राग बसंत

वसन्त-ऋतु का राग, फूल-फलन का स्वर।
बसन्त वसन्त-ऋतु का राग है, फूल खिलने वाले महीनों का। माघ से चैत्र तक (फरवरी से अप्रैल) यह विशेष रूप से गाया जाता है, और होली के क़रीब इसकी मादकता चरम पर होती है।
स्वर में एक मीठा उत्साह है, मगर ज़ोरदार नहीं। ग्रंथ में बसन्त की रचनाएँ अंग ग्यारह-सौ-अड़तीस के क़रीब से शुरू होती हैं।
“मन आप जोति सरूपु है आपणा मूलु पछाणु ।” बसंत M3