राग गूजरी
सुबह की देर की धुन, नर्म विनती।
गुजरी राग सुबह की देर का है। उसी समय का जब काम शुरू हो चुका हो, मगर सुबह की ताज़गी अभी छूटी नहीं हो। एक तरह की नर्म विनती के स्वर में बैठा है।
नाम का स्रोत संदिग्ध है, गुजरात से इसका कोई सीधा सम्बन्ध शायद नहीं। हिंदुस्तानी शास्त्रीय परम्परा में “गुर्जरी टोडी” इसी कुल से जुड़ा हो सकता है, मगर निश्चय कठिन है।
“जो माँगे ठाकुर अपने ते सोई सोई देवै ।” गूजरी M5