लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग माली गौड़ा

राग · M5

राग माली गउड़ा

अपराह्न का राग, पुष्प-गन्ध का।

माली गौड़ा पुष्पों से जुड़ा राग है, अपराह्न के झुकाव का। नाम "माली" (फूल-वाला) से आया, और स्वर में एक तरह की सुगन्ध-सी मिठास है।

ग्रंथ में माली गौड़ा की रचनाएँ कम हैं, मगर हर एक में एक हल्की उत्सव-भावना झलकती है।

"रे मन टहल हरि सुख सार ॥" माली गउड़ा M5
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 4 (5)
  1. अनिक जतन करि रहे हरि अंतु नाही पाइआ ॥अंग 984
  2. जपि मन राम नामु सुखदाता ॥अंग 984
  3. सभि सिध साधिक मुनि जना मनि भावनी हरि धिआइओ ॥अंग 985
  4. मेरा मनु राम नामि रसि लागा ॥अंग 985
  5. मेरे मन भजु हरि हरि नामु गुपाला ॥अंग 985
महला 5 (8)
  1. छका 1 ॥अंग 986
  2. राम नाम कउ नमसकार ॥अंग 986
  3. ऐसो सहाई हरि को नाम ॥अंग 986
  4. इही हमारै सफल काज ॥अंग 987
  5. सभ कै संगी नाही दूरि ॥अंग 987
  6. हरि समरथ की सरना ॥अंग 987
  7. प्रभ समरथ देव अपार ॥अंग 988
  8. मनि तनि बसि रहे गोपाल ॥अंग 988
भगत नामदेव जी (3)
  1. धनि धंनि ओ राम बेनु बाजै ॥अंग 988
  2. मेरो बापु माधउ तू धनु केसौ सांवलीओ बीठुलाइ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 988
  3. सभै घट रामु बोलै रामा बोलै ॥अंग 988

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