मनि बासिबो गुर गोबिंद ॥अंग 1204
  8. अब मोहि राम भरोसउ पाए ॥अंग 1204
  9. ओुइ सुख का सिउ बरनि सुनावत ॥अंग 1205
  10. बिखई दिनु रैनि इव ही गुदारै ॥अंग 1205
  11. अवरि सभि भूले भ्रमत न जानिआ ॥अंग 1205
  12. अनदिनु राम के गुण कहीऐ ॥अंग 1206
  13. बलिहारी गुरदेव चरन ॥अंग 1206
  14. गाइओ री मै गुण निधि मंगल गाइओ ॥अंग 1206
  15. कैसे कहउ मोहि जीअ बेदनाई ॥अंग 1206
  16. रे मूड़॑े तू किउ सिमरत अब नाही ॥अंग 1207
  17. किउ जीवनु प्रीतम बिनु माई ॥अंग 1207
  18. उआ अउसर कै हउ बलि जाई ॥अंग 1207
  19. मनोरथ पूरे सतिगुर आपि ॥अंग 1207
  20. मन कहा लुभाईऐ आन कउ ॥अंग 1208
  21. मन सदा मंगल गोबिंद गाइ ॥अंग 1208
  22. हरि जन सगल उधारे संग के ॥अंग 1208
  23. हरि जन राम राम राम धिआंए ॥अंग 1208
  24. मोहन घरि आवहु करउ जोदरीआ ॥अंग 1209
  25. अब किआ सोचउ सोच बिसारी ॥अंग 1209
  26. अब मोहि सरब उपाव बिरकाते ॥अंग 1209
  27. अब मोहि लबधिओ है हरि टेका ॥अंग 1209
  28. मेरा मनु एकै ही प्रिअ मांगै ॥अंग 1209
  29. अब मोरो ठाकुर सिउ मनु मानां ॥अंग 1210
  30. मेरै मनि चीति आए प्रिअ रंगा ॥अंग 1210
  31. बचन नाद मेरे स्रवनहु पूरे देहा प्रिअ अंकि समानी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1210
  32. अब मेरो पंचा ते संगु तूटा ॥अंग 1210
  33. अब मेरो ठाकुर सिउ मनु लीना ॥अंग 1210
  34. मोहन सभि जीअ तेरे तू तारहि ॥अंग 1211
  35. अब मोहि धनु पाइओ हरि नामा ॥अंग 1211
  36. मेरै मनि मिसट लगे प्रिअ बोला ॥अंग 1211
  37. रसना राम कहत गुण सोहं ॥अंग 1211
  38. नैनहु देखिओ चलतु तमासा ॥अंग 1211
  39. चरनह गोबिंद मारगु सुहावा ॥अंग 1212
  40. धिआइओ अंति बार नामु सखा ॥अंग 1212
  41. गुर मिलि ऐसे प्रभू धिआइआ ॥अंग 1212
  42. मेरै मनि सबदु लगो गुर मीठा ॥अंग 1212
  43. हरि हरि नामु दीओ गुरि साथे ॥अंग 1212
  44. रे मूड़॑े आन काहे कत जाई ॥अंग 1213
  45. ओअं प्रिअ प्रीति चीति पहिलरीआ ॥अंग 1213
  46. मन ओइ दिनस धंनि परवानां ॥अंग 1213
  47. अब मोरो सहसा दूखु गइआ ॥अंग 1213
  48. प्रभु मेरो इत उत सदा सहाई ॥अंग 1213
  49. अपना मीतु सुआमी गाईऐ ॥अंग 1214
  50. द्रिसटि न लिआवउ अवर काहू कउ माणि महति प्रभ तेरै ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1214
  51. प्रभ सिमरत दूख बिनासी ॥अंग 1214
  52. मेरो मनु जत कत तुझहि सम॑ारै ॥अंग 1214
  53. मन ते भै भउ दूरि पराइओ ॥अंग 1214
  54. अंम्रित नामु मनहि आधारो ॥अंग 1215
  55. बिनु प्रभ रहनु न जाइ घरी ॥अंग 1215
  56. रसना जपती तूही तूही ॥अंग 1215
  57. जाहू काहू अपुनो ही चिति आवै ॥अंग 1215
  58. झूठो माइआ को मद मानु ॥अंग 1215
