लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग मलार

राग · M1-M5

राग मलार

दलदली जलभूमि पर घिरे बरसाती बादल और उड़ता हुआ एक बगुला: राग मलार
मानसून का राग, बादलों और बूँदों का।

मल्हार बारिश का राग है। मियाँ-तानसेन के बारे में कथा है कि वो मल्हार गाते-गाते बादल बुला लेते थे, और गोदावरी का पानी ऊँचा कर देते थे। चाहे कथा सच हो या न हो, राग का सुर सच में मेघ-गर्जन और प्रतीक्षा की धुन है।

ग्रंथ में मल्हार की रचनाएँ अंग बारह-सौ-चौवन के क़रीब से शुरू होती हैं। हिंदुस्तानी शास्त्रीय में कई मल्हार-स्वरूप हैं, मियाँ-मल्हार, सूर-मल्हार, मेघ-मल्हार इत्यादि।

"बरसै मेघु सखी घरि पाहुन आए ॥" मलार M5
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 1 (65)
  1. खाणा पीणा हसणा सउणा विसरि गइआ है मरणा ॥अंग 1254
  2. करउ बिनउ गुर अपने प्रीतम हरि वरु आणि मिलावै ॥अंग 1254
  3. साची सुरति नामि नही त्रिपते हउमै करत गवाइआ ॥अंग 1254
  4. जिनि धन पिर का सादु न जानिआ सा बिलख बदन कुमलानी ॥अंग 1255
  5. पर दारा पर धनु पर लोभा हउमै बिखै बिकार ॥अंग 1255
  6. पवणै पाणी जाणै जाति ॥अंग 1256
  7. दुखु वेछोड़ा इकु दुखु भूख ॥अंग 1256
  8. दुख महुरा मारण हरि नामु ॥अंग 1256
  9. बागे कापड़ बोलै बैण ॥अंग 1257
  10. चकवी नैन नंीद नहि चाहै बिनु पिर नंीद न पाई ॥अंग 1273
  11. जागतु जागि रहै गुर सेवा बिनु हरि मै को नाही ॥अंग 1273
  12. चात्रिक मीन जल ही ते सुखु पावहि सारिंग सबदि सुहाई ॥1॥अंग 1274
  13. अखली ऊंडी जलु भर नालि ॥अंग 1274
  14. मरण मुकति गति सार न जानै ॥अंग 1275
  15. हेको पाधरु हेकु दरु गुर पउड़ी निज थानु ॥अंग 1279
  16. आपीन॑ै आपु साजि आपु पछाणिआ ॥अंग 1279
  17. नानक सावणि जे वसै चहु ओमाहा होइ ॥अंग 1279
  18. नानक सावणि जे वसै चहु वेछोड़ा होइ ॥अंग 1279
  19. तू सचा सचिआरु जिनि सचु वरताइआ ॥अंग 1279
  20. वैदु बुलाइआ वैदगी पकड़ि ढंढोले बांह ॥अंग 1279
  21. ब्रहमा बिसनु महेसु देव उपाइआ ॥अंग 1279
  22. आपे छिंझ पवाइ मलाखाड़ा रचिआ ॥अंग 1280
  23. दोवै तरफा उपाइ इकु वरतिआ ॥अंग 1280
  24. सो हरि सदा सरेवीऐ जिसु करत न लागै वार ॥अंग 1280
  25. दूजै दूजी तरफ है कूड़ि मिलै न मिलिआ जाइ ॥अंग 1281
  26. अतुलु किउ तोलीऐ विणु तोले पाइआ न जाइ ॥अंग 1282
  27. नाथ जती सिध पीर किनै अंतु न पाइआ ॥अंग 1282
  28. आपि कराए करे आपि हउ कै सिउ करी पुकार ॥अंग 1282
  29. सचा वेपरवाहु इको तू धणी ॥अंग 1283
  30. खंड पताल असंख मै गणत न होई ॥अंग 1283
  31. आपे जगतु उपाइ कै गुण अउगण करे बीचारु ॥अंग 1284
  32. सचा सतिगुरु सेवि सचु सम॑ालिआ ॥अंग 1284
