लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

वाणी: महला 1

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वाणी

महला 1, गुरु नानक देव जी

1469-1539 · सिख परंपरा के संस्थापक · 974 शबद

एक रात सुल्तानपुर लोधी के बाहर बेईं नदी में डुबकी लगाने उतरे, और तीन दिन तक वापस नहीं आए। चौथे दिन निकले, और पहली बात यह कही, "ना कोई हिंदू, ना कोई मुसलमान।" 1499 की बात है।

उस एक वाक्य में पूरी सिख परंपरा का बीज है। पहले मज़हबी पहचान को घोल दिया, फिर नया सवाल पूछा, "तो क्या है?" जवाब आगे के 38 साल की घूम-घूम कर दी गई सीख में आया, चार उदासियाँ, और जो वाणी आज ग्रंथ साहिब में 974 शबद के रूप में है।

नानक कोई यंत्र गढ़ने वाले कारीगर नहीं थे, मगर पूरी व्यवस्था को एक साथ सोचने वाले चिंतक थे। जपजी साहिब उनके समूचे सृष्टि-दर्शन को 38 पउड़ियों में समेट देती है। हुकम (सृष्टि का विधान), नदर (कृपा), साच (सत्य), सेवा, इन चार खंभों पर पूरा विचार खड़ा है।

महला 1 की वाणी आदि ग्रंथ में बिखरी है, सब प्रमुख रागों में। मुख्य रचनाएँ:

आदि ग्रंथ में इनके शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, राग के अनुसार, ग्रंथ के क्रम में।

सलोक और अन्य वाणी (49)
  1. ॥ जपु ॥अंग 1
  2. हुकमी होवनि आकार हुकमु न कहिआ जाई ॥अंग 1
  3. गावै को ताणु होवै किसै ताणु ॥अंग 1
  4. साचा साहिबु साचु नाइ भाखिआ भाउ अपारु ॥अंग 2
  5. थापिआ न जाइ कीता न होइ ॥अंग 2
  6. तीरथि नावा जे तिसु भावा विणु भाणे कि नाइ करी ॥अंग 2
  7. जे जुग चारे आरजा होर दसूणी होइ ॥अंग 2
  8. सुणिऐ सिध पीर सुरि नाथ ॥अंग 2
  9. सुणिऐ ईसरु बरमा इंदु ॥अंग 2
  10. सुणिऐ सतु संतोखु गिआनु ॥अंग 3
  11. सुणिऐ सरा गुणा के गाह ॥अंग 3
  12. मंने की गति कही न जाइ ॥अंग 3
  13. मंनै सुरति होवै मनि बुधि ॥अंग 3
  14. मंनै मारगि ठाक न पाइ ॥अंग 3
  15. मंनै पावहि मोखु दुआरु ॥अंग 3
  16. पंच परवाण पंच परधानु ॥अंग 3
  17. असंख जप असंख भाउ ॥अंग 3
  18. असंख मूरख अंध घोर ॥अंग 4
  19. असंख नाव असंख थाव ॥अंग 4
  20. भरीऐ हथु पैरु तनु देह ॥अंग 4
  21. तीरथु तपु दइआ दतु दानु ॥अंग 4
  22. पाताला पाताल लख आगासा आगास ॥अंग 5
  23. सालाही सालाहि एती सुरति न पाईआ ॥अंग 5
  24. अंतु न सिफती कहणि न अंतु ॥अंग 5
  25. बहुता करमु लिखिआ ना जाइ ॥अंग 5
  26. अमुल गुण अमुल वापार ॥अंग 5
  27. सो दरु केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब समाले ॥अंग 6
  28. मुंदा संतोखु सरमु पतु झोली धिआन की करहि बिभूति ॥अंग 6
  29. भुगति गिआनु दइआ भंडारणि घटि घटि वाजहि नाद ॥अंग 6
  30. एका माई जुगति विआई तिनि चेले परवाणु ॥अंग 7
  31. आसणु लोइ लोइ भंडार ॥अंग 7
  32. इक दू जीभौ लख होहि लख होवहि लख वीस ॥अंग 7
  33. आखणि जोरु चुपै नह जोरु ॥अंग 7
  34. राती रुती थिती वार ॥अंग 7
  35. धरम खंड का एहो धरमु ॥अंग 7
  36. गिआन खंड महि गिआनु परचंडु ॥अंग 7
  37. तिथै होरु न कोई होरु ॥अंग 8
  38. जतु पाहारा धीरजु सुनिआरु ॥अंग 8
  39. पवणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु ॥अंग 8
  40. सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब समाले ॥अंग 8
  41. सुणि वडा आखै सभु कोइ ॥अंग 9
  42. आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥अंग 9
  43. तितु सरवरड़ै भईले निवासा पाणी पावकु तिनहि कीआ ॥अंग 12
  44. जै घरि कीरति आखीऐ करते का होइ बीचारो ॥अंग 12
  45. छिअ घर छिअ गुर छिअ उपदेस ॥अंग 12
  46. गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती ॥अंग 13
  47. पड़ि॑ पुस्तक संधिआ बादं ॥अंग 1353
  48. उतंगी पैओहरी गहिरी गंभीरी ॥अंग 1410
  49. उदोसाहै किआ नीसानी तोटि न आवै अंनी ॥अंग 1412
सिरी राग (60)
  1. मोती त मंदर ऊसरहि रतनी त होहि जड़ाउ ॥अंग 14
  2. कोटि कोटी मेरी आरजा पवणु पीअणु अपिआउ ॥अंग 14
  3. लेखै बोलणु बोलणा लेखै खाणा खाउ ॥अंग 15
  4. लबु कुता कूड़ु चूहड़ा ठगि खाधा मुरदारु ॥अंग 15
  5. अमलु गलोला कूड़ का दिता देवणहारि ॥अंग 15
  6. जालि मोहु घसि मसु करि मति कागदु करि सारु ॥अंग 16
  7. सभि रस मिठे मंनिऐ सुणिऐ सालोणे ॥अंग 16
  8. कुंगू की कांइआ रतना की ललिता अगरि वासु तनि सासु ॥अंग 17
  9. गुणवंती गुण वीथरै अउगुणवंती झूरि ॥अंग 17
  10. आवहु भैणे गलि मिलह अंकि सहेलड़ीआह ॥अंग 17
  11. भली सरी जि उबरी हउमै मुई घराहु ॥अंग 18
  12. धातु मिलै फुनि धातु कउ सिफती सिफति समाइ ॥अंग 18
  13. ध्रिगु जीवणु दोहागणी मुठी दूजै भाइ ॥अंग 18
  14. भाहि बलंदी विझवी धूउ न निकसिओ काइ ॥अंग 19
  15. तनु जलि बलि माटी भइआ मनु माइआ मोहि मनूरु ॥अंग 19
  16. नानक बेड़ी सच की तरीऐ गुर वीचारि ॥अंग 20
  17. सुणि मन मित्र पिआरिआ मिलु वेला है एह ॥अंग 20
  18. मरणै की चिंता नही जीवण की नही आस ॥अंग 20
  19. एहु मनो मूरखु लोभीआ लोभे लगा लोुभानु ॥अंग 21
  20. इकु तिलु पिआरा वीसरै रोगु वडा मन माहि ॥अंग 21
  21. हरि हरि जपहु पिआरिआ गुरमति ले हरि बोलि ॥अंग 22
  22. भरमे भाहि न विझवै जे भवै दिसंतर देसु ॥अंग 22
  23. वणजु करहु वणजारिहो वखरु लेहु समालि ॥अंग 22
  24. धनु जोबनु अरु फुलड़ा नाठीअड़े दिन चारि ॥अंग 23
  25. आपे रसीआ आपि रसु आपे रावणहारु ॥अंग 23
  26. इहु तनु धरती बीजु करमा करो सलिल आपाउ सारिंगपाणी ॥अंग 23
  27. अमलु करि धरती बीजु सबदो करि सच की आब नित देहि पाणी ॥अंग 24
  28. सोई मउला जिनि जगु मउलिआ हरिआ कीआ संसारो ॥अंग 24
  29. एकु सुआनु दुइ सुआनी नालि ॥अंग 24
  30. एका सुरति जेते है जीअ ॥अंग 24
  31. तू दरीआउ दाना बीना मै मछुली कैसे अंतु लहा ॥अंग 25
  32. कीता कहा करे मनि मानु ॥अंग 25
  33. अछल छलाई नह छलै नह घाउ कटारा करि सकै ॥अंग 25