  59. अपुनी इतनी कछू न सारी ॥अंग 1215
  60. मोहनी मोहत रहै न होरी ॥अंग 1216
  61. कहा करहि रे खाटि खाटुली ॥अंग 1216
  62. कोटि जोध उआ की बात न पुछीऐ तां दरगह भी मानिओ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1216
  63. हरि हरि दीओ सेवक कउ नाम ॥अंग 1216
  64. तू मेरे मीत सखा हरि प्रान ॥अंग 1216
  65. करहु गति दइआल संतहु मोरी ॥अंग 1217
  66. ठाकुर बिनती करन जनु आइओ ॥अंग 1217
  67. जा की राम नाम लिव लागी ॥अंग 1217
  68. अब जन ऊपरि को न पुकारै ॥अंग 1217
  69. हरि जन छोडिआ सगला आपु ॥अंग 1217
  70. मेरै गुरि मोरो सहसा उतारिआ ॥अंग 1218
  71. सिमरत नामु प्रान गति पावै ॥अंग 1218
  72. अपुने गुर पूरे बलिहारै ॥अंग 1218
  73. बिनु हरि है को कहा बतावहु ॥अंग 1218
  74. ठाकुर तुम॑ सरणाई आइआ ॥अंग 1218
  75. हरि के नाम की गति ठांढी ॥अंग 1219
  76. जिहवे अंम्रित गुण हरि गाउ ॥अंग 1219
  77. होती नही कवन कछु करणी ॥अंग 1219
  78. फीके हरि के नाम बिनु साद ॥अंग 1219
  79. नामु विसारि लगहि अन लालचि बिरथा जनमु पराणी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1219
  80. धनवंत नाम के वणजारे ॥अंग 1219
  81. प्रभ जी मोहि कवनु अनाथु बिचारा ॥अंग 1220
  82. आवै राम सरणि वडभागी ॥अंग 1220
  83. जा ते साधू सरणि गही ॥अंग 1220
  84. रसना राम को जसु गाउ ॥अंग 1220
  85. बैकुंठ गोबिंद चरन नित धिआउ ॥अंग 1220
  86. साचे सतिगुरू दातारा ॥अंग 1221
  87. गुर के चरन बसे मन मेरै ॥अंग 1221
  88. जीवनु तउ गनीऐ हरि पेखा ॥अंग 1221
  89. सिमरन राम को इकु नाम ॥अंग 1221
  90. धूरतु सोई जि धुर कउ लागै ॥अंग 1221
  91. हरि हरि संत जना की जीवनि ॥अंग 1222
  92. हरि के नामहीन बेताल ॥अंग 1222
  93. मनि तनि राम को बिउहारु ॥अंग 1222
  94. हरि के नामहीन मति थोरी ॥अंग 1222
  95. चितवउ वा अउसर मन माहि ॥अंग 1222
  96. मेरा प्रभु संगे अंतरजामी ॥अंग 1222
  97. जा कै राम को बलु होइ ॥अंग 1223
  98. जीवतु राम के गुण गाइ ॥अंग 1223
  99. मन रे नाम को सुख सार ॥अंग 1223
  100. बिराजित राम को परताप ॥अंग 1223
  101. आतुरु नाम बिनु संसार ॥अंग 1223
  102. तिनि प्रभि साचै आपि भुलाइआ बिखै ठगउरी पीउ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1224
  103. रमण कउ राम के गुण बाद ॥अंग 1224
  104. कीन॑े पाप के बहु कोट ॥अंग 1224
  105. अंधे खावहि बिसू के गटाक ॥अंग 1224
  106. टूटी निंदक की अध बीच ॥अंग 1224
  107. त्रिसना चलत बहु परकारि ॥अंग 1224
  108. रे पापी तै कवन की मति लीन ॥अंग 1225
  109. माई री चरनह ओट गही ॥अंग 1225
  110. माई री मनु मेरो मतवारो ॥अंग 1225
  111. माई री आन सिमरि मरि जांहि ॥अंग 1225
