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महला 1, गुरु नानक देव जी
1469-1539 · सिख परंपरा के संस्थापक · 974 शबद
एक रात सुल्तानपुर लोधी के बाहर बेईं नदी में डुबकी लगाने उतरे, और तीन दिन तक वापस नहीं आए। चौथे दिन निकले, और पहली बात यह कही, "ना कोई हिंदू, ना कोई मुसलमान।" 1499 की बात है।
उस एक वाक्य में पूरी सिख परंपरा का बीज है। पहले मज़हबी पहचान को घोल दिया, फिर नया सवाल पूछा, "तो क्या है?" जवाब आगे के 38 साल की घूम-घूम कर दी गई सीख में आया, चार उदासियाँ, और जो वाणी आज ग्रंथ साहिब में 974 शबद के रूप में है।
नानक कोई यंत्र गढ़ने वाले कारीगर नहीं थे, मगर पूरी व्यवस्था को एक साथ सोचने वाले चिंतक थे। जपजी साहिब उनके समूचे सृष्टि-दर्शन को 38 पउड़ियों में समेट देती है। हुकम (सृष्टि का विधान), नदर (कृपा), साच (सत्य), सेवा, इन चार खंभों पर पूरा विचार खड़ा है।
महला 1 की वाणी आदि ग्रंथ में बिखरी है, सब प्रमुख रागों में। मुख्य रचनाएँ:
- जपजी साहिबअंग 1-8
- आसा-दी-वारअंग 462-475
- सोदर-रहिरासअंग 8-12
- सोहिलाअंग 12-13
- बारहमाहा (तुखारी)अंग 1107-1110
- सिद्ध गोष्ठि (रामकली)अंग 938-946
आदि ग्रंथ में इनके शबद
हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, राग के अनुसार, ग्रंथ के क्रम में।
सलोक और अन्य वाणी (49)
- ॥ जपु ॥अंग 1
- हुकमी होवनि आकार हुकमु न कहिआ जाई ॥अंग 1
- गावै को ताणु होवै किसै ताणु ॥अंग 1
- साचा साहिबु साचु नाइ भाखिआ भाउ अपारु ॥अंग 2
- थापिआ न जाइ कीता न होइ ॥अंग 2
- तीरथि नावा जे तिसु भावा विणु भाणे कि नाइ करी ॥अंग 2
- जे जुग चारे आरजा होर दसूणी होइ ॥अंग 2
- सुणिऐ सिध पीर सुरि नाथ ॥अंग 2
- सुणिऐ ईसरु बरमा इंदु ॥अंग 2
- सुणिऐ सतु संतोखु गिआनु ॥अंग 3
- सुणिऐ सरा गुणा के गाह ॥अंग 3
- मंने की गति कही न जाइ ॥अंग 3
- मंनै सुरति होवै मनि बुधि ॥अंग 3
- मंनै मारगि ठाक न पाइ ॥अंग 3
- मंनै पावहि मोखु दुआरु ॥अंग 3
- पंच परवाण पंच परधानु ॥अंग 3
- असंख जप असंख भाउ ॥अंग 3
- असंख मूरख अंध घोर ॥अंग 4
- असंख नाव असंख थाव ॥अंग 4
- भरीऐ हथु पैरु तनु देह ॥अंग 4
- तीरथु तपु दइआ दतु दानु ॥अंग 4
- पाताला पाताल लख आगासा आगास ॥अंग 5
- सालाही सालाहि एती सुरति न पाईआ ॥अंग 5
- अंतु न सिफती कहणि न अंतु ॥अंग 5
- बहुता करमु लिखिआ ना जाइ ॥अंग 5
- अमुल गुण अमुल वापार ॥अंग 5
- सो दरु केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब समाले ॥अंग 6
- मुंदा संतोखु सरमु पतु झोली धिआन की करहि बिभूति ॥अंग 6
- भुगति गिआनु दइआ भंडारणि घटि घटि वाजहि नाद ॥अंग 6
- एका माई जुगति विआई तिनि चेले परवाणु ॥अंग 7
- आसणु लोइ लोइ भंडार ॥अंग 7
- इक दू जीभौ लख होहि लख होवहि लख वीस ॥अंग 7
- आखणि जोरु चुपै नह जोरु ॥अंग 7
- राती रुती थिती वार ॥अंग 7
- धरम खंड का एहो धरमु ॥अंग 7
- गिआन खंड महि गिआनु परचंडु ॥अंग 7
- तिथै होरु न कोई होरु ॥अंग 8
- जतु पाहारा धीरजु सुनिआरु ॥अंग 8
- पवणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु ॥अंग 8
- सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब समाले ॥अंग 8
- सुणि वडा आखै सभु कोइ ॥अंग 9
- आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥अंग 9
- तितु सरवरड़ै भईले निवासा पाणी पावकु तिनहि कीआ ॥अंग 12
- जै घरि कीरति आखीऐ करते का होइ बीचारो ॥अंग 12
- छिअ घर छिअ गुर छिअ उपदेस ॥अंग 12
- गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती ॥अंग 13
- पड़ि॑ पुस्तक संधिआ बादं ॥अंग 1353
- उतंगी पैओहरी गहिरी गंभीरी ॥अंग 1410
- उदोसाहै किआ नीसानी तोटि न आवै अंनी ॥अंग 1412
सिरी राग (60)
- मोती त मंदर ऊसरहि रतनी त होहि जड़ाउ ॥अंग 14
- कोटि कोटी मेरी आरजा पवणु पीअणु अपिआउ ॥अंग 14
- लेखै बोलणु बोलणा लेखै खाणा खाउ ॥अंग 15
- लबु कुता कूड़ु चूहड़ा ठगि खाधा मुरदारु ॥अंग 15
- अमलु गलोला कूड़ का दिता देवणहारि ॥अंग 15
- जालि मोहु घसि मसु करि मति कागदु करि सारु ॥अंग 16
- सभि रस मिठे मंनिऐ सुणिऐ सालोणे ॥अंग 16
- कुंगू की कांइआ रतना की ललिता अगरि वासु तनि सासु ॥अंग 17
- गुणवंती गुण वीथरै अउगुणवंती झूरि ॥अंग 17
- आवहु भैणे गलि मिलह अंकि सहेलड़ीआह ॥अंग 17
- भली सरी जि उबरी हउमै मुई घराहु ॥अंग 18
- धातु मिलै फुनि धातु कउ सिफती सिफति समाइ ॥अंग 18
- ध्रिगु जीवणु दोहागणी मुठी दूजै भाइ ॥अंग 18
- भाहि बलंदी विझवी धूउ न निकसिओ काइ ॥अंग 19
- तनु जलि बलि माटी भइआ मनु माइआ मोहि मनूरु ॥अंग 19
- नानक बेड़ी सच की तरीऐ गुर वीचारि ॥अंग 20
- सुणि मन मित्र पिआरिआ मिलु वेला है एह ॥अंग 20
- मरणै की चिंता नही जीवण की नही आस ॥अंग 20
- एहु मनो मूरखु लोभीआ लोभे लगा लोुभानु ॥अंग 21
- इकु तिलु पिआरा वीसरै रोगु वडा मन माहि ॥अंग 21
- हरि हरि जपहु पिआरिआ गुरमति ले हरि बोलि ॥अंग 22
- भरमे भाहि न विझवै जे भवै दिसंतर देसु ॥अंग 22
- वणजु करहु वणजारिहो वखरु लेहु समालि ॥अंग 22
- धनु जोबनु अरु फुलड़ा नाठीअड़े दिन चारि ॥अंग 23
- आपे रसीआ आपि रसु आपे रावणहारु ॥अंग 23
- इहु तनु धरती बीजु करमा करो सलिल आपाउ सारिंगपाणी ॥अंग 23
- अमलु करि धरती बीजु सबदो करि सच की आब नित देहि पाणी ॥अंग 24
- सोई मउला जिनि जगु मउलिआ हरिआ कीआ संसारो ॥अंग 24
- एकु सुआनु दुइ सुआनी नालि ॥अंग 24
