शेख़ फ़रीद
शेख़ फ़रीद, Chishti Sufi परंपरा के बहुत बड़े pir। उनका dargah आज पाकिस्तान के Pak Pattan में है, हर साल हज़ारों आते हैं। मगर उनकी सबसे interesting बात: उनकी 134 सलोक और 4 शबद आदि ग्रंथ में हैं, उनकी मृत्यु के लगभग चार सदी बाद canonical text में।

क्यों? गुरु नानक जब अपनी उदासियों में Pak Pattan गए थे, वहाँ शेख़ फ़रीद के descendant (शेख़ इब्राहीम) से उनकी मुलाक़ात हुई। उन्होंने फ़रीद की वाणी की copies गुरु नानक को दीं। और वही copies गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में compilation में रखीं।
फ़रीद की वाणी का स्वर मृत्यु-aware है, मगर depressed नहीं। एक sustained meditation on impermanence। उनका famous line: “फ़रीदा कालि कालि करते मरि गए जां काली देखि न पाई।” (काल-काल करते सब चले गए, मगर काल को किसी ने नहीं देखा।)
फ़रीद की imagery
अंगों के पाठ में बार-बार लौटने वाले बिम्ब (recurring imagery)।







फ़रीद वाणी आदि ग्रंथ में:
- शेख़ फ़रीद सलोकअंग 1378-1384
- फ़रीद शबद आसा मेंअंग 488
- फ़रीद शबद सूही मेंअंग 794