राग मलार

मानसून का राग, बादलों और बूँदों का।
मल्हार बारिश का राग है। मियाँ-तानसेन के बारे में कथा है कि वो मल्हार गाते-गाते बादल बुला लेते थे, और गोदावरी का पानी ऊँचा कर देते थे। चाहे कथा सच हो या न हो, राग का सुर सच में मेघ-गर्जन और प्रतीक्षा की धुन है।
ग्रंथ में मल्हार की रचनाएँ अंग बारह-सौ-चौवन के क़रीब से शुरू होती हैं। हिंदुस्तानी शास्त्रीय में कई मल्हार-स्वरूप हैं, मियाँ-मल्हार, सूर-मल्हार, मेघ-मल्हार इत्यादि।
“बरसै मेघु सखी घरि पाहुन आए ।” मलार M1