लुल्ला परिवारLulla Family
English
सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग टोडी

राग · M4-M5

राग टोडी

सुबह की देर का राग, मीठा और हलका करुण।

टोडी सुबह की देर का राग है। हिंदुस्तानी शास्त्रीय परम्परा का एक प्राचीन राग, मीठा मगर एक हलकी टीस का स्वर लिए हुए।

शास्त्रीय परम्परा में "तोड़ी" से कई उप-राग निकले हैं, मियाँ-की-तोड़ी, गुर्जरी-तोड़ी, मधुवंती-तोड़ी इत्यादि। ग्रंथ में जो स्वरूप मिलता है, वो प्राचीनतर है।

"संतन अवर न काहू जानी ॥" टोडी M5
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 4 (1)
  1. हरि बिनु रहि न सकै मनु मेरा ॥अंग 711
महला 5 (30)
  1. संतन अवर न काहू जानी ॥अंग 711
  2. हरि बिसरत सदा खुआरी ॥अंग 711
  3. धाइओ रे मन दह दिस धाइओ ॥अंग 712
  4. मानुखु बिनु बूझे बिरथा आइआ ॥अंग 712
  5. क्रिपा निधि बसहु रिदै हरि नीत ॥अंग 712
  6. मागउ दानु ठाकुर नाम ॥अंग 713
  7. प्रभ जी को नामु मनहि साधारै ॥अंग 713
  8. नीके गुण गाउ मिटही रोग ॥अंग 713
  9. सतिगुर आइओ सरणि तुहारी ॥अंग 713
  10. रसना गुण गोपाल निधि गाइण ॥अंग 713
  11. निंदकु गुर किरपा ते हाटिओ ॥अंग 714
  12. किरपन तन मन किलविख भरे ॥अंग 714
  13. हरि के चरन कमल मनि धिआउ ॥अंग 714
  14. हरि हरि नामु सदा सद जापि ॥अंग 714
  15. स्वामी सरनि परिओ दरबारे ॥अंग 714
  16. हां हां लपटिओ रे मूड़॑े कछू न थोरी ॥अंग 715
  17. हमारै एकै हरी हरी ॥अंग 715
  18. रूड़ो मनु हरि रंगो लोड़ै ॥अंग 715
  19. गरबि गहिलड़ो मूड़ड़ो हीओ रे ॥अंग 715
  20. ऐसो गुनु मेरो प्रभ जी कीन ॥अंग 716
  21. माई मेरे मन की प्रीति ॥अंग 716
  22. प्रभ जी मिलु मेरे प्रान ॥अंग 716
  23. प्रभ तेरे पग की धूरि ॥अंग 716
  24. माई मेरे मन की पिआस ॥अंग 716
  25. हरि हरि पतित पावन ॥अंग 717
  26. माई माइआ छलु ॥अंग 717
  27. माई चरन गुर मीठे ॥अंग 717
  28. साधसंगि हरि हरि नामु चितारा ॥अंग 717
  29. माई मेरे मन को सुखु ॥अंग 717
  30. हरि हरि चरन रिदै उर धारे ॥अंग 718
महला 9 (1)
  1. कहउ कहा अपनी अधमाई ॥अंग 718
भगत नामदेव जी (2)
  1. कोई बोलै निरवा कोई बोलै दूरि ॥अंग 718
  2. तीनि छंदे खेलु आछै ॥1॥ रहाउ ॥अंग 718

संबंधित पृष्ठ