लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग कानड़ा

राग · M4-M5

राग कान्हड़ा

रात का राग, कृष्ण-भक्ति से जुड़ा।

कान्हड़ा रात का राग है। नाम "कान्ह" (कृष्ण) से उत्पन्न, और कृष्ण-भक्ति की परम्परा से इसका विशेष नाता है। दरबारी कान्हड़ा सबसे प्रसिद्ध स्वरूप है।

ग्रंथ में कान्हड़ा की रचनाएँ कम हैं, अंग बारह-सौ-चौरानवें के क़रीब। मगर जहाँ हैं, वहाँ एक कृष्ण-स्मरण की धुन सुनाई देती है।

"गाईऐ गुण गोपाल क्रिपा निधि ॥" कान्हड़ा M5
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 4 (61)
  1. मेरा मनु साध जनां मिलि हरिआ ॥अंग 1294
  2. मेरा मनु संत जना पग रेन ॥अंग 1294
  3. जपि मन राम नाम परगास ॥अंग 1295
  4. मेरै मनि राम नामु जपिओ गुर वाक ॥अंग 1295
  5. मेरे मन हरि हरि राम नामु जपि चीति ॥अंग 1295
  6. जपि मन राम नाम जगंनाथ ॥अंग 1296
  7. मन जापहु राम गुपाल ॥अंग 1296
  8. हरि गुन गावहु जगदीस ॥अंग 1296
  9. भजु रामो मनि राम ॥अंग 1297
  10. सतिगुर चाटउ पग चाट ॥अंग 1297
  11. जपि मन गोबिद माधो ॥अंग 1297
  12. हरि जसु गावहु भगवान ॥अंग 1297
  13. जपि मन राम नामु सुखु पावैगो ॥अंग 1308
  14. जपि मन हरि हरि नामु तरावैगो ॥अंग 1308
  15. मनु गुरमति रसि गुन गावैगो ॥अंग 1309
  16. मनु हरि रंगि राता गावैगो ॥अंग 1310
  17. मन गुरमति चाल चलावैगो ॥अंग 1310
  18. मनु सतिगुर सरनि धिआवैगो ॥अंग 1311
  19. राम नामु निधानु हरि गुरमति रखु उर धारि ॥अंग 1312
  20. गोविंदु गोविदु गोविदु हरि गोविदु गुणी निधानु ॥अंग 1312
  21. तूं आपे ही सिध साधिको तू आपे ही जुग जोगीआ ॥अंग 1313
  22. हरि हरि हरि हरि नामु है गुरमुखि पावै कोइ ॥अंग 1313
  23. हरि आपे आपि दइआलु हरि आपे करे सु होइ ॥अंग 1313
  24. सभ जोति तेरी जगजीवना तू घटि घटि हरि रंग रंगना ॥अंग 1313
  25. हरि हरि नामु धिआइ मन हरि दरगह पावहि मानु ॥अंग 1313
  26. हरि हरि नामु पवितु है नामु जपत दुखु जाइ ॥अंग 1313
  27. हरि हरि अंम्रितु नाम रसु हरि अंम्रितु हरि उर धारि ॥अंग 1314
  28. हरि कीरति उतमु नामु है विचि कलिजुग करणी सारु ॥अंग 1314
  29. राम नामु वखरु है ऊतमु हरि नाइकु पुरखु हमारा ॥अंग 1314
  30. हमरी जिहबा एक प्रभ हरि के गुण अगम अथाह ॥अंग 1314
  31. हरि करहु क्रिपा जगजीवना गुरु सतिगुरु मेलि दइआलु ॥अंग 1314
  32. हरि तुम॑ वड वडे वडे वड ऊचे सभ ऊपरि वडे वडौना ॥अंग 1315
  33. हमरे हरि जगजीवना हरि जपिओ हरि गुर मंत ॥अंग 1315
  34. हरि प्रभु सजणु नामु हरि मै मनि तनि नामु सरीरि ॥अंग 1315
  35. सुतिआ हरि प्रभु चेति मनि हरि सहजि समाधि समाइ ॥अंग 1315
  36. हरि इकसु सेती पिरहड़ी हरि इको मेरै चिति ॥अंग 1315
  37. पंचे सबद वजे मति गुरमति वडभागी अनहदु वजिआ ॥अंग 1315
  38. भगति सरोवरु उछलै सुभर भरे वहंनि ॥अंग 1316
  39. हरि हरि नाम असंख हरि हरि के गुन कथनु न जाहि ॥अंग 1316
  40. हरि अगमु अगोचरु अगमु हरि किउ करि हरि दरसनु पिखा ॥अंग 1316
  41. हरि हरि नामु अंम्रितु है हरि जपीऐ सतिगुर भाइ ॥अंग 1316
  42. हरि हरि नामु निधानु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥अंग 1316
  43. हउ वारिआ तिन कउ सदा सदा जिना सतिगुरु मेरा पिआरा देखिआ ॥अंग 1316
  44. राम नामु रमु रवि रहे रमु रामो रामु रमीति ॥अंग 1316
  45. हरि प्रभु सजणु लोड़ि लहु भागि वसै वडभागि ॥अंग 1317
  46. धनु धनु सुहावी सफल घड़ी जितु हरि सेवा मनि भाणी ॥अंग 1317
  47. हरि प्रभ रते लोइणा गिआन अंजनु गुरु देइ ॥अंग 1317
  48. गुरमुखि अंतरि सांति है मनि तनि नामि समाइ ॥अंग 1317
  49. तुधु आपे जगतु उपाइ कै तुधु आपे वसगति कीता ॥अंग 1317
  50. मन अंतरि हउमै रोगु है भ्रमि भूले मनमुख दुरजना ॥अंग 1317
  51. मनु तनु तामि सगारवा जां देखा हरि नैणे ॥अंग 1317
  52. जगंनाथ जगदीसर करते अपरंपर पुरखु अतोलु ॥अंग 1317
  53. हरि जन हरि हरि चउदिआ सरु संधिआ गावार ॥अंग 1317