- एका सुरति जेते है जीअ ॥अंग 24
- तू दरीआउ दाना बीना मै मछुली कैसे अंतु लहा ॥अंग 25
- कीता कहा करे मनि मानु ॥अंग 25
- अछल छलाई नह छलै नह घाउ कटारा करि सकै ॥अंग 25
- आखि आखि मनु वावणा जिउ जिउ जापै वाइ ॥अंग 53
- सभे कंत महेलीआ सगलीआ करहि सीगारु ॥अंग 53
- आपे गुण आपे कथै आपे सुणि वीचारु ॥अंग 54
- मछुली जालु न जाणिआ सरु खारा असगाहु ॥अंग 55
- मनि जूठै तनि जूठि है जिहवा जूठी होइ ॥अंग 55
- जपु तपु संजमु साधीऐ तीरथि कीचै वासु ॥अंग 56
- गुर ते निरमलु जाणीऐ निरमल देह सरीरु ॥अंग 57
- सुणि मन भूले बावरे गुर की चरणी लागु ॥अंग 57
- बिनु पिर धन सीगारीऐ जोबनु बादि खुआरु ॥अंग 58
- सतिगुरु पूरा जे मिलै पाईऐ रतनु बीचारु ॥अंग 59
- रे मन ऐसी हरि सिउ प्रीति करि जैसी जल कमलेहि ॥अंग 59
- मनमुखि भुलै भुलाईऐ भूली ठउर न काइ ॥अंग 60
- त्रिसना माइआ मोहणी सुत बंधप घर नारि ॥अंग 61
- राम नामि मनु बेधिआ अवरु कि करी वीचारु ॥अंग 62
- चिते दिसहि धउलहर बगे बंक दुआर ॥अंग 62
- डूंगरु देखि डरावणो पेईअड़ै डरीआसु ॥अंग 63
- मुकामु करि घरि बैसणा नित चलणै की धोख ॥अंग 64
- जोगी अंदरि जोगीआ ॥अंग 71
- पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा हुकमि पइआ गरभासि ॥अंग 74
- पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा बालक बुधि अचेतु ॥अंग 75
- दाती साहिब संदीआ किआ चलै तिसु नालि ॥अंग 83
- सिदकु सबूरी सादिका सबरु तोसा मलाइकां ॥अंग 83
- फकड़ जाती फकड़ु नाउ ॥अंग 83
- कुदरति करि कै वसिआ सोइ ॥अंग 83
- गलंी असी चंगीआ आचारी बुरीआह ॥अंग 85
- कुबुधि डूमणी कुदइआ कसाइणि पर निंदा घट चूहड़ी मुठी क्रोधि चंडालि ॥अंग 91
- किआ हंसु किआ बगुला जा कउ नदरि करेइ ॥अंग 91
माझ (74)
- सबदि रंगाए हुकमि सबाए ॥अंग 109
- गुरु दाता गुरु हिवै घरु गुरु दीपकु तिह लोइ ॥अंग 137
- पहिलै पिआरि लगा थण दुधि ॥अंग 137
- दस बालतणि बीस रवणि तीसा का सुंदरु कहावै ॥अंग 138
- तूं करता पुरखु अगंमु है आपि स्रिसटि उपाती ॥अंग 138
- अखी देखै जिहवा बोलै कंनी सुरति समाइ ॥अंग 138
- तुधु आपे जगतु उपाइ कै तुधु आपे धंधै लाइआ ॥अंग 138
- सदा सदा तूं एकु है तुधु दूजा खेलु रचाइआ ॥अंग 139
- सुइने कै परबति गुफा करी कै पाणी पइआलि ॥अंग 139
- वसत्र पखालि पखाले काइआ आपे संजमि होवै ॥अंग 139
- काइआ हंसि संजोगु मेलि मिलाइआ ॥अंग 139
- कूड़ु बोलि मुरदारु खाइ ॥अंग 139
- इकि कंद मूलु चुणि खाहि वण खंडि वासा ॥अंग 140
- जे रतु लगै कपड़ै जामा होइ पलीतु ॥अंग 140
- जा हउ नाही ता किआ आखा किहु नाही किआ होवा ॥अंग 140
- माहा रुती सभ तूं घड़ी मूरत वीचारा ॥अंग 140
- मिहर मसीति सिदकु मुसला हकु हलालु कुराणु ॥अंग 140
- हकु पराइआ नानका उसु सूअर उसु गाइ ॥अंग 141
- पंजि निवाजा वखत पंजि पंजा पंजे नाउ ॥अंग 141
- इकि रतन पदारथ वणजदे इकि कचै दे वापारा ॥अंग 141
- मुसलमाणु कहावणु मुसकलु जा होइ ता मुसलमाणु कहावै ॥अंग 141
- राजे रयति सिकदार कोइ न रहसीओ ॥अंग 141
- नदीआ होवहि धेणवा सुंम होवहि दुधु घीउ ॥अंग 141
- भार अठारह मेवा होवै गरुड़ा होइ सुआउ ॥अंग 142
- जे देहै दुखु लाईऐ पाप गरह दुइ राहु ॥अंग 142
- अगी पाला कपड़ु होवै खाणा होवै वाउ ॥अंग 142
- बदफैली गैबाना खसमु न जाणई ॥अंग 142
- सो जीविआ जिसु मनि वसिआ सोइ ॥अंग 142
- किआ खाधै किआ पैधै होइ ॥अंग 142
- जाती दै किआ हथि सचु परखीऐ ॥अंग 142
- जा पका ता कटिआ रही सु पलरि वाड़ि ॥अंग 142
- वेखु जि मिठा कटिआ कटि कुटि बधा पाइ ॥अंग 142
- इकना मरणु न चिति आस घणेरिआ ॥अंग 143
- मछी तारू किआ करे पंखी किआ आकासु ॥अंग 143
- कैहा कंचनु तुटै सारु ॥अंग 143
- आपे कुदरति साजि कै आपे करे बीचारु ॥अंग 143
- हम जेर जिमी दुनीआ पीरा मसाइका राइआ ॥अंग 143
- न देव दानवा नरा ॥ न सिध साधिका धरा ॥अंग 143
- न दादे दिहंद आदमी ॥ न सपत जेर जिमी ॥अंग 144
- न सूर ससि मंडलो ॥ न सपत दीप नह जलो ॥ अंन पउण थिरु न कुई ॥अंग 144
- न रिजकु दसत आ कसे ॥अंग 144
- परंदए न गिराह जर ॥अंग 144
- नानक लिलारि लिखिआ सोइ ॥अंग 144
- सचा तेरा हुकमु गुरमुखि जाणिआ ॥अंग 144
- सीहा बाजा चरगा कुहीआ एना खवाले घाह ॥अंग 144
- इकि मासहारी इकि त्रिणु खाहि ॥अंग 144
- पूरे गुर की कार करमि कमाईऐ ॥अंग 144
- तुधु भावै ता वावहि गावहि तुधु भावै जलि नावहि ॥अंग 144
- जा तूं वडा सभि वडिआंईआ चंगै चंगा होई ॥अंग 145
- सतिगुरु सेवि निसंगु भरमु चुकाईऐ ॥अंग 145
- कलि काती राजे कासाई धरमु पंख करि उडरिआ ॥अंग 145
- भगता तै सैसारीआ जोड़ु कदे न आइआ ॥अंग 145
- सबाही सालाह जिनी धिआइआ इक मनि ॥अंग 145
- जा तूं ता किआ होरि मै सचु सुणाईऐ ॥अंग 146
- सचा भोजनु भाउ सतिगुरि दसिआ ॥अंग 146
- पहिरा अगनि हिवै घरु बाधा भोजनु सारु कराई ॥अंग 147
- विणु सचे सभु कूड़ु कूड़ु कमाईऐ ॥अंग 147
- नानक गुरु संतोखु रुखु धरमु फुलु फल गिआनु ॥अंग 147
- सुइने का बिरखु पत परवाला फुल जवेहर लाल ॥अंग 147
- जीवदिआ मरु मारि न पछोताईऐ ॥अंग 147
- तुमी तुमा विसु अकु धतूरा निमु फलु ॥अंग 147
- मति पंखेरू किरतु साथि कब उतम कब नीच ॥अंग 147
- केते कहहि वखाण कहि कहि जावणा ॥अंग 148
- नारी पुरख पिआरु प्रेमि सीगारीआ ॥अंग 148
- मारू मीहि न त्रिपतिआ अगी लहै न भुख ॥अंग 148
- खसमै कै दरबारि ढाढी वसिआ ॥अंग 148
- खतिअहु जंमे खते करनि त खतिआ विचि पाहि ॥अंग 149
- नानक बोलणु झखणा दुख छडि मंगीअहि सुख ॥अंग 149