  34. आखि आखि मनु वावणा जिउ जिउ जापै वाइ ॥अंग 53
  35. सभे कंत महेलीआ सगलीआ करहि सीगारु ॥अंग 53
  36. आपे गुण आपे कथै आपे सुणि वीचारु ॥अंग 54
  37. मछुली जालु न जाणिआ सरु खारा असगाहु ॥अंग 55
  38. मनि जूठै तनि जूठि है जिहवा जूठी होइ ॥अंग 55
  39. जपु तपु संजमु साधीऐ तीरथि कीचै वासु ॥अंग 56
  40. गुर ते निरमलु जाणीऐ निरमल देह सरीरु ॥अंग 57
  41. सुणि मन भूले बावरे गुर की चरणी लागु ॥अंग 57
  42. बिनु पिर धन सीगारीऐ जोबनु बादि खुआरु ॥अंग 58
  43. सतिगुरु पूरा जे मिलै पाईऐ रतनु बीचारु ॥अंग 59
  44. रे मन ऐसी हरि सिउ प्रीति करि जैसी जल कमलेहि ॥अंग 59
  45. मनमुखि भुलै भुलाईऐ भूली ठउर न काइ ॥अंग 60
  46. त्रिसना माइआ मोहणी सुत बंधप घर नारि ॥अंग 61
  47. राम नामि मनु बेधिआ अवरु कि करी वीचारु ॥अंग 62
  48. चिते दिसहि धउलहर बगे बंक दुआर ॥अंग 62
  49. डूंगरु देखि डरावणो पेईअड़ै डरीआसु ॥अंग 63
  50. मुकामु करि घरि बैसणा नित चलणै की धोख ॥अंग 64
  51. जोगी अंदरि जोगीआ ॥अंग 71
  52. पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा हुकमि पइआ गरभासि ॥अंग 74
  53. पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा बालक बुधि अचेतु ॥अंग 75
  54. दाती साहिब संदीआ किआ चलै तिसु नालि ॥अंग 83
  55. सिदकु सबूरी सादिका सबरु तोसा मलाइकां ॥अंग 83
  56. फकड़ जाती फकड़ु नाउ ॥अंग 83
  57. कुदरति करि कै वसिआ सोइ ॥अंग 83
  58. गलंी असी चंगीआ आचारी बुरीआह ॥अंग 85
  59. कुबुधि डूमणी कुदइआ कसाइणि पर निंदा घट चूहड़ी मुठी क्रोधि चंडालि ॥अंग 91
  60. किआ हंसु किआ बगुला जा कउ नदरि करेइ ॥अंग 91
माझ (74)
  1. सबदि रंगाए हुकमि सबाए ॥अंग 109
  2. गुरु दाता गुरु हिवै घरु गुरु दीपकु तिह लोइ ॥अंग 137
  3. पहिलै पिआरि लगा थण दुधि ॥अंग 137
  4. दस बालतणि बीस रवणि तीसा का सुंदरु कहावै ॥अंग 138
  5. तूं करता पुरखु अगंमु है आपि स्रिसटि उपाती ॥अंग 138
  6. अखी देखै जिहवा बोलै कंनी सुरति समाइ ॥अंग 138
  7. तुधु आपे जगतु उपाइ कै तुधु आपे धंधै लाइआ ॥अंग 138
  8. सदा सदा तूं एकु है तुधु दूजा खेलु रचाइआ ॥अंग 139
  9. सुइने कै परबति गुफा करी कै पाणी पइआलि ॥अंग 139
  10. वसत्र पखालि पखाले काइआ आपे संजमि होवै ॥अंग 139
  11. काइआ हंसि संजोगु मेलि मिलाइआ ॥अंग 139
  12. कूड़ु बोलि मुरदारु खाइ ॥अंग 139
  13. इकि कंद मूलु चुणि खाहि वण खंडि वासा ॥अंग 140
  14. जे रतु लगै कपड़ै जामा होइ पलीतु ॥अंग 140
  15. जा हउ नाही ता किआ आखा किहु नाही किआ होवा ॥अंग 140
  16. माहा रुती सभ तूं घड़ी मूरत वीचारा ॥अंग 140
  17. मिहर मसीति सिदकु मुसला हकु हलालु कुराणु ॥अंग 140
  18. हकु पराइआ नानका उसु सूअर उसु गाइ ॥अंग 141
  19. पंजि निवाजा वखत पंजि पंजा पंजे नाउ ॥अंग 141
  20. इकि रतन पदारथ वणजदे इकि कचै दे वापारा ॥अंग 141
  21. मुसलमाणु कहावणु मुसकलु जा होइ ता मुसलमाणु कहावै ॥अंग 141
  22. राजे रयति सिकदार कोइ न रहसीओ ॥अंग 141
  23. नदीआ होवहि धेणवा सुंम होवहि दुधु घीउ ॥अंग 141
  24. भार अठारह मेवा होवै गरुड़ा होइ सुआउ ॥अंग 142
  25. जे देहै दुखु लाईऐ पाप गरह दुइ राहु ॥अंग 142
  26. अगी पाला कपड़ु होवै खाणा होवै वाउ ॥अंग 142
  27. बदफैली गैबाना खसमु न जाणई ॥अंग 142
  28. सो जीविआ जिसु मनि वसिआ सोइ ॥अंग 142
  29. किआ खाधै किआ पैधै होइ ॥अंग 142
  30. जाती दै किआ हथि सचु परखीऐ ॥अंग 142
  31. जा पका ता कटिआ रही सु पलरि वाड़ि ॥अंग 142
  32. वेखु जि मिठा कटिआ कटि कुटि बधा पाइ ॥अंग 142
  33. इकना मरणु न चिति आस घणेरिआ ॥अंग 143
  34. मछी तारू किआ करे पंखी किआ आकासु ॥अंग 143
  35. कैहा कंचनु तुटै सारु ॥अंग 143
  36. आपे कुदरति साजि कै आपे करे बीचारु ॥अंग 143
  37. हम जेर जिमी दुनीआ पीरा मसाइका राइआ ॥अंग 143
  38. न देव दानवा नरा ॥ न सिध साधिका धरा ॥अंग 143
  39. न दादे दिहंद आदमी ॥ न सपत जेर जिमी ॥अंग 144
  40. न सूर ससि मंडलो ॥ न सपत दीप नह जलो ॥ अंन पउण थिरु न कुई ॥अंग 144
  41. न रिजकु दसत आ कसे ॥अंग 144
  42. परंदए न गिराह जर ॥अंग 144
  43. नानक लिलारि लिखिआ सोइ ॥अंग 144
  44. सचा तेरा हुकमु गुरमुखि जाणिआ ॥अंग 144
  45. सीहा बाजा चरगा कुहीआ एना खवाले घाह ॥अंग 144
  46. इकि मासहारी इकि त्रिणु खाहि ॥अंग 144
  47. पूरे गुर की कार करमि कमाईऐ ॥अंग 144
  48. तुधु भावै ता वावहि गावहि तुधु भावै जलि नावहि ॥अंग 144
  49. जा तूं वडा सभि वडिआंईआ चंगै चंगा होई ॥अंग 145
  50. सतिगुरु सेवि निसंगु भरमु चुकाईऐ ॥अंग 145
  51. कलि काती राजे कासाई धरमु पंख करि उडरिआ ॥अंग 145
  52. भगता तै सैसारीआ जोड़ु कदे न आइआ ॥अंग 145
  53. सबाही सालाह जिनी धिआइआ इक मनि ॥अंग 145
  54. जा तूं ता किआ होरि मै सचु सुणाईऐ ॥अंग 146
  55. सचा भोजनु भाउ सतिगुरि दसिआ ॥अंग 146
  56. पहिरा अगनि हिवै घरु बाधा भोजनु सारु कराई ॥अंग 147
  57. विणु सचे सभु कूड़ु कूड़ु कमाईऐ ॥अंग 147
  58. नानक गुरु संतोखु रुखु धरमु फुलु फल गिआनु ॥अंग 147
  59. सुइने का बिरखु पत परवाला फुल जवेहर लाल ॥अंग 147
  60. जीवदिआ मरु मारि न पछोताईऐ ॥अंग 147
  61. तुमी तुमा विसु अकु धतूरा निमु फलु ॥अंग 147
  62. मति पंखेरू किरतु साथि कब उतम कब नीच ॥अंग 147
  63. केते कहहि वखाण कहि कहि जावणा ॥अंग 148
  64. नारी पुरख पिआरु प्रेमि सीगारीआ ॥अंग 148
  65. मारू मीहि न त्रिपतिआ अगी लहै न भुख ॥अंग 148
  66. खसमै कै दरबारि ढाढी वसिआ ॥अंग 148
  67. खतिअहु जंमे खते करनि त खतिआ विचि पाहि ॥अंग 149
  68. नानक बोलणु झखणा दुख छडि मंगीअहि सुख ॥अंग 149
  69. चारे कुंडा देखि अंदरु भालिआ ॥अंग 149
  70. सतिगुरु होइ दइआलु त सरधा पूरीऐ ॥अंग 149
  71. सिरु खोहाइ पीअहि मलवाणी जूठा मंगि मंगि खाही ॥अंग 149
  72. तुधु सचे सुबहानु सदा कलाणिआ ॥अंग 150
