राग माली गउड़ा
अपराह्न का राग, पुष्प-गन्ध का।
माली गौड़ा पुष्पों से जुड़ा राग है, अपराह्न के झुकाव का। नाम “माली” (फूल-वाला) से आया, और स्वर में एक तरह की सुगन्ध-सी मिठास है।
ग्रंथ में माली गौड़ा की रचनाएँ कम हैं, मगर हर एक में एक हल्की उत्सव-भावना झलकती है।
“हरि हरि नामु अपार अमोला ।” माली गउड़ा M5