- चारे कुंडा देखि अंदरु भालिआ ॥अंग 149
- सतिगुरु होइ दइआलु त सरधा पूरीऐ ॥अंग 149
- सिरु खोहाइ पीअहि मलवाणी जूठा मंगि मंगि खाही ॥अंग 149
- तुधु सचे सुबहानु सदा कलाणिआ ॥अंग 150
- आपि बुझाए सोई बूझै ॥अंग 150
- हउ ढाढी वेकारु कारै लाइआ ॥अंग 150
गउड़ी (40)
- भउ मुचु भारा वडा तोलु ॥अंग 151
- डरि घरु घरि डरु डरि डरु जाइ ॥अंग 151
- माता मति पिता संतोखु ॥अंग 151
- पउणै पाणी अगनी का मेलु ॥अंग 152
- सुणि सुणि बूझै मानै नाउ ॥ ता कै सद बलिहारै जाउ ॥अंग 152
- जातो जाइ कहा ते आवै ॥अंग 152
- कामु क्रोधु माइआ महि चीतु ॥अंग 153
- उलटिओ कमलु ब्रहमु बीचारि ॥अंग 153
- सतिगुरु मिलै सु मरणु दिखाए ॥अंग 153
- किरतु पइआ नह मेटै कोइ ॥अंग 154
- जिनि अकथु कहाइआ अपिओ पीआइआ ॥अंग 154
- जनमि मरै त्रै गुण हितकारु ॥अंग 154
- अंम्रित काइआ रहै सुखाली बाजी इहु संसारो ॥अंग 154
- अवरि पंच हम एक जना किउ राखउ घर बारु मना ॥अंग 155
- मुंद्रा ते घट भीतरि मुंद्रा कांइआ कीजै खिंथाता ॥अंग 155
- अउखध मंत्र मूलु मन एकै जे करि द्रिड़ु चितु कीजै रे ॥अंग 156
- कत की माई बापु कत केरा किदू थावहु हम आए ॥अंग 156
- रैणि गवाई सोइ कै दिवसु गवाइआ खाइ ॥अंग 156
- हरणी होवा बनि बसा कंद मूल चुणि खाउ ॥अंग 157
- जै घरि कीरति आखीऐ करते का होइ बीचारो ॥अंग 157
- निधि सिधि निरमल नामु बीचारु ॥अंग 220
- मनु कुंचरु काइआ उदिआनै ॥अंग 221
- ना मनु मरै न कारजु होइ ॥अंग 222
- हउमै करतिआ नह सुखु होइ ॥अंग 222
- दूजी माइआ जगत चित वासु ॥अंग 223
- अधिआतम करम करे ता साचा ॥अंग 223
- खिमा गही ब्रतु सील संतोखं ॥अंग 223
- ऐसो दासु मिलै सुखु होई ॥अंग 224
- ब्रहमै गरबु कीआ नही जानिआ ॥अंग 224
- चोआ चंदनु अंकि चड़ावउ ॥अंग 225
- सेवा एक न जानसि अवरे ॥अंग 225
- हठु करि मरै न लेखै पावै ॥अंग 226
- हउमै करत भेखी नही जानिआ ॥अंग 226
- प्रथमे ब्रहमा कालै घरि आइआ ॥अंग 227
- बोलहि साचु मिथिआ नही राई ॥अंग 227
- रामि नामि चितु रापै जा का ॥अंग 228
- जिउ गाई कउ गोइली राखहि करि सारा ॥ अहिनिसि पालहि राखि लेहि आतम सुखु धारा ॥1॥अंग 228
- गुर परसादी बूझि ले तउ होइ निबेरा ॥अंग 229
- धन थीई दुबलि कंत हावै केव नैणी देखए ॥अंग 242
- किउ धीरैगी नाह बिना प्रभ वेपरवाहे ॥अंग 243
आसा (130)
- सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब सम॑ाले ॥अंग 347
- सुणि वडा आखै सभ कोई ॥अंग 348
- आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥अंग 349
- जे दरि मांगतु कूक करे महली खसमु सुणे ॥अंग 349
- ताल मदीरे घट के घाट ॥अंग 349
- जेता सबदु सुरति धुनि तेती जेता रूपु काइआ तेरी ॥अंग 350
- वाजा मति पखावजु भाउ ॥अंग 350
- पउणु उपाइ धरी सभ धरती जल अगनी का बंधु कीआ ॥अंग 350
- करम करतूति बेलि बिसथारी राम नामु फलु हूआ ॥अंग 351
- मै गुण गला के सिरि भार ॥अंग 351
- करि किरपा अपनै घरि आइआ ता मिलि सखीआ काजु रचाइआ ॥अंग 351
- ग्रिहु बनु समसरि सहजि सुभाइ ॥अंग 351
- एको सरवरु कमल अनूप ॥अंग 352
- गुरमति साची हुजति दूरि ॥अंग 352
- जो तिनि कीआ सो सचु थीआ ॥अंग 352
- इकि आवहि इकि जावहि आई ॥अंग 353
- निवि निवि पाइ लगउ गुर अपुने आतम रामु निहारिआ ॥अंग 353
- किस कउ कहहि सुणावहि किस कउ किसु समझावहि समझि रहे ॥अंग 353
- कोई भीखकु भीखिआ खाइ ॥अंग 354
- दुध बिनु धेनु पंख बिनु पंखी जल बिनु उतभुज कामि नाही ॥अंग 354
- काइआ ब्रहमा मनु है धोती ॥अंग 355
- सेवकु दासु भगतु जनु सोई ॥अंग 355
- काची गागरि देह दुहेली उपजै बिनसै दुखु पाई ॥अंग 355
- मोहु कुटंबु मोहु सभ कार ॥अंग 356
- आपि करे सचु अलख अपारु ॥अंग 356
- विदिआ वीचारी तां परउपकारी ॥अंग 356
- एक न भरीआ गुण करि धोवा ॥अंग 356
- पेवकड़ै धन खरी इआणी ॥अंग 357
- न किस का पूतु न किस की माई ॥अंग 357
- तितु सरवरड़ै भईले निवासा पाणी पावकु तिनहि कीआ ॥अंग 357
- छिअ घर छिअ गुर छिअ उपदेस ॥अंग 357
- लख लसकर लख वाजे नेजे लख उठि करहि सलामु ॥अंग 358
- दीवा मेरा एकु नामु दुखु विचि पाइआ तेलु ॥अंग 358
- देवतिआ दरसन कै ताई दूख भूख तीरथ कीए ॥अंग 358
- भीतरि पंच गुपत मनि वासे ॥अंग 359
- मनु मोती जे गहणा होवै पउणु होवै सूत धारी ॥अंग 359
- कीता होवै करे कराइआ तिसु किआ कहीऐ भाई ॥अंग 359
- गुर का सबदु मनै महि मुंद्रा खिंथा खिमा हढावउ ॥अंग 359
- गुड़ु करि गिआनु धिआनु करि धावै करि करणी कसु पाईऐ ॥अंग 360
- खुरासान खसमाना कीआ हिंदुसतानु डराइआ ॥अंग 360
- उतरि अवघटि सरवरि न॑ावै ॥अंग 411
- सभि जप सभि तप सभ चतुराई ॥अंग 412
- लेख असंख लिखि लिखि मानु ॥अंग 412
- एकु मरै पंचे मिलि रोवहि ॥अंग 413
- आपु वीचारै सु परखे हीरा ॥अंग 413
- गुरमुखि गिआनु धिआनु मनि मानु ॥अंग 414
- गावहि गीते चीति अनीते ॥अंग 414
- मनु मैगलु साकतु देवाना ॥अंग 415
- तनु बिनसै धनु का को कहीऐ ॥अंग 416
- गुरु सेवे सो ठाकुर जानै ॥अंग 416
- जिन सिरि सोहनि पटीआ मांगी पाइ संधूरु ॥अंग 417
- कहा सु खेल तबेला घोड़े कहा भेरी सहनाई ॥अंग 417
- जैसे गोइलि गोइली तैसे संसारा ॥अंग 418
- चारे कुंडा ढूढीआ को नीम॑ी मैडा ॥अंग 418
- मनसा मनहि समाइले भउजलु सचि तरणा ॥अंग 419
- चले चलणहार वाट वटाइआ ॥अंग 419
- किआ जंगलु ढूढी जाइ मै घरि बनु हरीआवला ॥अंग 420
- जिन॑ी नामु विसारिआ दूजै भरमि भुलाई ॥अंग 420