  73. आपि बुझाए सोई बूझै ॥अंग 150
  74. हउ ढाढी वेकारु कारै लाइआ ॥अंग 150
गउड़ी (40)
  1. भउ मुचु भारा वडा तोलु ॥अंग 151
  2. डरि घरु घरि डरु डरि डरु जाइ ॥अंग 151
  3. माता मति पिता संतोखु ॥अंग 151
  4. पउणै पाणी अगनी का मेलु ॥अंग 152
  5. सुणि सुणि बूझै मानै नाउ ॥ ता कै सद बलिहारै जाउ ॥अंग 152
  6. जातो जाइ कहा ते आवै ॥अंग 152
  7. कामु क्रोधु माइआ महि चीतु ॥अंग 153
  8. उलटिओ कमलु ब्रहमु बीचारि ॥अंग 153
  9. सतिगुरु मिलै सु मरणु दिखाए ॥अंग 153
  10. किरतु पइआ नह मेटै कोइ ॥अंग 154
  11. जिनि अकथु कहाइआ अपिओ पीआइआ ॥अंग 154
  12. जनमि मरै त्रै गुण हितकारु ॥अंग 154
  13. अंम्रित काइआ रहै सुखाली बाजी इहु संसारो ॥अंग 154
  14. अवरि पंच हम एक जना किउ राखउ घर बारु मना ॥अंग 155
  15. मुंद्रा ते घट भीतरि मुंद्रा कांइआ कीजै खिंथाता ॥अंग 155
  16. अउखध मंत्र मूलु मन एकै जे करि द्रिड़ु चितु कीजै रे ॥अंग 156
  17. कत की माई बापु कत केरा किदू थावहु हम आए ॥अंग 156
  18. रैणि गवाई सोइ कै दिवसु गवाइआ खाइ ॥अंग 156
  19. हरणी होवा बनि बसा कंद मूल चुणि खाउ ॥अंग 157
  20. जै घरि कीरति आखीऐ करते का होइ बीचारो ॥अंग 157
  21. निधि सिधि निरमल नामु बीचारु ॥अंग 220
  22. मनु कुंचरु काइआ उदिआनै ॥अंग 221
  23. ना मनु मरै न कारजु होइ ॥अंग 222
  24. हउमै करतिआ नह सुखु होइ ॥अंग 222
  25. दूजी माइआ जगत चित वासु ॥अंग 223
  26. अधिआतम करम करे ता साचा ॥अंग 223
  27. खिमा गही ब्रतु सील संतोखं ॥अंग 223
  28. ऐसो दासु मिलै सुखु होई ॥अंग 224
  29. ब्रहमै गरबु कीआ नही जानिआ ॥अंग 224
  30. चोआ चंदनु अंकि चड़ावउ ॥अंग 225
  31. सेवा एक न जानसि अवरे ॥अंग 225
  32. हठु करि मरै न लेखै पावै ॥अंग 226
  33. हउमै करत भेखी नही जानिआ ॥अंग 226
  34. प्रथमे ब्रहमा कालै घरि आइआ ॥अंग 227
  35. बोलहि साचु मिथिआ नही राई ॥अंग 227
  36. रामि नामि चितु रापै जा का ॥अंग 228
  37. जिउ गाई कउ गोइली राखहि करि सारा ॥ अहिनिसि पालहि राखि लेहि आतम सुखु धारा ॥1॥अंग 228
  38. गुर परसादी बूझि ले तउ होइ निबेरा ॥अंग 229
  39. धन थीई दुबलि कंत हावै केव नैणी देखए ॥अंग 242
  40. किउ धीरैगी नाह बिना प्रभ वेपरवाहे ॥अंग 243
आसा (130)
  1. सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब सम॑ाले ॥अंग 347
  2. सुणि वडा आखै सभ कोई ॥अंग 348
  3. आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥अंग 349
  4. जे दरि मांगतु कूक करे महली खसमु सुणे ॥अंग 349
  5. ताल मदीरे घट के घाट ॥अंग 349
  6. जेता सबदु सुरति धुनि तेती जेता रूपु काइआ तेरी ॥अंग 350
  7. वाजा मति पखावजु भाउ ॥अंग 350
  8. पउणु उपाइ धरी सभ धरती जल अगनी का बंधु कीआ ॥अंग 350
  9. करम करतूति बेलि बिसथारी राम नामु फलु हूआ ॥अंग 351
  10. मै गुण गला के सिरि भार ॥अंग 351
  11. करि किरपा अपनै घरि आइआ ता मिलि सखीआ काजु रचाइआ ॥अंग 351
  12. ग्रिहु बनु समसरि सहजि सुभाइ ॥अंग 351
  13. एको सरवरु कमल अनूप ॥अंग 352
  14. गुरमति साची हुजति दूरि ॥अंग 352
  15. जो तिनि कीआ सो सचु थीआ ॥अंग 352
  16. इकि आवहि इकि जावहि आई ॥अंग 353
  17. निवि निवि पाइ लगउ गुर अपुने आतम रामु निहारिआ ॥अंग 353
  18. किस कउ कहहि सुणावहि किस कउ किसु समझावहि समझि रहे ॥अंग 353
  19. कोई भीखकु भीखिआ खाइ ॥अंग 354
  20. दुध बिनु धेनु पंख बिनु पंखी जल बिनु उतभुज कामि नाही ॥अंग 354
  21. काइआ ब्रहमा मनु है धोती ॥अंग 355
  22. सेवकु दासु भगतु जनु सोई ॥अंग 355
  23. काची गागरि देह दुहेली उपजै बिनसै दुखु पाई ॥अंग 355
  24. मोहु कुटंबु मोहु सभ कार ॥अंग 356
  25. आपि करे सचु अलख अपारु ॥अंग 356
  26. विदिआ वीचारी तां परउपकारी ॥अंग 356
  27. एक न भरीआ गुण करि धोवा ॥अंग 356
  28. पेवकड़ै धन खरी इआणी ॥अंग 357
  29. न किस का पूतु न किस की माई ॥अंग 357
  30. तितु सरवरड़ै भईले निवासा पाणी पावकु तिनहि कीआ ॥अंग 357
  31. छिअ घर छिअ गुर छिअ उपदेस ॥अंग 357
  32. लख लसकर लख वाजे नेजे लख उठि करहि सलामु ॥अंग 358
  33. दीवा मेरा एकु नामु दुखु विचि पाइआ तेलु ॥अंग 358
  34. देवतिआ दरसन कै ताई दूख भूख तीरथ कीए ॥अंग 358
  35. भीतरि पंच गुपत मनि वासे ॥अंग 359
  36. मनु मोती जे गहणा होवै पउणु होवै सूत धारी ॥अंग 359
  37. कीता होवै करे कराइआ तिसु किआ कहीऐ भाई ॥अंग 359
  38. गुर का सबदु मनै महि मुंद्रा खिंथा खिमा हढावउ ॥अंग 359
  39. गुड़ु करि गिआनु धिआनु करि धावै करि करणी कसु पाईऐ ॥अंग 360
  40. खुरासान खसमाना कीआ हिंदुसतानु डराइआ ॥अंग 360
  41. उतरि अवघटि सरवरि न॑ावै ॥अंग 411
  42. सभि जप सभि तप सभ चतुराई ॥अंग 412
  43. लेख असंख लिखि लिखि मानु ॥अंग 412
  44. एकु मरै पंचे मिलि रोवहि ॥अंग 413
  45. आपु वीचारै सु परखे हीरा ॥अंग 413
  46. गुरमुखि गिआनु धिआनु मनि मानु ॥अंग 414
  47. गावहि गीते चीति अनीते ॥अंग 414
  48. मनु मैगलु साकतु देवाना ॥अंग 415
  49. तनु बिनसै धनु का को कहीऐ ॥अंग 416
  50. गुरु सेवे सो ठाकुर जानै ॥अंग 416
  51. जिन सिरि सोहनि पटीआ मांगी पाइ संधूरु ॥अंग 417
  52. कहा सु खेल तबेला घोड़े कहा भेरी सहनाई ॥अंग 417
  53. जैसे गोइलि गोइली तैसे संसारा ॥अंग 418
  54. चारे कुंडा ढूढीआ को नीम॑ी मैडा ॥अंग 418
  55. मनसा मनहि समाइले भउजलु सचि तरणा ॥अंग 419
  56. चले चलणहार वाट वटाइआ ॥अंग 419
  57. किआ जंगलु ढूढी जाइ मै घरि बनु हरीआवला ॥अंग 420
  58. जिन॑ी नामु विसारिआ दूजै भरमि भुलाई ॥अंग 420
  59. मै ओल॑गीआ ओल॑गी हम छोरू थारे ॥अंग 421
  60. केता आखणु आखीऐ ता के अंत न जाणा ॥अंग 421
  61. मनु रातउ हरि नाइ सचु वखाणिआ ॥अंग 421
  62. आवण जाणा किउ रहै किउ मेला होई ॥अंग 422
  63. ससै सोइ स्रिसटि जिनि साजी सभना साहिबु एकु भइआ ॥अंग 432
