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अंग 1166

अंग
1166
राग भैरों
राग: भैरों · रचयिता: Bhagat Naam Dev Ji
पढ़ने का समय: लगभग 2-3 मिनट
नामे सर भरि सोना लेहु ॥10॥
मालु लेउ तउ दोजकि परउ ॥
दीनु छोडि दुनीआ कउ भरउ ॥11॥
पावहु बेड़ी हाथहु ताल ॥
नामा गावै गुन गोपाल ॥12॥
गंग जमुन जउ उलटी बहै ॥
तउ नामा हरि करता रहै ॥13॥
सात घड़ी जब बीती सुणी ॥
अजहु न आइओ त्रिभवण धणी ॥14॥
पाखंतण बाज बजाइला ॥
गरुड़ चड़॑े गोबिंद आइला ॥15॥
अपने भगत परि की प्रतिपाल ॥
गरुड़ चड़॑े आए गोपाल ॥16॥
कहहि त धरणि इकोडी करउ ॥
कहहि त ले करि ऊपरि धरउ ॥17॥
कहहि त मुई गऊ देउ जीआइ ॥
सभु कोई देखै पतीआइ ॥18॥
नामा प्रणवै सेल मसेल ॥
गऊ दुहाई बछरा मेलि ॥19॥
दूधहि दुहि जब मटुकी भरी ॥
ले बादिसाह के आगे धरी ॥20॥
बादिसाहु महल महि जाइ ॥
अउघट की घट लागी आइ ॥21॥
काजी मुलां बिनती फुरमाइ ॥
बखसी हिंदू मै तेरी गाइ ॥22॥
नामा कहै सुनहु बादिसाह ॥
इहु किछु पतीआ मुझै दिखाइ ॥23॥
इस पतीआ का इहै परवानु ॥
साचि सीलि चालहु सुलितान ॥24॥
नामदेउ सभ रहिआ समाइ ॥
मिलि हिंदू सभ नामे पहि जाहि ॥25॥
जउ अब की बार न जीवै गाइ ॥
त नामदेव का पतीआ जाइ ॥26॥
नामे की कीरति रही संसारि ॥
भगत जनां ले उधरिआ पारि ॥27॥
सगल कलेस निंदक भइआ खेदु ॥
नामे नाराइन नाही भेदु ॥28॥1॥10॥
भगत नामदेव महाराष्ट्र के संत थे, तेरहवीं-चौदहवीं सदी के। पंढरपुर के विट्ठल-मन्दिर से जुड़े, मगर बाद में पंजाब आ कर बसे, और गुरुदासपुर के पास उनकी समाधि है।

