राग बिहागड़ा
रात की धुन, ध्यान और एकांत की।
बिहागड़ा रात्रि के मध्य का राग है। आसपास के बिहाग राग का यह एक छोटा भाई-जैसा है, जो हिंदुस्तानी शास्त्रीय में अधिक प्रसिद्ध है।
स्वर में एक धीरज है, गहरापन है। एकांत में सुनने वाला सुर। पंजाब की कीर्तन-परम्परा में बिहागड़ा की रचनाएँ अक्सर रात की संगति में गायी जाती हैं।
“सुनहु बिनंती ठाकुर मेरे जीअ जंत आपके धारे ।” बिहागड़ा M5