राग गोंड
दिन के मध्य का राग, कम सुना जाने वाला।
गोंड राग दिन के मध्य का है, ग्रंथ साहिब में कम मिलने वाला। नाम का सम्बन्ध मध्य-भारत के गोंड समुदाय से बताया जाता है, जिनकी अपनी एक प्राचीन संगीत-परम्परा है।
ग्रंथ में गोंड की रचनाएँ अंग आठ-सौ-साठ के क़रीब से शुरू होती हैं, संख्या में सीमित।
“राम जनाणनी मनहि न दहो ।” गोंड M5