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राग कल्याण

राग · M4-M5

राग कल्याण

रात की धुन, ध्यानमग्न और श्रेष्ठ।

कल्याण रात का राग है, ध्यानमग्न और श्रेष्ठ। यमन-कल्याण, शुद्ध-कल्याण, श्याम-कल्याण इत्यादि कई स्वरूप हैं, सब रात की गोष्ठियों के मुख्य राग हैं।

नाम का अर्थ ही “शुभ” या “श्रेष्ठ” है। ग्रंथ में कल्याण की रचनाएँ अंग तेरह-सौ-एक के क़रीब से शुरू होती हैं।

“हरि गुण कहि न जाहे सति राम ।” कल्याण M4

इस राग के सब अंग

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