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अंग ८७४ · गोंड

अंग
874
गोंड
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  1. गोंड ॥
  2. हरि हरि करत मिटे सभि भरमा ॥
  3. गोंड ॥
  4. बिलावलु गोंड ॥

गोंड ॥

गोंड ॥
मोहि लागती तालाबेली ॥
बछरे बिनु गाइ अकेली ॥1॥
पानीआ बिनु मीनु तलफै ॥
ऐसे राम नामा बिनु बापुरो नामा ॥1॥ रहाउ ॥
जैसे गाइ का बाछा छूटला ॥
थन चोखता माखनु घूटला ॥2॥
नामदेउ नाराइनु पाइआ ॥
गुरु भेटत अलखु लखाइआ ॥3॥
जैसे बिखै हेत पर नारी ॥
ऐसे नामे प्रीति मुरारी ॥4॥
जैसे तापते निरमल घामा ॥
तैसे राम नामा बिनु बापुरो नामा ॥5॥4॥

हिन्दी अर्थ: गोंड ॥ मुझे (भी प्रभू से विछुड़ के) वैसे ही तिलमिलाहट होती है। जैसे बछड़े से विछुड़ के अकेली गाय (घबराती) है। 1। जैसे पानी के बिना मछली तड़फती है। वैसे ही मैं नामदेव प्रभू के नाम के बिना घबराता हूँ। 1। रहाउ। जैसे (जब) गाय का बछड़ा खूँटे से खुल जाता है तो (गाय के) थन चूँघता है। और मक्खन के घूँट भरता है। नामदेव को ईश्वर मिल गया। जब मुझे नामदेव को सतिगुरू मिला। मुझे अलख प्रभू की सूझ पड़ गई। जैसे (विषयी व्यक्ति को) विषय पूर्ति के लिए पराई नारि से प्यार होता है। मुझ नामे को प्रभू से प्यार है। 4। जैसे चमकती धूप में (जीव-जंतु) तपते-तड़पते हैं। प्रभू के नाम से विछुड़ के मैं नामदेव इस तरह घबराता हूँ।5। 4।

हरि हरि करत मिटे सभि भरमा ॥

रागु गोंड बाणी नामदेउ जीउ की घरु 2
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि हरि करत मिटे सभि भरमा ॥
हरि को नामु लै ऊतम धरमा ॥
हरि हरि करत जाति कुल हरी ॥
सो हरि अंधुले की लाकरी ॥1॥
हरए नमसते हरए नमह ॥
हरि हरि करत नही दुखु जमह ॥1॥ रहाउ ॥
हरि हरनाखस हरे परान ॥
अजैमल कीओ बैकुंठहि थान ॥
सूआ पड़ावत गनिका तरी ॥
सो हरि नैनहु की पूतरी ॥2॥
हरि हरि करत पूतना तरी ॥
बाल घातनी कपटहि भरी ॥
सिमरन द्रोपद सुत उधरी ॥
गऊतम सती सिला निसतरी ॥3॥
केसी कंस मथनु जिनि कीआ ॥
जीअ दानु काली कउ दीआ ॥
प्रणवै नामा ऐसो हरी ॥
जासु जपत भै अपदा टरी ॥4॥1॥5॥

हिन्दी अर्थ: रागु गोंड बाणी नामदेउ जीउ की घरु 2 सतिगुर प्रसादि ॥ हरी-नाम सिमरने से सभ भटकनें दूर हो जाती हैं; हे भाई ! नाम सिमर। यही है सबसे अच्छा धर्म। नाम सिमरने से (नीच और ऊँची) जाति कुल का भेद-भाव दूर हो जाता है। वह हरी-नाम ही मुझ अंधे का आसरा है। 1। मेरा उस परमात्मा को नमस्कार है। जिसका सिमरन करने से जमों का दुख नहीं रहता। 1। रहाउ। प्रभू ने हरणाक्षस (दैत्य) को मारा। अजामल पापी को बैकुंठ में जगह दी। उस हरी का नाम तोते को पढ़ाते हुए वैश्वा भी विकारों से हट गई; वही प्रभू मेरी आँखों की पुतली है। 2। पूतना दाई का भी उद्धार हो गया। जब उसने हरी-नाम सिमरा; जो बच्चों को मरने वाली और कपट से भरी हुई थी सिमरन की बरकति से ही द्रोपदी (निरादरी से) बची थी। गौतम की नेक स्त्री का पार उतारा हुआ था। जो (गौतम के श्राप से) शिला बन गई थी। 3। उसी प्रभू ने केसी व कंस का नाश किया था। और काली नाग की जान बख्श दी थी। नामदेव विनती करता है - प्रभू ऐसा (कृपालु बख्शिंद) है कि उसका नाम सिमरने से सब डर और मुसीबतें टल जाती हैं। 4। 1। 5।

