लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग भैरों

राग · M1-M5 + भगत

राग भैरों

सूर्योदय से पहले का राग, सतर्क-गम्भीर।

भैरव सुबह से पहले का राग है, सबसे शुरुआती घड़ी का सुर। एक तरह की awe इसके स्वर में बैठी है, ब्रह्म-मुहूर्त की हलकी ठंडक और निःशब्दता की।

भोर की पहली रोशनी में पत्थर के क़िले की दीवार: राग भैरों

नाम का सम्बन्ध शिव के "भैरव" स्वरूप से है, और स्वर का गाम्भीर्य उसी की प्रतिध्वनि है। ग्रंथ में भैरव की रचनाएँ अंग ग्यारह-सौ-छब्बीस के क़रीब से शुरू होती हैं।

"ना हम हिंदू न मुसलमान ॥" भैरों M5
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 1 (9)
  1. तुझ ते बाहरि किछू न होइ ॥अंग 1125
  2. गुर कै सबदि तरे मुनि केते इंद्रादिक ब्रहमादि तरे ॥अंग 1125
  3. नैनी द्रिसटि नही तनु हीना जरि जीतिआ सिरि कालो ॥अंग 1125
  4. भूंडी चाल चरण कर खिसरे तुचा देह कुमलानी ॥अंग 1126
  5. सगली रैणि सोवत गलि फाही दिनसु जंजालि गवाइआ ॥अंग 1126
  6. गुर कै संगि रहै दिनु राती रामु रसनि रंगि राता ॥अंग 1126
  7. हिरदै नामु सरब धनु धारणु गुर परसादी पाईऐ ॥अंग 1127
  8. जगन होम पुंन तप पूजा देह दुखी नित दूख सहै ॥अंग 1127
  9. आतम महि रामु राम महि आतमु चीनसि गुर बीचारा ॥अंग 1153
महला 3 (23)
  1. जाति का गरबु न करीअहु कोई ॥अंग 1127
  2. जोगी ग्रिही पंडित भेखधारी ॥अंग 1128
  3. जा कउ राखै अपणी सरणाई ॥अंग 1128
  4. मै कामणि मेरा कंतु करतारु ॥अंग 1128
  5. सो मुनि जि मन की दुबिधा मारे ॥अंग 1128
  6. राम नामु जगत निसतारा ॥अंग 1129
  7. नामे उधरे सभि जितने लोअ ॥अंग 1129
  8. गोविंद प्रीति सनकादिक उधारे ॥अंग 1129
  9. कलजुग महि राम नामु उर धारु ॥अंग 1129
  10. कलजुग महि बहु करम कमाहि ॥अंग 1129
  11. दुबिधा मनमुख रोगि विआपे त्रिसना जलहि अधिकाई ॥अंग 1130
  12. मनमुखि दुबिधा सदा है रोगी रोगी सगल संसारा ॥अंग 1130
  13. दुख विचि जंमै दुखि मरै दुख विचि कार कमाइ ॥अंग 1130
  14. सबदु बीचारे सो जनु साचा जिन कै हिरदै साचा सोई ॥अंग 1131
  15. मनमुख आसा नही उतरै दूजै भाइ खुआए ॥अंग 1131
  16. कलि महि प्रेत जिन॑ी रामु न पछाता सतजुगि परम हंस बीचारी ॥अंग 1131
  17. मनसा मनहि समाइ लै गुर सबदी वीचार ॥अंग 1132
  18. बाझु गुरू जगतु बउराना भूला चोटा खाई ॥अंग 1132
  19. हउमै माइआ मोहि खुआइआ दुखु खटे दुख खाइ ॥अंग 1132
  20. मेरी पटीआ लिखहु हरि गोविंद गोपाला ॥अंग 1133
  21. आपे दैत लाइ दिते संत जना कउ आपे राखा सोई ॥अंग 1133
  22. तिनि करतै इकु चलतु उपाइआ ॥अंग 1154
