भगत नामदेव
1270-1350 · Pandharpur, Maharashtra · 61 शबद
Pandharpur के विट्ठल मंदिर के सामने एक दर्ज़ी का बच्चा खड़ा था, हाथ में दूध का कटोरा। माँ ने कहा था, “जा, विट्ठल को दूध पिला कर आ।” बच्चा 5 साल का था। मूर्ति के सामने कटोरा रखा। मूर्ति ने नहीं पिया। बच्चे ने रोना शुरू किया। फिर परंपरा कहती है, मूर्ति ने उठ कर पिया।
यह कथा सच हो या न हो, यह नामदेव की पूरी journey का thesis है, सीधा भाव, बिना mediation। 1270 में Maharashtra के Naras-Vamani गाँव में पैदा हुए, बाद में Pandharpur, और last 20 साल पंजाब के Ghuman में बिताए। इसीलिए उनकी वाणी मराठी-influence carry करती है मगर पंजाबी region में popular हुई।
आदि ग्रंथ में 61 शबद। एक specific quality: नामदेव की वाणी अक्सर सीधी pure praise रहती है, philosophical argument में जाने के बजाय। यह “जो दिख रहा है, वो ही है” वाला स्वर।
नामदेव शबद आदि ग्रंथ में:
- नामदेव शबद गउड़ी मेंअंग 345-346
- नामदेव शबद आसा मेंअंग 485-487
- नामदेव शबद धनासरी मेंअंग 693-695
- नामदेव शबद मलार मेंअंग 1292