  33. इकि वण खंडि बैसहि जाइ सदु न देवही ॥अंग 1284
  34. इकि जैनी उझड़ पाइ धुरहु खुआइआ ॥अंग 1285
  35. सचा अलख अभेउ हठि न पतीजई ॥अंग 1285
  36. पूरा सतिगुरु सेवि पूरा पाइआ ॥अंग 1286
  37. कुलहां देंदे बावले लैंदे वडे निलज ॥अंग 1286
  38. सउ मणु हसती घिउ गुड़ु खावै पंजि सै दाणा खाइ ॥अंग 1286
  39. अगम अगोचरु तू धणी सचा अलख अपारु ॥अंग 1286
  40. राती कालु घटै दिनि कालु ॥अंग 1287
  41. मुआ पिआरु प्रीति मुई मुआ वैरु वादी ॥अंग 1287
  42. अंम्रित नामु सदा सुखदाता अंते होइ सखाई ॥अंग 1287
  43. सरमु धरमु दुइ नानका जे धनु पलै पाइ ॥अंग 1287
  44. दुखी दुनी सहेड़ीऐ जाइ त लगहि दुख ॥अंग 1287
  45. अंधी कंमी अंधु मनु मनि अंधै तनु अंधु ॥अंग 1287
  46. लख मण सुइना लख मण रुपा लख साहा सिरि साह ॥अंग 1287
  47. बधे छुटहि सचि सचु पछाणीऐ ॥अंग 1287
  48. हरणां बाजां तै सिकदारां एन॑ा पड़ि॑आ नाउ ॥अंग 1288
  49. आपि उपाए मेदनी आपे करदा सार ॥अंग 1288
  50. रूपै कामै दोसती भुखै सादै गंढु ॥अंग 1288
  51. राजु मालु रूपु जाति जोबनु पंजे ठग ॥अंग 1288
  52. पड़िआ लेखेदारु लेखा मंगीऐ ॥अंग 1288
  53. धरती पाताली आकासी इकि दरि रहनि वजीर ॥अंग 1289
  54. अजरु जरै त नउ कुल बंधु ॥अंग 1289
  55. पड़॑ीऐ नामु सालाह होरि बुधंी मिथिआ ॥अंग 1289
  56. पहिलां मासहु निंमिआ मासै अंदरि वासु ॥अंग 1289
  57. मासु मासु करि मूरखु झगड़े गिआनु धिआनु नही जाणै ॥अंग 1289
  58. हउ किआ आखा इक जीभ तेरा अंतु न किन ही पाइआ ॥अंग 1290
  59. नानक माइआ करम बिरखु फल अंम्रित फल विसु ॥अंग 1290
  60. सिरि सिरि होइ निबेड़ु हुकमि चलाइआ ॥अंग 1290
  61. घर महि घरु देखाइ देइ सो सतिगुरु पुरखु सुजाणु ॥अंग 1291
  62. चिलिमिलि बिसीआर दुनीआ फानी ॥अंग 1291
  63. धंनु सु कागदु कलम धंनु धनु भांडा धनु मसु ॥अंग 1291
  64. आपे पटी कलम आपि उपरि लेखु भि तूं ॥अंग 1291
  65. तूं आपे आपि वरतदा आपि बणत बणाई ॥अंग 1291
महला 2 (5)
  1. वैदा वैदु सुवैदु तू पहिलां रोगु पछाणु ॥अंग 1279
  2. सावणु आइआ हे सखी कंतै चिति करेहु ॥अंग 1280
  3. सावणु आइआ हे सखी जलहरु बरसनहारु ॥अंग 1280
  4. नाउ फकीरै पातिसाहु मूरख पंडितु नाउ ॥अंग 1288
  5. नानक दुनीआ कीआं वडिआईआं अगी सेती जालि ॥अंग 1290
महला 3 (42)
  1. निरंकारु आकारु है आपे आपे भरमि भुलाए ॥अंग 1257
  2. जिनी हुकमु पछाणिआ से मेले हउमै सबदि जलाइ ॥अंग 1258
  3. गुरमुखि कोई विरला बूझै जिस नो नदरि करेइ ॥अंग 1258
  4. गुरु सालाही सदा सुखदाता प्रभु नाराइणु सोई ॥अंग 1258
  5. गण गंधरब नामे सभि उधरे गुर का सबदु वीचारि ॥अंग 1259
  6. सतिगुर ते पावै घरु दरु महलु सु थानु ॥अंग 1259
  7. एकसु बिनु मै अवरु न जाणा सतिगुरि दीआ बुझाई ॥1॥अंग 1260
