Lulla Family

राग भैरों

राग · M1-M5 + भगत

राग भैरों

सूर्योदय से पहले का राग, सतर्क-गम्भीर।

भैरव सुबह से पहले का राग है, सबसे शुरुआती घड़ी का सुर। एक तरह की awe इसके स्वर में बैठी है, ब्रह्म-मुहूर्त की हलकी ठंडक और निःशब्दता की।

A stone fort wall at first light — raag Bhairon

नाम का सम्बन्ध शिव के “भैरव” स्वरूप से है, और स्वर का गाम्भीर्य उसी की प्रतिध्वनि है। ग्रंथ में भैरव की रचनाएँ अंग ग्यारह-सौ-छब्बीस के क़रीब से शुरू होती हैं।

“बेद कतेब इफतरा भाई दिल का फिकरु न जाइ ।” भैरों M5

इस राग के सब अंग

संबंधित पृष्ठ