हिन्दी अर्थ: नामदेव के बराबर का तोल के सोना ले लो (और इसे छोड़ दो)। 10। (उसने उक्तर दिया) अगर मैं रिश्वत लूँ तो दोज़क में पड़ता हूँ। (क्योंकि इस तरह तो) मैं मज़हब छोड़ के दौलत इकट्ठी करता हूँ। 11। नामदेव के पैरों में बेड़ियाँ हैं। पर फिर भी वह हाथों से ताल दे दे के परमात्मा के गुण गाता है। 12। अगर गंगा और जमुना उल्टी भी बहनें लग जाएं। तो भी नामा हरी के गुण गाता रहेगा (और दबाव में आ के खुदा खुदा नहीं कहेगा)। 13। (बादशाह ने गाय जिंदा करने के लिए एक पहर की मोहलत दी हुई थी) जब (घड़ी पर) सात घड़ियां गुज़री सुनी। तो (मैंने नामे ने सोचा कि) अभी तक भी त्रिलोकी का मालिक प्रभू नहीं आया। 14। (बस ! उसी वक्त) पंखों के फड़कने की आवाज़ आई। विष्णू भगवान गरुड़ पर चढ़ कर आ गया। 15। और उन्होंने अपने भगत की रक्षा कर ली। प्रभू जी गरुड़ पर चढ़ कर आ गए। 16। (गोपाल ने कहा- हे नामदेव !) अगर आप कहे तो मैं धरती टेढ़ी कर दूँ। अगर आप कहे तो इसको पकड़ के उल्टा दूँ। 17 अगर आप कहे तो मरी हुई गाया जीवित कर दूँ। और यहाँ हरेक व्यक्ति तसल्ली से देख ले। 18। (गोपाल की इस कृपा पर) मैंने नामे ने (उन लोगों को) विनती की- (गऊ के पास उसका) बच्चा कर दो। (तो उन्होंने) बच्छा छोड़ के गाय का दूध दुह लिया। 19। दूध दुह के जब उन्होंने मटकी भर ली तो वह ले के बादशाह के आगे रख दी। 20। बादशाह महलों में चला गया (और वहाँ उस पर) मुश्किल घड़ी आ गई (भाव। वह सहम गया)। अपने काज़ियों और मौलवियों के ज़रिए उसने विनती (भेज डाली) – हे हिंदू ! मुझे हुकम कर (जो हुकम आप देगा मैं करूँगा)। मुझे बख्श। मैं आपकी गाय हूँ। 21। 22। नामा कहता है- हे बादशाह ! सुन। मुझे एक तसल्ली करवा दे। इस इकरार का माप ये होंगे कि हे बादशाह ! आप (आगे से) सच्चाई पर चलेगा। अच्छे स्वभाव में रहेगा। 23। 24। (यह करिश्मा सुन देख के) घर-घर में नामदेव की बातें होने लगीं। (नगर के) सारे हिन्दू मिल के नामदेव के पास आए (और कहने लगे-) अगर अबकी बार गाय ना जिंदा होती तो नामदेव का ऐतबार जाता रहना था। 25। 26। नामदेव की शोभा जगत में बनी रही है; पर प्रभू ने अपने भगतों को। अपने सेवकों को चरणों से लगा के पार कर दिया है। (यह शोभा सुन के) निंदकों को बड़ा कलेश और बड़ा दुख हुआ है (क्योंकि वे यह नहीं जानते कि) नामदेव और परमात्मा में कोई दूरी नहीं रह गई। 27। 28। 1। 10।
घरु 2 ॥
जउ गुरदेउ त मिलै मुरारि ॥
जउ गुरदेउ त उतरै पारि ॥
जउ गुरदेउ त बैकुंठ तरै ॥
जउ गुरदेउ त जीवत मरै ॥1॥
सति सति सति सति सति गुरदेव ॥
झूठु झूठु झूठु झूठु आन सभ सेव ॥1॥ रहाउ ॥
जउ गुरदेउ त नामु द्रिड़ावै ॥
जउ गुरदेउ न दह दिस धावै ॥
जउ गुरदेउ पंच ते दूरि ॥
जउ गुरदेउ न मरिबो झूरि ॥2॥
जउ गुरदेउ त अंम्रित बानी ॥
जउ गुरदेउ त अकथ कहानी ॥
जउ गुरदेउ त अंम्रित देह ॥
जउ गुरदेउ नामु जपि लेहि ॥3॥
जउ गुरदेउ भवन त्रै सूझै ॥
जउ गुरदेउ ऊच पद बूझै ॥
जउ गुरदेउ त सीसु अकासि ॥
जउ गुरदेउ सदा साबासि ॥4॥
जउ गुरदेउ सदा बैरागी ॥
जउ गुरदेउ पर निंदा तिआगी ॥
नामदेव की वाणी में मराठी और पंजाबी दोनों के असर हैं। आदि ग्रंथ में उनकी छियासठ रचनाएँ हैं, अधिकांश भक्ति-प्रधान।