  8. मेरा प्रभु साचा दूख निवारणु सबदे पाइआ जाई ॥अंग 1260
  9. हउमै बिखु मनु मोहिआ लदिआ अजगर भारी ॥अंग 1260
  10. इहु मनु गिरही कि इहु मनु उदासी ॥अंग 1261
  11. भ्रमि भ्रमि जोनि मनमुख भरमाई ॥अंग 1261
  12. जीवत मुकत गुरमती लागे ॥अंग 1262
  13. रसना नामु सभु कोई कहै ॥अंग 1262
  14. करमु होवै ता सतिगुरु पाईऐ विणु करमै पाइआ न जाइ ॥अंग 1276
  15. बिनु नावै जम डंडु सहै मरि जनमै वारो वार ॥अंग 1276
  16. हरि हरि क्रिपा करे गुर की कारै लाए ॥अंग 1277
  17. ऊंनवि ऊंनवि आइआ अवरि करेंदा वंन ॥अंग 1280
  18. ऊंनवि ऊंनवि आइआ वरसै नीरु निपंगु ॥अंग 1280
  19. ऊंनवि ऊंनवि आइआ वरसै लाइ झड़ी ॥अंग 1280
  20. किआ उठि उठि देखहु बपुड़ें इसु मेघै हथि किछु नाहि ॥अंग 1280
  21. बाबीहा जिस नो तू पूकारदा तिस नो लोचै सभु कोइ ॥अंग 1281
  22. कलमलि होई मेदनी अरदासि करे लिव लाइ ॥अंग 1281
  23. नानक सो सालाहीऐ जिसु वसि सभु किछु होइ ॥अंग 1281
  24. अंम्रितु सदा वरसदा बूझनि बूझणहार ॥अंग 1281
  25. बाबीहा ना बिललाइ ना तरसाइ एहु मनु खसम का हुकमु मंनि ॥अंग 1282
  26. बाबीहा जल महि तेरा वासु है जल ही माहि फिराहि ॥अंग 1282
  27. इहु जलु सभ तै वरसदा वरसै भाइ सुभाइ ॥अंग 1282
  28. भिंनी रैणि चमकिआ वुठा छहबर लाइ ॥अंग 1282
  29. बाबीहा एहु जगतु है मत को भरमि भुलाइ ॥अंग 1283
  30. वुठै जीआ जुगति होइ धरणी नो सीगारु होइ ॥अंग 1283
  31. बाबीहा खसमै का महलु न जाणही महलु देखि अरदासि पाइ ॥अंग 1283
  32. बाबीहा भिंनी रैणि बोलिआ सहजे सचि सुभाइ ॥अंग 1283
  33. बाबीहा गुणवंती महलु पाइआ अउगणवंती दूरि ॥अंग 1283
  34. बाबीहा बेनती करे करि किरपा देहु जीअ दान ॥अंग 1284
  35. बाबीहै हुकमु पछाणिआ गुर कै सहजि सुभाइ ॥अंग 1284
  36. चात्रिक तू न जाणही किआ तुधु विचि तिखा है कितु पीतै तिख जाइ ॥अंग 1284
  37. बाबीहा अंम्रित वेलै बोलिआ तां दरि सुणी पुकार ॥अंग 1285
  38. बाबीहा इव तेरी तिखा न उतरै जे सउ करहि पुकार ॥अंग 1285
  39. सावणि सरसी कामणी गुर सबदी वीचारि ॥अंग 1285
  40. सावणि दझै गुण बाहरी जिसु दूजै भाइ पिआरु ॥अंग 1285
  41. गुर सबदी एकु पछाणिआ एको सचा सोइ ॥अंग 1285
  42. इंदु वरसै करि दइआ लोकां मनि उपजै चाउ ॥अंग 1285
महला 4 (9)
  1. अनदिनु हरि हरि धिआइओ हिरदै मति गुरमति दूख विसारी ॥अंग 1262
  2. गंगा जमुना गोदावरी सरसुती ते करहि उदमु धूरि साधू की ताई ॥अंग 1263
  3. तिसु जन कउ हरि मीठ लगाना जिसु हरि हरि क्रिपा करै ॥अंग 1263
  4. जितने जीअ जंत प्रभि कीने तितने सिरि कार लिखावै ॥अंग 1263
  5. जिन॑ कै हीअरै बसिओ मेरा सतिगुरु ते संत भले भल भांति ॥अंग 1264