  54. अखी प्रेमि कसाईआ हरि हरि नामु पिखंनि॑ ॥अंग 1318
  55. जलि थलि महीअलि पूरनो अपरंपरु सोई ॥अंग 1318
  56. गुरमुखि मिले सि सजणा हरि प्रभ पाइआ रंगु ॥अंग 1318
  57. हरि तूहै दाता सभस दा सभि जीअ तुम॑ारे ॥अंग 1318
  58. इछा मन की पूरीऐ जपीऐ सुख सागरु ॥अंग 1318
  59. हउ ढूंढेंदी सजणा सजणु मैडै नालि ॥अंग 1318
  60. नानक प्रीति लाई तिनि सचै तिसु बिनु रहणु न जाई ॥अंग 1318
  61. कोई गावै को सुणै को उचरि सुनावै ॥अंग 1318
महला 5 (51)
  1. गाईऐ गुण गोपाल क्रिपा निधि ॥अंग 1298
  2. आराधउ तुझहि सुआमी अपने ॥अंग 1298
  3. कीरति प्रभ की गाउ मेरी रसनां ॥अंग 1298
  4. ऐसी मांगु गोबिद ते ॥अंग 1298
  5. भगति भगतन हूं बनि आई ॥अंग 1299
  6. तेरो जनु हरि जसु सुनत उमाहिओ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1299
  7. संतन पहि आपि उधारन आइओ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1299
  8. बिसरि गई सभ ताति पराई ॥अंग 1299
  9. मानु महतु तुम॑ारै ऊपरि तुम॑री ओट तुम॑ारी सरना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1299
  10. साध सरनि चरन चितु लाइआ ॥अंग 1300
  11. हरि के चरन हिरदै गाइ ॥अंग 1300
  12. कथीऐ संतसंगि प्रभ गिआनु ॥अंग 1300
  13. साधसंगति निधि हरि को नाम ॥अंग 1300
  14. साधू हरि हरे गुन गाइ ॥अंग 1300
  15. पेखि पेखि बिगसाउ साजन प्रभु आपना इकांत ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1300
  16. साजना संत आउ मेरै ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1301
  17. चरन सरन गोपाल तेरी ॥अंग 1301
  18. धनि उह प्रीति चरन संगि लागी ॥अंग 1301
  19. कुचिल कठोर कपट कामी ॥अंग 1301
  20. नाराइन नरपति नमसकारै ॥अंग 1301
  21. न जानी संतन प्रभ बिनु आन ॥अंग 1302
  22. कहन कहावन कउ कई केतै ॥अंग 1302
  23. हीए को प्रीतमु बिसरि न जाइ ॥अंग 1302
  24. आनद रंग बिनोद हमारै ॥अंग 1302
  25. साजन मीत सुआमी नेरो ॥अंग 1302
  26. बिखै दलु संतनि तुम॑रै गाहिओ ॥अंग 1303
  27. बूडत प्रानी हरि जपि धीरै ॥अंग 1303
  28. सिमरत नामु मनहि सुखु पाईऐ ॥अंग 1303
  29. मेरे मन प्रीति चरन प्रभ परसन ॥अंग 1303
  30. कुहकत कपट खपट खल गरजत मरजत मीचु अनिक बरीआ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1303
  31. जीअ प्रान मान दाता ॥अंग 1303
  32. अविलोकउ राम को मुखारबिंद ॥अंग 1304
  33. प्रभ पूजहो नामु अराधि ॥अंग 1304
  34. जगत उधारन नाम प्रिअ तेरै ॥अंग 1304
  35. ऐसी कउन बिधे दरसन परसना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1305
  36. रंगा रंग रंगन के रंगा ॥अंग 1305
  37. तिख बूझि गई गई मिलि साध जना ॥अंग 1305
  38. तिआगीऐ गुमानु मानु पेखता दइआल लाल हां हां मन चरन रेन ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1305
  39. प्रभ कहन मलन दहन लहन गुर मिले आन नही उपाउ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1305
  40. पतित पावनु भगति बछलु भै हरन तारन तरन ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1306
  41. चरन सरन दइआल ठाकुर आन नाही जाइ ॥अंग 1306
  42. वारि वारउ अनिक डारउ ॥अंग 1306
  43. अहं तोरो मुखु जोरो ॥अंग 1306
  44. तां ते जापि मना हरि जापि ॥अंग 1306
  45. मान मोही पंच दोही उरझि निकटि बसिओ ताकी सरनि साधूआ दूत संगु निवारि ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1307
  46. सहज सुभाए आपन आए ॥अंग 1307
  47. गोबिंद ठाकुर मिलन दुराइंी ॥अंग 1307
  48. माई सिमरत राम राम राम ॥अंग 1307
  49. जन को प्रभु संगे असनेहु ॥अंग 1307
  50. करत करत चरच चरच चरचरी ॥अंग 1308
  51. से उधरे जिन राम धिआए ॥अंग 1312
भगत नामदेव जी (1)
  1. ऐसो राम राइ अंतरजामी ॥अंग 1318
अन्य भगत (1)
  1. छका 1 ॥अंग 1311

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