जीवन का अर्थ, और चार राही
“ज़रा बैठिए, साहब। एक सवाल है जो देर-सबेर हर दरवाज़े पर दस्तक देता है, इस सब का अर्थ क्या है।”
निबंध पढ़िए →विचार
पढ़ते-पढ़ते कुछ सवाल साथ रह जाते हैं। इन्हीं पर थोड़ा ठहरिए।
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“ज़रा बैठिए, साहब। एक सवाल है जो देर-सबेर हर दरवाज़े पर दस्तक देता है, इस सब का अर्थ क्या है।”
निबंध पढ़िए →“यह उलझन झुँझलाने की जगह नहीं, एक दरवाज़ा है, जो समय के चार अलग मतलबों में खुलता है।”
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