- मै ओल॑गीआ ओल॑गी हम छोरू थारे ॥अंग 421
- केता आखणु आखीऐ ता के अंत न जाणा ॥अंग 421
- मनु रातउ हरि नाइ सचु वखाणिआ ॥अंग 421
- आवण जाणा किउ रहै किउ मेला होई ॥अंग 422
- ससै सोइ स्रिसटि जिनि साजी सभना साहिबु एकु भइआ ॥अंग 432
- मुंध जोबनि बालड़ीए मेरा पिरु रलीआला राम ॥अंग 435
- अनहदो अनहदु वाजै रुण झुणकारे राम ॥अंग 436
- मेरा मनो मेरा मनु राता राम पिआरे राम ॥अंग 437
- दूख बिसारणहारु सुआमी कीता जा का होवै ॥अंग 438
- तूं सुणि हरणा कालिआ की वाड़ीऐ राता राम ॥अंग 438
- बलिहारी गुर आपणे दिउहाड़ी सद वार ॥अंग 462
- नानक गुरू न चेतनी मनि आपणै सुचेत ॥अंग 463
- आपीन॑ै आपु साजिओ आपीन॑ै रचिओ नाउ ॥अंग 463
- सचे तेरे खंड सचे ब्रहमंड ॥अंग 463
- वडी वडिआई जा वडा नाउ ॥अंग 463
- विसमादु नाद विसमादु वेद ॥अंग 463
- कुदरति दिसै कुदरति सुणीऐ कुदरति भउ सुख सारु ॥अंग 464
- आपीन॑ै भोग भोगि कै होइ भसमड़ि भउरु सिधाइआ ॥अंग 464
- भै विचि पवणु वहै सदवाउ ॥अंग 464
- नानक निरभउ निरंकारु होरि केते राम रवाल ॥अंग 464
- नदरि करहि जे आपणी ता नदरी सतिगुरु पाइआ ॥अंग 465
- घड़ीआ सभे गोपीआ पहर कंन॑ गोपाल ॥अंग 465
- वाइनि चेले नचनि गुर ॥अंग 465
- नाउ तेरा निरंकारु है नाइ लइऐ नरकि न जाईऐ ॥अंग 465
- मुसलमाना सिफति सरीअति पड़ि पड़ि करहि बीचारु ॥अंग 465
- मिटी मुसलमान की पेड़ै पई कुमि॑आर ॥अंग 466
- बिनु सतिगुर किनै न पाइओ बिनु सतिगुर किनै न पाइआ ॥अंग 466
- हउ विचि आइआ हउ विचि गइआ ॥अंग 466
- पुरखां बिरखां तीरथां तटां मेघां खेतांह ॥अंग 467
- लख नेकीआ चंगिआईआ लख पुंना परवाणु ॥अंग 467
- सचा साहिबु एकु तूं जिनि सचो सचु वरताइआ ॥अंग 467
- पड़ि पड़ि गडी लदीअहि पड़ि पड़ि भरीअहि साथ ॥अंग 467
- लिखि लिखि पड़िआ ॥अंग 467
- भगत तेरै मनि भावदे दरि सोहनि कीरति गावदे ॥अंग 468
- कूड़ु राजा कूड़ु परजा कूड़ु सभु संसारु ॥अंग 468
- सचु ता परु जाणीऐ जा रिदै सचा होइ ॥अंग 468
- दानु महिंडा तली खाकु जे मिलै त मसतकि लाईऐ ॥अंग 468
- सचि कालु कूड़ु वरतिआ कलि कालख बेताल ॥अंग 468
- लबु पापु दुइ राजा महता कूड़ु होआ सिकदारु ॥अंग 468
- वदी सु वजगि नानका सचा वेखै सोइ ॥अंग 469
- धुरि करमु जिना कउ तुधु पाइआ ता तिनी खसमु धिआइआ ॥अंग 469
- दुखु दारू सुखु रोगु भइआ जा सुखु तामि न होई ॥अंग 469
- कुंभे बधा जलु रहै जल बिनु कुंभु न होइ ॥अंग 469
- पड़िआ होवै गुनहगारु ता ओमी साधु न मारीऐ ॥अंग 469
- नानक मेरु सरीर का इकु रथु इकु रथवाहु ॥अंग 470
- साम कहै सेतंबरु सुआमी सच महि आछै साचि रहे ॥ सभु को सचि समावै ॥अंग 470
- सतिगुर विटहु वारिआ जितु मिलिऐ खसमु समालिआ ॥अंग 470
- सिंमल रुखु सराइरा अति दीरघ अति मुचु ॥अंग 470
- पड़ि पुसतक संधिआ बादं ॥अंग 470
- कपड़ु रूपु सुहावणा छडि दुनीआ अंदरि जावणा ॥अंग 470
- दइआ कपाह संतोखु सूतु जतु गंढी सतु वटु ॥अंग 471
- लख चोरीआ लख जारीआ लख कूड़ीआ लख गालि ॥अंग 471
- नाइ मंनिऐ पति ऊपजै सालाही सचु सूतु ॥अंग 471
- तगु न इंद्री तगु न नारी ॥अंग 471
- साहिबु होइ दइआलु किरपा करे ता साई कार कराइसी ॥अंग 471
- गऊ बिराहमण कउ करु लावहु गोबरि तरणु न जाई ॥अंग 471
- माणस खाणे करहि निवाज ॥अंग 471
- चितै अंदरि सभु को वेखि नदरी हेठि चलाइदा ॥अंग 472
- जे मोहाका घरु मुहै घरु मुहि पितरी देइ ॥अंग 472
- जिउ जोरू सिरनावणी आवै वारो वार ॥अंग 472
- तुरे पलाणे पउण वेग हर रंगी हरम सवारिआ ॥अंग 472
- जे करि सूतकु मंनीऐ सभ तै सूतकु होइ ॥अंग 472
- मन का सूतकु लोभु है जिहवा सूतकु कूड़ु ॥अंग 472
- सभो सूतकु भरमु है दूजै लगै जाइ ॥अंग 472
- सतिगुरु वडा करि सालाहीऐ जिसु विचि वडीआ वडिआईआ ॥अंग 473
- पहिला सुचा आपि होइ सुचै बैठा आइ ॥अंग 473
- भंडि जंमीऐ भंडि निंमीऐ भंडि मंगणु वीआहु ॥अंग 473
- सभु को आखै आपणा जिसु नाही सो चुणि कढीऐ ॥अंग 473
- नानक फिकै बोलिऐ तनु मनु फिका होइ ॥अंग 473
- अंदरहु झूठे पैज बाहरि दुनीआ अंदरि फैलु ॥अंग 473
- आपे ही करणा कीओ कल आपे ही तै धारीऐ ॥अंग 474
- आपे भांडे साजिअनु आपे पूरणु देइ ॥अंग 475
गूजरी (7)
- तेरा नामु करी चनणाठीआ जे मनु उरसा होइ ॥अंग 489
- नाभि कमल ते ब्रहमा उपजे बेद पड़हि मुखि कंठि सवारि ॥अंग 489
- एक नगरी पंच चोर बसीअले बरजत चोरी धावै ॥अंग 503
- कवन कवन जाचहि प्रभ दाते ता के अंत न परहि सुमार ॥अंग 503
- ऐ जी जनमि मरै आवै फुनि जावै बिनु गुर गति नही काई ॥अंग 504
- ऐ जी ना हम उतम नीच न मधिम हरि सरणागति हरि के लोग ॥अंग 504
- भगति प्रेम आराधितं सचु पिआस परम हितं ॥अंग 505
बिहागड़ा (2)
वडहंस (13)
- अमली अमलु न अंबड़ै मछी नीरु न होइ ॥अंग 557
- गुणवंती सहु राविआ निरगुणि कूके काइ ॥अंग 557
- मोरी रुण झुण लाइआ भैणे सावणु आइआ ॥अंग 557
- काइआ कूड़ि विगाड़ि काहे नाईऐ ॥अंग 565
- करहु दइआ तेरा नामु वखाणा ॥अंग 566
- धंनु सिरंदा सचा पातिसाहु जिनि जगु धंधै लाइआ ॥अंग 578
- आवहु मिलहु सहेलीहो सचड़ा नामु लएहां ॥अंग 579
- सचु सिरंदा सचा जाणीऐ सचड़ा परवदगारो ॥अंग 580
- जिनि जगु सिरजि समाइआ सो साहिबु कुदरति जाणोवा ॥अंग 581
- बाबा आइआ है उठि चलणा इहु जगु झूठु पसारोवा ॥अंग 581
- जालउ ऐसी रीति जितु मै पिआरा वीसरै ॥अंग 590
- घर ही मुंधि विदेसि पिरु नित झूरे संम्हाले ॥अंग 594
- नानक गाली कूड़ीआ बाझु परीति करेइ ॥अंग 594
सोरठ (18)
- सभना मरणा आइआ वेछोड़ा सभनाह ॥अंग 595
