राग टोडी
सुबह की देर का राग, मीठा और हलका करुण।
टोडी सुबह की देर का राग है। हिंदुस्तानी शास्त्रीय परम्परा का एक प्राचीन राग, मीठा मगर एक हलकी टीस का स्वर लिए हुए।
शास्त्रीय परम्परा में "तोड़ी" से कई उप-राग निकले हैं, मियाँ-की-तोड़ी, गुर्जरी-तोड़ी, मधुवंती-तोड़ी इत्यादि। ग्रंथ में जो स्वरूप मिलता है, वो प्राचीनतर है।
"संतन अवर न काहू जानी ॥" टोडी M5
इस राग के शबद
हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।
महला 4 (1)
महला 5 (30)
- संतन अवर न काहू जानी ॥अंग 711
- हरि बिसरत सदा खुआरी ॥अंग 711
- धाइओ रे मन दह दिस धाइओ ॥अंग 712
- मानुखु बिनु बूझे बिरथा आइआ ॥अंग 712
- क्रिपा निधि बसहु रिदै हरि नीत ॥अंग 712
- मागउ दानु ठाकुर नाम ॥अंग 713
- प्रभ जी को नामु मनहि साधारै ॥अंग 713
- नीके गुण गाउ मिटही रोग ॥अंग 713
- सतिगुर आइओ सरणि तुहारी ॥अंग 713
- रसना गुण गोपाल निधि गाइण ॥अंग 713
- निंदकु गुर किरपा ते हाटिओ ॥अंग 714
- किरपन तन मन किलविख भरे ॥अंग 714
- हरि के चरन कमल मनि धिआउ ॥अंग 714
- हरि हरि नामु सदा सद जापि ॥अंग 714
- स्वामी सरनि परिओ दरबारे ॥अंग 714
- हां हां लपटिओ रे मूड़॑े कछू न थोरी ॥अंग 715
- हमारै एकै हरी हरी ॥अंग 715
- रूड़ो मनु हरि रंगो लोड़ै ॥अंग 715
- गरबि गहिलड़ो मूड़ड़ो हीओ रे ॥अंग 715
- ऐसो गुनु मेरो प्रभ जी कीन ॥अंग 716
- माई मेरे मन की प्रीति ॥अंग 716
- प्रभ जी मिलु मेरे प्रान ॥अंग 716
- प्रभ तेरे पग की धूरि ॥अंग 716
- माई मेरे मन की पिआस ॥अंग 716
- हरि हरि पतित पावन ॥अंग 717
- माई माइआ छलु ॥अंग 717
- माई चरन गुर मीठे ॥अंग 717
- साधसंगि हरि हरि नामु चितारा ॥अंग 717
- माई मेरे मन को सुखु ॥अंग 717
- हरि हरि चरन रिदै उर धारे ॥अंग 718
महला 9 (1)
- कहउ कहा अपनी अधमाई ॥अंग 718