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राग धनासरी

राग · M1-M5 + भगत

राग धनासरी

शाम का स्थिर राग, बैठ कर सुनने वाला।

धनासरी राग शाम का है, स्थिर, बैठ कर सुनने वाला। उत्तरी और दक्षिणी दोनों शास्त्रीय परम्पराओं में इसकी मान्यता है, और दोनों स्वरूप कुछ-कुछ भिन्न हैं।

A ripe wheat field in late-afternoon light — raag Dhanasri

ग्रंथ में धनासरी की रचनाएँ अंग छह-सौ-साठ के क़रीब से शुरू होती हैं और सात-सौ के क़रीब तक चलती हैं। गुरु अर्जन और गुरु राम दास दोनों ने इस राग में बहु-रचनाएँ कीं।

“गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने ।” धनासरी M1, आरती

इस राग के सब अंग

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