लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग नट नारायण

राग · M4-M5

राग नट नारायण

रात का राग, शाही मिज़ाज वाला।

नट नारायन रात का राग है। दरबारी संगीत-गोष्ठियों में इसकी जगह रही है, राजसी मिज़ाज का स्वर।

नाम में "नट" शास्त्रीय राग-कुल का संकेत है, जिससे कई राग निकले हैं, और "नारायन" विशेष-स्वरूप का।

"राम हउ किआ जाना किआ भावै ॥" नट नारायण M5
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 4 (15)
  1. मेरे मन जपि अहिनिसि नामु हरे ॥अंग 975
  2. राम जपि जन रामै नामि रले ॥अंग 975
  3. मेरे मन जपि हरि हरि नामु सखे ॥अंग 975
  4. मेरे मन जपि हरि हरि राम रंगे ॥अंग 976
  5. मेरे मन जपि हरि हरि नामु मने ॥अंग 976
  6. मेरे मन कलि कीरति हरि प्रवणे ॥अंग 976
  7. मेरे मन सेव सफल हरि घाल ॥अंग 977
  8. मन मिलु संतसंगति सुभवंती ॥अंग 977
  9. कोई आनि सुनावै हरि की हरि गाल ॥अंग 977
  10. राम मेरे मनि तनि नामु अधारे ॥अंग 980
  11. राम हम पाथर निरगुनीआरे ॥अंग 981
  12. राम हरि अंम्रित सरि नावारे ॥अंग 981
  13. राम गुर सरनि प्रभू रखवारे ॥अंग 982
  14. राम करि किरपा लेहु उबारे ॥अंग 982
  15. मेरे मन भजु ठाकुर अगम अपारे ॥अंग 983
महला 5 (10)
  1. राम हउ किआ जाना किआ भावै ॥अंग 978
  2. उलाहनो मै काहू न दीओ ॥अंग 978
  3. जा कउ भई तुमारी धीर ॥अंग 978
  4. अपना जनु आपहि आपि उधारिओ ॥अंग 979
  5. हरि हरि मन महि नामु कहिओ ॥अंग 979
  6. चरन कमल संगि लागी डोरी ॥अंग 979
  7. मेरे मन जपु जपि हरि नाराइण ॥अंग 979
  8. मेरै सरबसु नामु निधानु ॥अंग 979
  9. हउ वारि वारि जाउ गुर गोपाल ॥1॥ रहाउ ॥अंग 980
  10. कोऊ है मेरो साजनु मीतु ॥अंग 980
अन्य भगत (1)
  1. छका 1 ॥अंग 983

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