  23. गुर सेवा ते अंम्रित फलु पाइआ हउमै त्रिसन बुझाई ॥अंग 1155
महला 4 (7)
  1. हरि जन संत करि किरपा पगि लाइणु ॥अंग 1133
  2. बोलि हरि नामु सफल सा घरी ॥अंग 1134
  3. सुक्रितु करणी सारु जपमाली ॥अंग 1134
  4. सभि घट तेरे तू सभना माहि ॥अंग 1134
  5. हरि का संतु हरि की हरि मूरति जिसु हिरदै हरि नामु मुरारि ॥अंग 1134
  6. ते साधू हरि मेलहु सुआमी जिन जपिआ गति होइ हमारी ॥अंग 1135
  7. सतसंगति साई हरि तेरी जितु हरि कीरति हरि सुनणे ॥अंग 1135
महला 5 (67)
  1. सगली थीति पासि डारि राखी ॥ असटम थीति गोविंद जनमा सी ॥1॥अंग 1136
  2. ऊठत सुखीआ बैठत सुखीआ ॥अंग 1136
  3. वरत न रहउ न मह रमदाना ॥अंग 1136
  4. दस मिरगी सहजे बंधि आनी ॥अंग 1136
  5. जे सउ लोचि लोचि खावाइआ ॥अंग 1136
  6. जिनहि उपाए तिस कउ पीर ॥1॥अंग 1137
  7. आगै दयु पाछै नाराइण ॥अंग 1137
  8. कोटि मनोरथ आवहि हाथ ॥अंग 1137
  9. लेपु न लागो तिल का मूलि ॥अंग 1137
  10. खूबु खूबु खूबु खूबु खूबु तेरो नामु ॥अंग 1137
  11. साच पदारथु गुरमुखि लहहु ॥अंग 1138
  12. सतिगुरु सेवि सरब फल पाए ॥अंग 1138
  13. अपणे दास कउ कंठि लगावै ॥अंग 1138
  14. स्रीधर मोहन सगल उपावन निरंकार सुखदाता ॥अंग 1138
  15. बन महि पेखिओ त्रिण महि पेखिओ ग्रिहि पेखिओ उदासाए ॥अंग 1139
  16. निकटि बुझै सो बुरा किउ करै ॥अंग 1139
  17. जिसु तू राखहि तिसु कउनु मारै ॥अंग 1139
  18. तउ कड़ीऐ जे होवै बाहरि ॥अंग 1140
  19. बिनु बाजे कैसो निरतिकारी ॥अंग 1140
  20. हउमै रोगु मानुख कउ दीना ॥अंग 1140
  21. चीति आवै तां महा अनंद ॥अंग 1141
  22. बापु हमारा सद चरंजीवी ॥अंग 1141
  23. निरवैर पुरख सतिगुर प्रभ दाते ॥अंग 1141
  24. सतिगुरु मेरा बेमुहताजु ॥अंग 1142
  25. नामु लैत मनु परगटु भइआ ॥अंग 1142
  26. नमसकार ता कउ लख बार ॥अंग 1142
  27. मोहि दुहागनि आपि सीगारी ॥अंग 1143
  28. चितवत पाप न आलकु आवै ॥अंग 1143
  29. अपणी दइआ करे सो पाए ॥अंग 1143
  30. नामु हमारै अंतरजामी ॥अंग 1144
  31. तू मेरा पिता तूहै मेरा माता ॥अंग 1144
  32. सभ ते ऊच जा का दरबारु ॥अंग 1144
  33. रोवनहारी रोजु बनाइआ ॥अंग 1145
  34. संत की निंदा जोनी भवना ॥अंग 1145
  35. नामु हमारै बेद अरु नाद ॥अंग 1145
  36. निरधन कउ तुम देवहु धना ॥अंग 1146
  37. संत मंडल महि हरि मनि वसै ॥अंग 1146
  38. रोगु कवनु जां राखै आपि ॥अंग 1146
  39. तेरी टेक रहा कलि माहि ॥अंग 1147
  40. प्रथमे छोडी पराई निंदा ॥अंग 1147
  41. सुखु नाही बहुतै धनि खाटे ॥अंग 1147
  42. गुर मिलि तिआगिओ दूजा भाउ ॥अंग 1147