- मनु हाली किरसाणी करणी सरमु पाणी तनु खेतु ॥अंग 595
- माइ बाप को बेटा नीका ससुरै चतुरु जवाई ॥अंग 596
- पुड़ु धरती पुड़ु पाणी आसणु चारि कुंट चउबारा ॥अंग 596
- हउ पापी पतितु परम पाखंडी तू निरमलु निरंकारी ॥अंग 596
- अलख अपार अगंम अगोचर ना तिसु कालु न करमा ॥अंग 597
- जिउ मीना बिनु पाणीऐ तिउ साकतु मरै पिआस ॥अंग 597
- घटि घटि रवि रहिआ बनवारी ॥अंग 597
- अपना घरु मूसत राखि न साकहि की पर घरु जोहन लागा ॥अंग 598
- मन रे राम जपहु सुखु होई ॥अंग 598
- जा तिसु भावा तद ही गावा ॥अंग 599
- दुबिधा न पड़उ हरि बिनु होरु न पूजउ मड़ै मसाणि न जाई ॥अंग 634
- आसा मनसा बंधनी भाई करम धरम बंधकारी ॥अंग 635
- जिन॑ी सतिगुरु सेविआ पिआरे तिन॑ के साथ तरे ॥अंग 636
- तू गुणदातौ निरमलो भाई निरमलु ना मनु होइ ॥अंग 636
- सोरठि सदा सुहावणी जे सचा मनि होइ ॥अंग 642
- इक दझहि इक दबीअहि इकना कुते खाहि ॥अंग 648
- ता की रजाइ लेखिआ पाइ अब किआ कीजै पांडे ॥अंग 653
धनासरी (14)
- दूख विसारणु सेविआ सदा सदा दातारु ॥1॥अंग 660
- हम आदमी हां इक दमी मुहलति मुहतु न जाणा ॥अंग 660
- किउ सिमरी सिवरिआ नही जाइ ॥अंग 661
- नदरि करे ता सिमरिआ जाइ ॥अंग 661
- तपि तपि खपै बहुतु बेकार ॥अंग 661
- चोरु सलाहे चीतु न भीजै ॥अंग 662
- काइआ कागदु मनु परवाणा ॥अंग 662
- कालु नाही जोगु नाही नाही सत का ढबु ॥अंग 662
- गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती ॥अंग 663
- गुरु सागरु रतनी भरपूरे ॥अंग 685
- सहजि मिलै मिलिआ परवाणु ॥अंग 686
- तीरथि नावण जाउ तीरथु नामु है ॥अंग 687
- गुर गिआनु अपारा सिरजणहारा जिनि सिरजी तिनि गोई ॥अंग 688
- लेखु न मिटई पुरबि कमाइआ किआ जाणा किआ होसी ॥अंग 689
तिलंग (6)
सूही (39)
- भांडा धोइ बैसि धूपु देवहु तउ दूधै कउ जावहु ॥अंग 728
- अंतरि वसै न बाहरि जाइ ॥अंग 728
- उजलु कैहा चिलकणा घोटिम कालड़ी मसु ॥अंग 729
- जप तप का बंधु बेड़ुला जितु लंघहि वहेला ॥अंग 729
- जिन कउ भांडै भाउ तिना सवारसी ॥अंग 729
- भांडा हछा सोइ जो तिसु भावसी ॥अंग 730
- जोगी होवै जोगवै भोगी होवै खाइ ॥अंग 730
- जोगु न खिंथा जोगु न डंडै जोगु न भसम चड़ाईऐ ॥अंग 730
- कउण तराजी कवणु तुला तेरा कवणु सराफु बुलावा ॥अंग 730
- सभि अवगण मै गुणु नही कोई ॥अंग 750
- माणस जनमु दुलंभु गुरमुखि पाइआ ॥अंग 751
- जिउ आरणि लोहा पाइ भंनि घड़ाईऐ ॥अंग 752
- मनहु न नामु विसारि अहिनिसि धिआईऐ ॥अंग 752
- गुण सार न जाणी भरमि भुलाणी जोबनु बादि गवाइआ ॥अंग 763
- हम घरि साजन आए ॥अंग 764
- आवहु सजणा हउ देखा दरसनु तेरा राम ॥अंग 764
- जिनि कीआ तिनि देखिआ जगु धंधड़ै लाइआ ॥अंग 765
- मेरा मनु राता गुण रवै मनि भावै सोई ॥अंग 766
- सूहा रंगु सुपनै निसी बिनु तागे गलि हारु ॥अंग 786
- वाहु खसम तू वाहु जिनि रचि रचना हम कीए ॥अंग 788
- उजल मोती सोहणे रतना नालि जुड़ंनि ॥अंग 788
- नानक इहु तनु जालि जिनि जलिऐ नामु विसारिआ ॥अंग 789
- नानक मन के कंम फिटिआ गणत न आवही ॥अंग 789
- नानक बदरा माल का भीतरि धरिआ आणि ॥अंग 789
- नावण चले तीरथी मनि खोटै तनि चोर ॥अंग 789
- दुइ दीवे चउदह हटनाले ॥अंग 789
- राती होवनि कालीआ सुपेदा से वंन ॥अंग 789
- चोरा जारा रंडीआ कुटणीआ दीबाणु ॥ वेदीना की दोसती वेदीना का खाणु ॥अंग 790
- बांगा बुरगू सिंङीआ नाले मिली कलाण ॥अंग 790
- सतिगुर भीखिआ देहि मै तूं संम्रथु दातारु ॥अंग 790
- इको कंतु सबाईआ जिती दरि खड़ीआह ॥अंग 790
- सभे कंतै रतीआ मै दोहागणि कितु ॥अंग 790
- हउ बलिहारी तिन कउ सिफति जिना दै वाति ॥अंग 790
- जिनी न पाइओ प्रेम रसु कंत न पाइओ साउ ॥अंग 790
- सउ ओलाम॑े दिनै के राती मिलनि॑ सहंस ॥अंग 790
- दीवा बलै अंधेरा जाइ ॥अंग 791
- सबदै सादु न आइओ नामि न लगो पिआरु ॥अंग 791
- काइआ कूमल फुल गुण नानक गुपसि माल ॥अंग 791
- पहिल बसंतै आगमनि पहिला मउलिओ सोइ ॥अंग 791
बिलावल (11)
- तू सुलतानु कहा हउ मीआ तेरी कवन वडाई ॥अंग 795
- मनु मंदरु तनु वेस कलंदरु घट ही तीरथि नावा ॥अंग 795
- आपे सबदु आपे नीसानु ॥अंग 795
- गुर बचनी मनु सहज धिआने ॥अंग 796
- निकटि वसै देखै सभु सोई ॥अंग 831
- मन का कहिआ मनसा करै ॥अंग 832
- एकम एकंकारु निराला ॥अंग 838
- मुंध नवेलड़ीआ गोइलि आई राम ॥अंग 843
- मै मनि चाउ घणा साचि विगासी राम ॥अंग 843
- कोई वाहे को लुणै को पाए खलिहानि ॥अंग 854
- जिसु मनि वसिआ तरिआ सोइ ॥अंग 854
रामकली (76)
- कोई पड़ता सहसाकिरता कोई पड़ै पुराना ॥अंग 876
- सरब जोति तेरी पसरि रही ॥अंग 876
- जितु दरि वसहि कवनु दरु कहीऐ दरा भीतरि दरु कवनु लहै ॥अंग 877
- सुरति सबदु साखी मेरी सिंङी बाजै लोकु सुणे ॥अंग 877
- सुणि माछिंद्रा नानकु बोलै ॥अंग 877
- हम डोलत बेड़ी पाप भरी है पवणु लगै मतु जाई ॥अंग 878
- सुरती सुरति रलाईऐ एतु ॥अंग 878
- तुधनो निवणु मंनणु तेरा नाउ ॥अंग 878
- सागर महि बूंद बूंद महि सागरु कवणु बुझै बिधि जाणै ॥अंग 878
- जा हरि प्रभि किरपा धारी ॥अंग 879
- छादनु भोजनु मागतु भागै ॥अंग 879
- सोई चंदु चड़हि से तारे सोई दिनीअरु तपत रहै ॥अंग 902
- जगु परबोधहि मड़ी बधावहि ॥अंग 903
- खटु मटु देही मनु बैरागी ॥अंग 903
- साहा गणहि न करहि बीचारु ॥अंग 904
- हठु निग्रहु करि काइआ छीजै ॥अंग 905
- अंतरि उतभुजु अवरु न कोई ॥अंग 905
- जिउ आइआ तिउ जावहि बउरे जिउ जनमे तिउ मरणु भइआ ॥अंग 906