  64. मुंध जोबनि बालड़ीए मेरा पिरु रलीआला राम ॥अंग 435
  65. अनहदो अनहदु वाजै रुण झुणकारे राम ॥अंग 436
  66. मेरा मनो मेरा मनु राता राम पिआरे राम ॥अंग 437
  67. दूख बिसारणहारु सुआमी कीता जा का होवै ॥अंग 438
  68. तूं सुणि हरणा कालिआ की वाड़ीऐ राता राम ॥अंग 438
  69. बलिहारी गुर आपणे दिउहाड़ी सद वार ॥अंग 462
  70. नानक गुरू न चेतनी मनि आपणै सुचेत ॥अंग 463
  71. आपीन॑ै आपु साजिओ आपीन॑ै रचिओ नाउ ॥अंग 463
  72. सचे तेरे खंड सचे ब्रहमंड ॥अंग 463
  73. वडी वडिआई जा वडा नाउ ॥अंग 463
  74. विसमादु नाद विसमादु वेद ॥अंग 463
  75. कुदरति दिसै कुदरति सुणीऐ कुदरति भउ सुख सारु ॥अंग 464
  76. आपीन॑ै भोग भोगि कै होइ भसमड़ि भउरु सिधाइआ ॥अंग 464
  77. भै विचि पवणु वहै सदवाउ ॥अंग 464
  78. नानक निरभउ निरंकारु होरि केते राम रवाल ॥अंग 464
  79. नदरि करहि जे आपणी ता नदरी सतिगुरु पाइआ ॥अंग 465
  80. घड़ीआ सभे गोपीआ पहर कंन॑ गोपाल ॥अंग 465
  81. वाइनि चेले नचनि गुर ॥अंग 465
  82. नाउ तेरा निरंकारु है नाइ लइऐ नरकि न जाईऐ ॥अंग 465
  83. मुसलमाना सिफति सरीअति पड़ि पड़ि करहि बीचारु ॥अंग 465
  84. मिटी मुसलमान की पेड़ै पई कुमि॑आर ॥अंग 466
  85. बिनु सतिगुर किनै न पाइओ बिनु सतिगुर किनै न पाइआ ॥अंग 466
  86. हउ विचि आइआ हउ विचि गइआ ॥अंग 466
  87. पुरखां बिरखां तीरथां तटां मेघां खेतांह ॥अंग 467
  88. लख नेकीआ चंगिआईआ लख पुंना परवाणु ॥अंग 467
  89. सचा साहिबु एकु तूं जिनि सचो सचु वरताइआ ॥अंग 467
  90. पड़ि पड़ि गडी लदीअहि पड़ि पड़ि भरीअहि साथ ॥अंग 467
  91. लिखि लिखि पड़िआ ॥अंग 467
  92. भगत तेरै मनि भावदे दरि सोहनि कीरति गावदे ॥अंग 468
  93. कूड़ु राजा कूड़ु परजा कूड़ु सभु संसारु ॥अंग 468
  94. सचु ता परु जाणीऐ जा रिदै सचा होइ ॥अंग 468
  95. दानु महिंडा तली खाकु जे मिलै त मसतकि लाईऐ ॥अंग 468
  96. सचि कालु कूड़ु वरतिआ कलि कालख बेताल ॥अंग 468
  97. लबु पापु दुइ राजा महता कूड़ु होआ सिकदारु ॥अंग 468
  98. वदी सु वजगि नानका सचा वेखै सोइ ॥अंग 469
  99. धुरि करमु जिना कउ तुधु पाइआ ता तिनी खसमु धिआइआ ॥अंग 469
  100. दुखु दारू सुखु रोगु भइआ जा सुखु तामि न होई ॥अंग 469
  101. कुंभे बधा जलु रहै जल बिनु कुंभु न होइ ॥अंग 469
  102. पड़िआ होवै गुनहगारु ता ओमी साधु न मारीऐ ॥अंग 469
  103. नानक मेरु सरीर का इकु रथु इकु रथवाहु ॥अंग 470
  104. साम कहै सेतंबरु सुआमी सच महि आछै साचि रहे ॥ सभु को सचि समावै ॥अंग 470
  105. सतिगुर विटहु वारिआ जितु मिलिऐ खसमु समालिआ ॥अंग 470
  106. सिंमल रुखु सराइरा अति दीरघ अति मुचु ॥अंग 470
  107. पड़ि पुसतक संधिआ बादं ॥अंग 470
  108. कपड़ु रूपु सुहावणा छडि दुनीआ अंदरि जावणा ॥अंग 470
  109. दइआ कपाह संतोखु सूतु जतु गंढी सतु वटु ॥अंग 471
  110. लख चोरीआ लख जारीआ लख कूड़ीआ लख गालि ॥अंग 471
  111. नाइ मंनिऐ पति ऊपजै सालाही सचु सूतु ॥अंग 471
  112. तगु न इंद्री तगु न नारी ॥अंग 471
  113. साहिबु होइ दइआलु किरपा करे ता साई कार कराइसी ॥अंग 471
  114. गऊ बिराहमण कउ करु लावहु गोबरि तरणु न जाई ॥अंग 471
  115. माणस खाणे करहि निवाज ॥अंग 471
  116. चितै अंदरि सभु को वेखि नदरी हेठि चलाइदा ॥अंग 472
  117. जे मोहाका घरु मुहै घरु मुहि पितरी देइ ॥अंग 472
  118. जिउ जोरू सिरनावणी आवै वारो वार ॥अंग 472
  119. तुरे पलाणे पउण वेग हर रंगी हरम सवारिआ ॥अंग 472
  120. जे करि सूतकु मंनीऐ सभ तै सूतकु होइ ॥अंग 472
  121. मन का सूतकु लोभु है जिहवा सूतकु कूड़ु ॥अंग 472
  122. सभो सूतकु भरमु है दूजै लगै जाइ ॥अंग 472
  123. सतिगुरु वडा करि सालाहीऐ जिसु विचि वडीआ वडिआईआ ॥अंग 473
  124. पहिला सुचा आपि होइ सुचै बैठा आइ ॥अंग 473
  125. भंडि जंमीऐ भंडि निंमीऐ भंडि मंगणु वीआहु ॥अंग 473
  126. सभु को आखै आपणा जिसु नाही सो चुणि कढीऐ ॥अंग 473
  127. नानक फिकै बोलिऐ तनु मनु फिका होइ ॥अंग 473
  128. अंदरहु झूठे पैज बाहरि दुनीआ अंदरि फैलु ॥अंग 473
  129. आपे ही करणा कीओ कल आपे ही तै धारीऐ ॥अंग 474
  130. आपे भांडे साजिअनु आपे पूरणु देइ ॥अंग 475
गूजरी (7)
  1. तेरा नामु करी चनणाठीआ जे मनु उरसा होइ ॥अंग 489
  2. नाभि कमल ते ब्रहमा उपजे बेद पड़हि मुखि कंठि सवारि ॥अंग 489
  3. एक नगरी पंच चोर बसीअले बरजत चोरी धावै ॥अंग 503
  4. कवन कवन जाचहि प्रभ दाते ता के अंत न परहि सुमार ॥अंग 503
  5. ऐ जी जनमि मरै आवै फुनि जावै बिनु गुर गति नही काई ॥अंग 504
  6. ऐ जी ना हम उतम नीच न मधिम हरि सरणागति हरि के लोग ॥अंग 504
  7. भगति प्रेम आराधितं सचु पिआस परम हितं ॥अंग 505
बिहागड़ा (2)
  1. कली अंदरि नानका जिंनां दा अउतारु ॥अंग 556
  2. हिंदू मूले भूले अखुटी जांही ॥अंग 556
वडहंस (13)
  1. अमली अमलु न अंबड़ै मछी नीरु न होइ ॥अंग 557
  2. गुणवंती सहु राविआ निरगुणि कूके काइ ॥अंग 557
  3. मोरी रुण झुण लाइआ भैणे सावणु आइआ ॥अंग 557
  4. काइआ कूड़ि विगाड़ि काहे नाईऐ ॥अंग 565
  5. करहु दइआ तेरा नामु वखाणा ॥अंग 566
  6. धंनु सिरंदा सचा पातिसाहु जिनि जगु धंधै लाइआ ॥अंग 578
  7. आवहु मिलहु सहेलीहो सचड़ा नामु लएहां ॥अंग 579
  8. सचु सिरंदा सचा जाणीऐ सचड़ा परवदगारो ॥अंग 580
  9. जिनि जगु सिरजि समाइआ सो साहिबु कुदरति जाणोवा ॥अंग 581
  10. बाबा आइआ है उठि चलणा इहु जगु झूठु पसारोवा ॥अंग 581
  11. जालउ ऐसी रीति जितु मै पिआरा वीसरै ॥अंग 590
  12. घर ही मुंधि विदेसि पिरु नित झूरे संम्हाले ॥अंग 594
  13. नानक गाली कूड़ीआ बाझु परीति करेइ ॥अंग 594
सोरठ (18)
  1. सभना मरणा आइआ वेछोड़ा सभनाह ॥अंग 595
  2. मनु हाली किरसाणी करणी सरमु पाणी तनु खेतु ॥अंग 595
  3. माइ बाप को बेटा नीका ससुरै चतुरु जवाई ॥अंग 596
  4. पुड़ु धरती पुड़ु पाणी आसणु चारि कुंट चउबारा ॥अंग 596