  112. हरि काटी कुटिलता कुठारि ॥अंग 1225
  113. पोथी परमेसर का थानु ॥अंग 1226
  114. वूठा सरब थाई मेहु ॥अंग 1226
  115. साजन मीत सहाई तुम ही तू मेरो परवार ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1226
  116. निबही नाम की सचु खेप ॥अंग 1226
  117. माई री पेखि रही बिसमाद ॥अंग 1226
  118. माई री माती चरण समूह ॥अंग 1227
  119. बिनसे काच के बिउहार ॥अंग 1227
  120. ता ते करण पलाह करे ॥अंग 1227
  121. हरि के नाम के जन कांखी ॥अंग 1227
  122. माखी राम की तू माखी ॥अंग 1227
  123. माई री काटी जम की फास ॥अंग 1227
  124. माई री अरिओ प्रेम की खोरि ॥अंग 1228
  125. नीकी राम की धुनि सोइ ॥अंग 1228
  126. हरि के नाम की मति सार ॥अंग 1228
  127. मानी तूं राम कै दरि मानी ॥अंग 1228
  128. तुअ चरन आसरो ईस ॥अंग 1228
  129. हरि भजि आन करम बिकार ॥अंग 1229
  130. सुभ बचन बोलि गुन अमोल ॥अंग 1229
  131. कंचना बहु दत करा ॥अंग 1229
  132. राम राम राम जापि रमत राम सहाई ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1229
  133. हरि हरे हरि मुखहु बोलि हरि हरे मनि धारे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1230
  134. नाम भगति मागु संत तिआगि सगल कामी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1230
  135. गुन लाल गावउ गुर देखे ॥अंग 1230
  136. मनि बिरागैगी ॥ खोजती दरसार ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1230
  137. ऐसी होइ परी ॥अंग 1230
  138. लाल लाल मोहन गोपाल तू ॥अंग 1231
  139. करत केल बिखै मेल चंद्र सूर मोहे ॥अंग 1231
  140. गुसाइंी परतापु तुहारो डीठा ॥अंग 1235
  141. अगम अगाधि सुनहु जन कथा ॥अंग 1235
  142. सभ देखीऐ अनभै का दाता ॥अंग 1236
  143. धरति सुहावड़ी आकासु सुहंदा जपंदिआ हरि नाउ ॥अंग 1247
  144. सचु खाणा सचु पैनणा सचु नामु अधारु ॥अंग 1251
  145. सभे जीअ समालि अपणी मिहर करु ॥अंग 1251
  146. वुठे मेघ सुहावणे हुकमु कीता करतारि ॥अंग 1251
  147. हरि के संग बसे हरि लोक ॥अंग 1253
महला 9 (4)
  1. हरि बिनु तेरो को न सहाई ॥अंग 1231
  2. कहा मन बिखिआ सिउ लपटाही ॥अंग 1231
  3. कहा नर अपनो जनमु गवावै ॥अंग 1231
  4. मन करि कबहू न हरि गुन गाइओ ॥अंग 1231
भगत कबीर जी (3)
  1. कहा नर गरबसि थोरी बात ॥अंग 1251
  2. राजास्रम मिति नही जानी तेरी ॥अंग 1252
  3. हरि बिनु कउनु सहाई मन का ॥अंग 1253
भगत नामदेव जी (3)
  1. काएं रे मन बिखिआ बन जाइ ॥अंग 1252
  2. बदहु की न होड माधउ मो सिउ ॥अंग 1252
  3. दास अनिंन मेरो निज रूप ॥अंग 1252
अन्य भगत (1)
  1. तै नर किआ पुरानु सुनि कीना ॥अंग 1253

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