- जतु सतु संजमु साचु द्रिड़ाइआ साच सबदि रसि लीणा ॥1॥अंग 907
- अउहठि हसत मड़ी घरु छाइआ धरणि गगन कल धारी ॥1॥अंग 907
- ओअंकारि ब्रहमा उतपति ॥अंग 929
- सिध सभा करि आसणि बैठे संत सभा जैकारो ॥अंग 938
- घटि घटि बैसि निरंतरि रहीऐ चालहि सतिगुर भाए ॥अंग 938
- जैसे जल महि कमलु निरालमु मुरगाई नै साणे ॥अंग 938
- हाटी बाटी रहहि निराले रूखि बिरखि उदिआने ॥अंग 938
- दरसनु भेख करहु जोगिंद्रा मुंद्रा झोली खिंथा ॥अंग 939
- ऊंधउ खपरु पंच भू टोपी ॥अंग 939
- घटि घटि गुपता गुरमुखि मुकता ॥अंग 939
- दुरमति बाधा सरपनि खाधा ॥अंग 939
- किसु कारणि ग्रिहु तजिओ उदासी ॥अंग 939
- कितु बिधि पुरखा जनमु वटाइआ ॥अंग 939
- आदि कउ कवनु बीचारु कथीअले सुंन कहा घर वासो ॥अंग 940
- आदि कउ बिसमादु बीचारु कथीअले सुंन निरंतरि वासु लीआ ॥अंग 940
- साचौ उपजै साचि समावै साचे सूचे एक मइआ ॥अंग 940
- गुरमुखि साचे का भउ पावै ॥अंग 941
- गुरमुखि अकथु कथै बीचारि ॥अंग 941
- गुरमुखि असट सिधी सभि बुधी ॥अंग 941
- नामि रते सिध गोसटि होइ ॥अंग 941
- गुरमुखि रतनु लहै लिव लाइ ॥अंग 942
- गुरमुखि सासत्र सिम्रिति बेद ॥अंग 942
- जिसु गुरु मिलै तिसु पारि उतारै ॥अंग 942
- गुरमुखि चूकै आवण जाणु ॥अंग 942
- कवण मूलु कवण मति वेला ॥अंग 942
- मैण के दंत किउ खाईऐ सारु ॥अंग 943
- सच भै राता गरबु निवारै ॥अंग 943
- सबदु भाखत ससि जोति अपारा ॥अंग 943
- अंतरि सुंनं बाहरि सुंनं त्रिभवण सुंन मसुंनं ॥अंग 943
- नउ सर सुभर दसवै पूरे ॥अंग 943
- कुबुधि चवावै सो कितु ठाइ ॥अंग 944
- साचु वखरु धनु पलै होइ ॥अंग 944
- सु सबद कउ निरंतरि वासु अलखं जह देखा तह सोई ॥अंग 944
- गिआन की मुद्रा कवन अउधू सिध की कवन कमाई ॥अंग 944
- गुर परसादी रंगे राता ॥अंग 945
- इहु मनु निहचलु हिरदै वसीअले गुरमुखि मूलु पछाणि रहै ॥अंग 945
- कितु कितु बिधि जगु उपजै पुरखा कितु कितु दुखि बिनसि जाई ॥अंग 946
- बिनु सतिगुर सेवे जोगु न होई ॥अंग 946
- सबदै का निबेड़ा सुणि तू अउधू बिनु नावै जोगु न होई ॥अंग 946
- सती पापु करि सतु कमाहि ॥अंग 951
- हिंदू कै घरि हिंदू आवै ॥अंग 951
- ना सति दुखीआ ना सति सुखीआ ना सति पाणी जंत फिरहि ॥अंग 952
- सो गिरही जो निग्रहु करै ॥अंग 952
- सो अउधूती जो धूपै आपु ॥अंग 952
- सो उदासी जि पाले उदासु ॥अंग 952
- सो पाखंडी जि काइआ पखाले ॥अंग 952
- सो बैरागी जि उलटे ब्रहमु ॥अंग 953
- किउ मरै मंदा किउ जीवै जुगति ॥अंग 953
- नानकु आखै रे मना सुणीऐ सिख सही ॥अंग 953
- सहंसर दान दे इंद्रु रोआइआ ॥अंग 953
- सावणु राति अहाड़ु दिहु कामु क्रोधु दुइ खेत ॥अंग 955
- भउ भुइ पवितु पाणी सतु संतोखु बलेद ॥अंग 955
- मनूआ अंधु न चेतई पड़ै अचिंता जालु ॥अंग 955
- वेलि पिंञाइआ कति वुणाइआ ॥अंग 955
- सच की काती सचु सभु सारु ॥अंग 956
- कमरि कटारा बंकुड़ा बंके का असवारु ॥अंग 956
- सरवर हंस धुरे ही मेला खसमै एवै भाणा ॥अंग 956
- साहिबु मेरा उजला जे को चिति करेइ ॥अंग 956
मारू (64)
- साजन तेरे चरन की होइ रहा सद धूरि ॥अंग 989
- पिछहु राती सदड़ा नामु खसम का लेहि ॥अंग 989
- मिलि मात पिता पिंडु कमाइआ ॥अंग 989
- करणी कागदु मनु मसवाणी बुरा भला दुइ लेख पए ॥अंग 990
- बिमल मझारि बससि निरमल जल पदमनि जावल रे ॥अंग 990
- पतित पुनीत असंख होहि हरि चरनी मनु लाग ॥अंग 990
- सखी सहेली गरबि गहेली ॥अंग 990
- मुल खरीदी लाला गोला मेरा नाउ सभागा ॥अंग 991
- कोई आखै भूतना को कहै बेताला ॥अंग 991
- इहु धनु सरब रहिआ भरपूरि ॥अंग 991
- सूर सरु सोसि लै सोम सरु पोखि लै जुगति करि मरतु सु सनबंधु कीजै ॥अंग 991
- माइआ मुई न मनु मुआ सरु लहरी मै मतु ॥अंग 992
- जोगी जुगति नामु निरमाइलु ता कै मैलु न राती ॥अंग 992
- अहिनिसि जागै नीद न सोवै ॥अंग 993
- बेद पुराण कथे सुणे हारे मुनी अनेका ॥अंग 1008
- बिखु बोहिथा लादिआ दीआ समुंद मंझारि ॥अंग 1009
- सबदि मरै ता मारि मरु भागो किसु पहि जाउ ॥अंग 1010
- साची कार कमावणी होरि लालच बादि ॥अंग 1010
- लालै गारबु छोडिआ गुर कै भै सहजि सुभाई ॥अंग 1011
- हुकमु भइआ रहणा नही धुरि फाटे चीरै ॥अंग 1012
- मनमुखु लहरि घरु तजि विगूचै अवरा के घर हेरै ॥अंग 1012
- मात पिता संजोगि उपाए रकतु बिंदु मिलि पिंडु करे ॥अंग 1013
- आवउ वंञउ डुंमणी किती मित्र करेउ ॥अंग 1014
- ना भैणा भरजाईआ ना से ससुड़ीआह ॥अंग 1015
- ना जाणा मूरखु है कोई ना जाणा सिआणा ॥अंग 1015
- साचा सचु सोई अवरु न कोई ॥अंग 1020
- आपे धरती धउलु अकासं ॥अंग 1021
- दूजी दुरमति अंनी बोली ॥अंग 1022
- आदि जुगादी अपर अपारे ॥अंग 1023
- साचै मेले सबदि मिलाए ॥अंग 1024
- आपे करता पुरखु बिधाता ॥अंग 1025
- केते जुग वरते गुबारै ॥अंग 1026
- हरि सा मीतु नाही मै कोई ॥अंग 1027
- असुर सघारण रामु हमारा ॥अंग 1028
- घरि रहु रे मन मुगध इआने ॥अंग 1030
- सरणि परे गुरदेव तुमारी ॥अंग 1031
- साचे साहिब सिरजणहारे ॥अंग 1032
- काइआ नगरु नगर गड़ अंदरि ॥अंग 1033
- दरसनु पावा जे तुधु भावा ॥अंग 1034
- अरबद नरबद धुंधूकारा ॥अंग 1035
- आपे आपु उपाइ निराला ॥अंग 1036
- सुंन कला अपरंपरि धारी ॥अंग 1037
- जह देखा तह दीन दइआला ॥अंग 1038
- हरि धनु संचहु रे जन भाई ॥अंग 1039
- सचु कहहु सचै घरि रहणा ॥अंग 1040
- कामु क्रोधु परहरु पर निंदा ॥अंग 1041
- कुदरति करनैहार अपारा ॥अंग 1042
- विणु गाहक गुणु वेचीऐ तउ गुणु सहघो जाइ ॥अंग 1086