  5. हउ पापी पतितु परम पाखंडी तू निरमलु निरंकारी ॥अंग 596
  6. अलख अपार अगंम अगोचर ना तिसु कालु न करमा ॥अंग 597
  7. जिउ मीना बिनु पाणीऐ तिउ साकतु मरै पिआस ॥अंग 597
  8. घटि घटि रवि रहिआ बनवारी ॥अंग 597
  9. अपना घरु मूसत राखि न साकहि की पर घरु जोहन लागा ॥अंग 598
  10. मन रे राम जपहु सुखु होई ॥अंग 598
  11. जा तिसु भावा तद ही गावा ॥अंग 599
  12. दुबिधा न पड़उ हरि बिनु होरु न पूजउ मड़ै मसाणि न जाई ॥अंग 634
  13. आसा मनसा बंधनी भाई करम धरम बंधकारी ॥अंग 635
  14. जिन॑ी सतिगुरु सेविआ पिआरे तिन॑ के साथ तरे ॥अंग 636
  15. तू गुणदातौ निरमलो भाई निरमलु ना मनु होइ ॥अंग 636
  16. सोरठि सदा सुहावणी जे सचा मनि होइ ॥अंग 642
  17. इक दझहि इक दबीअहि इकना कुते खाहि ॥अंग 648
  18. ता की रजाइ लेखिआ पाइ अब किआ कीजै पांडे ॥अंग 653
धनासरी (14)
  1. दूख विसारणु सेविआ सदा सदा दातारु ॥1॥अंग 660
  2. हम आदमी हां इक दमी मुहलति मुहतु न जाणा ॥अंग 660
  3. किउ सिमरी सिवरिआ नही जाइ ॥अंग 661
  4. नदरि करे ता सिमरिआ जाइ ॥अंग 661
  5. तपि तपि खपै बहुतु बेकार ॥अंग 661
  6. चोरु सलाहे चीतु न भीजै ॥अंग 662
  7. काइआ कागदु मनु परवाणा ॥अंग 662
  8. कालु नाही जोगु नाही नाही सत का ढबु ॥अंग 662
  9. गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती ॥अंग 663
  10. गुरु सागरु रतनी भरपूरे ॥अंग 685
  11. सहजि मिलै मिलिआ परवाणु ॥अंग 686
  12. तीरथि नावण जाउ तीरथु नामु है ॥अंग 687
  13. गुर गिआनु अपारा सिरजणहारा जिनि सिरजी तिनि गोई ॥अंग 688
  14. लेखु न मिटई पुरबि कमाइआ किआ जाणा किआ होसी ॥अंग 689
तिलंग (6)
  1. यक अरज गुफतम पेसि तो दर गोस कुन करतार ॥अंग 721
  2. भउ तेरा भांग खलड़ी मेरा चीतु ॥अंग 721
  3. इहु तनु माइआ पाहिआ पिआरे लीतड़ा लबि रंगाए ॥अंग 721
  4. इआनड़ीए मानड़ा काइ करेहि ॥अंग 722
  5. पाप की जंञ लै काबलहु धाइआ जोरी मंगै दानु वे लालो ॥अंग 722
  6. जिनि कीआ तिनि देखिआ किआ कहीऐ रे भाई ॥अंग 724
सूही (39)
  1. भांडा धोइ बैसि धूपु देवहु तउ दूधै कउ जावहु ॥अंग 728
  2. अंतरि वसै न बाहरि जाइ ॥अंग 728
  3. उजलु कैहा चिलकणा घोटिम कालड़ी मसु ॥अंग 729
  4. जप तप का बंधु बेड़ुला जितु लंघहि वहेला ॥अंग 729
  5. जिन कउ भांडै भाउ तिना सवारसी ॥अंग 729
  6. भांडा हछा सोइ जो तिसु भावसी ॥अंग 730
  7. जोगी होवै जोगवै भोगी होवै खाइ ॥अंग 730
  8. जोगु न खिंथा जोगु न डंडै जोगु न भसम चड़ाईऐ ॥अंग 730
  9. कउण तराजी कवणु तुला तेरा कवणु सराफु बुलावा ॥अंग 730
  10. सभि अवगण मै गुणु नही कोई ॥अंग 750
  11. माणस जनमु दुलंभु गुरमुखि पाइआ ॥अंग 751
  12. जिउ आरणि लोहा पाइ भंनि घड़ाईऐ ॥अंग 752
  13. मनहु न नामु विसारि अहिनिसि धिआईऐ ॥अंग 752
  14. गुण सार न जाणी भरमि भुलाणी जोबनु बादि गवाइआ ॥अंग 763
  15. हम घरि साजन आए ॥अंग 764
  16. आवहु सजणा हउ देखा दरसनु तेरा राम ॥अंग 764
  17. जिनि कीआ तिनि देखिआ जगु धंधड़ै लाइआ ॥अंग 765
  18. मेरा मनु राता गुण रवै मनि भावै सोई ॥अंग 766
  19. सूहा रंगु सुपनै निसी बिनु तागे गलि हारु ॥अंग 786
  20. वाहु खसम तू वाहु जिनि रचि रचना हम कीए ॥अंग 788
  21. उजल मोती सोहणे रतना नालि जुड़ंनि ॥अंग 788
  22. नानक इहु तनु जालि जिनि जलिऐ नामु विसारिआ ॥अंग 789
  23. नानक मन के कंम फिटिआ गणत न आवही ॥अंग 789
  24. नानक बदरा माल का भीतरि धरिआ आणि ॥अंग 789
  25. नावण चले तीरथी मनि खोटै तनि चोर ॥अंग 789
  26. दुइ दीवे चउदह हटनाले ॥अंग 789
  27. राती होवनि कालीआ सुपेदा से वंन ॥अंग 789
  28. चोरा जारा रंडीआ कुटणीआ दीबाणु ॥ वेदीना की दोसती वेदीना का खाणु ॥अंग 790
  29. बांगा बुरगू सिंङीआ नाले मिली कलाण ॥अंग 790
  30. सतिगुर भीखिआ देहि मै तूं संम्रथु दातारु ॥अंग 790
  31. इको कंतु सबाईआ जिती दरि खड़ीआह ॥अंग 790
  32. सभे कंतै रतीआ मै दोहागणि कितु ॥अंग 790
  33. हउ बलिहारी तिन कउ सिफति जिना दै वाति ॥अंग 790
  34. जिनी न पाइओ प्रेम रसु कंत न पाइओ साउ ॥अंग 790
  35. सउ ओलाम॑े दिनै के राती मिलनि॑ सहंस ॥अंग 790
  36. दीवा बलै अंधेरा जाइ ॥अंग 791
  37. सबदै सादु न आइओ नामि न लगो पिआरु ॥अंग 791
  38. काइआ कूमल फुल गुण नानक गुपसि माल ॥अंग 791
  39. पहिल बसंतै आगमनि पहिला मउलिओ सोइ ॥अंग 791
बिलावल (11)
  1. तू सुलतानु कहा हउ मीआ तेरी कवन वडाई ॥अंग 795
  2. मनु मंदरु तनु वेस कलंदरु घट ही तीरथि नावा ॥अंग 795
  3. आपे सबदु आपे नीसानु ॥अंग 795
  4. गुर बचनी मनु सहज धिआने ॥अंग 796
  5. निकटि वसै देखै सभु सोई ॥अंग 831
  6. मन का कहिआ मनसा करै ॥अंग 832
  7. एकम एकंकारु निराला ॥अंग 838
  8. मुंध नवेलड़ीआ गोइलि आई राम ॥अंग 843
  9. मै मनि चाउ घणा साचि विगासी राम ॥अंग 843
  10. कोई वाहे को लुणै को पाए खलिहानि ॥अंग 854
  11. जिसु मनि वसिआ तरिआ सोइ ॥अंग 854
रामकली (76)
  1. कोई पड़ता सहसाकिरता कोई पड़ै पुराना ॥अंग 876
  2. सरब जोति तेरी पसरि रही ॥अंग 876
  3. जितु दरि वसहि कवनु दरु कहीऐ दरा भीतरि दरु कवनु लहै ॥अंग 877
  4. सुरति सबदु साखी मेरी सिंङी बाजै लोकु सुणे ॥अंग 877
  5. सुणि माछिंद्रा नानकु बोलै ॥अंग 877
  6. हम डोलत बेड़ी पाप भरी है पवणु लगै मतु जाई ॥अंग 878
  7. सुरती सुरति रलाईऐ एतु ॥अंग 878
  8. तुधनो निवणु मंनणु तेरा नाउ ॥अंग 878
  9. सागर महि बूंद बूंद महि सागरु कवणु बुझै बिधि जाणै ॥अंग 878
  10. जा हरि प्रभि किरपा धारी ॥अंग 879
  11. छादनु भोजनु मागतु भागै ॥अंग 879
  12. सोई चंदु चड़हि से तारे सोई दिनीअरु तपत रहै ॥अंग 902
  13. जगु परबोधहि मड़ी बधावहि ॥अंग 903
  14. खटु मटु देही मनु बैरागी ॥अंग 903
  15. साहा गणहि न करहि बीचारु ॥अंग 904
  16. हठु निग्रहु करि काइआ छीजै ॥अंग 905