हिन्दी अर्थ: घरु 2॥ अगर गुरू मिल जाए तो रॅब मिल जाता है। (संसार-समुंद्र से मनुष्य) पार लांघ जाता है। (यहाँ से) तैर के बैकुंठ में जा पहुँचता है। (दुनिया में) रहते हुए (विकारों से उसका मन) मरा रहता है। 1। ये यकीन जानो कि गुरू की सेवा ही सदा-स्थिर रहने वाला उद्यम है। और सब (देवताओं की) सेवा-पूजा व्यर्थ है। व्यर्थ है। व्यर्थ है। 1। रहाउ। अगर गुरू मिल जाए तो वह नाम जपने का स्वभाव पक्का कर देता है। (फिर मन) दसों दिशाओं में नहीं दौड़ता। पाँच कामादिक से बचा रहता है। (चिंता-फिकर में) झुर-झुर के नहीं खपता। 2। अगर गुरू मिल जाए तो मनुष्य के बोल मीठे हो जाते हैं। अकथ प्रभू की बातें करने लग जाता है। शरीर पवित्र हो रहता है। (क्योंकि फिर यह सदा) नाम जपता है। 3। अगर गुरू ईश्वर मिल जाए तो मनुष्य को तीनों भवनों की सूझ हो जाती है (भाव। यह समझ आ जलाती है कि प्रभू तीनों भवनों में ही मौजूद है)। ऊँची आत्मिक अवस्था से जान-पहचान हो जाती है। मन प्रभू-चरणों में टिका रहता है (हर जगह से) सदा शोभा मिलती है। 4। अगर गुरू मिल जाए तो मनुष्य (दुनिया में रहता हुआ ही) सदा विरक्त रहता है। किसी की निंदा नहीं करता।

इस राग की धुन का अपना मिज़ाज है, और शास्त्रीय परम्परा में इसकी अपनी विशिष्टता है। ग्रंथ के संकलन के समय यह राग चुना गया क्योंकि इसकी रचनाएँ इसी सुर में बँधी थीं। भैरव, बसन्त, सारंग, मल्हार, और कान्हड़ा राग। सत्रहवीं सदी की रचनाओं का बड़ा हिस्सा।

नामदेव के बारे में परम्परा कहती है कि उनके स्पर्श से एक मन्दिर का दरवाज़ा घूम कर उनकी ओर हो गया। आदि ग्रंथ में उनकी कई रचनाएँ हैं, अधिकांश भक्ति-प्रधान।

इस अंग पर दो शबद बैठे हैं, एक के बाद दूसरा। पहले की प्रारम्भिक पंक्ति यह है: “नामदेव के बराबर का तोल के सोना ले लो (और इसे छोड़ दो)।”

पाठ की पारम्परिक विधि सरल है। एक बार धीमे-से पूरा शबद, हिन्दी अर्थ के साथ। फिर एक बार बिना अर्थ के, सिर्फ़ देवनागरी, ताकि लय अपनी जगह बैठ सके। दूसरी बार में स्वर अपना काम करता है, और जो पंक्ति आज की किसी स्थिति से जुड़ती है, उसे चिन्हित कर लेना उपयोगी रहता है। यही ‘हुकमनामा’ की भावना है, यानी आज के दिन के लिए एक संकेत।

स्रोत-नोट: यहाँ का देवनागरी पाठ बानीडीबी डेटाबेस (Khalis Foundation का खुला-स्रोत संग्रह) से लिया गया है। हिन्दी अनुवाद का आधार प्रोफ़ेसर साहिब सिंह जी की प्रसिद्ध टीका है, जो 1962 में पंजाबी विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित हुई थी और आज भी विद्वानों के बीच मानक मानी जाती है। गहन व्याख्या के लिए परम्परागत ‘स्टीक’ और ‘टीका’ संसाधन उपलब्ध हैं।

स्रोत: हिन्दी अर्थ banidb.com (Khalis Foundation) के डेटा से। टीका प्रोफ़ेसर साहिब सिंह की टीका पर आधारित। देवनागरी transliteration lulla.net पर automated।