- भूली भूली मै फिरी पाधरु कहै न कोइ ॥अंग 1087
- महल कुचजी मड़वड़ी काली मनहु कसुध ॥अंग 1088
- साचु सील सचु संजमी सा पूरी परवारि ॥अंग 1088
- ससुरै पेईऐ कंत की कंतु अगंमु अथाहु ॥अंग 1088
- ना मैला ना धुंधला ना भगवा ना कचु ॥अंग 1089
- हुकमि रजाई साखती दरगह सचु कबूलु ॥अंग 1090
- अलगउ जोइ मधूकड़उ सारंगपाणि सबाइ ॥अंग 1090
- सरबे जोइ अगछमी दूखु घनेरो आथि ॥अंग 1090
- पूंजी साचउ नामु तू अखुटउ दरबु अपारु ॥अंग 1090
- पूरब प्रीति पिराणि लै मोटउ ठाकुरु माणि ॥अंग 1090
- मांदलु बेदि सि बाजणो घणो धड़ीऐ जोइ ॥अंग 1091
- सागरु गुणी अथाहु किनि हाथाला देखीऐ ॥अंग 1091
- सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि ॥अंग 1091
- हउ मुआ मै मारिआ पउणु वहै दरीआउ ॥अंग 1091
- हउ मै करी तां तू नाही तू होवहि हउ नाहि ॥अंग 1092
- जिनि कीआ तिनि देखिआ आपे जाणै सोइ ॥अंग 1093
तुखारी (22)
- तू सुणि किरत करंमा पुरबि कमाइआ ॥ सिरि सिरि सुख सहंमा देहि सु तू भला ॥अंग 1107
- सा धन सभि रस चोलै अंकि समाणीआ ॥अंग 1107
- तू सुणि हरि रस भिंने प्रीतम आपणे ॥अंग 1107
- बरसै अंम्रित धार बूंद सुहावणी ॥अंग 1107
- चेतु बसंतु भला भवर सुहावड़े ॥अंग 1107
- वैसाखु भला साखा वेस करे ॥अंग 1108
- माहु जेठु भला प्रीतमु किउ बिसरै ॥अंग 1108
- आसाड़ु भला सूरजु गगनि तपै ॥अंग 1108
- सावणि सरस मना घण वरसहि रुति आए ॥अंग 1108
- भादउ भरमि भुली भरि जोबनि पछुताणी ॥अंग 1108
- असुनि आउ पिरा सा धन झूरि मुई ॥अंग 1108
- कतकि किरतु पइआ जो प्रभ भाइआ ॥अंग 1109
- मंघर माहु भला हरि गुण अंकि समावए ॥अंग 1109
- पोखि तुखारु पड़ै वणु त्रिणु रसु सोखै ॥अंग 1109
- माघि पुनीत भई तीरथु अंतरि जानिआ ॥अंग 1109
- फलगुनि मनि रहसी प्रेमु सुभाइआ ॥अंग 1109
- बे दस माह रुती थिती वार भले ॥ घड़ी मूरत पल साचे आए सहजि मिले ॥अंग 1109
- पहिलै पहरै नैण सलोनड़ीए रैणि अंधिआरी राम ॥अंग 1110
- तारा चड़िआ लंमा किउ नदरि निहालिआ राम ॥अंग 1110
- भोलावड़ै भुली भुलि भुलि पछोताणी ॥अंग 1111
- मेरे लाल रंगीले हम लालन के लाले ॥अंग 1112
- ए मन मेरिआ तू समझु अचेत इआणिआ राम ॥अंग 1112
भैरों (9)
- तुझ ते बाहरि किछू न होइ ॥अंग 1125
- गुर कै सबदि तरे मुनि केते इंद्रादिक ब्रहमादि तरे ॥अंग 1125
- नैनी द्रिसटि नही तनु हीना जरि जीतिआ सिरि कालो ॥अंग 1125
- भूंडी चाल चरण कर खिसरे तुचा देह कुमलानी ॥अंग 1126
- सगली रैणि सोवत गलि फाही दिनसु जंजालि गवाइआ ॥अंग 1126
- गुर कै संगि रहै दिनु राती रामु रसनि रंगि राता ॥अंग 1126
- हिरदै नामु सरब धनु धारणु गुर परसादी पाईऐ ॥अंग 1127
- जगन होम पुंन तप पूजा देह दुखी नित दूख सहै ॥अंग 1127
- आतम महि रामु राम महि आतमु चीनसि गुर बीचारा ॥अंग 1153
बसंत (18)
- माहा माह मुमारखी चड़िआ सदा बसंतु ॥अंग 1168
- रुति आईले सरस बसंत माहि ॥अंग 1168
- सुइने का चउका कंचन कुआर ॥अंग 1168
- सगल भवन तेरी माइआ मोह ॥अंग 1169
- मेरी सखी सहेली सुनहु भाइ ॥अंग 1169
- आपे कुदरति करे साजि ॥अंग 1170
- साल ग्राम बिप पूजि मनावहु सुक्रितु तुलसी माला ॥अंग 1170
- साहुरड़ी वथु सभु किछु साझी पेवकड़ै धन वखे ॥अंग 1171
- राजा बालकु नगरी काची दुसटा नालि पिआरो ॥अंग 1171
- साचा साहु गुरू सुखदाता हरि मेले भुख गवाए ॥अंग 1171
- जगु कऊआ नामु नही चीति ॥अंग 1187
- मनु भूलउ भरमसि आइ जाइ ॥अंग 1187
- दरसन की पिआस जिसु नर होइ ॥अंग 1188
- चंचलु चीतु न पावै पारा ॥अंग 1189
- मतु भसम अंधूले गरबि जाहि ॥अंग 1189
- दुबिधा दुरमति अधुली कार ॥अंग 1190
- आपे भवरा फूल बेलि ॥अंग 1190
- नउ सत चउदह तीनि चारि करि महलति चारि बहाली ॥अंग 1190
सारंग (38)
- अपुने ठाकुर की हउ चेरी ॥अंग 1197
- हरि बिनु किउ रहीऐ दुखु बिआपै ॥अंग 1197
- दूरि नाही मेरो प्रभु पिआरा ॥अंग 1197
- हरि बिनु किउ जीवा मेरी माई ॥अंग 1232
- हरि बिनु किउ धीरै मनु मेरा ॥अंग 1232
- न भीजै रागी नादी बेदि ॥अंग 1237
- नव छिअ खट का करे बीचारु ॥अंग 1237
- जिनसि थापि जीआं कउ भेजै जिनसि थापि लै जावै ॥अंग 1238
- जुड़ि जुड़ि विछुड़े विछुड़ि जुड़े ॥अंग 1238
- इकसु न पुजहि बोल जे पूरे पूरा करि मिलै ॥अंग 1239
- आखणि अउखा सुनणि अउखा आखि न जापी आखि ॥अंग 1239
- जूठि न रागंी जूठि न वेदंी ॥अंग 1240
- नानक चुलीआ सुचीआ जे भरि जाणै कोइ ॥अंग 1240
- दुख विचि जंमणु दुखि मरणु दुखि वरतणु संसारि ॥अंग 1240
- नानक दुनीआ भसु रंगु भसू हू भसु खेह ॥अंग 1240
- घरि नाराइणु सभा नालि ॥अंग 1240
- सभे सुरती जोग सभि सभे बेद पुराण ॥अंग 1241
- पुरीआ खंडा सिरि करे इक पैरि धिआए ॥अंग 1241
- है है आखां कोटि कोटि कोटी हू कोटि कोटि ॥अंग 1241
- सभे राती सभि दिह सभि थिती सभि वार ॥अंग 1241
- अखंी परणै जे फिरां देखां सभु आकारु ॥अंग 1241
- होरु सरीकु होवै कोई तेरा तिसु अगै तुधु आखां ॥अंग 1242
- जां न सिआ किआ चाकरी जां जंमे किआ कार ॥अंग 1242
- सासत्र बेद पुराण पड़॑ंता ॥अंग 1242
- जां हउ तेरा तां सभु किछु मेरा हउ नाही तू होवहि ॥अंग 1242
- कलि होई कुते मुही खाजु होआ मुरदारु ॥अंग 1242
- रंना होईआ बोधीआ पुरस होए सईआद ॥अंग 1243
- लख सिउ प्रीति होवै लख जीवणु किआ खुसीआ किआ चाउ ॥अंग 1243
- कापड़ु काठु रंगाइआ रांगि ॥अंग 1243
- बेदु पुकारे पुंनु पापु सुरग नरक का बीउ ॥अंग 1243