  6. अगमु अगोचरु नामु हरि ऊतमु हरि किरपा ते जपि लइआ ॥अंग 1264
  7. गुर परसादी अंम्रितु नही पीआ त्रिसना भूख न जाई ॥अंग 1265
  8. हरि जन बोलत स्रीराम नामा मिलि साधसंगति हरि तोर ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1265
  9. राम राम बोलि बोलि खोजते बडभागी ॥अंग 1265
महला 5 (35)
  1. किआ तू सोचहि किआ तू चितवहि किआ तूं करहि उपाए ॥अंग 1266
  2. खीर अधारि बारिकु जब होता बिनु खीरै रहनु न जाई ॥अंग 1266
  3. सगल बिधी जुरि आहरु करिआ तजिओ सगल अंदेसा ॥अंग 1266
  4. राज ते कीट कीट ते सुरपति करि दोख जठर कउ भरते ॥अंग 1267
  5. प्रभ मेरे ओइ बैरागी तिआगी ॥अंग 1267
  6. माई मोहि प्रीतमु देहु मिलाई ॥अंग 1267
  7. बरसु मेघ जी तिलु बिलमु न लाउ ॥अंग 1267
  8. प्रीतम साचा नामु धिआइ ॥अंग 1268
  9. प्रभ मेरे प्रीतम प्रान पिआरे ॥अंग 1268
  10. अब अपने प्रीतम सिउ बनि आई ॥अंग 1268
  11. घनिहर बरसि सगल जगु छाइआ ॥अंग 1268
  12. बिछुरत किउ जीवे ओइ जीवन ॥अंग 1268
  13. हरि कै भजनि कउन कउन न तारे ॥अंग 1269
  14. आजु मै बैसिओ हरि हाट ॥अंग 1269
  15. बहु बिधि माइआ मोह हिरानो ॥अंग 1269
  16. दुसट मुए बिखु खाई री माई ॥अंग 1269
  17. मन मेरे हरि के चरन रवीजै ॥अंग 1269
  18. प्रभ को भगति बछलु बिरदाइओ ॥अंग 1270
  19. गुरमुखि दीसै ब्रहम पसारु ॥अंग 1270
  20. गुर के चरन हिरदै वसाए ॥अंग 1270
  21. परमेसरु होआ दइआलु ॥अंग 1271
  22. गुर सरणाई सगल निधान ॥अंग 1271
  23. गुर मनारि प्रिअ दइआर सिउ रंगु कीआ ॥अंग 1271
  24. मनु घनै भ्रमै बनै ॥अंग 1272
  25. प्रिअ की सोभ सुहावनी नीकी ॥अंग 1272
  26. गुर प्रीति पिआरे चरन कमल रिद अंतरि धारे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1272
  27. बरसु सरसु आगिआ ॥अंग 1272
  28. गुन गोुपाल गाउ नीत ॥अंग 1272
  29. घनु गरजत गोबिंद रूप ॥अंग 1272
  30. हे गोबिंद हे गोपाल हे दइआल लाल ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1273
  31. प्रीतम प्रेम भगति के दाते ॥अंग 1278
  32. गुरि मिलिऐ मनु रहसीऐ जिउ वुठै धरणि सीगारु ॥अंग 1278
  33. राति न विहावी साकतां जिन॑ा विसरै नाउ ॥अंग 1284
  34. रतन जवेहर माणका हभे मणी मथंनि ॥अंग 1284
  35. सभो वरतै चलतु चलतु वखाणिआ ॥अंग 1291
भगत नामदेव जी (2)
  1. सेवीले गोपाल राइ अकुल निरंजन ॥अंग 1292
  2. मो कउ तूं न बिसारि तू न बिसारि ॥अंग 1292
भगत रविदास जी (3)
  1. नागर जनां मेरी जाति बिखिआत चंमारं ॥अंग 1293
  2. हरि जपत तेऊ जना पदम कवलास पति तास सम तुलि नही आन कोऊ ॥अंग 1293
  3. मिलत पिआरो प्रान नाथु कवन भगति ते ॥अंग 1293

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