गोंड ॥

गोंड ॥
भैरउ भूत सीतला धावै ॥
खर बाहनु उहु छारु उडावै ॥1॥
हउ तउ एकु रमईआ लैहउ ॥
आन देव बदलावनि दैहउ ॥1॥ रहाउ ॥
सिव सिव करते जो नरु धिआवै ॥
बरद चढे डउरू ढमकावै ॥2॥
महा माई की पूजा करै ॥
नर सै नारि होइ अउतरै ॥3॥
तू कहीअत ही आदि भवानी ॥
मुकति की बरीआ कहा छपानी ॥4॥
गुरमति राम नाम गहु मीता ॥
प्रणवै नामा इउ कहै गीता ॥5॥2॥6॥

हिन्दी अर्थ: गोंड॥ जो मनुष्य भैरव की ओर जाता है (भाव। जो भैरव की आराधना करता है) वह (ज्यादा से ज्यादा भैरव जैसा ही) भूत बन जाता है। जो सीतला को आराधता है वह (सीतला की ही तरह) गधे की सवारी करता है और (गधे के साथ) राख ही उड़ाता है। 1। (हे पण्डित !) मैं तो एक सुंदर राम का नाम ही लूँगा। (आपके) बाकी सारे देवताओं को उस नाम के बदले में दे दूँगा। (अर्थात। प्रभू-नाम के मुकाबले में मुझे आपके किसी भी देवते की आवश्यक्ता नहीं है)। 1। रहाउ। जो मनुष्य शिव का नाम जपता है वह (ज्यादा से ज्यादा जो कुछ हासिल कर सकता है वह ये है कि शिव का रूप ले के। शिव की सवारी) बैल के ऊपर चढ़ता है और (शिव की ही तरह) डमरू बजाता है। 2। जो मनुष्य पार्वती की पूजा करता है वह मनुष्य नर से नारी हो के जन्म लेता है (क्योंकि पूजा करने वाला अपने पूज्य का रूप ही बन सकता है)। 3। हे भवानी ! आप सबका आदि कहलवाती हैं। पर (अपने भक्तों को) मुक्ति देने के समय आप भी। पता नहीं कहाँ छुपी रहती हैं (भाव। मुक्ति भवानी के पास भी नहीं है)। 4। सो। नामदेव विनती करता है- हे मित्र (पण्डित !) सतिगुरू की शिक्षा ले के परमात्मा के नाम की ओट ले। (आपकी धर्म-पुस्तक) गीता भी यही उपदेश देती है। 5। 2। 6।

बिलावलु गोंड ॥

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बिलावलु गोंड ॥
आजु नामे बीठलु देखिआ मूरख को समझाऊ रे ॥ रहाउ ॥
पांडे तुमरी गाइत्री लोधे का खेतु खाती थी ॥
लै करि ठेगा टगरी तोरी लांगत लांगत जाती थी ॥1॥
पांडे तुमरा महादेउ धउले बलद चड़िआ आवतु देखिआ था ॥
मोदी के घर खाणा पाका वा का लड़का मारिआ था ॥2॥

हिन्दी अर्थ: बिलावलु गोंड ॥ हे पांडे ! मैंने तो इसी जनम में परमात्मा के दर्शन कर लिए हैं (पर। आप मूर्ख ही रहा। आपको दर्शन नहीं हुए; आ) मैं (आप) मूर्ख को समझाऊँ (कि आपको दर्शन क्यों नहीं होते)। 1। रहाउ। हे पांडे ! (पहली बात तो ये कि जिस गायत्री का आप पाठ करते हैं उस पर आपकी श्रद्धा नहीं बन सकती। क्योंकि) आपकी गायत्री (वह है जिसके बारे में आप खुद ही कहते हैं कि एक बार श्राप के कारण ये गाय की जून में आ के) एक लोधे जाट के खेत को चरने चली गई। उसने डंडा मार के लात तोड़ दी तब (से बेचारी) लंगड़ा-लंगड़ा के चलने लगी। 1। हे पांडे ! (फिर आप जिस शिव की आराधना करते हैं उसे ही बड़ा क्रोधी समझते हैं और कहते हैं कि गुस्से में आ के वह श्राप दे देता है। भस्म कर देता है। ऐसे शिव से आप प्यार कैसे कर सकते हैं।) आपका शिव (तो वह है जिसके बारे में आप कहते हैं) किसी भण्डारी के घर में उसके लिए भोजन तैयार हुआ। शिव को सफेद बैल पर चढ़ा हुआ जाता देखा। (भाव। आप बताते हैं कि शिव जी सफेद बैल की सवारी करते थे) (पर। शायद वह भोजन पसंद नहीं आया। शिव जी ने श्राप दे के) उसका लड़का मार दिया। 2।

रचयिता और स्रोत

इस अंग के रचयिता-संकेत: भगत नामदेव जी।

देवनागरी लिप्यन्तरण और हिन्दी अर्थ के साथ पढ़िए। उपलब्ध हिन्दी अर्थ का आधार बानीडीबी में संकलित प्रोफ़ेसर साहिब सिंह की टीका है। मूल गुरमुखी और विस्तृत व्याख्या के लिए गुरु ग्रंथ दर्पन, अंग ८७४ खोल सकते हैं। स्वतंत्र अंग्रेज़ी अनुवाद संत सिंह खालसा के पाठ में है।

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