- मरणि न मूरतु पुछिआ पुछी थिति न वारु ॥अंग 1244
- नानक ढेरी ढहि पई मिटी संदा कोटु ॥अंग 1244
- धनवंता इव ही कहै अवरी धन कउ जाउ ॥अंग 1244
- सूरजु चड़ै विजोगि सभसै घटै आरजा ॥अंग 1244
- ध्रिगु तिना का जीविआ जि लिखि लिखि वेचहि नाउ ॥अंग 1245
- सचु वरतु संतोखु तीरथु गिआनु धिआनु इसनानु ॥अंग 1245
- गिआन विहूणा गावै गीत ॥अंग 1245
- मनहु जि अंधे कूप कहिआ बिरदु न जाणन॑ी ॥अंग 1246
मलार (65)
- खाणा पीणा हसणा सउणा विसरि गइआ है मरणा ॥अंग 1254
- करउ बिनउ गुर अपने प्रीतम हरि वरु आणि मिलावै ॥अंग 1254
- साची सुरति नामि नही त्रिपते हउमै करत गवाइआ ॥अंग 1254
- जिनि धन पिर का सादु न जानिआ सा बिलख बदन कुमलानी ॥अंग 1255
- पर दारा पर धनु पर लोभा हउमै बिखै बिकार ॥अंग 1255
- पवणै पाणी जाणै जाति ॥अंग 1256
- दुखु वेछोड़ा इकु दुखु भूख ॥अंग 1256
- दुख महुरा मारण हरि नामु ॥अंग 1256
- बागे कापड़ बोलै बैण ॥अंग 1257
- चकवी नैन नंीद नहि चाहै बिनु पिर नंीद न पाई ॥अंग 1273
- जागतु जागि रहै गुर सेवा बिनु हरि मै को नाही ॥अंग 1273
- चात्रिक मीन जल ही ते सुखु पावहि सारिंग सबदि सुहाई ॥1॥अंग 1274
- अखली ऊंडी जलु भर नालि ॥अंग 1274
- मरण मुकति गति सार न जानै ॥अंग 1275
- हेको पाधरु हेकु दरु गुर पउड़ी निज थानु ॥अंग 1279
- आपीन॑ै आपु साजि आपु पछाणिआ ॥अंग 1279
- नानक सावणि जे वसै चहु ओमाहा होइ ॥अंग 1279
- नानक सावणि जे वसै चहु वेछोड़ा होइ ॥अंग 1279
- तू सचा सचिआरु जिनि सचु वरताइआ ॥अंग 1279
- वैदु बुलाइआ वैदगी पकड़ि ढंढोले बांह ॥अंग 1279
- ब्रहमा बिसनु महेसु देव उपाइआ ॥अंग 1279
- आपे छिंझ पवाइ मलाखाड़ा रचिआ ॥अंग 1280
- दोवै तरफा उपाइ इकु वरतिआ ॥अंग 1280
- सो हरि सदा सरेवीऐ जिसु करत न लागै वार ॥अंग 1280
- दूजै दूजी तरफ है कूड़ि मिलै न मिलिआ जाइ ॥अंग 1281
- अतुलु किउ तोलीऐ विणु तोले पाइआ न जाइ ॥अंग 1282
- नाथ जती सिध पीर किनै अंतु न पाइआ ॥अंग 1282
- आपि कराए करे आपि हउ कै सिउ करी पुकार ॥अंग 1282
- सचा वेपरवाहु इको तू धणी ॥अंग 1283
- खंड पताल असंख मै गणत न होई ॥अंग 1283
- आपे जगतु उपाइ कै गुण अउगण करे बीचारु ॥अंग 1284
- सचा सतिगुरु सेवि सचु सम॑ालिआ ॥अंग 1284
- इकि वण खंडि बैसहि जाइ सदु न देवही ॥अंग 1284
- इकि जैनी उझड़ पाइ धुरहु खुआइआ ॥अंग 1285
- सचा अलख अभेउ हठि न पतीजई ॥अंग 1285
- पूरा सतिगुरु सेवि पूरा पाइआ ॥अंग 1286
- कुलहां देंदे बावले लैंदे वडे निलज ॥अंग 1286
- सउ मणु हसती घिउ गुड़ु खावै पंजि सै दाणा खाइ ॥अंग 1286
- अगम अगोचरु तू धणी सचा अलख अपारु ॥अंग 1286
- राती कालु घटै दिनि कालु ॥अंग 1287
- मुआ पिआरु प्रीति मुई मुआ वैरु वादी ॥अंग 1287
- अंम्रित नामु सदा सुखदाता अंते होइ सखाई ॥अंग 1287
- सरमु धरमु दुइ नानका जे धनु पलै पाइ ॥अंग 1287
- दुखी दुनी सहेड़ीऐ जाइ त लगहि दुख ॥अंग 1287
- अंधी कंमी अंधु मनु मनि अंधै तनु अंधु ॥अंग 1287
- लख मण सुइना लख मण रुपा लख साहा सिरि साह ॥अंग 1287
- बधे छुटहि सचि सचु पछाणीऐ ॥अंग 1287
- हरणां बाजां तै सिकदारां एन॑ा पड़ि॑आ नाउ ॥अंग 1288
- आपि उपाए मेदनी आपे करदा सार ॥अंग 1288
- रूपै कामै दोसती भुखै सादै गंढु ॥अंग 1288
- राजु मालु रूपु जाति जोबनु पंजे ठग ॥अंग 1288
- पड़िआ लेखेदारु लेखा मंगीऐ ॥अंग 1288
- धरती पाताली आकासी इकि दरि रहनि वजीर ॥अंग 1289
- अजरु जरै त नउ कुल बंधु ॥अंग 1289
- पड़॑ीऐ नामु सालाह होरि बुधंी मिथिआ ॥अंग 1289
- पहिलां मासहु निंमिआ मासै अंदरि वासु ॥अंग 1289
- मासु मासु करि मूरखु झगड़े गिआनु धिआनु नही जाणै ॥अंग 1289
- हउ किआ आखा इक जीभ तेरा अंतु न किन ही पाइआ ॥अंग 1290
- नानक माइआ करम बिरखु फल अंम्रित फल विसु ॥अंग 1290
- सिरि सिरि होइ निबेड़ु हुकमि चलाइआ ॥अंग 1290
- घर महि घरु देखाइ देइ सो सतिगुरु पुरखु सुजाणु ॥अंग 1291
- चिलिमिलि बिसीआर दुनीआ फानी ॥अंग 1291
- धंनु सु कागदु कलम धंनु धनु भांडा धनु मसु ॥अंग 1291
- आपे पटी कलम आपि उपरि लेखु भि तूं ॥अंग 1291
- तूं आपे आपि वरतदा आपि बणत बणाई ॥अंग 1291
प्रभाती (23)
- तेरा नामु रतनु करमु चानणु सुरति तिथै लोइ ॥अंग 1327
- जै कारणि बेद ब्रहमै उचरे संकरि छोडी माइआ ॥अंग 1328
- जा कै रूपु नाही जाति नाही नाही मुखु मासा ॥अंग 1328
- ता का कहिआ दरि परवाणु ॥अंग 1328
- अंम्रितु नीरु गिआनि मन मजनु अठसठि तीरथ संगि गहे ॥अंग 1328
- गुर परसादी विदिआ वीचारै पड़ि पड़ि पावै मानु ॥अंग 1329
- आवतु किनै न राखिआ जावतु किउ राखिआ जाइ ॥अंग 1329
- दिसटि बिकारी बंधनि बांधै हउ तिस कै बलि जाई ॥अंग 1329
- मनु माइआ मनु धाइआ मनु पंखी आकासि ॥अंग 1330
- जागतु बिगसै मूठो अंधा ॥अंग 1330
- मसटि करउ मूरखु जगि कहीआ ॥अंग 1330
- खाइआ मैलु वधाइआ पैधै घर की हाणि ॥अंग 1331
- गीत नाद हरख चतुराई ॥अंग 1331
- अंतरि देखि सबदि मनु मानिआ अवरु न रांगनहारा ॥अंग 1331
- बारह महि रावल खपि जावहि चहु छिअ महि संनिआसी ॥अंग 1332
- संता की रेणु साध जन संगति हरि कीरति तरु तारी ॥अंग 1332
- दुबिधा बउरी मनु बउराइआ ॥अंग 1342
- माइआ मोहि सगल जगु छाइआ ॥अंग 1342
- निवली करम भुअंगम भाठी रेचक पूरक कुंभ करै ॥अंग 1343
- गोतमु तपा अहिलिआ इसत्री तिसु देखि इंद्रु लुभाइआ ॥अंग 1344
- आखणा सुनणा नामु अधारु ॥अंग 1344
- राम नामु जपि अंतरि पूजा ॥अंग 1345
- इकि धुरि बखसि लए गुरि पूरै सची बणत बणाई ॥अंग 1345