राग कान्हड़ा
रात का राग, कृष्ण-भक्ति से जुड़ा।
कान्हड़ा रात का राग है। नाम “कान्ह” (कृष्ण) से उत्पन्न, और कृष्ण-भक्ति की परम्परा से इसका विशेष नाता है। दरबारी कान्हड़ा सबसे प्रसिद्ध स्वरूप है।
ग्रंथ में कान्हड़ा की रचनाएँ कम हैं, अंग बारह-सौ-चौरानवें के क़रीब। मगर जहाँ हैं, वहाँ एक कृष्ण-स्मरण की धुन सुनाई देती है।
“राम राम राम जपि गुरु गोबिंदा ।” कान्हड़ा M5