  17. अंतरि उतभुजु अवरु न कोई ॥अंग 905
  18. जिउ आइआ तिउ जावहि बउरे जिउ जनमे तिउ मरणु भइआ ॥अंग 906
  19. जतु सतु संजमु साचु द्रिड़ाइआ साच सबदि रसि लीणा ॥1॥अंग 907
  20. अउहठि हसत मड़ी घरु छाइआ धरणि गगन कल धारी ॥1॥अंग 907
  21. ओअंकारि ब्रहमा उतपति ॥अंग 929
  22. सिध सभा करि आसणि बैठे संत सभा जैकारो ॥अंग 938
  23. घटि घटि बैसि निरंतरि रहीऐ चालहि सतिगुर भाए ॥अंग 938
  24. जैसे जल महि कमलु निरालमु मुरगाई नै साणे ॥अंग 938
  25. हाटी बाटी रहहि निराले रूखि बिरखि उदिआने ॥अंग 938
  26. दरसनु भेख करहु जोगिंद्रा मुंद्रा झोली खिंथा ॥अंग 939
  27. ऊंधउ खपरु पंच भू टोपी ॥अंग 939
  28. घटि घटि गुपता गुरमुखि मुकता ॥अंग 939
  29. दुरमति बाधा सरपनि खाधा ॥अंग 939
  30. किसु कारणि ग्रिहु तजिओ उदासी ॥अंग 939
  31. कितु बिधि पुरखा जनमु वटाइआ ॥अंग 939
  32. आदि कउ कवनु बीचारु कथीअले सुंन कहा घर वासो ॥अंग 940
  33. आदि कउ बिसमादु बीचारु कथीअले सुंन निरंतरि वासु लीआ ॥अंग 940
  34. साचौ उपजै साचि समावै साचे सूचे एक मइआ ॥अंग 940
  35. गुरमुखि साचे का भउ पावै ॥अंग 941
  36. गुरमुखि अकथु कथै बीचारि ॥अंग 941
  37. गुरमुखि असट सिधी सभि बुधी ॥अंग 941
  38. नामि रते सिध गोसटि होइ ॥अंग 941
  39. गुरमुखि रतनु लहै लिव लाइ ॥अंग 942
  40. गुरमुखि सासत्र सिम्रिति बेद ॥अंग 942
  41. जिसु गुरु मिलै तिसु पारि उतारै ॥अंग 942
  42. गुरमुखि चूकै आवण जाणु ॥अंग 942
  43. कवण मूलु कवण मति वेला ॥अंग 942
  44. मैण के दंत किउ खाईऐ सारु ॥अंग 943
  45. सच भै राता गरबु निवारै ॥अंग 943
  46. सबदु भाखत ससि जोति अपारा ॥अंग 943
  47. अंतरि सुंनं बाहरि सुंनं त्रिभवण सुंन मसुंनं ॥अंग 943
  48. नउ सर सुभर दसवै पूरे ॥अंग 943
  49. कुबुधि चवावै सो कितु ठाइ ॥अंग 944
  50. साचु वखरु धनु पलै होइ ॥अंग 944
  51. सु सबद कउ निरंतरि वासु अलखं जह देखा तह सोई ॥अंग 944
  52. गिआन की मुद्रा कवन अउधू सिध की कवन कमाई ॥अंग 944
  53. गुर परसादी रंगे राता ॥अंग 945
  54. इहु मनु निहचलु हिरदै वसीअले गुरमुखि मूलु पछाणि रहै ॥अंग 945
  55. कितु कितु बिधि जगु उपजै पुरखा कितु कितु दुखि बिनसि जाई ॥अंग 946
  56. बिनु सतिगुर सेवे जोगु न होई ॥अंग 946
  57. सबदै का निबेड़ा सुणि तू अउधू बिनु नावै जोगु न होई ॥अंग 946
  58. सती पापु करि सतु कमाहि ॥अंग 951
  59. हिंदू कै घरि हिंदू आवै ॥अंग 951
  60. ना सति दुखीआ ना सति सुखीआ ना सति पाणी जंत फिरहि ॥अंग 952
  61. सो गिरही जो निग्रहु करै ॥अंग 952
  62. सो अउधूती जो धूपै आपु ॥अंग 952
  63. सो उदासी जि पाले उदासु ॥अंग 952
  64. सो पाखंडी जि काइआ पखाले ॥अंग 952
  65. सो बैरागी जि उलटे ब्रहमु ॥अंग 953
  66. किउ मरै मंदा किउ जीवै जुगति ॥अंग 953
  67. नानकु आखै रे मना सुणीऐ सिख सही ॥अंग 953
  68. सहंसर दान दे इंद्रु रोआइआ ॥अंग 953
  69. सावणु राति अहाड़ु दिहु कामु क्रोधु दुइ खेत ॥अंग 955
  70. भउ भुइ पवितु पाणी सतु संतोखु बलेद ॥अंग 955
  71. मनूआ अंधु न चेतई पड़ै अचिंता जालु ॥अंग 955
  72. वेलि पिंञाइआ कति वुणाइआ ॥अंग 955
  73. सच की काती सचु सभु सारु ॥अंग 956
  74. कमरि कटारा बंकुड़ा बंके का असवारु ॥अंग 956
  75. सरवर हंस धुरे ही मेला खसमै एवै भाणा ॥अंग 956
  76. साहिबु मेरा उजला जे को चिति करेइ ॥अंग 956
मारू (64)
  1. साजन तेरे चरन की होइ रहा सद धूरि ॥अंग 989
  2. पिछहु राती सदड़ा नामु खसम का लेहि ॥अंग 989
  3. मिलि मात पिता पिंडु कमाइआ ॥अंग 989
  4. करणी कागदु मनु मसवाणी बुरा भला दुइ लेख पए ॥अंग 990
  5. बिमल मझारि बससि निरमल जल पदमनि जावल रे ॥अंग 990
  6. पतित पुनीत असंख होहि हरि चरनी मनु लाग ॥अंग 990
  7. सखी सहेली गरबि गहेली ॥अंग 990
  8. मुल खरीदी लाला गोला मेरा नाउ सभागा ॥अंग 991
  9. कोई आखै भूतना को कहै बेताला ॥अंग 991
  10. इहु धनु सरब रहिआ भरपूरि ॥अंग 991
  11. सूर सरु सोसि लै सोम सरु पोखि लै जुगति करि मरतु सु सनबंधु कीजै ॥अंग 991
  12. माइआ मुई न मनु मुआ सरु लहरी मै मतु ॥अंग 992
  13. जोगी जुगति नामु निरमाइलु ता कै मैलु न राती ॥अंग 992
  14. अहिनिसि जागै नीद न सोवै ॥अंग 993
  15. बेद पुराण कथे सुणे हारे मुनी अनेका ॥अंग 1008
  16. बिखु बोहिथा लादिआ दीआ समुंद मंझारि ॥अंग 1009
  17. सबदि मरै ता मारि मरु भागो किसु पहि जाउ ॥अंग 1010
  18. साची कार कमावणी होरि लालच बादि ॥अंग 1010
  19. लालै गारबु छोडिआ गुर कै भै सहजि सुभाई ॥अंग 1011
  20. हुकमु भइआ रहणा नही धुरि फाटे चीरै ॥अंग 1012
  21. मनमुखु लहरि घरु तजि विगूचै अवरा के घर हेरै ॥अंग 1012
  22. मात पिता संजोगि उपाए रकतु बिंदु मिलि पिंडु करे ॥अंग 1013
  23. आवउ वंञउ डुंमणी किती मित्र करेउ ॥अंग 1014
  24. ना भैणा भरजाईआ ना से ससुड़ीआह ॥अंग 1015
  25. ना जाणा मूरखु है कोई ना जाणा सिआणा ॥अंग 1015
  26. साचा सचु सोई अवरु न कोई ॥अंग 1020
  27. आपे धरती धउलु अकासं ॥अंग 1021
  28. दूजी दुरमति अंनी बोली ॥अंग 1022
  29. आदि जुगादी अपर अपारे ॥अंग 1023
  30. साचै मेले सबदि मिलाए ॥अंग 1024
  31. आपे करता पुरखु बिधाता ॥अंग 1025
  32. केते जुग वरते गुबारै ॥अंग 1026
  33. हरि सा मीतु नाही मै कोई ॥अंग 1027
  34. असुर सघारण रामु हमारा ॥अंग 1028
  35. घरि रहु रे मन मुगध इआने ॥अंग 1030
  36. सरणि परे गुरदेव तुमारी ॥अंग 1031
  37. साचे साहिब सिरजणहारे ॥अंग 1032
  38. काइआ नगरु नगर गड़ अंदरि ॥अंग 1033
  39. दरसनु पावा जे तुधु भावा ॥अंग 1034
  40. अरबद नरबद धुंधूकारा ॥अंग 1035
  41. आपे आपु उपाइ निराला ॥अंग 1036
  42. सुंन कला अपरंपरि धारी ॥अंग 1037
  43. जह देखा तह दीन दइआला ॥अंग 1038
  44. हरि धनु संचहु रे जन भाई ॥अंग 1039
  45. सचु कहहु सचै घरि रहणा ॥अंग 1040