  43. सभ ते ऊचा जा का नाउ ॥अंग 1148
  44. जिसु सिमरत मनि होइ प्रगासु ॥अंग 1148
  45. लाज मरै जो नामु न लेवै ॥अंग 1148
  46. गुर सुप्रसंन होए भउ गए ॥अंग 1149
  47. करण कारण समरथु गुरु मेरा ॥अंग 1149
  48. मनु तनु राता राम रंगि चरणे ॥अंग 1149
  49. नामु लैत किछु बिघनु न लागै ॥अंग 1150
  50. आपे सासतु आपे बेदु ॥अंग 1150
  51. भगता मनि आनंदु गोबिंद ॥अंग 1150
  52. भै कउ भउ पड़िआ सिमरत हरि नाम ॥अंग 1151
  53. पंच मजमी जो पंचन राखै ॥अंग 1151
  54. निंदक कउ फिटके संसारु ॥अंग 1151
  55. दुइ कर जोरि करउ अरदासि ॥अंग 1152
  56. सतिगुर अपुने सुनी अरदासि ॥अंग 1152
  57. परतिपाल प्रभ क्रिपाल कवन गुन गनी ॥अंग 1153
  58. जिसु नामु रिदै सोई वड राजा ॥अंग 1155
  59. कोटि बिसन कीने अवतार ॥अंग 1156
  60. सतिगुरि मो कउ कीनो दानु ॥अंग 1157
  61. जो पाथर कउ कहते देव ॥अंग 1160
  62. जल महि मीन माइआ के बेधे ॥अंग 1160
  63. जब लगु मेरी मेरी करै ॥अंग 1160
  64. सतरि सैइ सलार है जा के ॥अंग 1161
  65. सभु कोई चलन कहत है ऊहां ॥अंग 1161
  66. किउ लीजै गढु बंका भाई ॥अंग 1161
  67. गंग गुसाइनि गहिर गंभीर ॥अंग 1162
भगत कबीर जी (13)
  1. इहु धनु मेरे हरि को नाउ ॥अंग 1157
  2. नांगे आवनु नांगे जाना ॥अंग 1157
  3. मैला ब्रहमा मैला इंदु ॥अंग 1158
  4. मनु करि मका किबला करि देही ॥अंग 1158
  5. गंगा कै संगि सलिता बिगरी ॥ सो सलिता गंगा होइ निबरी ॥1॥अंग 1158
  6. माथे तिलकु हथि माला बानां ॥अंग 1158
  7. उलटि जाति कुल दोऊ बिसारी ॥अंग 1158
  8. निरधन आदरु कोई न देइ ॥अंग 1159
  9. गुर सेवा ते भगति कमाई ॥अंग 1159
  10. सिव की पुरी बसै बुधि सारु ॥अंग 1159
  11. सो मुलां जो मन सिउ लरै ॥अंग 1159
  12. अगम द्रुगम गड़ि रचिओ बास ॥अंग 1162
  13. कोटि सूर जा कै परगास ॥अंग 1162
भगत नामदेव जी (12)
  1. रे जिहबा करउ सत खंड ॥अंग 1163
  2. पर धन पर दारा परहरी ॥अंग 1163
  3. दूधु कटोरै गडवै पानी ॥ कपल गाइ नामै दुहि आनी ॥1॥अंग 1163
  4. मै बउरी मेरा रामु भतारु ॥अंग 1164
  5. कबहू खीरि खाड घीउ न भावै ॥अंग 1164
  6. हसत खेलत तेरे देहुरे आइआ ॥अंग 1164
  7. जैसी भूखे प्रीति अनाज ॥अंग 1164
  8. घर की नारि तिआगै अंधा ॥अंग 1164
  9. संडा मरका जाइ पुकारे ॥अंग 1165
  10. सुलतानु पूछै सुनु बे नामा ॥अंग 1165
  11. जउ गुरदेउ त मिलै मुरारि ॥अंग 1166
  12. आउ कलंदर केसवा ॥अंग 1167
भगत रविदास जी (1)
  1. बिनु देखे उपजै नही आसा ॥अंग 1167

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