  46. कामु क्रोधु परहरु पर निंदा ॥अंग 1041
  47. कुदरति करनैहार अपारा ॥अंग 1042
  48. विणु गाहक गुणु वेचीऐ तउ गुणु सहघो जाइ ॥अंग 1086
  49. भूली भूली मै फिरी पाधरु कहै न कोइ ॥अंग 1087
  50. महल कुचजी मड़वड़ी काली मनहु कसुध ॥अंग 1088
  51. साचु सील सचु संजमी सा पूरी परवारि ॥अंग 1088
  52. ससुरै पेईऐ कंत की कंतु अगंमु अथाहु ॥अंग 1088
  53. ना मैला ना धुंधला ना भगवा ना कचु ॥अंग 1089
  54. हुकमि रजाई साखती दरगह सचु कबूलु ॥अंग 1090
  55. अलगउ जोइ मधूकड़उ सारंगपाणि सबाइ ॥अंग 1090
  56. सरबे जोइ अगछमी दूखु घनेरो आथि ॥अंग 1090
  57. पूंजी साचउ नामु तू अखुटउ दरबु अपारु ॥अंग 1090
  58. पूरब प्रीति पिराणि लै मोटउ ठाकुरु माणि ॥अंग 1090
  59. मांदलु बेदि सि बाजणो घणो धड़ीऐ जोइ ॥अंग 1091
  60. सागरु गुणी अथाहु किनि हाथाला देखीऐ ॥अंग 1091
  61. सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि ॥अंग 1091
  62. हउ मुआ मै मारिआ पउणु वहै दरीआउ ॥अंग 1091
  63. हउ मै करी तां तू नाही तू होवहि हउ नाहि ॥अंग 1092
  64. जिनि कीआ तिनि देखिआ आपे जाणै सोइ ॥अंग 1093
तुखारी (22)
  1. तू सुणि किरत करंमा पुरबि कमाइआ ॥ सिरि सिरि सुख सहंमा देहि सु तू भला ॥अंग 1107
  2. सा धन सभि रस चोलै अंकि समाणीआ ॥अंग 1107
  3. तू सुणि हरि रस भिंने प्रीतम आपणे ॥अंग 1107
  4. बरसै अंम्रित धार बूंद सुहावणी ॥अंग 1107
  5. चेतु बसंतु भला भवर सुहावड़े ॥अंग 1107
  6. वैसाखु भला साखा वेस करे ॥अंग 1108
  7. माहु जेठु भला प्रीतमु किउ बिसरै ॥अंग 1108
  8. आसाड़ु भला सूरजु गगनि तपै ॥अंग 1108
  9. सावणि सरस मना घण वरसहि रुति आए ॥अंग 1108
  10. भादउ भरमि भुली भरि जोबनि पछुताणी ॥अंग 1108
  11. असुनि आउ पिरा सा धन झूरि मुई ॥अंग 1108
  12. कतकि किरतु पइआ जो प्रभ भाइआ ॥अंग 1109
  13. मंघर माहु भला हरि गुण अंकि समावए ॥अंग 1109
  14. पोखि तुखारु पड़ै वणु त्रिणु रसु सोखै ॥अंग 1109
  15. माघि पुनीत भई तीरथु अंतरि जानिआ ॥अंग 1109
  16. फलगुनि मनि रहसी प्रेमु सुभाइआ ॥अंग 1109
  17. बे दस माह रुती थिती वार भले ॥ घड़ी मूरत पल साचे आए सहजि मिले ॥अंग 1109
  18. पहिलै पहरै नैण सलोनड़ीए रैणि अंधिआरी राम ॥अंग 1110
  19. तारा चड़िआ लंमा किउ नदरि निहालिआ राम ॥अंग 1110
  20. भोलावड़ै भुली भुलि भुलि पछोताणी ॥अंग 1111
  21. मेरे लाल रंगीले हम लालन के लाले ॥अंग 1112
  22. ए मन मेरिआ तू समझु अचेत इआणिआ राम ॥अंग 1112
भैरों (9)
  1. तुझ ते बाहरि किछू न होइ ॥अंग 1125
  2. गुर कै सबदि तरे मुनि केते इंद्रादिक ब्रहमादि तरे ॥अंग 1125
  3. नैनी द्रिसटि नही तनु हीना जरि जीतिआ सिरि कालो ॥अंग 1125
  4. भूंडी चाल चरण कर खिसरे तुचा देह कुमलानी ॥अंग 1126
  5. सगली रैणि सोवत गलि फाही दिनसु जंजालि गवाइआ ॥अंग 1126
  6. गुर कै संगि रहै दिनु राती रामु रसनि रंगि राता ॥अंग 1126
  7. हिरदै नामु सरब धनु धारणु गुर परसादी पाईऐ ॥अंग 1127
  8. जगन होम पुंन तप पूजा देह दुखी नित दूख सहै ॥अंग 1127
  9. आतम महि रामु राम महि आतमु चीनसि गुर बीचारा ॥अंग 1153
बसंत (18)
  1. माहा माह मुमारखी चड़िआ सदा बसंतु ॥अंग 1168
  2. रुति आईले सरस बसंत माहि ॥अंग 1168
  3. सुइने का चउका कंचन कुआर ॥अंग 1168
  4. सगल भवन तेरी माइआ मोह ॥अंग 1169
  5. मेरी सखी सहेली सुनहु भाइ ॥अंग 1169
  6. आपे कुदरति करे साजि ॥अंग 1170
  7. साल ग्राम बिप पूजि मनावहु सुक्रितु तुलसी माला ॥अंग 1170
  8. साहुरड़ी वथु सभु किछु साझी पेवकड़ै धन वखे ॥अंग 1171
  9. राजा बालकु नगरी काची दुसटा नालि पिआरो ॥अंग 1171
  10. साचा साहु गुरू सुखदाता हरि मेले भुख गवाए ॥अंग 1171
  11. जगु कऊआ नामु नही चीति ॥अंग 1187
  12. मनु भूलउ भरमसि आइ जाइ ॥अंग 1187
  13. दरसन की पिआस जिसु नर होइ ॥अंग 1188
  14. चंचलु चीतु न पावै पारा ॥अंग 1189
  15. मतु भसम अंधूले गरबि जाहि ॥अंग 1189
  16. दुबिधा दुरमति अधुली कार ॥अंग 1190
  17. आपे भवरा फूल बेलि ॥अंग 1190
  18. नउ सत चउदह तीनि चारि करि महलति चारि बहाली ॥अंग 1190
सारंग (38)
  1. अपुने ठाकुर की हउ चेरी ॥अंग 1197
  2. हरि बिनु किउ रहीऐ दुखु बिआपै ॥अंग 1197
  3. दूरि नाही मेरो प्रभु पिआरा ॥अंग 1197
  4. हरि बिनु किउ जीवा मेरी माई ॥अंग 1232
  5. हरि बिनु किउ धीरै मनु मेरा ॥अंग 1232
  6. न भीजै रागी नादी बेदि ॥अंग 1237
  7. नव छिअ खट का करे बीचारु ॥अंग 1237
  8. जिनसि थापि जीआं कउ भेजै जिनसि थापि लै जावै ॥अंग 1238
  9. जुड़ि जुड़ि विछुड़े विछुड़ि जुड़े ॥अंग 1238
  10. इकसु न पुजहि बोल जे पूरे पूरा करि मिलै ॥अंग 1239
  11. आखणि अउखा सुनणि अउखा आखि न जापी आखि ॥अंग 1239
  12. जूठि न रागंी जूठि न वेदंी ॥अंग 1240
  13. नानक चुलीआ सुचीआ जे भरि जाणै कोइ ॥अंग 1240
  14. दुख विचि जंमणु दुखि मरणु दुखि वरतणु संसारि ॥अंग 1240
  15. नानक दुनीआ भसु रंगु भसू हू भसु खेह ॥अंग 1240
  16. घरि नाराइणु सभा नालि ॥अंग 1240
  17. सभे सुरती जोग सभि सभे बेद पुराण ॥अंग 1241
  18. पुरीआ खंडा सिरि करे इक पैरि धिआए ॥अंग 1241
  19. है है आखां कोटि कोटि कोटी हू कोटि कोटि ॥अंग 1241
  20. सभे राती सभि दिह सभि थिती सभि वार ॥अंग 1241
  21. अखंी परणै जे फिरां देखां सभु आकारु ॥अंग 1241
  22. होरु सरीकु होवै कोई तेरा तिसु अगै तुधु आखां ॥अंग 1242
  23. जां न सिआ किआ चाकरी जां जंमे किआ कार ॥अंग 1242
  24. सासत्र बेद पुराण पड़॑ंता ॥अंग 1242
  25. जां हउ तेरा तां सभु किछु मेरा हउ नाही तू होवहि ॥अंग 1242
  26. कलि होई कुते मुही खाजु होआ मुरदारु ॥अंग 1242
  27. रंना होईआ बोधीआ पुरस होए सईआद ॥अंग 1243
  28. लख सिउ प्रीति होवै लख जीवणु किआ खुसीआ किआ चाउ ॥अंग 1243
  29. कापड़ु काठु रंगाइआ रांगि ॥अंग 1243
  30. बेदु पुकारे पुंनु पापु सुरग नरक का बीउ ॥अंग 1243
  31. मरणि न मूरतु पुछिआ पुछी थिति न वारु ॥अंग 1244
  32. नानक ढेरी ढहि पई मिटी संदा कोटु ॥अंग 1244
  33. धनवंता इव ही कहै अवरी धन कउ जाउ ॥अंग 1244
  34. सूरजु चड़ै विजोगि सभसै घटै आरजा ॥अंग 1244
  35. ध्रिगु तिना का जीविआ जि लिखि लिखि वेचहि नाउ ॥अंग 1245
  36. सचु वरतु संतोखु तीरथु गिआनु धिआनु इसनानु ॥अंग 1245
  37. गिआन विहूणा गावै गीत ॥अंग 1245
  38. मनहु जि अंधे कूप कहिआ बिरदु न जाणन॑ी ॥अंग 1246
मलार (65)
  1. खाणा पीणा हसणा सउणा विसरि गइआ है मरणा ॥अंग 1254
  2. करउ बिनउ गुर अपने प्रीतम हरि वरु आणि मिलावै ॥अंग 1254
  3. साची सुरति नामि नही त्रिपते हउमै करत गवाइआ ॥अंग 1254
  4. जिनि धन पिर का सादु न जानिआ सा बिलख बदन कुमलानी ॥अंग 1255
  5. पर दारा पर धनु पर लोभा हउमै बिखै बिकार ॥अंग 1255
  6. पवणै पाणी जाणै जाति ॥अंग 1256
  7. दुखु वेछोड़ा इकु दुखु भूख ॥अंग 1256
  8. दुख महुरा मारण हरि नामु ॥अंग 1256
  9. बागे कापड़ बोलै बैण ॥अंग 1257
  10. चकवी नैन नंीद नहि चाहै बिनु पिर नंीद न पाई ॥अंग 1273
  11. जागतु जागि रहै गुर सेवा बिनु हरि मै को नाही ॥अंग 1273
  12. चात्रिक मीन जल ही ते सुखु पावहि सारिंग सबदि सुहाई ॥1॥अंग 1274
  13. अखली ऊंडी जलु भर नालि ॥अंग 1274
  14. मरण मुकति गति सार न जानै ॥अंग 1275
  15. हेको पाधरु हेकु दरु गुर पउड़ी निज थानु ॥अंग 1279
  16. आपीन॑ै आपु साजि आपु पछाणिआ ॥अंग 1279
  17. नानक सावणि जे वसै चहु ओमाहा होइ ॥अंग 1279
  18. नानक सावणि जे वसै चहु वेछोड़ा होइ ॥अंग 1279
  19. तू सचा सचिआरु जिनि सचु वरताइआ ॥अंग 1279
  20. वैदु बुलाइआ वैदगी पकड़ि ढंढोले बांह ॥अंग 1279
  21. ब्रहमा बिसनु महेसु देव उपाइआ ॥अंग 1279
  22. आपे छिंझ पवाइ मलाखाड़ा रचिआ ॥अंग 1280
  23. दोवै तरफा उपाइ इकु वरतिआ ॥अंग 1280
  24. सो हरि सदा सरेवीऐ जिसु करत न लागै वार ॥अंग 1280
  25. दूजै दूजी तरफ है कूड़ि मिलै न मिलिआ जाइ ॥अंग 1281
  26. अतुलु किउ तोलीऐ विणु तोले पाइआ न जाइ ॥अंग 1282
  27. नाथ जती सिध पीर किनै अंतु न पाइआ ॥अंग 1282
  28. आपि कराए करे आपि हउ कै सिउ करी पुकार ॥अंग 1282
  29. सचा वेपरवाहु इको तू धणी ॥अंग 1283
  30. खंड पताल असंख मै गणत न होई ॥अंग 1283
  31. आपे जगतु उपाइ कै गुण अउगण करे बीचारु ॥अंग 1284
  32. सचा सतिगुरु सेवि सचु सम॑ालिआ ॥अंग 1284
  33. इकि वण खंडि बैसहि जाइ सदु न देवही ॥अंग 1284
  34. इकि जैनी उझड़ पाइ धुरहु खुआइआ ॥अंग 1285
  35. सचा अलख अभेउ हठि न पतीजई ॥अंग 1285
  36. पूरा सतिगुरु सेवि पूरा पाइआ ॥अंग 1286
  37. कुलहां देंदे बावले लैंदे वडे निलज ॥अंग 1286
  38. सउ मणु हसती घिउ गुड़ु खावै पंजि सै दाणा खाइ ॥अंग 1286
  39. अगम अगोचरु तू धणी सचा अलख अपारु ॥अंग 1286
  40. राती कालु घटै दिनि कालु ॥अंग 1287
  41. मुआ पिआरु प्रीति मुई मुआ वैरु वादी ॥अंग 1287
  42. अंम्रित नामु सदा सुखदाता अंते होइ सखाई ॥अंग 1287
  43. सरमु धरमु दुइ नानका जे धनु पलै पाइ ॥अंग 1287
  44. दुखी दुनी सहेड़ीऐ जाइ त लगहि दुख ॥अंग 1287
  45. अंधी कंमी अंधु मनु मनि अंधै तनु अंधु ॥अंग 1287
  46. लख मण सुइना लख मण रुपा लख साहा सिरि साह ॥अंग 1287
  47. बधे छुटहि सचि सचु पछाणीऐ ॥अंग 1287
  48. हरणां बाजां तै सिकदारां एन॑ा पड़ि॑आ नाउ ॥अंग 1288
  49. आपि उपाए मेदनी आपे करदा सार ॥अंग 1288
  50. रूपै कामै दोसती भुखै सादै गंढु ॥अंग 1288
  51. राजु मालु रूपु जाति जोबनु पंजे ठग ॥अंग 1288
  52. पड़िआ लेखेदारु लेखा मंगीऐ ॥अंग 1288
  53. धरती पाताली आकासी इकि दरि रहनि वजीर ॥अंग 1289
  54. अजरु जरै त नउ कुल बंधु ॥अंग 1289
  55. पड़॑ीऐ नामु सालाह होरि बुधंी मिथिआ ॥अंग 1289
  56. पहिलां मासहु निंमिआ मासै अंदरि वासु ॥अंग 1289
  57. मासु मासु करि मूरखु झगड़े गिआनु धिआनु नही जाणै ॥अंग 1289
  58. हउ किआ आखा इक जीभ तेरा अंतु न किन ही पाइआ ॥अंग 1290
  59. नानक माइआ करम बिरखु फल अंम्रित फल विसु ॥अंग 1290
  60. सिरि सिरि होइ निबेड़ु हुकमि चलाइआ ॥अंग 1290
  61. घर महि घरु देखाइ देइ सो सतिगुरु पुरखु सुजाणु ॥अंग 1291
  62. चिलिमिलि बिसीआर दुनीआ फानी ॥अंग 1291
  63. धंनु सु कागदु कलम धंनु धनु भांडा धनु मसु ॥अंग 1291
  64. आपे पटी कलम आपि उपरि लेखु भि तूं ॥अंग 1291
  65. तूं आपे आपि वरतदा आपि बणत बणाई ॥अंग 1291
प्रभाती (23)
  1. तेरा नामु रतनु करमु चानणु सुरति तिथै लोइ ॥अंग 1327
  2. जै कारणि बेद ब्रहमै उचरे संकरि छोडी माइआ ॥अंग 1328
  3. जा कै रूपु नाही जाति नाही नाही मुखु मासा ॥अंग 1328
  4. ता का कहिआ दरि परवाणु ॥अंग 1328
  5. अंम्रितु नीरु गिआनि मन मजनु अठसठि तीरथ संगि गहे ॥अंग 1328
  6. गुर परसादी विदिआ वीचारै पड़ि पड़ि पावै मानु ॥अंग 1329
  7. आवतु किनै न राखिआ जावतु किउ राखिआ जाइ ॥अंग 1329
  8. दिसटि बिकारी बंधनि बांधै हउ तिस कै बलि जाई ॥अंग 1329
  9. मनु माइआ मनु धाइआ मनु पंखी आकासि ॥अंग 1330
  10. जागतु बिगसै मूठो अंधा ॥अंग 1330
  11. मसटि करउ मूरखु जगि कहीआ ॥अंग 1330
  12. खाइआ मैलु वधाइआ पैधै घर की हाणि ॥अंग 1331
  13. गीत नाद हरख चतुराई ॥अंग 1331
  14. अंतरि देखि सबदि मनु मानिआ अवरु न रांगनहारा ॥अंग 1331
  15. बारह महि रावल खपि जावहि चहु छिअ महि संनिआसी ॥अंग 1332
  16. संता की रेणु साध जन संगति हरि कीरति तरु तारी ॥अंग 1332
  17. दुबिधा बउरी मनु बउराइआ ॥अंग 1342
  18. माइआ मोहि सगल जगु छाइआ ॥अंग 1342
  19. निवली करम भुअंगम भाठी रेचक पूरक कुंभ करै ॥अंग 1343
  20. गोतमु तपा अहिलिआ इसत्री तिसु देखि इंद्रु लुभाइआ ॥अंग 1344
  21. आखणा सुनणा नामु अधारु ॥अंग 1344
  22. राम नामु जपि अंतरि पूजा ॥अंग 1345
  23. इकि धुरि बखसि लए गुरि पूरै सची बणत बणाई ॥अंग 1345